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गच्छाधिपति आचार्य देव श्रीमद् विजय हितेश चंद्र सूरीजी ने दिया आत्म-उत्थान का मूल मंत्र - "हम गुरु का नहीं,गुरु स्वयं हमारा हाथ थामें।"





 



 गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु के बिना शून्य है जीवन,समर्पण से ही मिलता है सच्चा मार्ग

  

 धर्म। भारतीय संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा का दिन केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले 'गुरु' के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। इस गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, सुप्रसिद्ध मोहनखेड़ा तीर्थ के वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य देव श्रीमद् विजय हितेश चंद्र सूरीजी महाराजा ने एक अत्यंत मार्मिक और जीवन को नई दिशा देने वाला संदेश दिया है।

गुरु ही हैं जीवन का कल्याणकारी आधार

  आचार्य देव ने अपने विशेष संदेश में स्पष्ट किया कि भौतिक संसार में चाहे कितनी भी उपलब्धियां प्राप्त कर ली जाएं, लेकिन गुरु के बिना जीवन का न तो कोई वास्तविक आरंभ होता है और न ही कोई सही गंतव्य मिलता है। गुरु ही हमारे जीवन के सच्चे मार्गदर्शक और वह मजबूत आधार हैं, जो हर परिस्थिति में हमारा कल्याण करते हैं।

'गुरु हमारा हाथ थामें' - एक गूढ़ आध्यात्मिक रहस्य

  आचार्य श्री के संदेश का सबसे गहरा और प्रभावशाली विचार यह था कि हमारा पुरुषार्थ (प्रयास) केवल गुरु को खोजने का नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा होना चाहिए कि 'गुरु स्वयं हमारा हाथ थाम लें।' उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में एक बड़ा सत्य बताया— यदि हम इंसान गुरु का हाथ पकड़ने जाते हैं, तो हमारी कमजोरियों या सांसारिक परिस्थितियों के कारण हो सकता है कि वह हाथ हमसे छूट जाए। लेकिन, यदि हमारे भावों को देखकर गुरु ने स्वयं हमारा हाथ पकड़ लिया, तो वह जीवन में कभी नहीं छूट सकता।

समर्पण ही है गुरु का हृदय जीतने की कुंजी

  गुरु का यह सान्निध्य और मंगलकारी आशीर्वाद कैसे प्राप्त हो? इसके उत्तर में आचार्य देव ने बताया कि इसके लिए पूर्ण समर्पण की आवश्यकता होती है। जब कोई शिष्य पूर्ण तल्लीनता, भक्ति और समर्पण के भाव से गुरु की शरण में जाता है, तभी वह गुरु का हृदय जीत सकता है। यह समर्पण ही शिष्य को उसके आत्म-उत्थान के मार्ग पर ले जाता है।

आनंदमय जीवन का मंगल आशीर्वाद

   इस विशेष अवसर पर, गच्छाधिपति आचार्य देव ने सभी भक्तों के लिए मंगलकामनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि गुरु की कृपा से सभी का जीवन आनंदमय और प्रसन्नता से भरा रहे, और हर व्यक्ति निरंतर आगे बढ़ते हुए अपनी आध्यात्मिक प्रगति (आत्म-उत्थान) के मार्ग पर प्रशस्त हो।

  आज के समय में जब चारों ओर वैचारिक भटकाव है, आचार्य देव श्रीमद् विजय हितेश चंद्र सूरीजी का यह संदेश हमें याद दिलाता है कि जीवन की नैया पार लगाने के लिए एक सच्चे गुरु के मार्गदर्शन और उनके प्रति अटूट विश्वास से बड़ा कोई संबल नहीं है।



सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ रूपये की स्वीकृति







 

आई टी पार्क स्थापना की निरंतरता को मंजूरी: 8000 को मिलेगा रोजगार
महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स 2026 के आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति
रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना के लिए 111 करोड़ रूपये की स्वीकृति
मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 184 करोड़ रूपये की स्वीकृति
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 857 करोड़ रूपये की स्वीकृति
संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के लिए 198 करोड़ रूपये की स्वीकृति
ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त की स्थापना को मंजूरी
नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति
आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन के लिए 129 करोड़ रूपये की स्वीकृति
कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा योजनाओं के लिए 982 करोड़ रूपये की स्वीकृति
समर्थन मूल्य पर उपार्जन पर किसानों को बोनस भुगतान योजना की निरंतरता की स्वीकृति
मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में संशोधन की स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय


  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनकल्याण को गति देने के लिए लगभग 2 हजार 480 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई। बैठक में खेल गतिविधियों, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई।

  प्रमुख निर्णयों में अक्टूबर 2026 में भोपाल में 'महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी' के भव्य आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य की खेल अवसंरचना और पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी। कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए रिहन्द एवं मल्हारगढ़ सिंचाई परियोजनाओं और किसानों को समर्थन मूल्य पर बोनस भुगतान योजना की निरंतरता को मंजूरी मिली। प्रदेश को तकनीकी रूप से अग्रणी बनाने के उद्देश्य से आईआईएसईआर (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' और आईटी पार्कों के विकास के लिए 857 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इन निर्णय में आई टी पार्क की स्थापना के वर्ष 2031 तक संचालन की निरंतरता की स्वीकृति महत्वपूर्ण है ,इसके तहत करीब 8000 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। 'मिशन शक्ति' के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण के लिए 198 करोड़ रुपये, कर्मचारी कल्याण एवं पेंशन योजनाओं के लिए 982 करोड़ रुपये और ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा के निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और नारायणगढ़ में 9 नए न्यायिक पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

  महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल में आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति

   मंत्रि-परिषद ने माह अक्टूबर 2026 में महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल के बरखेड़ा नाथू में स्थित अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स में आयोजन के लिए संभावित व्यय राशि 18 करोड़ 74 लाख रूपये के व्यय की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

  हॉकी इण्डिया को अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ द्वारा देश में हॉकी खेल का संचालन, प्रोत्साहन और अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए अधिकृत किया गया है। प्रतियोगिता वर्ष 2010 से निरन्तर 2 वर्ष के अन्तराल में आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का मुख्य उद्‌द्देश्य एशियाई महिला हॉकी टीमों की प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है। महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 में एशिया की प्रमुख 6 महिला टीमों (भारत, चीन, जापान, मलेशिया, साउथ कोरिया, एवं थाईलैण्ड) के लगभग 200 खिलाडी व सपोर्ट स्टॉफ के सम्मिलित होने की संभावना है।

   यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता हॉकी इण्डिया और खेल और युवा कल्याण विभाग ‌द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जायेगी। अनुबंध अनुसार हॉकी इण्डिया को खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा 'पेजेंटिंग पार्टनर' राईटस के लिए 11 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए विभाग दवारा 7 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय किया जायेगा। इस प्रकार आयोजन पर लगभग 18 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय होना संभावित है।

  भोपाल के बरखेड़ा नाथू में अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स को नवीन एवं आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार किया गया है। एशिया स्तर की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन से वैश्विक स्तर पर मध्यप्रदेश में निर्मित खेल अधोसरंचना का प्रचार प्रसार होगा। इससे प्रदेश के हॉकी खिलाड़ियों के मनोबल में वृ‌द्धि होगी और एशिया के प्रमुख देशों से सम्मिलित हुई टीमों के खिलाड़ियों के भोपाल आगमन से प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 111 करोड़ रूपये की स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली की रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना को सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 111 करोड़ 4 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना का मुख्य उद्देश्य गोविन्द वल्लभ पंत सागर रिजर्वायर (रिहन्द नदी पर स्थित) से संचित जल का उद्वहन कर सिंगरौली, माड़ा, वैढन और जावद तहसील के 119 गांवों में 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए जल प्रदान करना है।

मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 184 करोड़ रूपये की स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद ने मंदसौर की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 184 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदसौर जिले की 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

   ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 857 करोड़ रूपये की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने आईसर में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए 85 करोड़ 51 लाख रूपये सहित विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 857 करोड़ 21 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

आई टी पार्क स्थापना की निरंतरता को मंजूरी: 8000 को मिलेगा रोजगार

   प्रदेश में आईटी पार्क की स्थापना' संबंधी योजना के लिए 595 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश में इन्दौर, भोपाल, जबलपुर एवं ग्वालियर में आई.टी. पार्को की स्थापना की गयी है। आई.टी. पार्क एवं आई.टी. टावर्स की स्थापना से प्रदेश में आधुनिक तकनीकी अधोसंरचना का विकास होगा जिससे देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर निवेश एवं औ‌द्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। परिणामस्वरुप प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा 8000 से अधिक स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि अब तक लगभग 22000 युवाओ को रोजगार प्राप्त हो चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के अंतर्गत संपादित एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से आई.टी. एवं ई.एस.डी.एम. क्षेत्र का विस्तार होगा जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ होगी। डिजिटल एवं तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी तथा मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते तकनीकी एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।

   मंत्रि-परिषद ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की स्थापना के लिए कुल लागत 85 करोड़ 51 लाख रूपये में से 17 करोड़ 90 लाख रूपये को आगामी तीन वर्षों तक प्रदाय किए जाने की स्वीकृति दी है। यह एक उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करेगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन प्रौ‌द्योगिकी, UAV डिजाइन एवं निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों तथा उन्नत अनुप्रयोगों पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्र में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC), प्रोटोटाइप विकास एवं परीक्षण जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी, जिससे राज्य में ड्रोन प्रौ‌द्योगिकी का एक समग्र एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकेगा।

 'नई तकनीक के लिए एम.पी.एस.ई.डी.सी. एवं अन्य संस्थाओं को सहायता' योजना के लिए 110 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य शासन एवं उसके विभिन्न विभागों को नवीनतम सूचना प्रौ‌द्योगिकी एवं डिजिटल समाधान उपलब्ध कराकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना एवं नागरिकों को त्वरित, सरल और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना है। इसमें AI/ML आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, व्हाट्‌सऐप चैटवॉट, ड्रोन सेवाएं, एसएमएस गेटवे, MP CODE, ई-साइन, राज्य ई-मेल नीति, लो-कोड/नो-कोड प्लेटफॉर्म और सिक्योरिटी ऑडिट लैब जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं।

  'मध्यप्रदेश स्टेट स्पाटियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर (एम.पी. एस एस डी आई)' योजना के लिए 40 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। योजना के उद्देश्य राज्य में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग कर एकीकृत स्थानिक डाटा (Spatial Data) का निर्माण, संधारण एवं अद्‌यतन करते हुए विभिन्न विभागों, एजेसियों तथा योजनाओं को अद्‌यतन, विश्वसनीय एवं सुगम जीआइएस आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इससे आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति, भूमि प्रबंधन, शहरी विकास एवं सड़क मरम्मत जैसे क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय क्षमता में वृद्धि हुई है।

  इसी तरह 'क्लाउड सेवाओं का प्रदाय व प्रबंधन' के लिए 26 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने और शासन की सभी सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन (डिटिटल ट्रांसफार्मेशन) को गति देना है। इस योजना के अंतर्गत, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) ‌द्वारा तैयार क्लाउड अंगीकरण रूपरेखा (Cloud Adoption Framework) के आधार पर सभी शासकीय एवं अर्ध-शासकीय विभागों को सुरक्षित, लचीली, स्केलेवल एवं किफायती क्लाउड सेवाएं प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से शासन को अपने आईटी संसाधनों के निर्माण और रखरखाव पर भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकतानुसार कम्प्यूटिंग संसाधन, स्टोरेज, नेटवर्किंग तथा सॉफ्टवेयर सेवाएँ क्लाउड प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते है।

ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय की स्थापना की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। सृजन संबंधी कार्यवाही के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है। उल्लेखनीय है कि सभी बड़े राजस्व संभागों (सागर, शहडोल, नर्मदापुरम को छोडकर) में विद्युत निरीक्षकालय के वृत्त कार्यालय स्थापित है। वर्तमान में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रहण संबंधी कार्य भोपाल मुख्यालय से संपादित होते हैं। ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय प्रारंभ करने से विशेषत: मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर औ‌द्योगिक क्षेत्र को लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त भविष्य में मुरैना में 600 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किया जाना है जिसके लिए भी ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय स्थापित किया जाना आवश्यक है।

नारायणगढ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने मंदसौर के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का एक नवीन पद सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इससे वहां नियमित रूप से न्यायालय का संचालन हो सकेगा जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं और लोगों की मांग के साथ प्रकरणों का निराकरण किया जा सकेगा और आम जन को सुलभ व त्वरित न्याय मिल सकेगा।

प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन के लिए 129 करोड़ रूपये की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की गतिविधियों से संबंधित योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 129 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति राशि से अकादमी के स्थापना एवं कार्यालयीन व्यय, मिशन कर्मयोगी, विभागीय परिसंपतियों का संधारण एवं प्रशासन अकादमी परिसर में प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए भौतिक सुविधाओं का निर्माण संबंधित कार्य किए जायेंगे।

संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के लिए 198 करोड़ रूपये की स्वीकृति

   मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 198 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

  संकल्प -हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना का उद्देश्य जिला स्तर पर एक ऐसी इकाई के रूप में कार्य करना है जो महिलाओं को उनके कल्याण और सशक्तिकरण के लिए योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता के साथ-साथ पहुंच प्रदान करें। यह योजना पूर्व से सभी 52 जिलों में संचालित है और अब इसे 3 नवगठित जिलों में संचालित किया जायेगा।

  शक्ति सदन का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना तथा अवैध व्यापार, संकट में फंसी महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से उबार कर एक नई शुरुआत करवाना है। वर्तमान में प्रदेश में 14 शक्ति सदन अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से संचालित है। भारत सरकार द्वारा 5 नये शक्ति सदन स्वीकृत किये गये हैं।

  शहरी/ग्रामीण कामकाजी महिलाओं को सुविधाजनक व सुरक्षित आवास प्रदान करने के लिए सखी निवास योजना को लागू किया गया है। पूर्व में इस योजना का नाम महिला विश्रामालय था। सखी निवास में सभी वर्ग की कामकाजी महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है। सखी निवास में महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर संचालन का भी प्रावधान है। प्रदेश में 3 शासकीय सखी निवास संचालित है।

कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा योजनाओं के लिए 982 करोड़ रूपये की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा की योजनाओं के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 982 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा की योजनाओं, पेंशन तथा कर्मचारी कल्याण संचालनालय, जिला पेंशन कार्यालय, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, पेंशनर कल्याण कोष, शासकीय सेवक परिवार कल्याण निधि पर ब्याज, शासकीय कर्मचारी समूह बीमा योजना, शासकीय कर्मचारी सह समूह बीमा योजना को संचालित किया जायेगा।

समर्थन मूल्य पर उपार्जन पर किसानों को बोनस भुगतान योजना की निरंतरता की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत 500 करोड़ से अधिक की योजना अंतर्गत समर्थन मूल्य पर किसानों को उपार्जन पर बोनस भुगतान के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक में निरंतर संचालन की स्वीकृति दी है।

मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम 2011 में संशोधन की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में संशोधन की स्वीकृति दी है। भारत सरकार द्वारा जनविश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 में किए गए संशोधनों को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने, Compliance Reduction and Deregulation के अंतर्गत की गई अनुशंसाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क के पुनरीक्षण के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है।

McVitie's की पैरेंट कंपनी का 2030 तक बेहतर न्यूट्रिशन वाले प्रोडक्ट्स की सेल दोगुनी करने का लक्ष्य

लंदन, यूनाइटेड किंगडम

McVitie’s, GODIVA और Ulker की मालिकाना कंपनी ने 2030 तक अपने उन प्रोडक्ट्स की सेल दोगुनी करने का संकल्प लिया है, जिनमें चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो और फाइबर व प्रोटीन जैसे पोषक तत्व ज्यादा हों।

स्नैकिंग के क्षेत्र में दिग्गज कंपनी pladis ने कहा कि वे स्वाद से कोई समझौता किए बिना मौजूदा रेसिपी को बेहतर बनाकर, नए उत्पाद लॉन्च करके व अपने वर्तमान सफल उत्पादों को नए बाजारों में पहुंचाकर इस लक्ष्य को हासिल करेंगे।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब उपभोक्ता लगातार ऐसे स्नैक्स की मांग कर रहे हैं जो उनके लाइफस्टाइल और फिटनेस लक्ष्यों के अनुकूल हों और वे इसके लिए स्वाद से भी समझौता नहीं करना चाहते। pladis का मानना है कि उनकी यह पहल ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं को पूरा करते हुए उनके पोर्टफोलियो में ज्यादा विकल्प प्रदान करेगी।

pladis की चीफ R&D ऑफिसर, Dr Jennifer Moss ने कहा "लोग बिस्कुट और चॉकलेट इसलिए नहीं खरीदते क्योंकि उन्हें न्यूट्रिशन पर भाषण सुनना होता है – वे इन्हें इसलिए खरीदते हैं क्योंकि वे इसका स्वाद पसंद करते हैं। बेहतरीन स्वाद ही हमेशा हमारी पहली प्राथमिकता रहेगा।"

"बदलाव यह आ रहा है कि अब ग्राहक ज्यादा विकल्प चाहते हैं। वे ऐसे प्रोडक्ट चाहते हैं जो उनकी लाइफस्टाइल और सेहत के लिए ठीक हों, लेकिन उन्हें वही बेहतरीन स्वाद भी चाहिए।"

"हमारा मानना है कि भविष्य में वही ब्रांड्स सफल होंगे जो इन दोनों चीजों को एक साथ दे सकें। इसीलिए हम उपभोक्ताओं को ज्यादा विकल्प देने के लिए प्रतिबद्ध हैं और साथ ही उस स्वाद को भी बनाए रखेंगे जो हमेशा से हमारे ब्रांड्स की पहचान रहा है।"

इस लक्ष्य को सपोर्ट करने के लिए pladis ने एक नया ग्लोबल न्यूट्रिशन फ्रेमवर्क तैयार किया है। यह तय करेगा कि कंपनी के सभी प्रोडक्ट्स को कैसे विकसित, रिफॉर्म्युलेट और मार्केट किया जाए।

कंपनी के वैज्ञानिकों द्वारा बनाए गए इस फ्रेमवर्क में फ्रांस के Nutri-Score, ऑस्ट्रेलिया के Health Star Rating और यूके के Nutrient Profile Model (HFSS) जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त न्यूट्रिशन सिस्टम्स को आधार बनाया गया है।

यह फ्रेमवर्क pladis के सभी प्रोडक्ट्स पर लागू होता है और न्यूट्रिशन को संतुलित नजरिए से देखता है। यह फाइबर और प्रोटीन जैसे न्यूट्रिएंट्स का भी आकलन करता है जिन्हें बढ़ाने की सलाह दी जाती है और नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट जैसे तत्वों का भी जिन्हें कम करने की जरूरत होती है।

आज के समय में जिन प्रोडक्ट्स को इस फ्रेमवर्क द्वारा बेहतर न्यूट्रिशनल बैलेंस वाला माना गया है, वे pladis की कुल सेल के लगभग 10 प्रतिशत हिस्से के बराबर हैं। कंपनी ने 2030 तक इस वॉल्यूम को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।

यह कदम pladis द्वारा अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बनाने के लिए लंबे समय से किए जा रहे काम का ही हिस्सा है। कंपनी पहले ही यूके में अपनी रेसिपीज़ से 676 टन चीनी कम कर चुकी है जो लगभग 169 मिलियन चम्मच चीनी के बराबर है। नीदरलैंड में चीनी और नमक कम करके और फाइबर बढ़ाकर अपने Sultana फ्रूट बिस्कुट को नया रूप दिया गया है। पिछले एक दशक में किए गए इन बदलावों के कारण Ulker ने भी चीनी और नमक कम करने के साथ-साथ अपने प्रोडक्ट्स से 549 टन फैट कम किया है।

यह संकल्प pladis की हाल ही में लॉन्च की गई ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी स्ट्रेटेजी, Happy People, Happy Planet का हिस्सा है।

pladis में लगभग 16,000 कर्मचारी काम करते हैं और इसके प्रोडक्ट्स 110 से अधिक देशों में बेचे जाते हैं।

मीडिया पूछताछ के लिए, कृपया pladis प्रेस ऑफिस से संपर्क करें: 44 151 230 4899 / press.office@pladisglobal.com 


एडिटर्स के लिए नोट्स:

सभी लक्ष्य 2023 के डेटा बेसलाइन पर आधारित हैं।
चीनी के चम्मच की गणना हर चम्मच में 4 ग्राम के आधार पर की गई है।

झाँसी के अभिनेता अज़ीम शेख की नई फिल्म 'हनुमान अंश' 31 जुलाई को रिलीज | Head Constable का किरदार

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  झाँसी के अभिनेता अज़ीम शेख की बॉलीवुड में एक और उपलब्धि, 'हनुमान अंश' में निभाया हेड कांस्टेबल सुखीराम का दमदार रोल

  मनोरंजन | वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की नगरी झाँसी ने एक बार फिर बॉलीवुड को एक प्रतिभाशाली कलाकार दिया है। झाँसी के मूल निवासी अभिनेता अज़ीम शेख Azeem Sheikh ने अपनी मेहनत और लगन से फिल्म इंडस्ट्री में एक और बड़ी छलांग लगाई है।

  उनकी आगामी हिंदी फिल्म 'हनुमान अंश Hanuman Ansh' 31 जुलाई 2026 को पूरे देश के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। इस फिल्म में अज़ीम शेख हेड कांस्टेबल सुखीराम का अहम और दमदार किरदार निभाते नजर आएंगे।

'हनुमान अंश' - आस्था और मूल्यों पर आधारित फिल्म

   निर्देशक विशाल चतुर्वेदी Vishal Chaturvedi द्वारा निर्देशित और स्वंभू मीडिया नेटवर्क Swayambhu Media Network के बैनर तले बनी यह फिल्म आस्था, आध्यात्मिकता, मानवीय मूल्यों और भावनात्मक रिश्तों पर आधारित एक प्रेरणादायक कहानी है। 

  फिल्म में अज़ीम शेख का किरदार कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

    मुंबई में लाखों कलाकार अपने सपने लेकर आते हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही अपनी पहचान बना पाते हैं। झाँसी से मुंबई तक का अज़ीम शेख का सफर संघर्ष, धैर्य और निरंतर मेहनत की मिसाल है।

   अज़ीम शेख पहले भी मोहेंजो दारो Mohenjo Daro', 'दुपहिया सीजन 2 Dupahiya Season 2', 'अली बाबा और 40 भूत Ali Baba Aur 40 Bhoot' जैसी फिल्मों, वेब सीरीज, शॉर्ट फिल्मों और टीवी विज्ञापनों में काम कर चुके हैं। हर किरदार को ईमानदारी से निभाना उनकी खासियत बन गई है।

  फिल्म को लेकर अज़ीम शेख कहते हैं : "एक अभिनेता के लिए हर किरदार नई सीख और नया अनुभव लेकर आता है। कलाकार को हमेशा सीखते रहना चाहिए और हर भूमिका में अपना 100% देना चाहिए।"

युवाओं के लिए प्रेरणा

 आज अज़ीम शेख छोटे शहरों से बड़े सपने देखने वाले युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। 'हनुमान अंश' उनके करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी।

फिल्म रिलीज डेट: 31 जुलाई 2026  
स्थान: देशभर के सिनेमाघरों में



  


अमृत हरित अभियान के तहत नगर परिषद राजगढ़ ने दलपुरा बाबाजी के कुएं पर किया वृहद पौधारोपण






 




    राजगढ़/धार। आयुक्त महोदय एवं सीएमओ संतोष चौहान के निर्देशानुसार पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज दिनांक 26 जुलाई 2026, दिन रविवार को नगर परिषद राजगढ़ द्वारा 'अमृत हरित अभियान' के अंतर्गत एक वृहद पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।यह गरिमामयी आयोजन दलपुरा बाबाजी के कुएं पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रकृति के संरक्षण और नगर को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए।जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति इस अभियान को सफल बनाने के लिए बड़ी संख्या में लोग एकजुट हुए।
  
    कार्यक्रम में मुख्य रूप से वार्ड पार्षदगण, नगर परिषद के अधिकारी व कर्मचारी, और स्थानीय नागरिक गण उपस्थित रहे। सभी उपस्थित जनों ने न केवल पौधारोपण किया, बल्कि इन पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल करने का सामूहिक संकल्प भी लिया। नगर परिषद राजगढ़ ने इस अवसर पर आम जनता से भी अपील की है कि वे इस मानसून सत्र में अनिवार्य रूप से पौधे लगाएं और पर्यावरण को स्वच्छ व सुंदर बनाने में अपना अमूल्य योगदान दें।

राजगढ़ की पुरानी कन्या शाला को लेकर भाजपा नेता मुकेश कावड़िया ने मंत्री से की मांग,कलेक्टर को तत्काल कार्यवाही के निर्देश



 



  राजगढ़ (धार)। 25 जुलाई को अमझेरा में शर्मा परिवार द्वारा आयोजित 5000 पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेता मुकेश कावड़िया ने नगरीय प्रशासन एवं प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का स्वागत किया। इस अवसर पर उन्होंने राजगढ़ की पुरानी कन्या शाला के संबंध में मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।कावड़िया ने विद्यालय की आवश्यकताओं से अवगत कराते हुए संबंधित मामले में शीघ्र हस्तक्षेप की मांग रखी।

  मंत्री विजयवर्गीय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए और आवश्यक कदम उठाने को कहा।

आस्था और पर्यावरण संरक्षण का अद्वितीय संगम: राजगढ़ के श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर को मिली वैश्विक पहचान











 मुख्यमंत्री मोहन यादव का भँवर मृत्युंजय सिंह दत्तीगांव के नेतृत्व में भव्य स्वागत,राजगढ़ के शनि मंदिर को मिले वर्ल्ड रिकॉर्ड्स संस्थाओं के सम्मान पत्रों का किया विमोचन

 राजगढ़ (धार,मध्यप्रदेश)। धार जिले के राजगढ़ नगर स्थित अति प्राचीन श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर ने आस्था, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक विशाल वटवृक्ष (बरगद) के संरक्षण तथा धार्मिक एवं पर्यावरणीय चेतना के उत्कृष्ट प्रयासों को विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं ने सम्मानित एवं मान्यता प्रदान की है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के भाबरा प्रवास के दौरान दत्तीगांव बंगले पर भँवर मृत्युंजयसिंह दत्तीगांव के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया।

 इस दौरान मुख्यमंत्री को श्री शनि शीतला माता मंदिर का चित्र भेंट किया गया। 51 किलो की पुष्पमाला द्वारा स्वागत किया गया। जान्हवीसिंह दत्तीगांव द्वारा गुलदस्ता भेंटकर अभिनंदन किया गया। अति प्राचीन श्री शनि मंदिर को सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय भंडारी के प्रयासों से विश्व की 11 संस्थाओं द्वारा वर्ड रिकॉर्ड्स प्रमाण पत्र का विमोचन मुख्यमंत्रीजी द्वारा किया गया। भँवर मृत्युंजयसिंह समिति सदस्य निलेश सोनी व अक्षय भंडारी द्वारा मुख्यमंत्री को मंदिर की प्राचीनता व विशेषताओं से अवगत करवाया गया।

लगभग तीन माह तक चले मूल्यांकन, दस्तावेजी अध्ययन एवं परीक्षण के उपरांत मंदिर को देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित रिकॉर्ड एवं सम्मान प्रदान करने वाली संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल राजगढ़ नगर, बल्कि पूरे धार जिले एवं मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है।

श्री शनि-शीतला माता मंदिर समिति के सदस्य श्री निलेश सोनी ने बताया कि मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन विशाल वटवृक्ष और स्वयंभू शनिदेव महाराज की प्रतिमा सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है। अब इस धार्मिक एवं प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर मिली पहचान हम सभी के लिए अत्यंत गौरव एवं प्रसन्नता का विषय है।

उन्होंने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित अक्षय भंडारी के सतत प्रयासों, दस्तावेजीकरण एवं समन्वय के परिणामस्वरूप मंदिर की इस विशिष्ट पहचान को विश्व स्तर तक पहुँचाने में सफलता मिली।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएँ

- प्राकृतिक चमत्कार:
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ विराजमान शनिदेव की प्रतिमा मानव-निर्मित नहीं है। यह एक जीवित एवं प्राचीन बरगद वृक्ष की जड़ों के भीतर स्वयंभू स्वरूप में प्रकट हुई मानी जाती है। आस्था और प्रकृति का यह अद्भुत संगम इसे विश्व के विशिष्ट धार्मिक स्थलों में स्थान दिलाता है।

- दुर्लभ सिंदूरी स्वरूप:
विश्व के अधिकांश शनिदेव मंदिरों में प्रतिमाएँ काले पत्थर की होती हैं, जबकि राजगढ़ स्थित इस मंदिर में शनिदेव का स्वरूप सिंदूरी रंग में पूजित है। यह विशेषता इसे अत्यंत दुर्लभ एवं विशिष्ट बनाती है।

- शनि–सूर्य का अद्वितीय संयोग:
मंदिर में विराजमान स्वयंभू प्रतिमा पूर्व दिशा अर्थात सूर्योदय की ओर स्थित है। धार्मिक मान्यताओं एवं ज्योतिषीय दृष्टि से यह शनि और सूर्य के अद्वितीय संयोग का प्रतीक माना जाता है, जो इस मंदिर की विशिष्ट पहचान है।

- प्रकृति-सम्मिलित वास्तुकला:
मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया गया है कि प्राचीन बरगद वृक्ष को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुँची। संपूर्ण मंदिर वृक्ष के संरक्षण को केंद्र में रखकर विकसित किया गया है। यह भारतीय संस्कृति के "प्रकृति देवो भवः" के सनातन संदेश का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

मंदिर को वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, अमेजिंग वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, आईईए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, एशिया कालिंग एक्सीलेंस बुक ऑफ रिकार्ड्स, लिंकन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, कर्नाटक अचीवर्स बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, आंध्र बुक ऑफ रिकॉर्ड्स तथा भारत टैलेंट्स बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स सहित अनेक प्रतिष्ठित रिकॉर्ड संस्थाओं द्वारा सम्मान एवं मान्यता प्रदान की गई है।

इसके अतिरिक्त मंदिर की यह उपलब्धि केवल रिकॉर्ड संस्थाओं तक सीमित नहीं है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संस्था एप्लाइड एनवायरनमेंटल रिसर्च फाउंडेशन (AERF) ने श्री शनि-शीतला माता मंदिर समिति को मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक विशाल बरगद (महावृक्ष) के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपने "सेव गायंट ट्रीज़" कार्यक्रम के अंतर्गत "सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर" प्रदान कर सम्मानित किया है।

एप्लाइड एनवायरनमेंटल रिसर्च फाउंडेशन (AERF) की स्थापना वर्ष 1995 में पुणे (महाराष्ट्र) में हुई थी। यह संस्था भारत में विशाल एवं ऐतिहासिक वृक्षों तथा निजी वनों के संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही है। अब तक संस्था 1,200 से अधिक विशाल वृक्षों को संरक्षण समझौतों के अंतर्गत शामिल कर चुकी है तथा 15,000 एकड़ से अधिक निजी वन क्षेत्र के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे चुकी है।

AERF का कार्य राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जाता है। संस्था Conservation International (Japan) तथा IUCN (International Union for Conservation of Nature) जैसी प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संस्थाओं के साथ समन्वय एवं सहयोग के माध्यम से जैव विविधता, प्राकृतिक धरोहरों और विशाल वृक्षों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर को मिला यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण का समन्वय न केवल स्थानीय समाज, बल्कि वैश्विक संरक्षण संस्थाओं द्वारा भी सराहा जा रहा है। मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक बरगद का संरक्षण भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक प्रेरणादायी पहल है।

मंदिर द्वारा "एक मंदिर – एक संदेश" की अवधारणा को अपनाते हुए धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी संदेश समाज तक पहुँचाया जा रहा है। यह पहल यह सिद्ध करती है कि धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना के केंद्र ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के भी सशक्त माध्यम बन सकते हैं।

इस अवसर पर अक्षय भंडारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में वटवृक्ष जीवन, आस्था और पर्यावरण का प्रतीक है। यदि समाज अपनी प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प ले, तो स्थानीय विरासत भी वैश्विक पहचान प्राप्त कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल मंदिर समिति का नहीं, बल्कि पूरे राजगढ़ नगर, धार जिले एवं मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत का सम्मान है।

आज श्री बरगद वाले शनिदेव मंदिर आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत के अद्वितीय समन्वय का प्रेरणास्रोत बन चुका है। यह स्थल भविष्य में आध्यात्मिक पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण तथा सांस्कृतिक धरोहर के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है।