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भोजशाला मामला: हाई कोर्ट ने माना 'वाग्देवी मंदिर',परिसर का प्रबंधन अब एएसआई के पास







 




  धार/इंदौर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक अत्यंत प्रभावशाली और स्पष्ट निर्णय सुनाया है। अदालत ने अपने फैसले में इस विवादित परिसर को कानूनी और ऐतिहासिक रूप से 'देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर' स्वीकार किया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राजा भोज द्वारा निर्मित यह स्थल मूलतः एक प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र था, जिसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पहचाना गया है।
  अदालत ने इस परिसर की व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसका संपूर्ण प्रशासनिक और प्रबंधकीय नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपने का आदेश दिया है। अब परिसर के भीतर होने वाली तमाम धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना का नियमन एएसआई द्वारा ही सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया है कि वह लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए आवश्यक राजनयिक कदम उठाए। फैसले में सामाजिक सद्भाव का ध्यान रखते हुए यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि मुस्लिम समुदाय आवेदन करता है, तो राज्य सरकार जिले में किसी अन्य स्थान पर मस्जिद के लिए भूमि आवंटन की संभावनाओं पर विचार कर सकती है। यह पूरा निर्णय पुरातात्विक विज्ञान और ऐतिहासिक तथ्यों की मजबूती पर टिका है।


राजगढ़ में कल धूमधाम से मनेगी शनि जयंती,महाअभिषेक और भंडारे का आयोजन










  राजगढ़ (धार)। न्याय के देवता सूर्यपुत्र श्री शनि देव महाराज का जन्मोत्सव कल, शनिवार 16 मई 2026 को राजगढ़ नगर के वाई क्र. 9 में स्थित प्राचीन शनि मंदिर में बड़े ही हर्षोल्लास और भक्ति-भाव के साथ मनाया जाएगा। शनि शीतला माता मंदिर समिति एवं समस्त धर्मप्रेमी जनता द्वारा यह आयोजन किया जा रहा है।

  सुबह से लेकर रात तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया है। प्रातः 6:00 बजे प्रभु का महा-अभिषेक एवं ध्वजारोहण होगा, जिसके पश्चात श्री शनि देव जी की आरती की जाएगी। दोपहर 12:00 बजे जन्मोत्सव की महाआरती का आयोजन रखा गया है।

  इस पावन अवसर पर दोपहर 4:00 बजे से विशाल महाप्रसादी (भंडारा) का प्रबंध किया गया है। रात्रि 8:00 बजे संध्याकालीन महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।

  मंदिर समिति ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से सविनय निवेदन किया है कि वे इस पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारकर धर्म लाभ लें और भगवान शनि देव जी की कृपा प्राप्त करें।

  बता दें कि यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और मान्यता प्राप्त है। यहाँ स्थित शनि देव का विग्रह स्वयंभू माना जाता है, जो एक विशाल बरगद की जड़ों से प्रकट हुआ था।

यह भी पढ़ें: बरगद की कोख से निकले न्याय के देवता: राजगढ़ के प्राचीन शनि विग्रह की अनकही गाथा

बरगद की कोख से निकले न्याय के देवता: राजगढ़ के उस प्राचीन शनि विग्रह की अनकही गाथा

Rajgarh Ancient Shani Temple Swayambhu Idol





 

लेखक: अक्षय भंडारी (संपादक,टाइम्स ऑफ मालवा)

  Rajgarh (Dhar) Madhya Pradesh की ऐतिहासिक धरती पर कई धार्मिक स्थल अपनी भव्यता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन यहाँ का अति प्राचीन शनि मंदिर अपनी एक अलौकिक और रहस्यमयी उत्पत्ति के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। एक पत्रकार और लेखक के नजरिए से जब हम इस स्थान की गहराई में उतरते हैं,तो समझ आता है कि यह मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं,बल्कि सदियों पुरानी उस लोक-आस्था का जीवित प्रमाण है जहाँ न्याय के देवता ने स्वयं अपनी उपस्थिति के लिए इस स्थान को चुना था।

पाषाण विग्रह का वो अलौकिक प्राकट्य  (Swayambhu Miracle)

  इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वतः प्राकट्य है। क्षेत्रीय मान्यताओं और बुजुर्गों की स्मृतियों में यह बात गहराई तक पैठी है कि यहाँ स्थित शनि देव की प्रतिमा को किसी शिल्पी की छेनी ने नहीं तराशा है। कहा जाता है कि सदियों पहले, इसी स्थान पर स्थित एक विशालकाय वटवृक्ष (बरगद) की जड़ों के बीच से यह विग्रह स्वयं प्रकट हुआ था। बरगद की जड़ों को चीरकर पाषाण रूप में शनि देव का प्रकट होना,आध्यात्मिक दृष्टि से एक दुर्लभ घटना मानी जाती है।











प्रकृति और दिव्यता का अटूट संगम  (Nature & Divinity)

  मंदिर का स्वरूप समय के साथ आधुनिक हुआ है, लेकिन वह प्राचीन वटवृक्ष आज भी अपनी जड़ों से इस स्थान की पौराणिकता की गवाही दे रहा है। प्रकृति और ईश्वर का यह मिलन दर्शाता है कि राजगढ़ की इस पावन भूमि में कितनी सकारात्मक ऊर्जा समाहित है। बरगद की शीतल छाँव और काले पाषाण विग्रह का सानिध्य भक्तों को एक ऐसी शांति प्रदान करता है, जो आधुनिक शोर-शराबे के बीच कहीं लुप्त हो गई है। यहाँ शनि देव किसी भय के रूप में नहीं, बल्कि एक न्यायप्रिय और सौम्य रक्षक के रूप में विराजमान हैं।

आध्यात्मिक चेतना का केंद्र  (Spiritual Significance)

  राजगढ़ के इस धाम के बारे में यह विश्वास अटल है कि वटवृक्ष की जड़ों से उत्पन्न होने के कारण इस विग्रह में एक विशेष जागृति और शक्ति है। यह मंदिर हमारी उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है, जहाँ ईश्वर को मंदिरों के साथ-साथ प्रकृति के कण-कण में खोजा गया है।
  आज भी जब कोई श्रद्धालु इस विग्रह के सम्मुख शीश नवाता है, तो उसे उस आदि-शक्ति का आभास होता है जिसने बरगद की जड़ों के बीच से इस धरा पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। यह स्थान राजगढ़ की धार्मिक विरासत का वो स्तंभ है, जो आने वाली पीढ़ियों को हमारी जड़ों और विश्वास से जोड़े रखता है।

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जयपुर : निःशुल्क सेवाओं से सनातन धर्म को नई दिशा दे रहे डॉ.जनार्दनाचार्य,पढ़िए उनकी अनोखी यात्रा






 



  जयपुर। सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसा नाम है जो न केवल अपनी विद्वत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि अपनी निःशुल्क सेवाओं के कारण भी चर्चा में है। यह नाम है - डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास। वर्तमान में वे राजस्थान के जयपुर से सक्रिय हैं, जबकि इनका पैतृक स्थान बिसाऊ (Bissau) है।

  हाल ही में डॉ. जनार्दनाचार्य ने अपने यूट्यूब चैनल को और अधिक सक्रिय किया है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रवचनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया और आध्यात्मिक सर्किलों में उनकी चर्चा इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। खास बात यह है कि ये सब कुछ बिना किसी शुल्क के किया जा रहा है।

शिक्षा और उपलब्धियाँ: कैसे बने 'डॉक्टर' और 'साहित्य सेवा रत्न'

 ताजा जानकारी के मुताबिक, डॉ. जनार्दनाचार्य ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजघाट परिसर से प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और योग में ग्रेजुएशन के साथ NDDY डिप्लोमा प्राप्त किया है। यह कोर्स साढ़े तीन साल का था।

 इसके अलावा, उनके गीता-पुराण के गहन ज्ञान को देखते हुए अमेरिका की हॉकिन्स यूनिवर्सिटी (टेक्सास) और नोएडा की सेंट यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। दिल्ली में उन्हें 'साहित्य सेवा रत्न' का खिताब भी मिल चुका है।

क्या है उनका मिशन? (गुरुकुल और गौशाला)

 पिछले कुछ वर्षों में डॉ. जनार्दनाचार्य ने एक साफ उद्देश्य के साथ काम करना शुरू किया है - प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को फिर से जीवित करना।

 इसी के तहत वे एक गुरुकुल और एक गौशाला का संचालन कर रहे हैं। यहाँ कोई फीस नहीं ली जाती। यह सेवा पूरी तरह निस्वार्थ भाव से चल रही है।

कैसे जुड़ते हैं लोग? (प्रवचन और कथाएँ)

 डॉ. जनार्दनाचार्य लोगों को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के लिए अलग-अलग पौराणिक कथाओं का सहारा लेते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

- श्रीमद्भागवत
- शिव पुराण
- श्रीदेवी भागवत
- गणेश पुराण

 इनके अलावा, ये गोकथा, श्री हरिवंश पुराण, नानी बाई रो मायरो, भक्तमाल, हनुमत कथा और नियमित गीता क्लास भी लगाते हैं।

निःशुल्क सेवाओं की लिस्ट

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी सभी सेवाएँ निःशुल्क हैं।

- ज्योतिष मार्गदर्शन (Astrology Guidance)
- समस्त वैदिक विधि-विधान (Vedic Rituals)
- गीता प्रवचन
- सुंदरकांड और रामायण गान

 यानी अगर किसी को भी धार्मिक या आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहिए, तो वे बिना किसी शुल्क के डॉ. जनार्दनाचार्य से संपर्क कर सकते हैं।

परिवार: विद्या और संस्कारों का संगम

 डॉ. जनार्दनाचार्य के परिवार की बात करें तो उनके पिता पं. विश्वनाथ बालासरिया एक जाने-माने संगीतज्ञ और कथा वाचक हैं। माता श्रीमती विमला देवी के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा।

 उनकी पत्नी श्रीमती रक्षा देवी खुद एक विद्वान हैं। उन्होंने हिंदी में MA, संस्कृत में शास्त्री, आचार्य और शिक्षा शास्त्री की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उनके बच्चे मेडिकल और आर्ट्स के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

डिजिटल उपस्थिति: कैसे करें संपर्क?

 डॉ. जनार्दनाचार्य सिर्फ ऑफलाइन ही नहीं,बल्कि ऑनलाइन भी सक्रिय हैं। उनका यूट्यूब चैनल 'Sanatan Seva Janardan Acharya' है, जहाँ वे नियमित रूप से प्रवचन अपलोड करते हैं।

अन्य सोशल मीडिया लिंक:


सवाल-जवाब (People Also Ask)

सवाल: क्या डॉ. जनार्दनाचार्य की सेवाएँ सच में मुफ्त हैं?

जवाब: हाँ, उनकी सभी आध्यात्मिक सेवाएँ, ज्योतिष मार्गदर्शन और वैदिक अनुष्ठान पूरी तरह निःशुल्क हैं।

सवाल: वे कहाँ रहते हैं?

जवाब: वर्तमान में जयपुर, राजस्थान में रहते हैं।

सवाल: उन्हें डॉक्टरेट किसने दी?

जवाब: हॉकिन्स यूनिवर्सिटी (टेक्सास, USA) और सेंट यूनिवर्सिटी (नोएडा) ने मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया है।

सवाल: उनका मुख्य उद्देश्य क्या है?

जवाब: प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और सनातन संस्कृति को गुरुकुल और गौशाला के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना।

  गौरतलब है कि हाल ही में डॉ. जनार्दनाचार्य ने अपने यूट्यूब चैनल को और अधिक सक्रिय किया है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रवचनों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सनातन धर्म के इस स्तंभ का प्रभाव अब डिजिटल माध्यमों से और भी तेजी से फैल रहा है।

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राजगढ़: एटम इंटरनेशनल स्कूल का 100% रिजल्ट,प्रिंसी माहेश्वरी ने 12वीं में किया टॉप

Princy Maheshwari Atom International School





 

  राजगढ़ (Dhar News) : मध्य प्रदेश के राजगढ़ (सरदारपुर) स्थित एटम इंटरनेशनल स्कूल (Atom International School) ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा परिणामों में शानदार प्रदर्शन किया है। स्कूल के पहले ही बैच ने 100% सफलता हासिल कर क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता का परिचय दिया है।

प्रिंसी माहेश्वरी ने हासिल किए 94% अंक

  इस शैक्षणिक सत्र में कॉमर्स संकाय (Commerce Stream) की छात्रा प्रिंसी माहेश्वरी (Princy Maheshwari) ने 94% अंक प्राप्त कर स्कूल और अपने परिवार का नाम रोशन किया है। प्रिंसी की इस सफलता पर नगर के गणमान्य नागरिकों ने उन्हें बधाई दी है। स्कूल के अन्य 7-8 विद्यार्थियों ने भी 80% से अधिक अंक लाकर अपनी प्रतिभा साबित की है।

10वीं और 12वीं दोनों में शत-प्रतिशत परिणाम
  
   एटम इंटरनेशनल स्कूल के लिए यह गौरव का क्षण है क्योंकि कक्षा 12वीं के साथ-साथ कक्षा 10वीं का परिणाम भी 100% रहा है। कॉमर्स हेड गौरव नखेत्रा सर और स्कूल के सभी शिक्षकों ने बच्चों को उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी हैं।

  शिक्षकों का कहना है कि सही मार्गदर्शन और बच्चों की कड़ी मेहनत ने ही इस बेहतरीन परिणाम को मुमकिन बनाया है। राजगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए यह स्कूल एक प्रमुख शिक्षा केंद्र के रूप में उभर रहा है।

राजगढ़ में 29 मई को “एक शाम श्री सोनाणा खेतलाजी के नाम” भव्य भजन संध्या का आयोजन







 




  राजगढ़ (धार)। श्री सोनाणा खेतलाजी के परम उपासक भक्त शिरोमणि शांतिलाल लादाजी भंडारी के दिव्य आशीर्वाद एवं राजेंद्र शांतिलाल भंडारी की प्रेरणा से राजगढ़ नगर में प्रथम वर्ष “एक शाम श्री सोनाणा खेतलाजी के नाम” भव्य भजन संध्या का आयोजन 29 मई को किया जाएगा। आयोजन में खेतलाजी भक्त हिमेश नाहटा का विशेष सानिध्य रहेगा।
   कार्यक्रम की तैयारियों के तहत बुधवार को मोहनखेड़ा तीर्थ में राजगढ़ श्रीसंघ एवं प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में पत्रिका लेखन का आयोजन किया गया।
आयोजन समिति के अनुसार 29 मई, शुक्रवार को दोपहर 2 बजे पांचधाम एक मुकाम माताजी मंदिर से भव्य वरघोड़ा निकाला जाएगा। इसमें गजानंदजी, कुलदेवी माताजी एवं श्री सोनाणा खेतलाजी की रजत प्रतिमाओं को दो रथों में विराजित कर नगर भ्रमण कराया जाएगा। शोभायात्रा में बैंड-बाजे, हाथी-घोड़े भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। यह वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मेला मैदान स्थित शिव वाटिका परिसर पहुंचेगा, जहां शाम 4 बजे गजाननजी, माताजी एवं खेतलाजी की स्थापना की जाएगी।
  शाम 7 बजे से भव्य भजन संध्या प्रारंभ होगी। कार्यक्रम में राजस्थान की सुप्रसिद्ध गायिका नीता नायक, दीपक राठौड़, बाल कलाकार कृशिव बागरेचा, जोड़ी नंबर वन धर्मेंद्र सिंह एवं हेमा सिंह अपनी प्रस्तुतियां देंगे। वहीं अशोक बंजारा द्वारा 1008 दीपकों से महाआरती प्रस्तुत की जाएगी। मंच संचालन प्रमोद परिहार करेंगे।
  भजन संध्या का मुख्य आकर्षण लक्की ड्रॉ रहेगा, जिसमें सोने-चांदी के सिक्कों सहित अन्य आकर्षक उपहार वितरित किए जाएंगे।
  श्री सोनाणा खेतलाजी भक्त मंडल एवं श्री खेतल शांति भक्त परिवार, राजगढ़ ने सभी श्रद्धालुओं, परिवारजनों और इष्ट मित्रों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।

प्रिटी पिक्सी को लेकर ग्राहकों में बढ़ी चिंता,ऑनलाइन खरीदारी से पहले रहें सतर्क





  

  प्रिटी पिक्सी ऑनलाइन फैशन दुनिया में क्यूट मिनी ड्रेसेस, क्यूट शॉर्ट ड्रेसेस, फ्लोरल मिनी ड्रेस और पार्टी वियर मिनी ड्रेसेस जैसे ट्रेंडी कपड़ों के लिए तेजी से चर्चा में आया है। कंपनी खुद को युवाओं के लिए एक मॉडर्न फैशन ब्रांड बताती है और सोशल मीडिया के जरिए लोगों को आकर्षित करती है।

  कई ग्राहक मिनी ड्रेस फॉर वुमेन, मिनी ड्रेस फॉर गर्ल, कैजुअल मिनी ड्रेसेस और शॉर्ट मिनी ड्रेसेस जैसे कपड़े खरीदने के लिए वेबसाइट पर जाते हैं। आकर्षक तस्वीरों और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की वजह से बड़ी संख्या में लोग इन फैशन प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

  हालांकि, ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले कई ग्राहकों का कहना है कि किसी भी फैशन वेबसाइट से खरीदारी करने से पहले पूरी जानकारी जांचना बेहद जरूरी है। फ्लोरल प्रिंट ड्रेस, फ्लोरल बस्टियर ड्रेस और खूबसूरत शॉर्ट पार्टी ड्रेसेस जैसे प्रोडक्ट्स खरीदने से पहले ग्राहकों को रिव्यू और दूसरे खरीदारों का अनुभव जरूर पढ़ना चाहिए।

  कुछ लोगों का दावा है कि ऑनलाइन दिखाई गई तस्वीरें और असली प्रोडक्ट में अंतर हो सकता है। इसी वजह से ग्राहकों को पेमेंट करने से पहले रिटर्न पॉलिसी, रिफंड प्रक्रिया और कस्टमर सपोर्ट की जानकारी ध्यान से देखनी चाहिए।

 प्रिटी पिक्सी खुद को भारत में निर्मित फैशन ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करता है और आधुनिक डिजाइन के साथ भारतीय कारीगरी को बढ़ावा देने की बात करता है। कंपनी मिनी विंटर ड्रेसेस और फ्लोरल पैंट्स एंड टॉप सेट जैसे प्रोडक्ट्स का भी काफी प्रचार करती है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल विज्ञापन देखकर किसी भी वेबसाइट पर भरोसा करना सही नहीं होता।

ऑनलाइन खरीदारी के दौरान सुरक्षित भुगतान माध्यम का उपयोग करना और वेबसाइट की विश्वसनीयता जांचना बेहद जरूरी माना जाता है। चाहे आप शॉर्ट गॉर्जियस ड्रेसेस खरीद रहे हों या पार्टी वियर मिनी ड्रेसेस, हर ग्राहक को सोच समझकर फैसला लेना चाहिए।

 आज के डिजिटल दौर में समझदारी से खरीदारी करना ही सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है ताकि फैशन के साथ किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

 

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