जयपुर। सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान के क्षेत्र में एक ऐसा नाम है जो न केवल अपनी विद्वत्ता के लिए जाना जाता है, बल्कि अपनी निःशुल्क सेवाओं के कारण भी चर्चा में है। यह नाम है - डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास। वर्तमान में वे राजस्थान के जयपुर से सक्रिय हैं, जबकि इनका पैतृक स्थान बिसाऊ (Bissau) है।
हाल ही में डॉ. जनार्दनाचार्य ने अपने यूट्यूब चैनल को और अधिक सक्रिय किया है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रवचनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सोशल मीडिया और आध्यात्मिक सर्किलों में उनकी चर्चा इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि उन्होंने प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। खास बात यह है कि ये सब कुछ बिना किसी शुल्क के किया जा रहा है।
शिक्षा और उपलब्धियाँ: कैसे बने 'डॉक्टर' और 'साहित्य सेवा रत्न'
ताजा जानकारी के मुताबिक, डॉ. जनार्दनाचार्य ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के राजघाट परिसर से प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और योग में ग्रेजुएशन के साथ NDDY डिप्लोमा प्राप्त किया है। यह कोर्स साढ़े तीन साल का था।
इसके अलावा, उनके गीता-पुराण के गहन ज्ञान को देखते हुए अमेरिका की हॉकिन्स यूनिवर्सिटी (टेक्सास) और नोएडा की सेंट यूनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। दिल्ली में उन्हें 'साहित्य सेवा रत्न' का खिताब भी मिल चुका है।
क्या है उनका मिशन? (गुरुकुल और गौशाला)
पिछले कुछ वर्षों में डॉ. जनार्दनाचार्य ने एक साफ उद्देश्य के साथ काम करना शुरू किया है - प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति को फिर से जीवित करना।
इसी के तहत वे एक गुरुकुल और एक गौशाला का संचालन कर रहे हैं। यहाँ कोई फीस नहीं ली जाती। यह सेवा पूरी तरह निस्वार्थ भाव से चल रही है।
कैसे जुड़ते हैं लोग? (प्रवचन और कथाएँ)
डॉ. जनार्दनाचार्य लोगों को धर्म और संस्कारों से जोड़ने के लिए अलग-अलग पौराणिक कथाओं का सहारा लेते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- श्रीमद्भागवत
- शिव पुराण
- श्रीदेवी भागवत
- गणेश पुराण
इनके अलावा, ये गोकथा, श्री हरिवंश पुराण, नानी बाई रो मायरो, भक्तमाल, हनुमत कथा और नियमित गीता क्लास भी लगाते हैं।
निःशुल्क सेवाओं की लिस्ट
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इनकी सभी सेवाएँ निःशुल्क हैं।
- ज्योतिष मार्गदर्शन (Astrology Guidance)
- समस्त वैदिक विधि-विधान (Vedic Rituals)
- गीता प्रवचन
- सुंदरकांड और रामायण गान
यानी अगर किसी को भी धार्मिक या आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहिए, तो वे बिना किसी शुल्क के डॉ. जनार्दनाचार्य से संपर्क कर सकते हैं।
परिवार: विद्या और संस्कारों का संगम
डॉ. जनार्दनाचार्य के परिवार की बात करें तो उनके पिता पं. विश्वनाथ बालासरिया एक जाने-माने संगीतज्ञ और कथा वाचक हैं। माता श्रीमती विमला देवी के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को गढ़ा।
उनकी पत्नी श्रीमती रक्षा देवी खुद एक विद्वान हैं। उन्होंने हिंदी में MA, संस्कृत में शास्त्री, आचार्य और शिक्षा शास्त्री की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उनके बच्चे मेडिकल और आर्ट्स के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
डिजिटल उपस्थिति: कैसे करें संपर्क?
डॉ. जनार्दनाचार्य सिर्फ ऑफलाइन ही नहीं,बल्कि ऑनलाइन भी सक्रिय हैं। उनका यूट्यूब चैनल 'Sanatan Seva Janardan Acharya' है, जहाँ वे नियमित रूप से प्रवचन अपलोड करते हैं।
अन्य सोशल मीडिया लिंक:
सवाल-जवाब (People Also Ask)
सवाल: क्या डॉ. जनार्दनाचार्य की सेवाएँ सच में मुफ्त हैं?
जवाब: हाँ, उनकी सभी आध्यात्मिक सेवाएँ, ज्योतिष मार्गदर्शन और वैदिक अनुष्ठान पूरी तरह निःशुल्क हैं।
सवाल: वे कहाँ रहते हैं?
जवाब: वर्तमान में जयपुर, राजस्थान में रहते हैं।
सवाल: उन्हें डॉक्टरेट किसने दी?
जवाब: हॉकिन्स यूनिवर्सिटी (टेक्सास, USA) और सेंट यूनिवर्सिटी (नोएडा) ने मानद डॉक्टरेट से सम्मानित किया है।
सवाल: उनका मुख्य उद्देश्य क्या है?
जवाब: प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति और सनातन संस्कृति को गुरुकुल और गौशाला के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना।
गौरतलब है कि हाल ही में डॉ. जनार्दनाचार्य ने अपने यूट्यूब चैनल को और अधिक सक्रिय किया है। जयपुर और आसपास के क्षेत्रों में उनके प्रवचनों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सनातन धर्म के इस स्तंभ का प्रभाव अब डिजिटल माध्यमों से और भी तेजी से फैल रहा है।