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पी.एम.श्री गुमानपुरा में नवाचार की नई उड़ान बच्चो ने लिया रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग और ड्रोन का प्रशिक्षण




 

   गुमानपुरा (सरदारपुर)। पी.एम. श्री शासकीय हायर सेकेंड्री स्कूल गुमानपुरा में अटल टिंकरिंग लैब के अंतर्गत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में विद्यालय के शिक्षकों के साथ कक्षा 9वीं से 11वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
   प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, ड्रोन असेंबलिंग, कोडिंग, 3D प्रिंटिंग तथा विज्ञान एवं नवाचार से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। रोबोकार्ट के प्रशिक्षक हिमांशु पाल (मुंबई) द्वारा बच्चों को विभिन्न उपकरणों के उपयोग एवं प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।
   कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं नवाचार की भावना का विकास करना है। विद्यालय के शिक्षक भानालाल चोयल, कैलाश चंद्र वसुनिया , मनीष पाल, गोपाल पडियार, प्रियंका सिसोदिया, रुची पॅवार एवं प्रतिभा गजभिए ने सह भागिता की , अटल ट्रिन्कलिंग लेब के प्रभारी शिक्षक अभिषेक पंवार ने इस पहल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

 

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 24 जनवरी को मंत्रि-परिषद् बैठक के निर्णयों के संबंध में सदन में दिया गया वक्तव्य
 
  आज की कैबिनेट किसानों को समर्पित की

  देश में पहली बार उड़द एवं सरसों की फसल का उत्पादन बढ़ाने मध्यप्रदेश सरकार ने किया नवाचार

 उड़द के उपार्जन पर एमएसपी के अतिरिक्त किसानों को देंगे 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस

 सरसों का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा, इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन उपार्जन की संभावना

  कल सदन में घोषणा की थी,आज कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी, हम जो कहते हैं,करके दिखाते हैं

 कैबिनेट ने किसान कल्याण वर्ष में किसानों को दी बड़ी सौगात

 मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

   भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार की कटिबद्ध मंशा और इस संबंध में की जा रही कार्यवाहियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आज ही मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि अब यह पांच योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्यप्रदेश के किसानों को मिलेगा। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज की पूरी कैबिनेट हमने प्रदेश के किसानों को ही समर्पित की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है। हम सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज लिए गए सभी निर्णयों की सिलसिलेवार जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय मंत्रि-परिषद् ने लिया है, उनमें निम्न योजनाएं शामिल हैं :

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2008.683 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जा सकेगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2393.97 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक निरंतर मिलता रहेगा। इस योजना से किसान के खेतों में माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं में अगले 5 सालों तक लगातार विस्तार होता रहेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग राज्य सरकार के जरिए निरंतर मिलता रहेगा।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1011.59 करोड़ रुपये की इस योजना की स्वीकृति से प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार 31 मार्च 2031 तक निरंतर होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विकास जरूरी है। यह न केवल मध्यप्रदेश की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी, वरन् मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल सीड योजना

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं, उन्हें निरंतर लाभ प्राप्त होगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि करीब 10500 करोड़ रुपए की बड़ी लागत वाली इन पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले 5 सालों तक निरंतर रखने से किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त उत्पादन से निजात पाने में भी ये 5 योजनाएं बेहद सहायक सिद्ध होंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुप्तप्राय प्रजातियों के 5 गिद्धों को हलाली डेम जल क्षेत्र में किया मुक्त





 




पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ यादव

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से निरंतर बढ़ रही गिद्ध संख्या
  

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्ध को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम है। मध्यप्रदेश में सभी प्रांतों से अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। पारस्थितिकी तंत्र में इन पक्षियों का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध पक्षी संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।

  इस अवसर पर बताया गया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देख-रेख में हुई है। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।

गिद्ध संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण के प्रयास

 पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भू-दृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भू-दृश्य स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी।

मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है

  भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।

व्यापार के साथ आरोग्य की सेवा: राजगढ़ के सराफा व्यवसायी कमलेश सोनी के योग का दुनिया में असर




 

 
  राजगढ़ (धार)। मध्य प्रदेश के एक छोटे से जिले राजगढ़ की मिट्टी से उपजी योग की शक्ति आज अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघ चुकी है। पेशे से सराफा व्यापारी लेकिन सेवा से योग साधक कमलेश सोनी आज केवल राजगढ़ ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना चुके हैं। उनके योग कौशल की चर्चा अब भारत के विभिन्न राज्यों से लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक पहुँच चुकी है, जहाँ असाध्य रोगों से जूझ रहे लोग उनके मार्गदर्शन में नया जीवन पा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया से अमरावती तक: योग बना वैश्विक ढाल

   कमलेश सोनी की ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात समुंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली छाया बंधु,जो थर्ड स्टेज के ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, उन्हें कमलेश सोनी के योग परामर्श से अभूतपूर्व लाभ मिला। इसी तरह महाराष्ट्र के अमरावती के वासुदेव नसूड़े भी उनके योग विज्ञान के मुरीद हैं।

  मध्य प्रदेश के हृदय स्थल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.पी. सिंह के मामले ने तो चिकित्सा जगत को भी अचंभित कर दिया है। कैंसर से पीड़ित होने के बाद कमलेश सोनी के बताए गए योग को अपनाकर डॉ. सिंह ने वह रिकवरी दिखाई कि उन्हें कीमोथेरेपी जैसी जटिल प्रक्रिया तक नहीं लेनी पड़ी। यह इस बात का प्रमाण है कि कमलेश जी का योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण उपचार पद्धति बन चुका है।

मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में फैला सेवा का नेटवर्क

  राजगढ़ के सोनी धर्मशाला से शुरू हुई यह मुहिम आज एक विशाल वटवृक्ष बन गई है। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान,महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी लोग अपनी शारीरिक और मानसिक व्याधियों के समाधान के लिए कमलेश सोनी से संपर्क करते हैं। विशेषकर मोहनखेड़ा तीर्थ में प्रवास के दौरान उन्होंने कई जैन संतों और साध्वियों को योग की बारीकियां सिखाईं, जिससे उनके स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार आए।

संघर्ष की भट्टी में तपकर निखरा व्यक्तित्व

  कमलेश सोनी के इस सफर की शुरुआत स्वयं के दुखों से हुई थी। 47 वर्षीय कमलेश सोनी कभी माइग्रेन,पाइल्स और टॉन्सिल जैसी बीमारियों से लड़ रहे थे। जिम, तैराकी, स्केटिंग और साइकिलिंग जैसे हर संभव प्रयास विफल होने के बाद उन्होंने योग को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाया। स्वामी रामदेव जी के योग सूत्रों को आत्मसात कर उन्होंने न केवल खुद को निरोगी किया, बल्कि इसे अपने जीवन का मिशन बना लिया।

डिजिटल योग और आयुष मंत्रालय का सम्मान

  कोरोना काल में कमलेश सोनी ने मोबाइल व वीडियो कॉल के जरिए मरीजों को योग कराकर स्वस्थ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस सेवा के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। हरिद्वार में योग निरीक्षकों के साक्षात्कार के बाद उन्हें आधिकारिक योग शिक्षक का प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ।

समर्पित टीम: निरंतरता ही सफलता की कुंजी

  कमलेश सोनी की सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी वह टीम है जो उनकी अनुपस्थिति में भी सेवा की इस मशाल को जलाए रखती है। रितेश अम्बोर, राहुल माली और नितिन धारीवाल जैसे समर्पित सहयोगी प्रतिदिन सुबह 5:30 से 7:25 बजे तक योग कक्षाएं संचालित करते हैं। आज सोनी धर्मशाला में 30 से अधिक महिला-पुरुषों का समूह नियमित रूप से योग साधना कर रहा है।




उल्लास का उत्सव भगोरिया मेला - क्रांतिदीप अलूने




 


  भगोरिया मेला प्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर आलीराजपुर, खरगौन, बड़वानी और धार के भील, भिलाला और बारेला जनजाति द्वारा होली से सात दिन पहले मनाया जाने वाला सात दिवसीय प्रसिद्ध जनजातीय उत्सव है। फसल कटाई का जश्न होली के सात दिन पहले शुरू होने वाला यह मेला, फसल कटाई के बाद जनजातीय समुदाय द्वारा उल्लास के साथ मनाए जाने वाला का त्यौहार है। भगोरिया में पारम्परिक रूप से जीवन साथी चुनने, रंग-गुलाल लगाने, नृत्य-संगीत और खरीदारी करने की उदात्त भावनाएँ मुखरता से प्रदर्शित होती है।

  फागुन महीने में जब चारों ओर प्रकृति में नया उल्लास होता हैं तब पश्चिम निमाड़ से झाबुआ तक के जनजातीय क्षेत्रों के साप्ताहिक हाट बाजार भगोरिया के रंग में रंगे होते हैं। मेले में हर तरफ फागुन और इन्द्रधनुषी प्रेम के रंग नज़र आते हैं। इन मेलों में मुख्य रूप से होली के लिए खरीददारी करने के लिए लोग आते हैं। गैर जनजातीय समुदाय के लिए भी भगौरिया के साप्ताहिक हाट बाजार विशिष्ट होते हैं। इसका सभी व्यापारियों को भी इंतजार रहता है। इसमें दुकानदार साल भर की कमाई, भगोरिया के साप्ताहिक बाजार से कर लेते हैं। भगोरिया हाट (बाजार) में जरूरत की वस्तुएं, मिठाइयाँ और पारंपरिक आभूषण बिकते हैं।

  भगोरिया मेले में बड़े-बड़े ढोल और मांदल की थाप पर पारंपरिक आदिवासी नृत्य किया जाता है, जिसमें विभिन्न दल ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेते हैं। वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होने वाले विभिन्न दल एक ही रंग के वस्त्रों में अपनी अलग पहचान के साथ छटा बिखेरते हैं। महिलाओं के साथ पुरूष भी चांदी के आभूषणों से सज्जित होकर पारम्परिक वाद्य यंत्रों की ताल पर थिरकते हैं। चांदी के आभूषण भील जनजाति में समृद्धि के प्रतीक हैं।

  भगोरिया मेल-मिलाप, आनंद और उल्लास का उत्सव है। माना जाता है कि इसमें युवा अपनी पसंद के साथी को गुलाल लगाकर या पान खिलाकर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। भगोरिया में मनपसंद के साथी के साथ भागकर विवाह करने की मान्यता भी प्रचलित है।

  भगोरिया पर्व होली के सात दिन पहले से शुरू होकर होलिका दहन तक चलता है। यह मुख्य रूप से मध्यप्रदेश के झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों के विभिन्न गाँवों में साप्ताहिक बाजार के दिन आयोजित होता है। भगोरिया मेला आदिवासी संस्कृति, उमंग और जीवन को करीब से जानने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।

वालपुर का प्रसिद्ध भगोरिया

 आलीराजपुर जिले के वालपुर का भगोरिया मेला अपनी ऐतिहासिक प्राचीनता, आदिवासी संस्कृति के जीवंत रंगों और अनूठी पारंपरिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है।

 किंवदंती है कि इस मेले की शुरुआत राजा भोज के समय में भील राजाओं द्वारा की गई थी। आलीराजपुर जिले के वालपुर में तीन प्रांतों की जनजातीय संस्कृति के रंग दिखाई देते हैं। यह स्थान तीन प्रांतों (मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, और गुजरात के निकट) की सांस्कृतिक संस्कृति का संगम स्थल होने के कारण भी विशेष जाना जाता है। वालपुर का मेला आदिवासी संस्कृति और आधुनिकता का एक अद्भुत मिश्रण है, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों के साथ, ढोल-मांदल की थाप पर आदिवासी युवा थिरकते हैं।

भगोरिया प्रदेश में राजकीय उत्सव

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 मार्च 2025 को 'भगोरिया पर्व' को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनजातीय देवलोक महोत्सव में राजकीय उत्सव किया। उन्होंने कहा कि भगोरिया उल्लास का पर्व है। यह फागुन के रंगों से सराबोर प्रकृति की खुशबू में कुछ पल थम जाने और इसी में रम जाने का पर्व है। हमारी सरकार भगोरिया का उल्लास बरकरार रखेगी।

  वर्ष 2026 में भगोरिया महोत्सव 24 फरवरी मंगलवार से प्रारंभ होगा। यह 2 मार्च सोमवार तक चलेगा। बड़वानी जिले में सोमवार 2 मार्च को निवाली में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भगोरिया महोत्सव में शामिल होंगे।

 (लेखक उप संचालक जनसम्पर्क हैं)


"मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म : मुख्यमंत्री डॉ. यादव




 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ किया मन की बात कार्यक्रम का श्रवण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "मन की बात" कार्यक्रम का श्रवण मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस लाइन स्टेडियम,नेहरू नगर भोपाल में किया।

प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं

  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की "मन की बात" देश और देशवासियों की उपलब्धियों को सामने लाने का एक प्रभावी प्लेटफार्म है। देश में मैदानी स्तर पर घटित होने वाली सूक्ष्मतम गतिविधियों का वे ध्यान रखते हैं और उन्हें देशवासियों से साझा करते हैं। किसानों द्वारा एक ही स्थान पर विविध फसलें लेने के लिए किया गया नवाचार हो या केरल में बच्चे के अंगदान का मामला हो मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उल्लेख किए गए यह सब प्रसंग कई लोगों को प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा तमिलनाडु की पूर्व प्रधानमंत्री  जयललिता को याद करना देश की विविधता को अभिव्यक्ति देने के समान है। प्रधानमंत्री मोदी के विचारों में समग्रता और सबके विकास की सोच प्रकट होती है। प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम की यह विशेषता है कि इस संवाद में कभी राजनैतिक विषय नहीं आते, वे सदैव देश हित को ही प्राथमिकता देते हैं। उनका यह विजन हम सबके लिए प्रेरणादायी है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी अन्नदाता, युवा, महिला, गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश के कोने-कोने में विकास, जनकल्याण के लिए हो रहे नवाचारों और पहल का ध्यान रखना और उन्हें देशवासियों से नियमित तौर पर साझा करना सराहनीय है। नई दिल्ली में आयोजित ग्लोबल एआई एम्पैक्ट समिट-2026 के संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समिट में प्रदेश के कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रही पहल को प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश के हित में एआई का किस प्रकार अधिक से अधिक लाभ उठाया जा सकता है, इस पर विचार करना ही हमारी प्राथमिकता है। प्रधानमंत्र मोदी के नेतृत्व में देश उदार और उदात विचारों के साथ इस दिशा में आगे बढ़ेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ




 


 
 मध्यप्रदेश उभर रहा है दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 प्रधानमंत्री मोदी ने दिव्यांग कह कर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संघर्ष करने वाले निशक्तजनों की इच्छा शक्ति को किया प्रोत्साहित : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज पुलिस लाइन स्टेडियम, भोपाल में राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव-2026 "नॉट आउट @ 100" का शुभारंभ किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आयोजन के लिए सभी प्रतिभागियों और आयोजकों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लगातार 100 घंटे तक चलने वाली इस अनूठी प्रतियोगिता में 25 से अधिक राज्यों की टीमें भाग ले रही हैं। दिव्यांग खिलाड़ी अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। 

मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश दिव्यांगजन के खेलों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। प्रदेश के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना कर प्रदेश को गौरवान्वित किया है। समाज सुधारक और चिंतक स्व. कुशाभाऊ ठाकरे की जन्म शताब्दी वर्ष पर 100 घंटे लगातार क्रिकेट खेलने का यह प्रयास केवल रिकॉर्ड बनाने की कोशिश नहीं, बल्कि यह संदेश है कि जब संकल्प समाज के उत्थान के लिए होता है तो सीमाएं स्वयं समाप्त हो जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकलांग शब्द के स्थान पर दिव्यांग शब्द को स्थापित किया है। उनका यह कदम भारतीय संस्कृति के मनोभाव के अनुरूप है। इस पहल ने विकलांग शब्द से जन सामान्य में उपजती हीनता की भावना का अंत किया है, साथ ही चुनौतिपूर्ण परि‍स्थितियों में संघर्ष की अदम्य इच्छा शक्ति को प्रोत्साहित किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की सकारात्मक सोच के अनुरूप देश को सभी क्षेत्रों में आगे लाने के प्रयास को साकार रूप देने के उद्देश्य से ही राष्ट्रीय दिव्यांगजन क्रिकेट खेल महोत्सव 2026 नॉट आउट@100 का आयोजन किया गया है। 

 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रिकेट पिच पर पहुंचकर खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तथा एक बॉल खेलकर मैच का शुभारंभ किया। पहला मैच मध्यप्रदेश और राजस्थान की ऑर्थो केटेगरी टीम के बीच रहा। इसके पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव को खेल महोत्सव का बैच लगाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने टूर्नामेंट की कैप भी धारण की।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्रीय दिव्यांग खेल महोत्सव के अंतर्गत दिव्यांगजन का लगातार 100 घंटे क्रिकेट खेलना अद्भुत, आनंददायी और हम सबके लिए गर्व का अवसर है। उन्होंने इस आयोजन के लिए कुशाभाऊ ठाकरे न्यास और इंटर नेशनल पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर को बधाई दी। उन्होंने कहा कि हमारे लिए यह सौभाग्य का विषय है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की "मन की बात" के श्रवण के साथ यह खेल महोत्सव आयोजित हो रहा है। यह सभी क्षेत्रों में सर्वागींण रूप से समान भाव के साथ आगे बढ़ने की प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रतिबद्धता का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांग बेटी संगीता विश्नोई की इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि बेटियां केवल खिलाड़ी नहीं, आत्मविश्वास और साहस की जीवंत मिसाल हैं।