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Rajgarh Dhar News: बिजली संकट से परेशान जनता, ऊर्जा मंत्री से मांगा हस्तक्षेप – Power Cut Issue बना गंभीर

Rajgarh Dhar News power cut






 


  राजगढ़ (धार) में बिजली संकट गहराता जा रहा है, और अब यह मामला ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के दरवाजे तक पहुंच गया है। पिछले एक साल से नगर परिषद राजगढ़ क्षेत्र में बिजली की बदहाल स्थिति ने आम जनता का जीना मुहाल कर रखा है। लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और पुराने विद्युत उपकरणों के कारण लोगों में रोष व्याप्त है। इस गंभीर समस्या को लेकर भाजपा नेता निलेश सोनी ने ऊर्जा मंत्री के निजी सचिव अरुण जी से फोन पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए बताया कि maintenance के नाम पर प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक बिना सूचना के बिजली कटौती की जा रही है, जिससे आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

 वार्ड नंबर 10 की पार्षद रीतु निलेश सोनी ने ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर अधिकारियों की लापरवाही उजागर की। उन्होंने बताया कि नगर में लगी पुरानी डीपी (Distribution Points) और केबलों के कारण बार-बार फॉल्ट हो रहे हैं, और विभाग के पास इन्हें सही करने के लिए पर्याप्त स्टाफ भी नहीं है। यही कारण है कि एक छोटी सी खराबी को ठीक करने में घंटों लग जाते हैं।

  इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री राजवर्धनसिंह दत्तीगाव और भाजपा जिला अध्यक्ष महंत निलेश भारती को भी समस्या से अवगत कराया गया। साथ ही, भाजपा नेता निलेश परमार ने उच्चाधिकारियों से संवाद कर विद्युत व्यवस्था में तुरंत सुधार की मांग की है। अब इस पूरे प्रकरण को देखते हुए ऊर्जा मंत्री कार्यालय को speed post के माध्यम से औपचारिक शिकायत भेजी गई है। साथ ही त्वरित कार्रवाई के लिए ईमेल और व्हाट्सएप पर भी यह शिकायत प्रेषित की गई है।

  शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि maintenance के नाम पर लंबी बिजली कटौती पर तुरंत रोक लगाई जाए। जर्जर केबलों और पुरानी डीपी को बदला जाए, और स्टाफ की कमी को पूरा कर जनता की समस्याओं का समय पर समाधान किया जाए। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुए, तो इस बिजली संकट को लेकर राजगढ़ की जनता कड़े कदम उठाने को मजबूर होगी। फिलहाल, ऊर्जा मंत्री के कार्यालय से इस मामले में जल्द कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

भक्ति का महासंगम: पुरुषोत्तम मास में पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर पर उमड़ेगी श्रीकृष्ण प्रेम की अविरल धारा







 


  जानें क्यों इस समय कथा श्रवण है अनिवार्य – ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज से।



  राजगढ़ (धार)। अध्यात्म और आस्था के संगम 'पुरुषोत्तम मास' के दुर्लभ अवसर पर मालवा की धरा श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में सबरोर होने जा रही है। श्री माताजी मंदिर के पवित्र प्रांगण में आगामी 16 मई से 22 मई तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। परम पूज्य गुरुदेव ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज जी महाराज के मुखारविंद से निशृत होने वाली यह कथा श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का एक अनूठा द्वार खोलेगी।

सौभाग्य का द्वार है पुरुषोत्तम मास: क्यों अनिवार्य है कथा श्रवण?

   ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज जी महाराज के अनुसार, अध्यात्म की दृष्टि से 'अधिक मास' का समय कोई साधारण कालखंड नहीं, बल्कि स्वयं श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद है। जब सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तब वह समय 'मलमास' कहलाता था, जिसे स्वयं भगवान ने अपना नाम देकर 'पुरुषोत्तम मास' के रूप में प्रतिष्ठित किया। यही कारण है कि इस विशेष माह में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक फलदायी माना गया है।

  यह समय हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से निकलकर आत्म-चिंतन और ईश्वर से जुड़ने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। महाराज श्री बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस मास को अपनी समस्त शक्तियाँ प्रदान की हैं, अतः इस अवधि में किया गया कथा श्रवण सीधे श्रीहरि के चरणों तक पहुँचता है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और वैराग्य के माध्यम से मानव जीवन को श्रीकृष्णमय बनाने का एक दिव्य प्रयास है।

आयोजन की मुख्य कड़ियाँ:

  राजगढ़ के श्री माताजी मंदिर में आयोजित इस आध्यात्मिक उत्सव में प्रतिदिन शाम 6 से 10 तक अमृत वर्षा होगी। विशेष आकर्षण के रूप में प्रतिदिन अधिक मास की दुर्लभ कथाओं के साथ भव्य भजन-कीर्तन, दिव्य आरती और प्रसाद वितरण का लाभ भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। इस पावन अवसर पर समस्त धर्मप्रेमी जनता को सपरिवार पधारकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ लेने हेतु सादर आमंत्रित किया गया है।

डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास की जीवनी (Biography of Dr. Janardan Acharya)

डॉ जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास






 


  भारतीय संस्कृति,अध्यात्म (Spirituality) और वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge) के क्षेत्र में डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उनका संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा और समाज के नैतिक उत्थान के लिए समर्पित है। वर्तमान में वे जयपुर (Jaipur,Rajasthan) से अपनी आध्यात्मिक सेवाएं (Spiritual Services) प्रदान कर रहे हैं, जबकि उनका पैतृक स्थान बिसाऊ (Bissau) है।

शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता (Education and Qualifications)

  डॉ. जनार्दनाचार्य की शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के राजघाट परिसर से साढे तीन वर्ष का प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और योग (Naturopathy, Ayurveda, and Yoga) में Graduate + NDDY डिप्लोमा प्राप्त किया है। उनके अगाध ज्ञान और गीता-पुराण (Gita Puran) के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें हॉकिन्स यूनिवर्सिटी,टेक्सास (USA) और सेंट यूनिवर्सिटी, नोएडा द्वारा मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में उन्हें 'साहित्य सेवा रत्न' (Sahitya Seva Ratna) की प्रतिष्ठित उपाधि से भी नवाजा गया है।

आध्यात्मिक मिशन और सेवा प्रकल्प (Spiritual Mission and Services)

   ​डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति (Ancient Indian Education System) को पुनर्जीवित करना है। इसी पावन संकल्प की सिद्धि के लिए वे गुरुकुल (Gurukul) और गौशाला (Gaushala) का निस्वार्थ भाव से संचालन कर रहे हैं। समाज को संस्कारों और धर्म से जोड़ने के लिए वे विभिन्न पौराणिक कथाओं जैसे श्रीमद्भागवत (Shrimad Bhagwat), शिव पुराण (Shiv Puran), श्रीदेवी भागवत (Shri Devi Bhagwat) और गणेश पुराण (Ganesh Puran) के माध्यम से ज्ञान की गंगा प्रवाहित करते हैं।
​   उनकी नि:शुल्क सेवाओं (Free Services) का दायरा अत्यंत व्यापक है। वे गौ-सेवा हेतु समर्पित गोकथा (Gokatha), श्री हरिवंश पुराण (Shri Harivansh Puran), नानी बाई रो मायरो (Nani Bai Ro Mayro), भक्तमाल (Bhaktamal), हनुमत कथा (Hanumat Katha) और नियमित गीता क्लास (Gita Class) के माध्यम से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना जगा रहे हैं। इसके साथ ही, समाज के कल्याण हेतु ज्योतिष मार्गदर्शन (Astrology Guidance) और समस्त वैदिक विधि-विधान (Vedic Rituals) भी उनके द्वारा पूर्णतः नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)

  डॉ. जनार्दनाचार्य का परिवार विद्या और संस्कारों का संगम है। उनके पिता पं. विश्वनाथ बालासरिया एक जाने-माने संगीतज्ञ और कथा वाचक (Storyteller) हैं, जबकि माता श्रीमती विमला देवी के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को संवारा है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रक्षा देवी शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत निपुण हैं, जिन्होंने हिंदी में एमए (MA Hindi) और संस्कृत में शास्त्री, आचार्य (Acharya) एवं शिक्षा शास्त्री की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा (Medical and Arts) के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हैं।

संपर्क और सोशल मीडिया (Contact and Social Media)

  धर्म और अध्यात्म से जुड़ने के लिए डॉ. जनार्दनाचार्य अपने यूट्यूब चैनल (YouTube Channel: Sanatan Seva Janardan Acharya) के माध्यम से भी सक्रिय हैं। भविष्य की पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ने के लिए उनका यह मिशन निरंतर जारी है।

FAQ

डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास कौन हैं?

वे भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान के प्रचारक एवं आध्यात्मिक गुरु हैं।

वे वर्तमान में कहां से सेवाएं दे रहे हैं?

वे वर्तमान में जयपुर, राजस्थान से अपनी आध्यात्मिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

उनकी प्रमुख सेवाएं क्या हैं?

गीता प्रवचन, सुंदरकांड, रामायण गान, वैदिक अनुष्ठान, ज्योतिष मार्गदर्शन और आध्यात्मिक परामर्श।

उन्हें कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हुए हैं?

उन्हें मानद डॉक्टरेट और साहित्य सेवा रत्न सम्मान प्राप्त हो चुका है।

उनका उद्देश्य क्या है?

प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।

राजगढ़ में श्रीराम कथा का भव्य समापन :ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम भारद्वाज ने शिव धनुष प्रसंग से जगाई धर्म की अलख








 




  राजगढ़ (धार)। राजगढ़ के सोसायटी ग्राउंड पर आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने व्यासपीठ से शिव धनुष भंग के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने केवल शिव के प्राचीन और भारी धनुष को नहीं तोड़ा, बल्कि वहां मौजूद अभिमानी राजाओं के अहंकार और 'मैं' को भी छिन्न-भिन्न कर दिया। यह क्षण केवल एक राजकुमारी के विवाह का नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बन गया।
    ज्योतिषाचार्य ने विनम्रता का महत्व समझाते हुए कहा कि भगवान ने इतना बड़ा कार्य करने के बाद भी सीता जी के समक्ष मस्तक झुकाकर अपनी नम्रता का परिचय दिया, जबकि धनुष न तोड़ पाने वाले राजा अब भी छाती तानकर बैठे थे। जैसे ही वह विशाल धनुष टूटा, उसकी गर्जना ने पूरे संसार को चकित कर दिया और इसी गर्जना को सुनकर भगवान परशुराम अत्यंत क्रोध में सभा में पधारे।
   कथा के दौरान परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। जहाँ एक ओर लक्ष्मण जी का तेज और उनके तर्क थे, जो परशुराम जी के क्रोध को और हवा दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर श्री राम की अगाध शांति थी। श्री राम परशुराम जी के क्रोध को शांत करने के लिए जल के समान शीतल बने रहे। अंततः श्री राम ने अपनी विनम्रता और मधुर वचनों से परशुराम जी के भीतर छिपे भगवान नारायण के अंश को जागृत किया और परशुराम जी उन्हें आशीर्वाद देकर महेंद्र पर्वत की ओर चले गए। व्यासपीठ से यह संदेश दिया गया कि जीवन में जो नम्र होकर चलता है, उसकी सदैव जय-जयकार होती है।
    इसके बाद जनकपुर में उत्सव का वातावरण बन गया। अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर आए और वहां केवल एक नहीं, बल्कि चार दिव्य मिलन हुए। राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुति कीर्ति का विवाह संपन्न हुआ, जो रिश्तों की मर्यादा और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
   जब ये चारों वधुएं अयोध्या पहुंचीं, तो पूरी नगरी दीपों के प्रकाश और खुशियों से भर गई। कथा में यह समझाया गया कि जैसे अयोध्या में राम के आने से उजाला हुआ, वैसे ही जब मनुष्य के हृदय में राम-नाम और संस्कारों का प्रवेश होता है, तो अज्ञान का अंधकार मिट जाता है। माता कौशल्या ने बहुओं को कुल की मर्यादा और सेवा का जो उपदेश दिया, वह आज भी हर परिवार के लिए प्रेरणा है।














    इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने कथा का लाभ लिया,जिनमें एसडीएम सलोनी अग्रवाल, थाना प्रभारी समीर पाटीदार, नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक जैन, पार्षद पंकज बारोड़,नवीन बानिया,ललित कोठारी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष व भाजपा नेता सुरेश तातेड और अशोक भंडारी सहित राजगढ़ नगर एवं आसपास के अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

   धार्मिक कार्यक्रमों की इसी कड़ी में राजगढ़ पुलिस थाना परिसर स्थित श्री सांई मंदिर में श्री सांई बाबा की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन भी संपन्न हुआ। इसके साथ ही आगामी 13 मई को राजगढ़ में होने वाले सर्व समाज के निशुल्क सामूहिक विवाह और नगर चौरासी महोत्सव के लिए सभी धर्मप्रेमी जनता को आमंत्रित किया गया है।

अध्यात्म और आधुनिक जीवन के द्वंद्व का समाधान: 17 मई को आ रही है पूजा शांति चौबे की नई पुस्तक 'आत्मचिंतन से परम सत्य तक'







 



   जयपुर : साहित्य और आध्यात्मिकता के संगम के साथ लेखिका पूजा शांति चौबे अपनी नई कृति 'आत्मचिंतन से परम सत्य तक (भीतर के प्रश्न, परमात्मा के उत्तर)' लेकर आ रही हैं। 17 मई को लॉन्च होने जा रही यह पुस्तक केवल पौराणिक कथाओं का वर्णन नहीं है, बल्कि मानव मन के भीतर चलने वाले अंतर्द्वंद्वों और आध्यात्मिक जिज्ञासाओं का एक गहरा दस्तावेज है।
   लेखिका के अनुसार,यह पुस्तक आत्मा,धर्म और कर्म के उन गूढ़ सत्यों की खोज करती है जो आज के दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। पुस्तक में महाभारत के ऐतिहासिक पात्रों—अर्जुन, युधिष्ठिर, कर्ण,धृतराष्ट्र,द्रौपदी और अश्वत्थामा—को केवल चरित्रों के रूप में नहीं,बल्कि मानवीय संवेदनाओं और मानसिक अवस्थाओं के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसके वे प्रश्न हैं जो एक भक्त और जिज्ञासु के मन में उठते हैं। चाहे वह द्रौपदी का क्षमा और स्मृतियों के बीच का संघर्ष हो, या युधिष्ठिर का धर्म के मार्ग पर कष्टों को लेकर संशय, इन सभी जटिल सवालों का उत्तर भगवान श्री कृष्ण की दिव्य दृष्टि के माध्यम से दिया गया है।
   पूजा शांति चौबे का यह प्रयास महाभारत के शाश्वत संवादों को आधुनिक जीवन की चुनौतियों से जोड़ना है। यह कृति पाठकों को बाहरी शोर से हटकर स्वयं के भीतर झाँकने और आत्मजागृति की राह पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
  आध्यात्मिक रुचि रखने वाले पाठक इस पुस्तक को Amazon और Flipkart जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही, लेखिका से उनके इंस्टाग्राम हैंडल (@Poojacc_93) पर जुड़कर इस यात्रा का हिस्सा बन सकते हैं।

राम नाम के नशे से ही होगा जीवन का कल्याण,राजगढ़ श्रीराम कथा में बोले ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम भारद्वाज,13 मई को सामूहिक विवाह का आयोजन







 


  राजगढ़ (धार): नगर के मार्केटिंग सोसाइटी मैदान में श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज (Jyotishacharya Shri Purshottam Bhardwaj) के मुखारविंद से बह रही श्रीराम कथा की अमृत धारा में भक्त पूरी तरह सराबोर नजर आए। सोमवार को क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल (MLA Pratap Grewal) ने भी कथा पांडाल पहुंचकर व्यासपीठ का पूजन किया और आरती में सम्मिलित होकर धर्मलाभ लिया।














गुरु महिमा और आत्मिक शुद्धि (Spiritual Purification) का संदेश

  कथा के आठवें दिन ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने गुरु की महत्ता और मन की शुद्धि पर विशेष प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गुरु की नजरों से गिर जाता है, उसके लिए जीवन में सफलता पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। गुरु के चरणों का सानिध्य ही मनुष्य की तकदीर बदलने की शक्ति रखता है। उन्होंने जीवन में सत्संग (Satsang) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जब हमारा मन शुद्ध होता है, तभी हमारे विचार और वाणी में शुद्धि आती है। कथा के माध्यम से ही हमें यह समझ आती है कि जीवन में क्या देखना चाहिए, क्या सुनना चाहिए और कैसा व्यवहार करना चाहिए।

संस्कार और कुल परंपराओं का महत्व

  व्यासपीठ से श्री भारद्वाज ने कहा कि हम अपने बच्चों को लाड-प्यार से बड़ा करते हैं और उन्हें कुल की रीति-रिवाज सिखाते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें धर्म की शिक्षा देने में कमी रह जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे स्वयं भक्ति मार्ग पर चलें ताकि उनके बच्चे भी उन संस्कारों को आत्मसात कर सकें। उन्होंने बताया कि संसार की धन-संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा मन को कभी संतुष्ट नहीं कर सकते। मन की शांति केवल प्रभु के नाम और संकीर्तन में ही संभव है।

नशामुक्त समाज और राम नाम का नशा

  प्रवचन के दौरान उन्होंने आधुनिक शादियों और समाज में व्याप्त बुराइयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की शादियों में लोग गलत प्रकार का नशा करके आते हैं, जिससे परिवार और समाज में केवल असंतोष फैलता है। इसके विपरीत, यदि नशा करना ही है तो राम नाम का नशा करें। राम का नाम किसी को दुखी नहीं करता, बल्कि दुखी व्यक्ति को सुखी बनाने का एकमात्र साधन है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक कार्य निरंतर करें और वह है प्रभु का सुमिरन।











जैन संतों की तपस्या का सम्मान एवं बहुमान (Felicitation)

   कथा में विशेष रूप से जैन समाज के साधु-संतों की तपस्या और उनके सिद्धांतों का वर्णन किया गया। श्री भारद्वाज ने कहा कि जैन संत त्याग और वैराग्य का जीवन जीते हैं और भगवान महावीर के 'जियो और जीने दो' (Live and Let Live) के सिद्धांत पर चलते हुए समाज को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं।
   इस अवसर पर नवरत्न परिवार द्वारा ज्योतिषाचार्य श्री भारद्वाज को आचार्य नवरत्न सागर सुरीश्वर जी महाराज का चित्र भेंट कर शाल और श्रीफल से सम्मानित किया गया। इस दौरान नवरत्न परिवार के प्रदेश संगठन मंत्री (State Organization Secretary) नितिन जैन (चिंटू चौहान),राजगढ़ शाखा अध्यक्ष (Branch President) रोहन जैन सेंडी (MR),सुशील जैन,प्रवीण जैन (सर),हरीश जैन,ललित जैन,सचिन चोमेलावाला,वीकेन जैन,अभिषेक पारख, दिनेश गुगलिया और कल्पेश जैन सहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।













सुविधाएं और आगामी कार्यक्रम (Upcoming Events)

   भीषण गर्मी को देखते हुए आयोजन समिति ने पूरे कथा पांडाल को वातानुकूलित (Air Conditioned) बनाया है और शीतल जल की उत्तम व्यवस्था की है। कथा के समापन पर प्रतिदिन सभी भक्तों के लिए भोजन प्रसादी (Bhojan Prasadi) का प्रबंध किया जा रहा है। समिति के लक्ष्मण डामेचा ने जानकारी दी कि 12 मई को कथा का पूर्ण समापन होगा और 13 मई को इसी मैदान पर भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह (Mass Marriage) समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात पूरे नगर के लिए 'नगर चौरासी' महाप्रसादी का वितरण होगा। आयोजन समिति के सदस्यों ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

प्रदेश के समग्र विकास और जन-कल्याण के लिए 29 हजार 540 करोड़ रूपये से अधिक की स्वीकृति

















लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण के लिए 15 हजार 598 करोड़ रूपये की स्वीकृति
शहरी एवं नगरीय मार्गों के नव निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए 6 हजार 900 करोड़ रूपये की स्वीकृति
गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले वृद्धजनों की पेंशन के लिए 6 हजार 116 करोड़ रूपये की स्वीकृति
बुदनी में एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल
महाविद्यालय की स्थापना के लिए 763.40 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
नीमच जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 163.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति
राज्य मंत्रियों व्दारा दिए जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि को बढ़ाकर 25 हजार रूपये किए जाने की स्वीकृति
10 करोड़ से कम लागत के डामरीकरण कार्यों में मूल्य समायोजन और MPRDC अंतर्गत EPC तथा HAM परियोजनाओं में मासिक दर समायोजन की स्वीकृति
जबलपुर उच्च न्यायालय के सामने मल्टीलेवल वाहन पार्किंग के निर्माण की लागत राशि को विभागीय सूचकांक की गणना से मुक्त रखे जाने की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में लिये गये निर्णय


  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में सम्पन्न हुईं। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के समग्र विकास और जन-कल्याण की दिशा में कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। प्रदेश में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, सिंचाई सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए विभिन्न विकास कार्यों और योजनाओं के लिए 29 हजार 540 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों एवं योजनाओं के परीक्षण और अनुमोदन के लिए 15 हजार 598 करोड़ रुपये और शहरी व नगरीय मार्गों के कायाकल्प तथा सुदृढ़ीकरण के लिए 6,900 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिये गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले वृद्धजनों की पेंशन के लिए 6 हजार 116 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अतिरिक्त चिकित्सा क्षेत्र के विस्तार के लिए बुदनी में एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए 763.40 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। साथ ही जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय सिंचाई परियोजना के लिए 163.95 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ ही राज्य मंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने का निर्णय लिया गया हैं। इसके साथ ही सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के लिए 10 करोड़ से कम लागत के डामरीकरण कार्यों में मूल्य समायोजन और MPRDC अंतर्गत EPC तथा HAM परियोजनाओं में मासिक दर समायोजन की भी स्वीकृति दी गई है।

लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण के लिए 15 हजार 598 करोड़ रूपये की स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग अंतर्गत लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया से संबंधित योजना को 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031) तक योजनाओं के संचालन की निरंतरता के लिए कुल 15,598.27 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

 स्वीकृति अनुसार कोषालयों की स्थापना के लिए 683.50 करोड़ रूपये, लंबित देनदारियों के भुगतान से सम्बंधित योजना के लिए 13,818.32 करोड़ रूपये के साथ लेखा प्रशिक्षण शालाओं की स्थापना, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, म.प्र. आंतरिक लेखा परीक्षण प्रकोष्ठ, निर्देशन एवं प्रशासन, संभागीय कार्यालयों की स्थापना और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी परियोजनाएँ एवं कार्य के लिए 1,096.45 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

शहरी एवं नगरीय मार्गों के नव निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए 6 हजार 900 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने लोक निर्माण विभाग अंतर्गत शहरी एवं नगरीय मार्गों के नव निर्माण और उन्नयन सहित सड़कों के सुदृढ़ीकरण से संबंधित योजनाओं को सोलहवें वित्त आयोग की अवधि (1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च 2031) तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 900 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार शहरी एवं नगरीय मार्गों के नव निर्माण और उन्नयन के लिए 2,100 करोड़ रूपये और सड़कों के सुदृढ़ीकरण के लिए 4,800 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले वृद्धजनों की पेंशन के लिए

6115.99 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद ने सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.) अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 1 अप्रैल 2026 से आगामी 5 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 6115.99 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना 15 अगस्त 1995 से प्रभावशील है। योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार द्वारा किया जाता है। योजनान्तर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वृद्धजनों को उनकी पात्रतानुसार 600 रूपये प्रतिमाह पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है।

बुदनी में एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल महाविद्यालय की स्थापना के लिए 763.40 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा सीहोर के बुदनी में एमबीबीएस, नर्सिंग और पैरामेडिकल महाविद्यालय की स्थापना के लिए 714.91 करोड़ रूपये के स्थान पर 763.40 करोड़ रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार बुदनी में 100 एम.बी.बी.एस. सीट प्रवेश क्षमता के नवीन चिकित्सा महाविद्यालय तथा 500 सीटर संबद्ध अस्पताल स्थापित किया जाएगा। साथ ही नर्सिग पाठ्यक्रमों के लिए 60 सीट प्रवेश क्षमता के नर्सिंग महाविद्यालय और पैरामेडिकल पाठ्क्रमों के लिए 60 सीट प्रवेश क्षमता के पैरामेडिकल महाविद्यालय की स्थापना भी की जायेगी।

नीमच जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 163.95 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा नीमच जिले की खुमानसिंह शिवाजी जलाशय (ठिकरिया तालाब) सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए लागत राशि 163.95 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। इससे नीमच की नीमच तहसील के 22 ग्रामों की कुल 5,200 हैक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

राज्य मंत्रियों व्दारा दिए जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि को बढ़ाकर 25 हजार रूपये किए जाने की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य मंत्रियों व्दारा दिए जाने वाले स्वेच्छानुदान की राशि में किसी एक प्रकरण के लिए वर्तमान में निर्धारित सीमा राशि 16,000 रूपये को बढ़ाकर  25,000 रुपये किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

उच्च न्यायालय के सामने मल्टीलेवल वाहन पार्किंग के निर्माण की लागत राशि को विभागीय सूचकांक की गणना से मुक्त रखे जाने की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा उच्च न्यायालय, म.प्र. जबलपुर में गेट क्रमांक 4 और 5 के सामने मल्टीलेवल वाहन पार्किंग ब्लाक कम बार ऑफिस के निर्माण की लागत राशि 94 करोड़ 16 लाख रूपये की योजना के प्रस्ताव को विभागीय सूचकांक की गणना से मुक्त रखे जाने की स्वीकृति दी गई है।

  10 करोड़ से कम लागत के डामरीकरण कार्यों में मूल्य समायोजन और MPRDC अंतर्गत EPC तथा HAM परियोजनाओं में मासिक दर समायोजन की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सड़क निर्माण कार्यों को गति देने के लिए 10 करोड़ से कम लागत के डामरीकरण कार्यों में मूल्य समायोजन को स्वीकृति दी है। निर्णय अनुसार लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत 10 करोड़ रुपये से कम लागत वाले डामरीकृत मार्गों के निर्माण, नवीनीकरण और संधारण कार्यों के अनुबंधों में अब मूल्य समायोजन का लाभ दिया जाएगा। इसके लिए एक विशिष्ट फॉर्मूला [V = Q(W_f - W_o)] निर्धारित किया गया है, जिससे डामर की बढ़ी हुई दरों का बोझ संविदाकारों पर नहीं पड़ेगा। इससे छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलेगी और कार्य समय-सीमा में पूर्ण हो सकेंगे। वैश्विक स्तर पर डामर (बिटुमेन) की कीमतों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि को देखते हुए ठेकेदारों को मूल्य समायोजन का लाभ देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

  इसके अतिरिक्त मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के अंतर्गत संचालित EPC (Engineering, Procurement, and Construction) और HAM (Hybrid Annuity Model) परियोजनाओं में 'Schedule-G' और 'Schedule-H' के तहत मूल्य समायोजन की गणना त्रैमासिक के स्थान पर भारत सरकार के MoRTH (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) के नियमों के अनुसार मासिक आधार पर करने की स्वीकृति दी है।

  वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे डामर की दरों में 20 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इस कारण कई निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे। मंत्रि-परिषद द्वारा दी गई यह राहत 1 मई 2026 से 30 जून 2026 तक की अवधि में क्रय किए गए बिटुमेन (डामर) के लिए लागू होगी।