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राजगढ़ में भव्य श्रीराम कथा और निःशुल्क सामूहिक विवाह महोत्सव 2026: 4 मई से शुरुआत,जानिए पूरा कार्यक्रम





 





  मध्य प्रदेश के धार जिले की धर्ममयी नगरी राजगढ़ में एक बार फिर भक्ति और सामाजिक समरसता का अदभूत संगम देखने को मिलेगा। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट मोयाखाई और संत रविदास ट्रस्ट मंडल,राजगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में भव्य श्रीराम कथा एवं सर्व समाज निःशुल्क सामूहिक विवाह महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा का भी बड़ा संदेश देता है।

4 मई को निकलेगी भव्य कलश यात्रा

  महोत्सव की शुरुआत 4 मई 2026, सोमवार को विशाल कलश यात्रा के साथ होगी। यह यात्रा सुबह 9 बजे माताजी मंदिर बावड़ी, राजगढ़ से संतों के सानिध्य में प्रारंभ होगी। धर्म ध्वज के साथ निकाली जाने वाली यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कथा स्थल सोसाइटी ग्राउंड तक पहुंचेगी। इस कलश यात्रा में माता, बहनों और बालिकाओं की विशेष भागीदारी रहेगी। आयोजन समिति द्वारा कलश धारण करने वाली महिलाओं और बालिकाओं के लिए उपहार की व्यवस्था भी की गई है। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे सुबह 8:30 बजे तक माताजी मंदिर पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन की शोभा बढ़ाएं।

श्रीराम कथा का आयोजन

  4 से 12  तक प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा वाचन परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम जी भारद्वाज द्वारा किया जाएगा। उनके प्रवचन सरल, प्रेरणादायक और जीवन मूल्यों से परिपूर्ण होते हैं, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हैं।

प्रभु श्रीराम नाम जाप महायज्ञ

   8 मई से 12 मई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे तक प्रभु श्रीराम नाम जाप महायज्ञ का आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर सामूहिक जाप के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करेंगे।

निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन 2026

  महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 13 मई 2026, बुधवार को आयोजित होने वाला सर्व समाज निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन रहेगा। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में जरूरतमंद परिवारों के जोड़ों का विवाह समाज के सहयोग से संपन्न कराया जाएगा, जिससे सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को बल मिलेगा।

आयोजन स्थल और व्यवस्थाएं

  पूरे महोत्सव का आयोजन सोसाइटी ग्राउंड, राजगढ़ (धार), मध्य प्रदेश में किया जाएगा। आयोजन की सभी व्यवस्थाएं श्री महावीर हनुमान गौशाला एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के साथ-साथ सर्व समाज के सहयोग से की जा रही हैं।

आयोजन समिति की अपील

  आयोजन समिति ने सभी धर्म प्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महोत्सव को अपना महोत्सव मानते हुए अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। विशेष रूप से माता, बहनों और बालिकाओं से आग्रह किया गया है कि वे कलश यात्रा में भाग लेकर सनातन संस्कृति की इस परंपरा को आगे बढ़ाएं।

   साथ ही,लोगों से यह भी निवेदन किया गया है कि वे इस आयोजन की जानकारी अपने मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि यह आयोजन ऐतिहासिक और सफल बन सके।

   राजगढ़ में आयोजित होने वाला यह भव्य श्रीराम कथा और सामूहिक विवाह महोत्सव 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि समाज में एकता, सेवा और संस्कारों का संदेश भी देगा। यह आयोजन निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र के लिए एक यादगार और प्रेरणादायक महोत्सव साबित होगा।



#RajgarhNews #RamKatha2026 #SamuhikVivah

जल संरक्षण में MP देश में नंबर 1,CM मोहन यादव का गंगा दशहरा पर बड़ा आह्वान

madhya pradesh water conservation campaign cm mohan yadav speech






 

मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में अव्वल: सीएम डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसे प्रदेशवासियों की जागरूकता और जनभागीदारी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पानी बचाना सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी है।

गंगा दशहरा पर जल स्रोतों की सफाई का आह्वान

मुख्यमंत्री ने 25 मई को आने वाले Ganga Dussehra के अवसर पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि इस दिन नदी, तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोतों की सफाई, श्रमदान और पौधरोपण जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में जल स्रोतों की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना जाता है और इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभाना चाहिए।

जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल ही जीवन है” और इसके संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।

जनभागीदारी से बना राष्ट्रीय रिकॉर्ड

राज्य में जनसहभागिता आधारित जल संचय अभियान के तहत अब तक:

  • 5.64 लाख से अधिक कार्य पूरे

  • 2.43 लाख से अधिक कार्यों को स्वीकृति

  • 45,000+ खेत तालाब निर्माण

  • 77,000+ डगवेल रिचार्ज कार्य

  • 3000+ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग यूनिट स्थापित

जिला स्तर पर डिंडोरी और खंडवा ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है।

गांव से शहर तक चल रहा अभियान

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। पंचायतों से लेकर नगर निकाय तक तालाबों, कुओं और बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनकी साफ-सफाई का अभियान जारी है।

साथ ही स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हर व्यक्ति की जिम्मेदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण सिर्फ सरकार का काम नहीं है। परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर भी पानी बचाने के प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पंचायतों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापारिक समूहों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।

मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल अब देश के लिए उदाहरण बनता जा रहा है। यदि जनसामान्य इसी तरह सक्रिय भागीदारी निभाता रहा, तो प्रदेश आने वाले समय में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो सकता है।



वैदिक घड़ी की डिजिटल गूंज: 78 लाख+ लोगों तक पहुँची भारतीय कालगणना,काशी से दुनिया तक पहचान

काशी विश्वनाथ धाम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का दृश्य





 वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक परंपरा को डिजिटल युग में नई पहचान दी है। इस अनूठी घड़ी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच दर्ज कर एक नया कीर्तिमान बनाया है।

प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिली वैश्विक पहचान

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के बाद इस वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। उन्होंने इसे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम बताया।

 प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हुई, जिससे यह पहल देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई।

सोशल मीडिया पर बना ट्रेंडिंग विषय

 माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत में नंबर 1 ट्रेंड पर रहा। इसके साथ ही #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #VedicClock जैसे हैशटैग्स ने लाखों लोगों को आकर्षित किया।

 प्रधानमंत्री और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर लाइव स्ट्रीम को हजारों दर्शकों ने देखा, जबकि राष्ट्रीय टीवी चैनलों के प्रसारण से करोड़ों लोगों तक इसकी जानकारी पहुँची।

क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?

 यह विशेष घड़ी मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विकसित की गई है। इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया गया।

  4 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय पंचांग और खगोलीय गणनाओं को आसान तरीके से प्रस्तुत करती है।

वैदिक घड़ी की प्रमुख विशेषताएँ

  • भारतीय कालगणना पर आधारित समय प्रणाली

  • तिथि, नक्षत्र, योग, करण की सटीक जानकारी

  • ग्रहों की स्थिति का प्रदर्शन

  • सूर्योदय आधारित समय गणना

  • पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान का संगम

अब मोबाइल में भी उपलब्ध: Vedic Clock App

 ‘Vikramaditya Vedic Clock’ ऐप इस घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जिसे Android और iOS पर डाउनलोड किया जा सकता है।

ऐप की मुख्य खूबियाँ

  • 30 मुहूर्त आधारित समय प्रणाली

  • 7000 वर्षों का पंचांग डेटा

  • 189+ भाषाओं में उपलब्ध

  • राहुकाल, शुभ मुहूर्त और चौघड़िया जानकारी

  • सूर्योदय-सूर्यास्त आधारित समय

  • वैदिक समय अनुसार अलार्म सुविधा

भविष्य की योजना: पूरे देश में विस्तार

  इस डिजिटल सफलता के बाद अब सरकार अयोध्या के श्री राम मंदिर सहित देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों पर वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना बना रही है।

भारतीय संस्कृति का डिजिटल पुनर्जागरण

 विक्रमादित्य वैदिक घड़ी सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि भारतीय कालगणना और सनातन ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

 यह पहल साबित करती है कि आज की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपराओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से समझने के लिए उत्सुक है।






Eylsia Nicolas ने माइक्रोपेमेंट्स द्वारा संचालित AI अडैप्टिव डिजिटल पब्लिशिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च करने के लिए मेटा इंडिया के साथ साझेदारी की

नॉर्थ पाम बीच, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका; मुंबई, महाराष्ट्र, भारत 

ग्लोबल रिकॉर्डिंग आर्टिस्ट और इन्वेंटर Eylsia Nicolas ने BookKards के लॉन्च के लिए मेटा इंडिया को अपना एडवाइजरी पार्टनर चुना है। यह एक पेटेंटेड डिजिटल पब्लिशिंग फॉर्मेट है जो माइक्रो ‑ट्रांजैक्शन, शॉर्टफॉर्म स्टोरीटेलिंग और भविष्य की AIadaptive रीडिंग क्षमताओं को जोड़ता है। इंडियाफर्स्ट पायलट यह पता लगाता है कि क्रिएटर्स देश भर के लाखों युवा रीडर्स तक पहुंचने के लिए माइक्रोपेमेंट्स और मोबाइलनेटिव पब्लिशिंग का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं।

BookKards डिजिटल कंटेंट की एक नई कैटेगरी पेश करता है: इमोशनल, कलेक्ट करने लायक कहानियां जिन्हें माइक्रो ट्रांजैक्शन के ज़रिए तुरंत खरीदा जा सकता है ‑। यह फॉर्मेट इंडिया के मोबाइलफर्स्ट ऑडियंस के लिए डिज़ाइन किया गया है और यह मेटा की उन क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की चल रही कोशिशों से मेल खाता है जो अपने काम से पैसे कमाने के नए तरीके आजमा रहे हैं।

पायलट के हिस्से के तौर पर, मेटा इंडिया ने पहले ही एल्सिया की कंटेंट स्ट्रैटेजी पर एडवाइज़री सपोर्ट दिया है, जिसमें सीक्वेंसिंग, ऑडियंस टारगेटिंग और मेटा की रिकमेंडेशन के आधार पर इस हफ़्ते फ़िल्माए गए उनके लेटेस्ट "घोस्ट वीडियो" के डेवलपमेंट पर गाइडेंस शामिल है। टीम ने उनके वायरल "मॉन्स्टर क्लिप" के पीछे प्रमोशनल बजट को कैसे एलोकेट और मैनेज किया जाए, इस पर भी डायरेक्शन दिया, जिससे बुककार्ड्स को अपने माइक्रोपेमेंट लॉन्च के लिए डेटा ड्रिवन बेस मिला।

कोविड के कारण आवाज़ को हुए नुकसान से ठीक होने के बाद, निकोलस ने एडवांस ऑडियो टूल्स की मदद से अपनी पुरानी आवाज़ वापस पाई — और यह अब उनकी पहचान का हिस्सा बन चुका है। टीनएज टेनिस चैंपियन से हॉलीवुड एग्जीक्यूटिव, कॉलेज प्रेसिडेंट और अब नॉट लाइक एनीवन एल्स की राइटर बनने तक का उनका सफ़र इस बात पर ज़ोर देता है कि उनकी आवाज़ सिंथेटिक नहीं है, बल्कि रिस्टोर की गई है, जिसे किसी और की ज़िंदगी से अलग बनाया गया है।

BookKards फ़ॉर्मेट पूरी तरह तैयार होने पर पाठकों को अपनी पसंद के अनुसार पढ़ने का अनुभव चुनने देगा — जैसे सामग्री का स्तर, भाषा और लंबाई। कोई भी दो पाठक एक ही किताब को एक जैसे तरीके से नहीं पढ़ेंगे। यह सुविधा BookKards को ऐसे शुरुआती प्रकाशन तरीकों में से एक बनाती है जो एआई की मदद से व्यक्तिगत कहानियाँ देते हैं।

Eylsia Nicolas ने कहा, “भारत दुनिया का सबसे रोमांचक डिजिटल बाज़ार है, और Meta India समझता है कि युवा दर्शक कहानियाँ कैसे ढूंढते हैं। उनकी सलाह और मदद की वजह से BookKards को लॉन्च करने का तरीका पहले से ही तय हो चुका है । यह आरंभिक परियोजना एक शुरुआत है जो आगे चलकर क्रिएटर्स के लिए एक नया और बेहतर पब्लिशिंग सिस्टम बनाएगी।"

BookKards डिजिटल पब्लिशिंग, माइक्रो ट्रांज़ैक्शन और मोबाइलनेटिव कंटेंट डिलीवरी को कवर करने वाले पेटेंट के पोर्टफोलियो पर बना है। प्लेटफ़ॉर्म का मकसद क्रिएटर्स को पारंपरिक स्ट्रीमिंग और पब्लिशिंग मॉडल के बाहर रेवेन्यू कमाने का एक नया तरीका देना है, जिसमें अक्सर कलाकारों को बहुत कम मुआवज़ा मिलता है।

भारत को इसकी तेज़ी से बढ़ती क्रिएटर इकॉनमी, डिजिटल पेमेंट को मज़बूती से अपनाने और मोबाइल स्टोरीटेलिंग में ग्लोबल लीडरशिप के कारण पहले मार्केट के रूप में चुना गया था। भारत के पायलट के बाद, BookKards फिलीपींस और दूसरे उभरते क्रिएटर मार्केट में विस्तार करेगा।




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बुककार्ड्स के बारे में

BookKards एक पेटेंट किया हुआ डिजिटल पब्लिशिंग तरीका है। इसमें छोटे भुगतान (micro-payments), छोटी कहानियाँ और भविष्य की AI तकनीक का मेल है। इसे खास तौर पर मोबाइल इस्तेमाल करने वालों के लिए बनाया गया है। BookKards की मदद से क्रिएटर्स दिल को छू लेने वाली कहानियाँ पब्लिश कर सकते हैं और प्रशंसकों (fans) से सीधे रेवेन्यू कमा सकते हैं।

 
Eylsia Nicolas के बारे में

आइलीसिया (लीजा पामिंतुआन) एक फिलीपीन-अमेरिकी गायक-लेखक, आविष्कारक, उद्यमी और पूर्व अंतरराष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्हें म्यूज़िक डिस्ट्रीब्यूशन टेक्नोलॉजी, लग्ज़री फैशन (Nicolas of Palm Beach) और WorldIPI के जरिए नई पब्लिशिंग तकनीक मे काम करने के लिए जानी जाती हैं। साल 2026 में उनके संगीत को दुनिया भर में 6 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है। उनके पास कई तरह के आविष्कारों के अधिकार (पेटेंट) हैं, जैसे स्पेशल ऑडियो तकनीक, मेडिकल टेक्नोलॉजी, टेक्सटाइल, टेलीकम्युनिकेशन और कंज्यूमर प्रोडक्ट डिजाइन से जुड़ी नई तकनीकें भी शामिल हैं।

 
WORLDIPI.COM LLC के बारे में

इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज इंटरनेशनल होल्डिंग्स (Intellectual Properties International Holdings), WORLDIPI.COM, intellectual property में एक विश्वव्यापी लीडर है। यह Donald Spector की संपदाओं और तकनीकों का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्हें दुनिया के सबसे विपुल (prolific) आविष्कारकों में से एक कहा जाता है। कंपनी के पास चिकित्सा, मनोरंजन, संचार, प्रौद्योगिकी और उपभोक्ता उत्पादों में सैकड़ों अमेरिकी और विदेशी पेटेंट हैं। मिस्टर स्पेक्टर ने कई अरब-डॉलर के उद्योगों की शुरुआत की है।

World IPI के संस्थापकों ने पहला हाइड्रोलिक एक्सरसाइजर, बीजों के लिए पहला हाइपरबेरिक चैंबर और रात में चमकने वाली पहली गेंद बनाई थी। ब्रिस्टल-मायर्स स्क्विब (Bristol-Myers Squibb) ने स्पेक्टर के पेटेंट के लिए एक अलग डिवीजन स्थापित किया था जिसमें पहला इलेक्ट्रॉनिक एयर फ्रेशनर, 'अरोमा डिस्क सिस्टम' (Aroma Disc System) शामिल है। स्पेक्टर के पेटेंट लोकेशन-आधारित विज्ञापन के लिए पहले ज्ञात ऐप से लेकर; साइबर ट्रांसलेशन सिस्टम के लिए पहले ज्ञात पेटेंट; वियरेबल बायो-सेंसर बाजार से पहले के पेटेंट, साथ ही सैकड़ों अन्य पेटेंट और प्रौद्योगिकियों तक फैले हुए हैं।
 

मंत्रि-परिषद की बैठक में विकास योजनाओं के लिये 26 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति






 

लोक निर्माण के कार्यों के लिए 26311 करोड़ और चिकित्सा शिक्षा, आंगनवाड़ी एवं सिंचाई योजना के लिए 490 करोड़ रूपये की स्वीकृति
लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रूपये की मिली स्वीकृति
पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी छात्रगृह योजना में संशोधन,छात्रवृत्ति 1550 से बढ़कर हुई 10 हजार प्रतिमाह, अब प्रतिवर्ष 100 नए विद्यार्थी होंगे लाभांवित
38,901 आँगनवाड़ी भवनों में विद्युतीकरण के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति
गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में पी.जी. सीट वृद्धि योजना अंतर्गत 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के लिए 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति
मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय


   मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए 26 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक की महत्वपूर्ण विकास योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। प्रदेश के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए लोक निर्माण विभाग की आगामी 5 वर्षों (2026-2031) की विभिन्न निर्माण व नवीनीकरण परियोजनाओं के लिए 26,311 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सामाजिक न्याय और शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिये छात्रवृत्ति राशि में ऐतिहासिक वृद्धि कर इसे 1,550 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था के लिए लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना और प्रदेश की 38,901 आंगनवाड़ियों के विद्युतीकरण के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। चिकित्सा क्षेत्र में विस्तार के लिए भोपाल और रीवा के चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृतियां भी दी गईं, जो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और अधोसंरचना को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप नई ऊंचाई प्रदान करेंगी। मंत्रि-परिषद की बैठक वन्दे मातरम गान से प्रारंभ हुई।

लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए 155 करोड़ 82 लाख रूपये की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद द्वारा शाजापुर जिले की लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना लागत राशि 155 करोड़ 82 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से शाजापुर जिले की शाजापुर तहसील के 17 एवं उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 ग्राम इस तरह कुल 24 ग्रामों के लिए 9 हजार 200 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। परियोजना अंतर्गत लखुंदर नदी पर शाजापुर जिले में मक्सी के समीप पूर्व से ही निर्मित जलाशय से 24.37 मीट्रिक घन. मीटर जल का उद्वहन कर सिंचाई सुविधा उपलब्ध करायी जाऐगी।

लोक निर्माण विभाग के निर्माण और विभिन्न विकास कार्यों के लिए 26 हजार 311 करोड़ रूपये की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत मार्गों के नवीनीकरण, कार्यालयों की स्थापना और मरम्मत, आवासों के अनुरक्षण सहित भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी विभिन्न योजनाओं की सोलहवें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की निरन्तरता के लिए लगभग 26 हजार 311 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

  स्वीकृति अनुसार मुख्यालय कार्यालय स्थापना, मण्डल कार्यालय स्थापना, अनुरक्षण, मरम्मत-संधारण और संभागीय कार्यालय स्थापना संबंधी योजनाओं के लिए 6,180 करोड़ 57 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

  इसके साथ ही केन्द्रीय सड़क अधोसंरचना निधि संबंधी योजनाओं के लिए 6 हजार 925 करोड़ रूपये, एफ-टाईप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवास एवं गैर आवासीय भवनों का अनुरक्षण का कार्य संबंधी योजना के लिए 1 हजार 680 करोड़ रूपये और भू-अर्जन के लिए मुआवजा संबंधी योजना के लिए 6 हजार 500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए है।

 इसके अलावा भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान और डिक्रीधन के भुगतान के लिए 25 करोड़ 50 लाख रूपये और मुख्य जिला मार्गों, जिला मार्ग तथा अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण संबंधी योजना के लिए 5 हजार करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।

पिछड़ा वर्ग विद्यार्थी छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन की स्वीकृति

  मंत्रि-परिषद द्वारा पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिल्ली स्थित उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत मध्यप्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन की स्वीकृति दी है।

 स्वीकृति अनुसार अब हर साल कुल 100 नए विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिसमें 50 सीटें स्नातक और 50 सीटें स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के लिए तय की गई हैं। इसके साथ ही, जो विद्यार्थी पहले से इस योजना का लाभ ले रहे हैं, उन्हें उनके कोर्स की अवधि पूरी होने तक सहायता मिलती रहेगी।

 छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली 1,550 रूपये की राशि को अब बढ़ाकर सीधे 10 हजार रूपये प्रति माह कर दी है। योजना का लाभ लेने के लिए यह जरूरी है कि विद्यार्थी पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र हो और उसके अभिभावकों की वार्षिक आय सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई आय सीमा के भीतर हो।

गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में पी.जी. सीट वृद्धि योजना अंतर्गत 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में गुणवत्ता पूर्ण चिकित्सा शिक्षा के विस्तार तथा दूरस्थ अंचलों में तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पी.जी. सीट वृद्धि योजना के अंतर्गत गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल के लिए रेडियोथैरिपी विभाग की ओ.पी.डी, लीनियक मशीन बंकर, बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और कैथलैब का निर्माण कार्य के लिए 14 करोड़ 8 लाख रूपये की कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान करने के साथ 79 करोड़ 16 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल विस्तार के लिए 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद द्वारा श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के अंतर्गत सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के विस्तार के तहत निर्माण कार्य के लिए 164 करोड़ 49 लाख रूपये के स्थान पर 174 करोड़ 80 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है।

38,901 आँगनवाड़ी भवनों में विद्युतीकरण के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत विद्युतविहीन आँगनवाड़ी भवनों में विद्युत व्यवस्था अन्तर्गत 38 हजार 901 ऑगनवाड़ी भवनों में बाहय विद्युतीकरण संबंधी योजना की 16 वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक) की स्वीकृति एवं निरंतरता के लिए 80 करोड़ 41 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

 स्वीकृति अनुसार प्रदेश में संचालित कुल 97,882 आँगनवाड़ी केन्द्रों में से विद्युत व्यवस्थाविहीन 38,901 विभागीय आँगनवाड़ी भवनों में विदयुत व्यवस्था करवाई जाएगी। आंगनवाड़ी भवनों में बाहय विदयुतीकरण होने पर ट्यूबलाईट/बल्ब, पंखा, कूलर, स्मार्ट टी.वी.,वॉटर प्यूरीफायर इत्यादि के समुचित उपयोग होगा एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की समस्त विभागीय योजनाओं का बेहतर तरीके से संचालन होगा। विभागीय योजनाओं की गतिशीलता बढ़ेगी। आँगनवाड़ी केन्द्र के बच्चें सुविधाजनक वातावरण में शालापूर्व शिक्षा व अन्य सेवायें ले सकेंगे।

 वित्तीय वर्ष 2026-27 से वित्तीय वर्ष 2030-31 तक कुल 38,814 विभागीय आँगनवाड़ी भवनों, धरती आबा योजना अंतर्गत शेष संभावित 69 आँगनवाड़ी भवन एवं जिला खनिज फंड से निर्मित 18 आँगनवाड़ी भवनों सहित अनुमानत 38,901 आँगनवाड़ी भवनों में बाहय विदयुतीकरण का लक्ष्य है।

मध्यप्रदेश में जंगली भैंसा का पुनर्स्थापन: 100 साल बाद वन्य इतिहास का नया अध्याय






 




  मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग एक सदी बाद जंगली भैंसा (Wild Buffalo) की वापसी ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पल दर्ज किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ करते हुए इसे प्रदेश की जैव-विविधता के लिए एक निर्णायक कदम बताया।

कान्हा टाइगर रिजर्व बना पुनर्स्थापन का केंद्र

 असम के प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। पहले चरण में चार जंगली भैंसों—तीन मादा और एक नर—को सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत सुरक्षित बाड़े में छोड़ा गया। सभी भैंस युवा और स्वस्थ हैं, जिससे इनके अनुकूलन की संभावना मजबूत मानी जा रही है।

  मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सिर्फ वन्यजीवों की वापसी नहीं, बल्कि प्रदेश के पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम है।

100 साल बाद वापसी: जैव विविधता को मिलेगा नया जीवन

 मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की प्रजाति लगभग 100 वर्ष पहले विलुप्त हो चुकी थी। वर्तमान में इनकी प्राकृतिक उपस्थिति मुख्य रूप से असम तक सीमित है। ऐसे में यह पुनर्स्थापन परियोजना न केवल एक खोई हुई प्रजाति की वापसी है, बल्कि घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का भी प्रयास है।

जंगली भैंसें घास के मैदानों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। इनके चरने से वनस्पति संतुलन बना रहता है, जिससे अन्य वन्य प्रजातियों को भी लाभ मिलता है।











असम से मध्यप्रदेश तक 2000 किलोमीटर का सफर

 इस परियोजना के तहत 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच काजीरंगा के विभिन्न क्षेत्रों से सात किशोर भैंसों को चयनित किया गया। इनमें से चार भैंसों को 25 अप्रैल 2026 को लगभग 2000 किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व लाया गया।

 यह पूरा ट्रांसलोकेशन अभियान विशेषज्ञ वन अधिकारियों और अनुभवी पशु चिकित्सकों की निगरानी में सम्पन्न हुआ, जिससे जानवरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सका।

वैज्ञानिक अध्ययन ने बताया कान्हा को सबसे उपयुक्त

 भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे अनुकूल स्थान पाया गया। यहां के विस्तृत घास के मैदान, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करते हैं।

वन्य संरक्षण में मध्यप्रदेश की बढ़ती पहचान

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले ही “टाइगर स्टेट” और “चीता स्टेट” के रूप में देश में अपनी पहचान बना चुका है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल वापसी के बाद अब जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन प्रदेश को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

 उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में अन्य विलुप्त या संकटग्रस्त प्रजातियों के पुनर्वास पर भी कार्य किया जाएगा, जिससे प्रदेश की जैव विविधता और समृद्ध हो सके।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

 इस परियोजना से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वन्यजीवों की विविधता बढ़ने से देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

अंतर्राज्यीय सहयोग का मजबूत उदाहरण

 इस अभियान ने असम और मध्यप्रदेश के बीच सहयोग का एक नया अध्याय भी जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत बिस्वा सरमा के साथ हुई चर्चा को इस परियोजना की सफलता का आधार बताया।

भविष्य की दिशा: संतुलित विकास और संरक्षण

 जंगली भैंसों की यह वापसी केवल एक प्रजाति का पुनर्स्थापन नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। मध्यप्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है।


मध्यप्रदेश कैडर के डॉ. ए. अंसारी सेंट्रल जू ऑथोरिटी की ‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ कमेटी में शामिल

Dr. A. Ansari, Madhya Pradesh cadre, Central Zoo Authority, Conservation Breeding Committee, Wildlife Conservation



 

  ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ को वैज्ञानिक दिशा प्रदान करेगी विशेषज्ञ समिति

 डॉ. अंसारी समिति में शामिल होने वाले मध्यप्रदेश कैडर के पहले आईएफएस

  भोपाल : देश में वन्य जीव संरक्षण को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। समिति का गठन देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ गतिविधियों की समीक्षा, मार्गदर्शन और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया है। समिति में पहली बार मध्यप्रदेश कैडर के आईएफएस अधिकारी डॉ. ए. अंसारी को शामिल किया गया है। डॉ. अंसारी प्रदेश के सिवनी में वर्किंग प्लान अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।

   समिति में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें- डॉ. ए. अंसारी (वर्किंग प्लान ऑफिसर, सिवनी, मध्यप्रदेश), डॉ. मनोज वी. नायर (अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, ओडिशा), डॉ. कार्तिकेयन वासुदेवन (वैज्ञानिक, हैदराबाद) और डॉ. अभिजीत पावडे (भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, बरेली) शामिल हैं। समिति का कार्यकाल आदेश जारी होने की तिथि से 6 माह निर्धारित किया गया है। गैर-सरकारी सदस्यों को बैठक शुल्क एवं यात्रा भत्ता केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण द्वारा प्रदान किया जाएगा। प्राधिकरण समिति को आवश्यक प्रशासनिक एवं सचिवीय सहयोग भी उपलब्ध कराएगा।

  ‘‘कंजर्वेशन-ब्रीडिंग’ समिति का गठन देश में वन्यजीव संरक्षण और लुप्तप्राय प्रजातियों के वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन से संरक्षण प्रजनन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी, संगठित और परिणामोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी। इस समिति के गठन से देशभर के चिड़ियाघरों में संचालित संरक्षण प्रयासों को नई दिशा और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  समिति चिड़ियाघरों में संरक्षण प्रजनन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी। इनमें—संरक्षण प्रजनन प्रस्तावों की समीक्षा एवं सिफारिशें, वित्तीय सहायता के प्रस्तावों का परीक्षण, प्राथमिकता वाली प्रजातियों की पहचान और सूची का पुनरीक्षण, समन्वयक और सहभागी चिड़ियाघरों की भूमिका निर्धारित करना,कार्यक्रम के मूल्यांकन और मॉनिटरिंग के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं का विकास, प्रगति रिपोर्ट के लिए प्रारूप तैयार करना और चिड़ियाघरों के मूल्यांकन हेतु प्रश्नावली विकसित करना शामिल हैं। समिति मास्टर प्लान प्रस्तुत करने के लिए प्रारूप भी तैयार करेगी और आवश्यकतानुसार अन्य कार्य भी संपादित करेगी।