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राजगढ़ के व्यापारियों के लिए बड़ी राहत: कॉम्प्लेक्स खाली करने का नोटिस स्थगित,मरम्मत पर होगा मंथन







 



  राजगढ़ (धार): राजगढ़ नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले बाल विनय मंदिर कॉम्प्लेक्स और राजीव कॉम्प्लेक्स के सैकड़ों व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्रशासन द्वारा दुकानों को रिक्त करने के लिए जारी किया गया अंतिम नोटिस फिलहाल रोक दिया गया है। पार्षद रीतु निलेश सोनी की पहल और उनके द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को सौंपे गए ज्ञापन के बाद यह सकारात्मक निर्णय लिया गया है।

क्या था मामला?

  पिछले कुछ समय से इन दोनों कॉम्प्लेक्सों के दुकानदारों पर अपनी दुकानें खाली करने का दबाव था, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। ये दुकानदार पिछले 20-25 वर्षों से अपना व्यवसाय यहाँ सफलतापूर्वक चला रहे हैं। अचानक आए इस नोटिस के कारण व्यापारियों में भारी चिंता का माहौल था और वे बेरोजगारी की आशंका से भयभीत थे।

 पार्षद के हस्तक्षेप से टली कार्रवाई

 मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पार्षद रीतु निलेश सोनी ने नगर परिषद प्रशासन के समक्ष व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखा। पार्षद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि:
 * दुकानदार नियमित रूप से किराया जमा कर रहे हैं।
 * अधिकांश दुकानदार दशकों से यहाँ कार्यरत हैं, जिन्हें अचानक हटाना अनुचित है।
 * व्यापारी स्वयं कॉम्प्लेक्स की मरम्मत में आर्थिक सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
इन तर्कों पर विचार करते हुए प्रशासन ने फिलहाल निष्कासन की कार्यवाही को रोकने का निर्णय लिया है।

अब आगे क्या? (16 जून की बैठक पर टिकी निगाहें)

  आगामी परिषद बैठक 16 जून को हे जिसमे पार्षद रीतु निलेश सोनी कॉम्प्लेक्स के जीर्णोद्धार (रिपेयरिंग) का प्रस्ताव रखेंगी। उद्देश्य यह है कि दुकानों को खाली कराने के स्थान पर, उनकी मरम्मत करवाकर उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित किया जाए।

 व्यापारियों में खुशी की लहर

  नोटिस पर रोक लगने की सूचना मिलते ही व्यापारियों में खुशी का माहौल है। राजीव कॉम्प्लेक्स के एक पुराने व्यापारी ने भावुक होकर कहा, "25 साल से हम इस दुकान के भरोसे अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। नोटिस ने हमारी नींद उड़ा दी थी, लेकिन पार्षद मैडम के सहयोग से हमें नई उम्मीद मिली है।"

  पार्षद रीतु निलेश सोनी ने कहा: "हमारा मकसद किसी को उजाड़ना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना है। हम चाहते हैं कि व्यापारी बिना किसी डर के अपना काम जारी रखें। 16 जून की बैठक में हम रिपेयरिंग का एस्टीमेट पास करवाकर कॉम्प्लेक्स के कायाकल्प की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।"

 अब क्षेत्र के सभी व्यापारियों की नजरें 16 जून को होने वाली नगर परिषद की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें मरम्मत कार्य और नई किराया नीति पर अंतिम मुहर लग सकती है।

भारत 2030: इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति जो लोगों और गणित की ताकत से शुरू होगी

पुणे, महाराष्ट्र, भारत

भारत में बिजली की मांग पहले ही 250 गीगावाट से ज़्यादा है और 2032 तक इसके 400 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। अकेले AI डेटा सेंटर के विकास से 2031 तक 13 गीगावाट और जुड़ सकते हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डेडिकेटेड हर गीगावाट औद्योगिक विकास, शहरी विकास और घरेलू मांग से मुकाबला करता है। फिर भी, करोड़ों भारतीय रोज़ाना बिजली कटौती, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, या मामूली ग्रिड कनेक्शन के बावजूद डीज़ल बैकअप पर निर्भरता का अनुभव करते हैं।


यह फ़र्क मायने रखता है: ग्रिड से जुड़ा होना और लगातार बिजली उपलब्ध होना, दो अलग-अलग बातें हैं। सिर्फ़ सेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाकर उस अंतर को कम करने के लिए जेनरेशन, ट्रांसमिशन और स्टोरेज में सैकड़ों अरबों डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी। भारत की ऊर्जा चुनौती सिर्फ़ इसके बड़े पैमाने (स्केल) को लेकर नहीं है, बल्कि इसके बुनियादी ढांचे की बनावट (आर्किटेक्चर) से जुड़ी है।

न्यूट्रिनो ® एनर्जी ग्रुप , जो गणितज्ञ होल्गर थॉर्स्टन शुबार्ट के बनाए गणित और इंजीनियरिंग फ्रेमवर्क पर काम करता है, एक पूरक समाधान पेश करता है: लाखों इंटेलिजेंट डीसेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर नोड्स, जिनमें से हर एक कंजम्प्शन पॉइंट पर लगातार पावर जेनरेट करता है, मिलकर वह प्रोड्यूस करता है जो सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम नहीं कर सकते: भरोसेमंद, डिस्ट्रिब्यूटेड बेसलोड बिना इंफ्रास्ट्रक्चर चेन के जो एक्सपेंशन को धीमा और महंगा बनाते हैं।

नेगावाट अंकगणित​
आर्थिक तर्क नंबरों पर आधारित है। एक मिलियन लाइफ क्यूब यूनिट एक किलोवाट के लगातार आउटपुट पर काम करते हुए एक गीगावाट का डीसेंट्रलाइज़्ड बेसलोड बनाते हैं। दस मिलियन यूनिट दस गीगावाट बनाते हैं । पचास मिलियन यूनिट पचास गीगावाट बनाते हैं। लेकिन असली कीमत पैदा हुए वॉट में नहीं है । यह सेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के गीगावाट में है जिसे कभी बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती : ट्रांसमिशन कैपेसिटी, स्टोरेज सिस्टम, रिज़र्व जेनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन को मज़बूत करना।
 
उपभोग स्थल पर लगाई गई हर इकाई उस इंफ्रास्ट्रक्चर चेन को समाप्त कर देती है, जो उस स्थान तक बिजली पहुँचाने के लिए आवश्यक होती। डीसेंट्रलाइज़्ड लगातार-जेनरेशन प्लेटफॉर्म नई जेनरेशन कैपेसिटी को सीधे खपत की जगह पर लाकर इस टकराव को कम करने में मदद कर सकते हैं। भारत के फिस्कल संदर्भ में, जहां ग्रिड बढ़ाने की लागत सैकड़ों अरबों डॉलर में आती है, यह सिस्टमिक नेगावाट इफ़ेक्ट कोई फिलॉसफी नहीं है। यह सस्ती ऊर्जा उपलब्धता और डेफर्ड डेवलपमेंट की एक और जेनरेशन के बीच का अंतर है।
 
द टेक्नोलॉजी

न्यूट्रिनो ® एनर्जी ग्रुप के कन्वर्ज़न सिस्टम, ओपन नॉन-इक्विलिब्रियम सिस्टम के तौर पर काम करने वाले ग्रेफीन-सिलिकॉन नैनोस्ट्रक्चर के ज़रिए थर्मल ग्रेडिएंट, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैकग्राउंड फील्ड और कॉस्मिक पार्टिकल इंटरैक्शन सहित मल्टी-चैनल एम्बिएंट फ्लक्स को इकट्ठा करते हैं। इसका मुख्य फ्रेमवर्क शुबार्ट मास्टर फ़ॉर्मूला है:
 

यह इक्वेशन मल्टी-चैनल एम्बिएंट फ्लक्स से लगातार इलेक्ट्रिकल आउटपुट को बताता है, जो एक्टिव मटीरियल वॉल्यूम में इंटीग्रेटेड है, और थर्मोडायनामिक एफिशिएंसी कंस्ट्रेंट से घिरा हुआ है।

यह आउटपुट लगातार होता है, लोकेशन से अलग होता है, और इसके लिए किसी फ्यूल, मूविंग पार्ट्स और ग्रिड कनेक्शन की ज़रूरत नहीं होती। इंटरनल मोंटे कार्लो सिमुलेशन और मल्टी-पैरामीटर इवैल्यूएशन से पता चलता है कि स्टैटिस्टिकल कंसिस्टेंसी 5.9 से 6.0 सिग्मा तक पहुँचती है, जो मॉडर्न फिजिक्स में कन्वेंशनल
फाइव-सिग्मा डिस्कवरी थ्रेशहोल्ड से ऊपर है।

यह दावा औद्योगिक स्तर पर इसके व्यावसायिक प्रदर्शन (कमर्शियल परफॉर्मेंस) को प्रमाणित नहीं करता है। यह स्थापित एक्सपेरिमेंटल फ़िज़िक्स के मुकाबले फ़िज़िकल फ्रेमवर्क की अंदरूनी कंसिस्टेंसी को एक कॉन्फिडेंस लेवल पर मापता है, जहाँ एक्सीडेंटल कंसिस्टेंसी की संभावना लगभग पाँच सौ मिलियन में से एक है।

द लाइफ क्यूब 
लाइफ क्यूब एक ऑटोनॉमस इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म है जिसे 1 से 1.5 किलोवाट रेंज में लगातार आउटपुट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें इंटीग्रेटेड क्लाइमेट कंट्रोल और हवा से पानी को साफ करने की सुविधा है, जो मौसम के हिसाब से हर दिन 12 से 25 लीटर साफ पीने का पानी बनाता है। यह बिना किसी बाहरी बिजली सप्लाई, बिना फ्यूल लॉजिस्टिक्स और बिना ग्रिड पर निर्भर हुए काम करता है।

राजस्थान के एक दूर-दराज के क्लिनिक के लिए, इसका मतलब है लाइट, रेफ्रिजेरेटेड दवाइयां, और एक ही यूनिट से साफ पानी, जो सड़क से आता है और जिसे दोबारा सप्लाई की ज़रूरत नहीं होती। बिहार के एक गांव के स्कूल के लिए, इसका मतलब है लगातार कनेक्टिविटी और कूलिंग। वहीं, ओडिशा के किसी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के लिए इसका मतलब है—कागज़ पर ग्रिड से जुड़े होने और असल में भरोसेमंद बिजली मिलने के बीच का अंतर खत्म होना, वो भी उस बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का इंतजार किए बिना जिसे आने में शायद दशक लग जाएं। 

भारत के क्लाइमेट में खास तौर पर वह कंपाउंडिंग इफ़ेक्ट है जिसके बारे में शुबार्ट बताते हैं: एनर्जी से कूलिंग होती है, कूलिंग से कंडेंसेशन होता है, और कंडेंसेशन से साफ़ पानी बनता है। एक प्लैटफ़ॉर्म से, इंसानी विकास का एक साइकिल शुरू होता है।

भारत की AI महत्वाकांक्षा और इसकी ऊर्जा बाधा
भारत का लक्ष्य एक ग्लोबल AI पावर बनना है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार, स्टेबल बिजली की ज़रूरत होती है, जिसकी गारंटी कभी-कभी मिलने वाले रिन्यूएबल एनर्जी स्ट्रक्चरल तौर पर नहीं दे सकते। वही डीसेंट्रलाइज़्ड आर्किटेक्चर जो गांव में ऊर्जा की कमी को दूर करता है, वह AI एज कंप्यूटिंग की लगातार बेसलोड ज़रूरत को भी पूरा करता है। लाइफ क्यूब और पावर क्यूब प्लेटफॉर्म भारत के रिन्यूएबल बिल्डआउट का विकल्प नहीं हैं। वे लगातार जेनरेशन लेयर हैं जो उस बिल्डआउट को पूरा करते हैं।

एक साझेदारी, बिक्री नहीं
शुबार्ट इस एंगेजमेंट के नेचर के बारे में सीधे कहते हैं, “मैं भारत में एक विक्रेता (Seller) के रूप में नहीं, बल्कि एक एक साझेदार के रूप में आया हूँ। कुछ लेने नहीं , बल्कि साथ मिलकर कुछ बनाने के लिए।”

हमारा दृष्टिकोण (विज़न) यह है कि इंडियन इंजीनियर, इंडियन मैन्युफैक्चरर, इंडियन बैटरी स्पेशलिस्ट, इंडियन सॉफ्टवेयर डेवलपर और इंडियन एंटरप्रेन्योर भारत में यह इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएं। अंतरराष्ट्रीय साझेदार ज्ञान प्रदान करते हैं, प्लेटफ़ॉर्म को मिलकर विकसित करते हैं, और ऐसी औद्योगिक क्षमता बनाते हैं जो लंबे समय तक इंडियन इंडस्ट्री से जुड़ी रहे। यह इम्पोर्ट पर डिपेंडेंसी नहीं है। यह एक टेक्नोलॉजी पैराडाइम का इंडियन हाथों में ट्रांसफर है।

 “अगर हम ऊर्जा, पानी, कूलिंग और कनेक्टिविटी की चुनौतियों का मिलकर समाधान खोज लेते हैं, तो हम केवल एक नए इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं करेंगे; बल्कि हम नई संभावनाओं को जन्म देंगे—परिवारों के लिए, छात्रों के लिए, डॉक्टरों के लिए, गांवों के लिए, शहरों के लिए और अंततः पूरे देश के लिए।"

भारत ने एक समय दुनिया को ज़ीरो का कॉन्सेप्ट दिया था। शायद भारत 21वीं सदी में दुनिया को दिखाएगा कि कैसे अरबों लोग इंटेलिजेंट डीसेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए ऊर्जा, पानी, शिक्षा और खुशहाली पा सकते हैं।

अगली इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति पावर प्लांट से शुरू नहीं होगी, बल्कि लोगों और गणित की ताकत से शुरू होगी।

 वेबसाइट: neutrino-energy.com 


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press@neutrino-energy.com

ब्रिक्स (BRICS) प्रतिनिधि मण्डल के माण्डू भ्रमण की तैयारियाँ पूर्ण; कल जहाज महल में होगा अंतर्राष्ट्रीय डेलिगेशन का भव्य स्वागत








 



सांस्कृतिक कार्यक्रमों,भव्य लाइट एंड साउंड शो और गाला डिनर से सजेगी माण्डू की शाम

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने जहाज महल पहुँचकर सुरक्षा और वी.आई.पी. प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं का लिया अंतिम जायजा

    धार। ऐतिहासिक पर्यटन नगरी माण्डू में कल, 12 जून 2026 को आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) प्रतिनिधि मण्डल के अंतर्राष्ट्रीय भ्रमण को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वी.आई.पी. आयोजन की व्यवस्थाओं की अंतिम समीक्षा करने के लिए कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना एवं पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा विशेष रूप से 'जहाज महल' पहुँचे। अधिकारियों ने सुरक्षा, रूट और स्वागत-सत्कार से जुड़ी तमाम बारीकियों का धरातलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।
  कलेक्टर श्री मीना ने निर्देश दिए हैं कि संपूर्ण आयोजन अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों और वी.आई.पी. प्रोटोकॉल के अनुरूप गरिमामय और चाक-चौबंद होना चाहिए, जिसमें किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।

पारंपरिक संस्कृति और 'बाग प्रिंट' से रूबरू होंगे विदेशी मेहमान

  तय कार्यक्रम के अनुसार, 12 जून को ब्रिक्स प्रतिनिधि मण्डल माण्डू के विश्व प्रसिद्ध 'जहाज महल' का दीदार करेगा। विदेशी मेहमानों के जहाज महल पहुँचने पर आजीविका समूह की दीदियों द्वारा पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके पश्चात, प्रतिनिधि मण्डल मुख्य द्वार के समीप आजीविका समूह की दीदियों द्वारा लगाई गई धार जिले की विश्व प्रसिद्ध 'बाग प्रिंट' की विशेष स्टॉल्स का अवलोकन करेगा।

लोक नृत्य और लाइट एंड साउण्ड शो का आकर्षण

भ्रमण के दौरान मुख्य द्वार पर स्थानीय नृत्य दल द्वारा पारंपरिक लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्य द्वार से जहाज महल में प्रवेश के बाद अधिकृत टूरिस्ट गाइड्स द्वारा विदेशी मेहमानों को माण्डू और जहाज महल के गौरवशाली इतिहास तथा स्थापत्य कला की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
     शाम को विशेष आकर्षण के रूप में ऐतिहासिक प्राचीर पर भव्य 'लाइट एंड साउण्ड शो' का प्रदर्शन किया जाएगा। 

गाला डिनर के साथ होगा समापन

  सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भ्रमण के उपरांत, जिला प्रशासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय डेलीगेट्स के सम्मान में एक शानदार गाला डिनर का आयोजन किया जाएगा, जहाँ मेहमान विशेष व्यंजनों का स्वाद लेंगे। 
  निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

बर्ड वाचिंग के 25 वर्षों में पहली बार दिखा रेड-नैप्ड आइबिस; पर्यावरण के लिए शुभ संकेत









 



  सरदारपुर (धार) : इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-47 पर फुलगांवड़ी से चिंचोड़िया मार्ग के बीच स्थित खेतों में 'रेड-नैप्ड आइबिस' (Pseudibis papillosa) पक्षी देखा गया है। पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन, जो पिछले 25 वर्षों से इस क्षेत्र में बर्ड वाचिंग (पक्षी अवलोकन) कर रहे हैं, ने इस पक्षी के दिखाई देने की पुष्टि की है।

पक्षी की विशेषताएं और पारिस्थितिकी

  रेड-नैप्ड आइबिस, जिसे 'इंडियन ब्लैक आइबिस' भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप का एक स्थानीय (resident) पक्षी है। यह मुख्य रूप से खुले मैदानों, कृषि क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास पाया जाता है। काले-धूसर रंग के इस पक्षी की पहचान इसके कंधों पर मौजूद विशिष्ट सफेद पैच (white shoulder patch) और सिर पर मौजूद लाल रंग की त्वचा (red warty skin) से की जाती है। इसकी लंबी, नीचे की ओर झुकी हुई चोंच इसे खेतों में कीड़े-मकोड़े और छोटे जीवों को खोजने में मदद करती है।

जैव-विविधता का सकारात्मक संकेत

  पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन ने बताया कि इस क्षेत्र में सामान्यतः ब्लैक हेडेड आइबिस देखे जाते हैं, लेकिन रेड-नैप्ड आइबिस का इस विशेष मार्ग पर दिखना स्थानीय जैव-विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। पास ही स्थित आनंदखेड़ी तालाब के कारण यह क्षेत्र पक्षियों के लिए भोजन का एक अच्छा स्रोत बना हुआ है। इस पक्षी का यहाँ विचरण करना पर्यावरण के संतुलित और स्वस्थ होने का एक सकारात्मक संकेत है।
 
 

मोबाइल छोड़ो,कागज़ की नाव जोड़ो: दिनेश गुप्ता का एक और गिनीज़ रिकॉर्ड प्रयास







 





  कल्याण | – प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर, लेखक एवं 8 गिनीज़ रिकॉर्ड धारक दिनेश गुप्ता (माइंडसेट गुरु) ने बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने और रचनात्मक गतिविधियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक घंटे में 275 ओरिगामी (कागज़ की) नावें बनाकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करने का प्रयास किया। उनका संदेश है, "बारिश आ रही है और हमारी नाव तैयार है", अर्थात बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के बजाय कागज़ की नाव बनाकर, खेलकर और अपनी कल्पनाशक्ति का विकास करें। यह प्रयास एक घंटे में सबसे अधिक नावें श्रेणी के अंतर्गत किया गया, जिसमें पूर्व रिकॉर्ड 250 नावों का था। रिकॉर्ड प्रयास के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया, संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई तथा आवश्यक साक्ष्य तैयार किए गए। हालांकि इस उपलब्धि की गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है और अंतिम परिणाम सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद घोषित किया जाएगा।

राजगढ़ में "गण आपके द्वार" कार्यक्रम संपन्न,धर्म आराधना से जुड़ने का आह्वान







 


  राजगढ़ (धार)। महावीर स्थानक भवन, राजगढ़ में श्री धर्मदास  गण परिषद के "गण आपके द्वार" कार्यक्रम के अंतर्गत तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा 6 के दर्शन, वंदन एवं मांगलिक श्रवण का लाभ प्राप्त किया गया।

 मेघनगर एवं झाबुआ श्रीसंघ में प्रवास के पश्चात श्री धर्मदास गण परिषद का दल राजगढ़ पहुंचा। इस अवसर पर गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरतजी भंसाली, महामंत्री शैलेशजी पीपाड़ा, दीपकजी रुणवाल, सोहनलालजी रुणवाल सहित अन्य सदस्य राजगढ़ श्रीसंघ में पधारे, जिनका श्रीसंघ द्वारा बहुमान किया गया।

  कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष भरतजी भंसाली ने श्रावण एवं भाद्रपद मास में आयोजित होने वाली मिनी वर्षीतप आराधना से अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं को जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन साधकों को अनुकूलता हो, वे पूर्ण वर्षीतप आराधना भी सातापूर्वक संपन्न करें।

  उन्होंने आगामी वर्षावास 2026 के दौरान श्रावण मास की विशेष आराधनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए संघजनों से घर-घर धर्म संदेश पहुंचाने एवं अधिकाधिक लोगों को आराधना से जोड़ने का आग्रह किया। साथ ही बताया कि 28 जुलाई से चातुर्मास प्रारंभ होने के साथ ही स्थानीय स्वाध्याय संघ के स्वाध्यायी प्रतिदिन अपनी सेवाएं श्रीसंघ को प्रदान करेंगे।

  गण परिषद द्वारा द्वितीय वर्ष में विशेष सामायिक आराधना के अंतर्गत वर्षभर में 1500 सामायिक तथा पक्खी पर्व की आराधना एवं प्रतिक्रमण करने वाले कुल 24 श्रावक-श्राविकाओं का सम्मान एवं पुरस्कार वितरण भी किया गया।

  इस अवसर पर अणु जन्म शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित होने वाली आगामी आराधनाओं की जानकारी भी प्रदान की गई। गण परिषद ने सभी श्रीसंघों को अधिक से अधिक धर्म आराधना से जोड़ने का संदेश दिया।
  
  कार्यक्रम में वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के सदस्य संतोष बुरड़, नरेंद्र मूणत, अनिल नखेत्रा, वर्धमान , ज्ञानचंद, सचिन, अंकुश खाबिया, आशीष वागरेचा, पंकज, हर्ष मामा, हितेश वागरेचा सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। सभी के सहयोग से "गण आपके द्वार" कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
  यह जानकारी संघ के मीडिया प्रभारी हितेश वागरेचा द्वारा प्रदान की गई।

राजगढ़: देहदान कर अमर हुए समाजसेवी महेंद्र जी छाजेड़, 'नगर रत्न' की उपाधि से सम्मानित






 




  राजगढ़ (धार)। मानवता की सेवा के लिए जीते-जी तो सभी प्रेरित करते हैं, लेकिन मृत्यु के उपरांत भी समाज को नई राह दिखाना एक विरले व्यक्ति का कार्य है। राजगढ़ नगर के वरिष्ठ समाजसेवी एवं दानवीर, ब्रह्मलीन श्रद्धेय श्री महेंद्रजी छाजेड़ ने मृत्योपरांत अपनी देहदान कर समाज के सामने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। विज्ञान और मानवता के कल्याण हेतु उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए उनके परिजनों ने नेत्रदान व देहदान का पुनीत निर्णय लिया।

'नगर रत्न' से नवाजा गया परिवार

  इस महान कार्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए 'सराफा एसोसिएशन, राजगढ़' ने उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मंजुलाजी और पुत्र श्री अंकितजी छाजेड़ को 'अनुमोदना पत्र' भेंट किया। संस्था ने महेंद्र छाजेड़ को नगर के "प्रथम देहदान" का ऐतिहासिक कार्य करने हेतु "नगर रत्न" की उपाधि से अलंकृत किया।
  
  इस अवसर पर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष निलेश सोनी ने कहा कि महेंद्रजी ने संथारापूर्वक देह त्याग कर न केवल मानवता की सेवा की, बल्कि समाज को एक नई प्रेरणा दी है। उनके इस निस्वार्थ त्याग से पूरा राजगढ़ गौरवान्वित है।

अनेक संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि

  इस अनुमोदन कार्यक्रम में सराफा एसोसिएशन, हिंदू उत्सव समिति और दत्तीगाँव सोशल ग्रुप ने परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में अनुमोदन पत्र का वाचन समाजसेवी महेश तांतेड़ ने किया।

उपस्थित जनसमूह

  मांगीलाल पावेचा (ट्रस्टी, मोहनखेड़ा तीर्थ), दिलीप फ़रबदा (अमझेरा तीर्थ ट्रस्टी व सराफा सचिव),सोनिक सराफ (महावीर सेवा संस्था),गौरव जैन (अध्यक्ष,ऋषभदेव मोतीलाल पेड़ी ट्रस्ट), चिन्टू जैन (ट्रस्टी व पार्षद),मोतीसिंह राठौड़ (महाराणा प्रताप राजपूत समाज),सुरेंद्र सोनी (अध्यक्ष, सोनी समाज),शंभु परवार (सीरवी समाज समाजसेवी व पार्षद),गौरव दुबे (समाजसेवी, ब्राह्मण समाज),लाला माहेश्वरी (माहेश्वरी समाज),आज़ाद फ़रबदा,निलेश परमार (सेन समाज),अक्षय भण्डारी (पत्रकार),बसंत जैन,विनेश जैन,नवीन पुराणी,अजय श्रीवास्तव,दीपांश जैन,मयंक सोनी,हेमन्त रोकड़िया,साहिल मामा,मनोज सराफ सहित हिंदू उत्सव समिति और दत्तीगाँव सोशल ग्रुप के सदस्य एवं नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।