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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भीलवाड़ा में "Interactive Session on Investment Opportunities in Madhya Pradesh" में सहभागिता की




 



भारत के दिल से जुड़िए, मध्यप्रदेश के साथ आगे बढ़िए : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मध्यप्रदेश भी बढ़ते हुए राजस्थान के साथ करेगा अपनी भागीदारी


मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए निवेशकों को किया आमंत्रित

 

   भीलवाड़ा/राजस्थान । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज भीलवाड़ा, राजस्थान में आयोजित "Interactive Session on Investment Opportunities in Madhya Pradesh" में सहभागिता की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश संभावनाओं, उद्योग-अनुकूल नीतियों एवं सुगम औद्योगिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।






  मध्यप्रदेश सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी बनकर उभरा

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज देश के सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में अग्रणी बनकर उभरा है। मध्यप्रदेश में निवेश हर मायने में फायदे का सौदा है। देश के दिल से जुड़िए, विकास और अवसरों के केंद्र से जुड़िए। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के मध्य में स्थित होने से मध्यप्रदेश व्यापार, उद्योग-धंधों की स्थापना और उत्पादों के निर्यात के लिए एक रणनीतिक केंद्र बनता जा रहा है। प्राकृतिक संसाधन, उद्योग-अनुकूल नीतियां, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शासन-प्रशासन ये सभी कारक निवेशकों के लिए एक आदर्श वातावरण तैयार करते हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को “अनंत संभावनाओं का अनुपम केंद्र” बताते हुए कहा कि वीरों की धरती राजस्थान के सभी निवेशकों का हीरों की धरती मध्यप्रदेश में स्वागत है, अभिनंदन है। उन्होंने कहा कि सदियों से हमारी साझा संस्कृति, व्यापार-व्यवसाय और साझा भविष्य का एक अटूट रिश्ता रहा है। हमारा आपसी संवाद नई संभावनाओं के विकास-विस्तार और देश की औद्योगिक क्षमता को नई दिशा देने का एक साझा मंच है। भीलवाड़ा की समृद्ध वस्त्र विरासत से जुड़कर मध्यप्रदेश भी अनेकानेक संभावनाओं को तलाश कर बढ़ते हुए राजस्थान के साथ अपनी दीर्घकालिक भागीदारी करना चाहता है। हम सब मिलकर अपनी वणिक युक्ति, बुद्धि और क्षमता से इस क्षेत्र के औद्योगिक विकास का नया अध्याय लिखेंगे।

 मध्यप्रदेश भी बढ़ते हुए राजस्थान के साथ करेगा अपनी भागीदारी

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि लंबे समय से मध्यप्रदेश और राजस्थान का सहोदर जैसा रिश्ता रहा है। दोनों राज्यों में सदैव व्यापार की अनुकूलता रही है। पद्म विभूषण से राजस्थान के सम्मानित स्व. श्री घनश्याम दास बिड़ला ने उज्जैन जिले के नागदा में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज लिमिटेड की स्थापना की थी। राजस्थान के मारवाड़ और मेवाड़ के कारोबारियों में व्यापार-व्यवसाय की कुशलता अद्भुत है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार उद्योग प्रोत्साहन के लिए संकल्पित है। हमारे उद्योगपति जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराते हैं। बदलते दौर में राज्यों के परस्पर संबंध सौहार्द्रपूर्ण हुए हैं। हम सभी को उद्योग-व्यापार के विकास और विस्तार के लिए अनुकूल वातावरण मिला है। मध्यप्रदेश सरकार ने राजस्थान सरकार के साथ सालों से लंबित पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना पर समझौता कर दोनों राज्यों के नागरिकों को सुगम जल उपलब्धता की एक नई सौगात दी है। दुनिया के देश चुनौतियों का सामना करते हुए हम आगे बढ़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। अगर कोई देश प्रतिबंध लगाएगा, तो हम दूसरा रास्ता निकालेंगे। यूरोप के साथ टैक्सटाइल ट्रेड एण्ड बिजनेस को आगे बढ़ाने की अच्छी संभावनाएं हैं।

बड़े निवेश प्रस्तावों पर देंगे बड़ी रियायतें

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उन्होंने राज्य के उद्योग विभाग की कमान स्वयं ले ली हैं, जिससे प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ाने में कोई कठिनाई न आए और सभी मुद्दे सरलता के साथ समय रहते हल हो जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने औद्योगिक नीतियों को सरल बनाया है। इससे मध्यप्रदेश में निवेश और उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है। राज्य सरकार निवेशकों को विशेष प्रोत्साहन भी प्रदान कर रही है। हमारी सरकार बड़े निवेश विभिन्न प्रस्तावों पर रियायतें भी दे रही है। हम छोटे-बड़े सभी निवेशकों को अपनी नीतियों से लाभान्वित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियाँ लागू की गई हैं। विस्तृत लैंड बैंक, भरपूर जल उपलब्धता, कुशल मानव संसाधन, उत्कृष्ट लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और पारदर्शी प्रशासन निवेश के लिए सर्वोत्तम माहौल प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश आज ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा अर्थात ग्रीन एनर्जी प्रोड्क्शन के मामले में भी हमारा प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का विश्वसनीय विकास साझेदार बन रहा है और हमारा मध्यप्रदेश भी इस राष्ट्रीय प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आईएसबी रिपोर्ट के मुताबिक पारिवारिक व्यवसायों को भविष्य में अपने विकास को बनाए रखने के लिए इनोवेशन करना है बहुत जरूरी





 


  एराइज़ फ्रेमवर्क ने दीर्घकालिक मूल्य निर्माण के लिए रोडमैप पेश किया

  इंदौर : भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तीन‑चौथाई से अधिक योगदान पारिवारिक व्यवसायों का है और 2047 तक देश की वृद्धि में उनकी भूमिका और भी बड़ी होने की उम्मीद है। इंडियन स्कूल ऑफ बिज़नेस (आईएसबी) के नए अध्ययन में सामने आया है कि मध्यम आकार के कई पारिवारिक उद्यमों को अभी-भी भारत में हो रही आर्थिक वृद्धि का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि वो अल्पकालिक लाभ पर अपना ध्यान केंद्रित करते हैं, जिसकी वजह से वो टेक्नोलॉजी और इकोसिस्टम के माध्यम से भविष्य के लिए निवेश नहीं कर पाते, जो ग्लोबल कंपनियों को मिलने वाली एक महत्वपूर्ण बढ़त होती है।
  आईएसबी की नई रिपोर्ट, ‘‘बिज़नेस इनोवेशन- एन इंपरेटिव फॉर इंडियन फैमिली-लेड बिज़नेस’ (बिज़नेस इनोवेशन- भारत में पारिवारिक उद्यमों के लिए जरूरी) में सामने आया है कि पारिवारिक व्यवसाय स्थानीय और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद होते हैं, लेकिन फिर भी इनमें से कई व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ने वाले विकास मॉडल्स पर आश्रित हैं, और उच्च वृद्धि करने वाले सेक्टर्स का पूरा लाभ नहीं ले पाते हैं। यह कमी ज्यादातर मिड-साइज़ वाले उद्यमों में देखने को मिलती है, जो मजबूत ऑपरेशनल आधार पर बने होते हैं, लेकिन उनके पास बाजार का निर्माण करने, गैर-भौतिक संपत्तियों में निवेश करने और अपने मुख्य व्यवसाय के साथ भविष्य के रेवेन्यू मॉडल का विकास करने की दूरदर्शिता और महत्वाकांक्षा की कमी होती है।
   यह रिपोर्ट आईएसबी के सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन और थॉमस श्मिडहेनी सेंटर फॉर फैमिली एंटरप्राइज़ द्वारा तैयार की गई है, जिसमें ऑटो, रिटेल, फार्मा, हैल्थकेयर, आईटी, कंस्ट्रक्शन आदि सेक्टर्स में मुख्य भारतीय पारिवारिक व्यवसायों के इनोवेशन एवं विकास के पैटर्न का आकलन किया है। इस रिपोर्ट में सामने आया कि संचालन के पारंपरिक तरीकों के बजाए प्रोडक्ट इनोवेशन, सप्लाई चेन इंटीग्रेशन और कस्टमर इंगेज़मेंट में निवेश से बेहतर दीर्घकालिक मूल्य निर्माण एवं विकास संभव होता है तथा मजबूती मिलती है।  
अध्ययन में यह भी सामने आया कि पारिवारिक उद्यमों को सबसे बड़ा जोखिम बाजार के उतार-चढ़ाव से नहीं, बल्कि रणनीति की गतिहीनता से हो रहा है। डिजिटल परिवर्तन, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और विकसित होते हुए ग्राहक बाजार के वातावरण में यदि भारतीय व्यवसायों द्वारा खासकर ग्लोबल साउथ के उच्च वृद्धि वाले क्षेत्र में विकास के इंटीग्रेटेड मॉडल और टेक्नोलॉजी, जिसमें एआई भी शामिल है, एवं पार्टनरशिप्स में साहसी निवेश नहीं किया जाएगा, तो इससे उनका दायरा और वैश्विक विस्तार बाधित होगा।
  इन चुनौतियों को हल करने के लिए इस रिपोर्ट में भविष्य के विकास के रोडमैप के रूप में एराइज़ फ्रेमवर्क- एंबिशन, रिस्क-टेकिंग, इनोवेशन, स्पीड एवं स्केल और इकोसिस्टम थिंकिंग का सुझाव दिया गया है। इसमें साहसी लक्ष्यों, समय पर डिसीज़न-मेकिंग, बिज़नेस मॉडल इनोवेशन और महत्वपूर्ण साझेदारियों का महत्व प्रदर्शित किया गया है, ताकि पारिवारिक व्यवसाय विस्तार कर सकें, पूरे विश्व में प्रतिस्पर्धा करने के काबिल बनें और दीर्घकालिक मूल्य का निर्माण कर सकें। 
   प्रोफेसर राजेंद्र श्रीवास्तव, नोवार्टिस प्रोफेसर ऑफ मार्केटिंग स्ट्रेटेजी एंड इनोवेशन, आईएसबी और एग्ज़िक्यूटिव डायरेक्टर, आईएसबी सेंटर फॉर बिज़नेस इनोवेशन, ने कहा, “भारत में पारिवारिक व्यवसाय एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ उन्हें प्रबंधन और विरासत को बनाए रखने के साथ फुर्ती और इनोवेशन की जरूरत भी है। इसलिए अब ईबीआईटीडीए पर केंद्रित रहने से आगे बढ़ना होगा। यह समय टेक्नोलॉजी, डिज़ाइन थिंकिंग, प्लेटफॉर्म बिज़नेस मॉडल, बाजार एवं ब्रांड के विकास के माध्यम से भविष्य की वृद्धि में तेजी से निवेश करने का है। विभिन्न सेक्टर्स का उदाहरण लेकर इस रिपोर्ट में उन कंपनियों के बारे में बताया गया है, जिन्होंने इनोवेशन के माध्यम से अपने व्यवसाय का विस्तार किया और भारत के गतिशील बाजार में विकास के अवसरों का लाभ उठाया।“
  तेजी से बदलते और प्रतिस्पर्धी परिवेश में पारिवारिक स्वामित्व के बिज़नेस की अद्वितीय चुनौतियों को पहचानते हुए आईएसबी, जिसे फाइनेंशियल टाईम्स द्वारा ग्लोबल बिज़नेस स्कूलों में लगातार 12वें स्थान पर रखा गया है, ने पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट फॉर फैमिली बिज़नेस (पीजीपी एमफैब) जैसे प्रोग्राम के माध्यम से एक दशक से अधिक समय से व्यावसायिक परिवारों के साथ साझेदारी की है। यह पारिवारिक उद्यमों की विरासत को बनाए रखते हुए उन्हें प्रोफेशनल बनाने वाला प्रोग्राम है, जो विश्वस्तर की फैकल्टी, अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोज़र, उद्योग के साथ बातचीत और हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंशल लर्निंग द्वारा अगली पीढ़ी के लीडर्स को आधुनिक मैनेजमेंट टूल्स और लर्निंग का समृद्ध अनुभव प्रदान करके उन्हें विकास के लक्ष्य प्राप्त करने में समर्थ बनाता है।

सातवें "TRT विश्व नागरिक पुरस्कार" के विजेताओं की घोषणा की गई

Istanbul, Turkey
2017 में TRT की "सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करना" की दृष्टि के साथ शुरू किए गए और इसकी सबसे अहम सामाजिक ज़िम्मेदारी से जुड़े प्रोजेक्ट्स में से एक माने जाने वाले TRT विश्व नागरिक पुरस्कार इस साल सातवीं बार प्रदान किए गए। ये पुरस्कार दुनिया भर के अलग-अलग देशों के उन लोगों को दिए जाते हैं जो अपने-अपने क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर सामाजिक लाभ बढ़ाते हैं, उनकी कहानियों को दुनिया के साथ शेयर करने में योगदान देते हैं और सकारात्मक बदलाव प्रमोट करने को बढ़ावा देते हैं।


अब तक, 17 अलग-अलग देशों के 31 लोगों को TRT विश्व नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इस समारोह का सातवां एडिशन 13 फ़रवरी को आयोजित किया गया, जिसमें Istanbul में राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan की पत्नी Emine Erdogan ने भी भाग लिया।

राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan की पत्नी Emine Erdogan ने कहा कि TRT विश्व नागरिक पुरस्कार एक बेहद कीमती प्रोजेक्ट है

राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan की पत्नी Emine Erdogan, जो TRT विश्व नागरिक पुरस्कारों में मुख्य अतिथि थीं और जिन्होंने उद्घाटन भाषण दिया, उन्होंने कहा कि 2017 से TRT विश्व नागरिक पुरस्कारों एक बेहद कीमती प्रोजेक्ट रहा है जो वैश्विक मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करता है और जागरूकता बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि यह पहल उन दिलों को एक साथ जोड़ता है जो दुनिया में जहाँ कहीं भी अन्याय होता है उसके खिलाफ़ खड़े होते हैं, मानवीय गरिमा की रक्षा करते हैं और जीवन को और ज़्यादा सुंदर बनाने की कोशिश करते हैं, और उन्होंने ज़ोर दिया कि यह पहल TRT की ब्रॉडकास्टिंग पॉलिसी का एक मज़बूत प्रतिबिंब भी है, जो सच्चाई पर फ़ोकस करना कभी बंद नहीं करती और सभी परिस्थितियों में सच्चाई के साथ खड़ी रहती है।

 
भाषणों के बाद, Sobacı ने Emine Erdogan को स्मृति चिन्ह के तौर पर एक श्लोक के साथ अंकित डिज़ाइन भेंट की।

संचार प्रमुख Duran ने एक सही और निष्पक्ष बयान के तरीके की अहमियत पर ज़ोर दिया

TRT विश्व नागरिक पुरस्कार समारोह में बोलते हुए, राष्ट्रपति कार्यालय के संचार प्रमुख Burhanettin Duran ने कहा कि दुनिया में एक तरफ़ बहुत ज़्यादा समृद्धि है, वहीं दूसरी तरफ़ गंभीर मानवीय समस्याएं भी मौजूद हैं।

पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग में TRT की भूमिका के लिए धन्यवाद देते हुए, Duran ने कहा कि संचार निदेशालय के तौर पर, वे Türkiye के सम्मानजनक रुख को दुनिया के सामने रखने, अन्याय के खिलाफ़ आवाज़ उठाने और नए नज़रिए पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। एक निष्पक्ष बयान के तरीके की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, Duran ने कहा कि वे इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

 TRT के महानिदेशक Sobacı ने कहा कि TRT, लोगों की कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश करेगा

समारोह का उद्घाटन भाषण देते हुए, TRT के महानिदेशक Mehmet Zahid Sobacı ने कहा कि TRT विश्व नागरिक पुरस्कार एक ऐसा मंच है जहां सकारात्मक विचारों, कार्यों और साहसी लोगों को सम्मानित किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस मंच से मानवता के लिए काम करने वाले कई लोगों को करीबी से पहचाना जा सकता है, और दूसरों को प्रेरित करने में मदद मिलती है।

 
यह कहते हुए कि Türkiye राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan के नेतृत्व में अपने प्रयासों को जारी रखे हुए है, Sobacı ने ज़ोर दिया कि Türkiye के पब्लिक ब्रॉडकास्टर के तौर पर, TRT इस उद्देश्य की दिशा में अपनी पूरी ताकत के साथ काम करता है। Sobacı ने ज़ोर दिया कि TRT परिवार के तौर पर, वे इस दावे को बरकरार रखने वाले लोगों की कहानियों और उनकी आवाज़ को दुनिया तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे।

 
विजेताओं को प्रदान किए गए पुरस्कार 

"वर्ल्ड सिटिज़न ऑफ़ द ईयर" पुरस्कार Yahya Barzaq को दिया गया, जो Gaza में एक नए फ़ोटोग्राफर के तौर पर काम कर रहे थे और Israel युद्ध के दौरान युद्ध फ़ोटोग्राफ़ी की प्रैक्टिस करने लगे ताकि दुनिया को वह सब कुछ बताया जा सके जो हो रहा था, और जिन्होंने 30 सितंबर, 2025 को इज़राइली हमलों में अपनी जान गंवा दी। Barzaq का पुरस्कार उनकी माँ, Yousra Barzaq द्वारा राष्ट्रपति Recep Tayyip Erdogan की पत्नी Emine Erdogan से प्राप्त किया गया।

 "लाइफ़टाइम अचीवमेंट अवार्ड " इतालवी आर्किटेक्ट Raul Pantaleo को दिया गया, जो आर्किटेक्चर को सिर्फ़ सुंदरता बनाने के क्षेत्र के तौर पर नहीं, बल्कि सामाजिक असमानताओं के जवाब में बनाए गए एकजुटता और सुधार के साधन के रूप में देखते हैं।

 
"कम्यूनिकेटर" कैटेगरी में, Ibtihal Aboussaad और Vaniya Agrawal को तकनीकी क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस ऐप्लिकेशन्स की नैतिक ज़िम्मेदारियों के संबंध में स्पष्ट रुख अपनाने के लिए सम्मानित किया गया। "यूथ" पुरस्कार Nigerian पर्यावरण कार्यकर्ता Amara Nwuneli को दिया गया।

 "एजुकेटर" पुरस्कार TRT के महानिदेशक Mehmet Zahid Sobacı द्वारा Rudayna Abdo को दिया गया, जिन्होंने शरणार्थी और वंचित बच्चों के लिए डिजिटल एजुकेशन को सुलभ बनाया है।

 "एक्सेसेबिलिटी" पुरस्कार Joohi Tahir को दिया गया, जिन्होंने मुस्लिम समुदायों में समावेशिता और सुलभता के क्षेत्र में स्थायी बदलाव किया है। 

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Sezin Soylu
sezin.soylu@trt.net.tr
 

राजगढ़ में रंगपंचमी के पावन अवसर पर 8 मार्च को निकलेगी भव्य श्री राधा-कृष्ण फाग यात्रा




 


  राजगढ़ (धार)। नगर में रंगपंचमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में आगामी रविवार, 8 मार्च 2026 को सनातन समाज के सहयोग से भव्य 'श्री राधा-कृष्ण फाग यात्रा' का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन की तैयारियों को लेकर मंगलवार शाम को 'पांच धाम एक मुकाम' माताजी मंदिर पर एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई, जिसमें यात्रा को गरिमामय और अनुशासित बनाने के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। यह भव्य फाग यात्रा प्रातः 10:30 बजे माताजी मंदिर से प्रारंभ होगी।

   राधा-कृष्ण फाग उत्सव समिति ने रंगपंचमी के इस उत्सव की पवित्रता और मर्यादा बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं से विशेष आग्रह किया है कि यात्रा में केवल सूखे रंगों (गुलाल) का ही प्रयोग करें। साथ ही समिति ने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया है कि कोई भी व्यक्ति नशा करके यात्रा में सम्मिलित न हो और यात्रा के दौरान अपशब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें। मंगलवार को आयोजित इस बैठक में पंडित कृष्णा भारद्वाज, राजेश मूणत, मोतीसीह जी राठौर अंतिम ठाकुर, जितेंद्र बगड़िया, प्रवीण तन्हा, दीपक चौधरी, सुजीत ठाकुर,अक्षय भंडारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। समिति ने सभी धर्मप्रेमी जनता से रंगपंचमी के इस पावन अवसर पर आयोजित फाग यात्रा में उत्साह के साथ सम्मिलित होने की अपील की है।

पी.एम.श्री गुमानपुरा में नवाचार की नई उड़ान बच्चो ने लिया रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग और ड्रोन का प्रशिक्षण




 

   गुमानपुरा (सरदारपुर)। पी.एम. श्री शासकीय हायर सेकेंड्री स्कूल गुमानपुरा में अटल टिंकरिंग लैब के अंतर्गत शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में विद्यालय के शिक्षकों के साथ कक्षा 9वीं से 11वीं तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
   प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, ड्रोन असेंबलिंग, कोडिंग, 3D प्रिंटिंग तथा विज्ञान एवं नवाचार से संबंधित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। रोबोकार्ट के प्रशिक्षक हिमांशु पाल (मुंबई) द्वारा बच्चों को विभिन्न उपकरणों के उपयोग एवं प्रोजेक्ट निर्माण की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।
   कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, रचनात्मकता एवं नवाचार की भावना का विकास करना है। विद्यालय के शिक्षक भानालाल चोयल, कैलाश चंद्र वसुनिया , मनीष पाल, गोपाल पडियार, प्रियंका सिसोदिया, रुची पॅवार एवं प्रतिभा गजभिए ने सह भागिता की , अटल ट्रिन्कलिंग लेब के प्रभारी शिक्षक अभिषेक पंवार ने इस पहल को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

 

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 24 जनवरी को मंत्रि-परिषद् बैठक के निर्णयों के संबंध में सदन में दिया गया वक्तव्य
 
  आज की कैबिनेट किसानों को समर्पित की

  देश में पहली बार उड़द एवं सरसों की फसल का उत्पादन बढ़ाने मध्यप्रदेश सरकार ने किया नवाचार

 उड़द के उपार्जन पर एमएसपी के अतिरिक्त किसानों को देंगे 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस

 सरसों का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा, इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन उपार्जन की संभावना

  कल सदन में घोषणा की थी,आज कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी, हम जो कहते हैं,करके दिखाते हैं

 कैबिनेट ने किसान कल्याण वर्ष में किसानों को दी बड़ी सौगात

 मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

   भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार की कटिबद्ध मंशा और इस संबंध में की जा रही कार्यवाहियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आज ही मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि अब यह पांच योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्यप्रदेश के किसानों को मिलेगा। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज की पूरी कैबिनेट हमने प्रदेश के किसानों को ही समर्पित की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है। हम सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज लिए गए सभी निर्णयों की सिलसिलेवार जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय मंत्रि-परिषद् ने लिया है, उनमें निम्न योजनाएं शामिल हैं :

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2008.683 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जा सकेगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2393.97 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक निरंतर मिलता रहेगा। इस योजना से किसान के खेतों में माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं में अगले 5 सालों तक लगातार विस्तार होता रहेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग राज्य सरकार के जरिए निरंतर मिलता रहेगा।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1011.59 करोड़ रुपये की इस योजना की स्वीकृति से प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार 31 मार्च 2031 तक निरंतर होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विकास जरूरी है। यह न केवल मध्यप्रदेश की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी, वरन् मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल सीड योजना

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं, उन्हें निरंतर लाभ प्राप्त होगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि करीब 10500 करोड़ रुपए की बड़ी लागत वाली इन पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले 5 सालों तक निरंतर रखने से किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त उत्पादन से निजात पाने में भी ये 5 योजनाएं बेहद सहायक सिद्ध होंगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लुप्तप्राय प्रजातियों के 5 गिद्धों को हलाली डेम जल क्षेत्र में किया मुक्त





 




पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री डॉ यादव

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से निरंतर बढ़ रही गिद्ध संख्या
  

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्ध को प्राकृतिक आवास में मुक्त किया। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम है। मध्यप्रदेश में सभी प्रांतों से अधिक संख्या में गिद्ध पाए जाते हैं। इनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं। पारस्थितिकी तंत्र में इन पक्षियों का विशेष योगदान है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध पक्षी संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।

  इस अवसर पर बताया गया कि उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देख-रेख में हुई है। यह पहल मध्य भारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाई-वे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।

गिद्ध संरक्षण एवं पक्षी संरक्षण के प्रयास

 पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भू-दृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भू-दृश्य स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी।

मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है

  भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।