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बदनावर: नगर परिषद ने बढ़ाये हरियाली की ओर कदम,250 से ज्यादा नीम के पौधे लगाए, लगातार चलायेगी अभियान,गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में हुआ पौधरोपण....

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 बदनावर(धार)। वसुंधरा हरियाली की और बढ़ते कदम, ऑक्सीजन कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाने वाले पेड़ पौधों को लेकर शासन.प्रशासन हुआ।सजग,मुख्यमंत्री की अंकुर योजना को व्यापक रूप से जमीन पर उतारकर उसे मूर्त रूप देने के लिए नगर परिषद बदनावर के द्वारा 29 जुलाई गुरुवार को नगर के फिल्टर प्लांट से लगी हुई भूमि पर 250 से अधिक नीम के पौधों को रोपण किया गया।

 नगर के गणमान्य नागरिक जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों, कर्मचारियों की उपस्थिति में नीम के पेड़ों को लगाया गया। अंकुर योजना के तहत नगर परिषद द्वारा इस अभियान की शुरुआत की गई।

 इस मौके पर भाजपा जिला महामंत्री मनोज सोमानी सांसद प्रतिनिधि शिवराम रघुवंशी, वरिष्ठ भाजपा नेता  शेखर यादव, पूर्व नं.पा उपाध्यक्ष राजेन्द्रसिंह पंवार,  पंकज ठाकुर, वरिष्ठ पत्रकार पुर्षोत्तम शर्मा,  चित्रंजन राठौर, न.पा ईजि. सारंग पोराणिक,श्रीमति आराधना डामोर, अशोक शर्मा, कांतिलाल शर्मा,  मनमोहन राठौड,  कमलेश पाटीदार, भरत उटवाल एंव निकाय कर्मचारी उपस्थित थे। सभी जनप्रतिनिधियों के द्वारा नीम के पौधारोपण किया गया।

  मुख्य नगर पालिका अधिकारी आशा जितेन्द्र भण्डारी ने बताया की अंकुर योजना के तहत नगर परिषद अब लगातार पौधारोपण करेगी व उनको रख रखाव के साथ ही उनका विधिवत संचालन ,संधारण किया जाएगा। उक्त अभियान अब नगर में लगातार चलाया जाएगा। वर्तमान में फिल्टर प्लांट के समीप एक टेकरी नुमा जगह पर पौधा रोपण किया गया है आज नगर परिषद बदनावर के द्वारा नगर के वरिष्ठजनो व जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में  करीब दो सौ पचास नीम के पौधे रोपे गए है। आम लोगो मे वसुंधरा हरियाली के प्रति जागरूकता हेतु लगातार प्रयास किये जायेंगे।

देव,गुरु और धर्म के प्रति अटुट आस्था वाले को समकित की प्राप्ति संभव : मुनि पीयूषचन्द्रविजय

 


 राजगढ़ (धार) । शास्त्रों में बताया गया है कि बाल्यावस्था में विद्या प्राप्ति जरुरी है व युवावस्था में धनोपार्जन जरुरी है । 18 से 50 वर्ष की उम्र तक व्यक्ति को धन कमा लेना चाहिये । इस सूत्र में संसार में जीने की और धर्म के क्षेत्र में धर्म क्रिया करने की सलाह दी गयी पर वृद्धावस्था में यदि हम धर्म करने का विचार मन में लाते है कि बुढ़ापे में हम धर्म ध्यान कर लेगें पर यह कभी भी संभव नहीं हो पायेगा । वृद्धावस्था हमें देखने मिलेगी या नहीं मिलेगी यह कोई नहीं जानता । विद्या प्राप्ति के लिये गुरुकुल में रहने की व्यवस्था बतायी गयी है । इंसान के जीवन में जो ज्ञान की रोशनी प्रकट कर दे वही गुरु कहलाते है । पांचवें आरे में सुख और दुख दोनों ही देखने को मिलते है पर आने वाले छठे आरे में चारों और भयंकर दुःख ही दुःख देखने को मिलने वाला है । इसलिये प्रभु से हमेशा यह कामना करें की हमारा जन्म पुनः छठे आरे में न हो । भगवती सूत्र में गणधर गौतमस्वामी ने प्रभु महावीर से जन कल्याण हेतु 36 हजार प्रश्न पूछे थे । आपके भाव बदलेगें तभी आपका जीवन संवर पायेगा । उक्त बात श्री राजेन्द्र भवन राजगढ़ में गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कही । आपने कहा कि जो शिष्य गुरु की आज्ञा का पालन नहीं करता है उसके हाल बेहाल हो जाते है । 48 मिनिट की सामायिक का असर जीवन में स्थाई रुप से होना चाहिये । हमेशा गुरु को वंदन भावों के साथ किया जाना चाहिये । शास्त्रों में दान, शील, तप और भाव ये धर्म के चार भेद बताये गये है । आपकी आराधना तब तक शून्य की स्थिति में रहेगी जबतक आपके भावों में धर्म के प्रति श्रद्धा आस्था नहीं है । पूर्ण भावों के साथ ही कि गयी धर्म आराधना ही साधक को सफलता के सौपान पर ले जाती है । जब भी आपके निवास पर आचार्यदेव, गुरुभगवन्त या साध्वीवृंद आहार (गोचरी) हेतु पधारे तब आपकी वाणी में मधुरता, ह्रदय में उत्साह, मन में निर्मलता होना चाहिये साथ ही उनके आने पर उनको पांच कदम आगे जाकर आहार हेतु विनंती करना एवं आहार लेने के पश्चात् पुनः उन्हें गंतव्य तक छोड़ने हेतु जाना चाहिये । साधु दर्शन से पुण्य में अभिवृद्धि होती है । श्रावक को श्रमणोपासक कहा गया है । जिसे देव, गुरु और धर्म के प्रति अटुट आस्था उत्पन्न हो जाये उसे ही समकित की प्राप्ति की संभावना बनती है ।

भावपूर्ण एक सामायिक आत्मा के कल्याण में समर्थ : मुनि पीयूषचन्द्रविजय

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 राजगढ़ (धार) । प्रभु के अंतिम समय का प्रवचन हित शिक्षा के रुप में 16 प्रहर याने 48 घण्टे का हुआ । व्यक्ति के जीवन का अंतिम समय बहुत ही महत्वपूर्ण होता है । उस समय की सोच व्यक्ति की आत्मा का कल्याण भी करवा सकती है । ‘‘अंते मति सो गति‘‘ अंत समय में व्यक्ति के भाव जिस प्रकार के होते है, उसी प्रकार जीव की गति हो जाती है ऐसा शास्त्रों में उल्लेख है । उत्तराध्ययन सूत्र 36 अध्यायों में विभक्त है जिसमें प्रथम अध्याय विनय भाव का है । तीर्थंकर नहीं होने के बावजूद मिथ्या बुद्धि के कारण गौशालक को तीर्थंकर होने का अंहकार हो गया था । अंत में पश्चात के कारण प्रभु की करुणामयी दृष्टि से उसकी आत्मा का कल्याण हुआ और देवगति को प्राप्त हुआ । हमें बाह्य पदार्थो को नहीं जानना है हमें अंतर की बात को समझना है । सम्यक का अर्थ सही ज्ञान को प्राप्त करना होता है । यदि डॉक्टर किसी को सिर्फ 24 घण्टे जीवित रहने का अल्टीमेटम दे दे उस समय व्यक्ति विचलित हो जाता है पर उस समय 48 मिनिट की सामायिक उस जीव को केवलज्ञान तक पहुंचाने में समर्थ होती है । हमारे अंदर कल्याण के भाव नहीं आते है इस कारण हम अभी तक भटक रहे है । प्रभु ने सभी जीवों के प्रति करुणा के भाव रखें । अ- भवी को कभी भी मोक्ष प्राप्त नहीं होता । उक्त बात श्री राजेन्द्र भवन राजगढ़ में 50 दिवसीय प्रवचन माला में गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कही । आपने कहा कि जीवन में कभी भी गुरु की निन्दा नहीं करना चाहिये । मृत्यु को निकट जानकर जीव को पश्चाताप के भाव मन में लाना चाहिये । जिससे जीव अच्छे शुद्ध विचारों के कारण सद्गति को प्राप्त कर मोक्ष की प्राप्ति कर लेता है और आत्मा का कल्याण हो जाता है । तीर्थंकर प्रभु के दर्शन लगभग 9 हाथ की दूरी से करना चाहिये । पूजा के समय व्यक्ति का मुखकोश 8 परत (अष्टपड़) का होना चाहिये । जिन शासन भावना प्रधान शासन है । भावों से व्यक्ति कर्मो को बांध भी लेता है और कर्म गति से मुक्ति भी प्राप्त कर लेता है । यदि धर्म क्रिया में भावशुद्धि नहीं है तो वह धर्मक्रिया निरर्थक साबित होती है । भावपूर्वक की गयी एक सामायिक भी आत्मा के कल्याण में समर्थ सिद्ध होती है ।

भारत के 40वें स्थल को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला,कच्छ का रण, गुजरात में स्थित हड़प्पा काल के स्थल के रूप में विख्यात धोलावीरा को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी.

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  कच्छ का रण, गुजरात में स्थित हड़प्पा कालीन स्थल धोलावीरा से संबंधित भारतीय नामांकन को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया है। भारत ने जनवरी, 2020 में “धोलावीरा ; एक हड़प्पा कालीन नगर से विश्व धरोहर स्थल तक” शीर्षक से अपना नामांकन जमा किया था। यह स्थल 2014 से यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल था। हड़प्पाकालीन नगर धोलावीरा दक्षिण एशिया में संरक्षित प्रमुख नगर जीवन स्थलों में एक है और जिसका इतिहास तीसरी शताब्दी ईसा-पूर्व से लेकर दूसरी शताब्दी ईसा-पूर्व के मध्य तक का है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट किया “इस समाचार से बेहद खुश हूं, धोलावीरा एक प्रमुख जीवन स्थल था और यह हमारे अतीत के साथ जोड़ने वाले सबसे प्रमुख संपर्कों में से हैं। जिन लोगों की इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में रुचि है, उन्हें यह स्थल जरूर देखना चाहिए।”





 केन्द्रीय संस्कृति, पर्यटन और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी.किशन रेड्डी ने घोषणा के बाद इस समाचार को ट्विटर पर साझा किया। इस घोषणा के कुछ दिनों पहले तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट स्थित रुद्रेश्वर मंदिर “रामप्पा मंदिर के नाम से भी जाना जाता है” को भारत के 39वें विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया था।

 श्री जी.किशन रेड्डी ने ट्वीट किया, “देशवासियों के साथ इस समाचार को साझा करके बहुत गर्व का अनुभव कर रहा हूं। धोलावीरा भारत का 40वां स्थल है जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी गई है। भारत के लिए एक और गौरव की बात – हमारा देश विश्व धरोहर स्थल की सूची में सुपर 40 के रूप में शामिल हो गया है।”



 


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 इस सफल नामांकन के साथ भारत के पास कुल मिलाकर 40 विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें 32 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और एक मिश्रित संपत्ति हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री उन देशों का भी उल्लेख किया जिनके पास 40 या इससे अधिक विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें भारत के अलावा अब इटली, स्पेन, जर्मनी, चीन व फ्रांस शामिल हैं। मंत्री ने अपने ट्वीट में इसका भी उल्लेख किया कि कैसे भारत ने 2014 से 10 नए विश्व धरोहर स्थलों को जोड़ा है और यह भारतीय संस्कृति, विरासत और भारतीय जीवन दर्शन को बढ़ावा देने को लेकर प्रधानमंत्री की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है।


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श्री जी किशन रेड्डी ने ट्वीट में लिखा, “आज का दिन भारत के लिए, विशेषकर गुजरात के लोगों के लिए गर्व का दिन है। 2014 के बाद से भारत ने 10 नए विश्व धरोहर स्थल जोड़े हैं जोकि हमारे धरोहर स्थलों की कुल संख्या की एक चौथाई। यह भारतीय संस्कृति, विरासत और भारतीय जीवन दर्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाता है।”




श्री जी किशन रेड्डी ने ट्वीट में लिखा, “आज का दिन भारत के लिए, विशेषकर गुजरात के लोगों के लिए गर्व का दिन है। 2014 के बाद से भारत ने 10 नए विश्व धरोहर स्थल जोड़े हैं जोकि हमारे धरोहर स्थलों की कुल संख्या की एक चौथाई। यह भारतीय संस्कृति, विरासत और भारतीय जीवन दर्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दृढ़ प्रतिबद्धता को दिखाता है।”



प्रभु की वाणी का श्रवण आत्मा के लिये कल्याणकारी : मुनि पीयूषचन्द्रविजय

 

prabhu vani प्रभु की वाणी प्रभु वाल्मीकि वाणी प्रभु जी की वाणी प्रभु  प्रभु परमात्मा की वाणी प्रभु जी की वाणी सुनाओ इ प्रभात मीरा प्रभु की वाणी ललित प्रभु की वाणी सुनो जिनवाणी प्रभु की वाणी प्रभु की सात वाणी

 राजगढ़ (धार) । प्रभु की वाणी को श्रवण करके सभी लोग अपने जीवन में आ रहे अवरोधों को समाप्त कर लेते है । इसी लक्ष्य को लेकर समाजजन इस धर्मवाणी का श्रवण कर रहे है । किसी भी सूत्र को समझने के लिये सबसे पहले उसकी भूमिका को समझना नितांत आवश्यक है । प्रभु ने 16 प्रहर याने 48 घण्टे तक निरन्तर देशना प्रदान की थी । इस बात का उल्लेख प्रभु की नवांगी पूजा में भी आता है । प्रभु के कंठ की केसर पूजा करते समय जो दोहा बोला जाता है उसमें भी 16 प्रहर का उल्लेख आता है । जयवियराय सूत्र में हम प्रभु की अंतर आत्मा से प्रार्थना करते है इस वजह से सभी को हाथ जोड़ने का कहा जाता है । जयवियराय सूत्र में 13 गाथाऐं है । उक्त बात श्री राजेन्द्र भवन राजगढ़ में 50 दिवसीय प्रवचन माला में गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कही । आपने कहा कि प्रभु के 34 अतिशय और वाणी के 35 गुण होते है । समवशरण में हर जीव को उसकी भाषा में प्रभु की वाणी समझ आती है । जैन शासन में दीक्षा दो प्रकार की होती है । द्रव्य दीक्षा और भाव दीक्षा । द्रव्य दीक्षा व्यक्ति वस्त्र, रजोहरण लेकर दीक्षीत रुप में दिखाई देता है वही भाव दीक्षा में व्यक्ति अपने भावों के साथ दीक्षीत होकर अपनी आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है । एक घण्टे का संयम भी आत्मा का कल्याण करता है । संसार में झूठ प्रकट होने पर अपमान सहन करना पड़ता है । जिस प्रकार स्वयं को तीर्थंकर कहलाने वाले गौशालक का झूठ अन्त में प्रकट होने पर उसे अपमानित होना पड़ा । ‘‘विनाशकाले विपरित बुद्धिः‘‘ विनाशकाल के समय इंसान की बुद्धि भी विपरीत हो जाती है । उपकारी का उपकार हमेशा मानना चाहिये । जीवन में हमेशा संवाद होना चाहिये संवाद से कई समस्याओं का निदान सम्भव है । संवाद में यदि विवाद आ जाये तो बनती हुई बात भी बिगड़ जाती है ।

मुनिश्री ने धन्यकुमार चरित्र का विश्लेषण करते हुए कहा कि धन्यकुमार का जीवन चक्र दान पर आधारित रहा है । इस चरित्र को समझने से पहले हमें दान की महिमा को विस्तार से समझना होगा । दान, शील, तप और भाव पर आधारित यह चरित्र व्यक्ति के जीवन में कई सुधार ला सकता है ।

रिमझिम बारिश के बीच प्रजा का हाल जानने निकले बाबा चंद्रमौलेश्वर महादेव....

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 राजगढ़(धार)। श्रावण के प्रथम सोमवार को श्री राम सरकारी मन्दिर से बाबा चंद्रमौलेश्वर महादेव प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण के लिये निकले। जो प्रमुख मार्गों से नगर भ्रमण करते हुए पुनः श्री राम मंदिर पहुँची। बाबा चंद्रमौलेश्वर महादेव का दर्शन के लिये लोग उत्साह के साथ सुख-शांति की कामना करते हुए दिखाई दिये।

झिरनेश्वर महादेव का अभिषेक श्रावण मास के प्रथम सोमवार को किया गया...

 

राजगढ़(धार)। जय भोले मित्र मंडल के द्वारा बाबा झिरनेश्वर महादेव का अभिषेक श्रावण मास के प्रथम सोमवार को किया गया।  सुख शांति समृद्धि की कामना की । पंडित प्रकाश जी शर्मा के सानिध्य में पूजन अर्चन संपन्न हुआ।