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साक्षात्कार: पूजा शांति चौबे — "जज़्बात जो कविता बन गए"







 



  राजस्थान उच्च न्यायालय की अधिवक्ता, लेखिका एवं समाज सेविका पूजा शांति चौबे से उनके नवीनतम काव्य संग्रह "जज़्बात जो कविता बन गए" पर विशेष बातचीत

  पूजा शांति चौबे एक ऐसा नाम है जो कानून, साहित्य और समाजसेवा — तीनों क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय है। राजस्थान उच्च न्यायालय की अधिवक्ता होने के साथ साथ वे एक संवेदनशील लेखिका हैं। उनका पहला अंग्रेज़ी उपन्यास "What's Your Surname" लगभग 450 पृष्ठों का, दो भागों में प्रकाशित हो चुका है, जिस पर वेब सीरीज़ बनने की संभावना है। अब उनका दूसरा लेखन — हिंदी काव्य संग्रह "जज़्बात जो कविता बन गए" — पाठकों के बीच आ चुका है। प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश...

शीर्षक की प्रेरणा: जब भावनाएँ स्वयं कविता बन जाएँ

प्रश्न: "जज़्बात जो कविता बन गए" शीर्षक के पीछे क्या विचार था?

  पूजा जी बताती हैं — "यह शीर्षक उन भावनाओं और आत्मा की अभिव्यक्ति को समेटे हुए है, जहाँ जीवन के विभिन्न पहलुओं को कविता में ढालना था। जीवन में कुछ भाव हमें इतनी गहराई से महसूस होते हैं कि वे अपने आप कविता का स्वरूप लेने लग जाते हैं। वहीं से इस टाइटल की प्रेरणा मिली — आखिर में वो जज़्बात ही थे जो कविता बन गए।"

 व्यक्तिगत या सामाजिक? — अनुभवों की सीमा को पार करती कविता

 प्रश्न: क्या इस पुस्तक की कविताएँ आपके व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरित हैं या समाज के अनुभवों से?

 इस पर वे कहती हैं — "मेरा मानना है कि चाहे अनुभव व्यक्तिगत हों या सामाजिक, वे हमें किसी न किसी स्वरूप में ढालते हैं। कई बार बहुत सारी बातें मिलकर ऐसी भावनाएँ बन जाती हैं कि हम अंतर ही नहीं कर पाते कि कौन सा भाव कहाँ से उत्पन्न हुआ।"

 वे आगे कहती हैं — "यह कहना गलत होगा कि सम्पूर्ण भावनाएँ मेरी ही हैं। और न ही यह पूर्णतः सामाजिक हैं। ये कविताएँ मेरे व्यक्तिगत या सामाजिक अनुभवों से ऊपर उठकर वे सारे भाव हैं, जो मैंने कहीं देखे, सुने, मेरे अंतर्मन में प्रकट हुए और जिन्हें मैंने गहराई से महसूस किया।"

'बियॉन्ड लाइफ' — दो अध्याय जो सबसे करीब हैं

 प्रश्न: क्या इस पुस्तक का कोई ऐसा अध्याय है जो आपके सबसे अधिक करीब है?

 पूजा जी का जवाब — "अगर एक या दो चुनने हों, तो पहला — 'मृत्यु एक अंत नहीं, अल्पविराम है' और दूसरा — 'अधूरी मोहब्बत'।"

  वे समझाती हैं — "बाकी अध्याय वर्तमान जीवन की बात करते हैं, लेकिन मृत्यु वाला अध्याय एक अलग जीवन की संभावना की बात करता है — आत्मा अविनाशी है, वह दोबारा कहीं और जन्म लेगी। यानी एक अंत के बाद भी एक संभावना है। और 'अधूरी मोहब्बत' में विभिन्न कविताओं के माध्यम से एक प्रेमी जोड़े के उस वादे को व्यक्त किया गया है, जहाँ वे अगले जन्म में मिलने की बात करते हैं। क्योंकि वे इस जन्म में किसी कारणवश नहीं मिल पाए। इन दोनों अध्यायों में 'बियॉन्ड लाइफ' जैसी गहराई है।"

कविता: साहित्य या आत्मा की अभिव्यक्ति?

 प्रश्न: आपके अनुसार कविता केवल साहित्य है या आत्मा की अभिव्यक्ति?

 उनका उत्तर स्पष्ट है — "मेरे लिए तो आत्मा की अभिव्यक्ति है। और वही आत्मा की अभिव्यक्ति आगे चलकर साहित्य का रूप ले लेती है।"

अधूरापन और पूर्णता का द्वंद्व

प्रश्न: क्या अधूरापन भी इंसान को पूर्ण बना सकता है?

 इस गहन प्रश्न पर वे कहती हैं — "जब आप दुनिया के बहुत सारे लोगों से बात करते हैं, तो पाते हैं कि हर इंसान किसी न किसी प्रकार से अधूरा है। लेकिन फिर भी उनमें पूर्णता है — वे एक जगह रुके नहीं हैं, वे चल रहे हैं, लड़ रहे हैं।"

  वे आगे बताती हैं — "किसी ख्वाहिश का पूरा न होना नई ख्वाहिशों को जन्म देता है, किसी इंसान का न मिलना नए इंसानों से मिलवाता है, और किसी सपने का टूटना नई अपॉर्च्युनिटीज़ और नए सपने लेकर आता है। अधूरापन तो है, क्योंकि जो नहीं मिल पाया उसका मलाल रहेगा — लेकिन जो उसकी वजह से मिल गया, वह भी तो कहीं न कहीं पूर्णता ला ही रहा है।"

  लेखन की प्रक्रिया: भावनाओं के साथ जीने का समय

 प्रश्न: क्या आप नियमित रूप से लिखती हैं या भावनाएँ आने पर?

 पूजा जी बताती हैं — "नहीं, मैं नियमित रूप से नहीं लिखती। मुझे लिखने के लिए उस 'स्टेट ऑफ माइंड' में जाना पड़ता है — थोड़ा आइसोलेट करना पड़ता है, क्योंकि किसी भी बात को लिखने के लिए मुझे उस भाव में डूबना पड़ता है।"

 वे कहती हैं — "बहुत सारे दिनों में से कुछ ही दिन ऐसे होते हैं जब मैं किसी एक भाव को लेकर बैठ जाती हूँ। वह रोज़ नहीं होता, क्योंकि रोज़ किसी एक भाव के साथ जीवन नहीं चल सकता।"

 लेखन या जीवन — किसने किसको बदला?

प्रश्न: क्या लेखन ने आपको बदला है?

 उनका जवाब — "लेखन ने मुझे नहीं बदला। जीवन ने मुझे बहुत प्रकार से बदला है, और उसी वजह से लेखन है, और लेखन में विविधता भी है।"

 वे कहती हैं — "कई बार लोगों के लिए आश्चर्य होता है कि कोई इंसान इतने अलग अलग विषयों पर कैसे लिख सकता है। लेकिन जीवन ने मुझे विभिन्न प्रकार से बदला है। और मैं एक संवेदनशील इंसान हूँ — किसी भी बात को बहुत गहराई से महसूस करती हूँ, इसलिए अलग अलग विषयों पर लिखना मेरे लिए आसान हो जाता है।"

लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी

 प्रश्न: आपके अनुसार एक लेखक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी क्या होती है?

 पूजा जी कहती हैं — "एक लेखक की जिम्मेदारी यह होती है कि वह ऐसा लेखन करे जिसमें पाठक डूब पाए — लेकिन साथ ही अपनी किताब को ऐसी रूपरेखा दे कि जब पाठक पढ़कर बाहर निकले, तो उस विषय से संबंधित उसकी समझ पहले से बेहतर हो चुकी हो। वह किसी भँवर में न रह जाए, बल्कि वहाँ से कुछ सीखकर और समझकर जीवन में आगे बढ़े।"

पाठकों के लिए संदेश: "मरने से पहले जी लेना चाहिए"

 प्रश्न: "जज़्बात जो कविता बन गए" पढ़ने के लिए आप पाठकों से क्या कहना चाहेंगी?

 अपने पाठकों से बातचीत के अंत में पूजा जी का संदेश अत्यंत मार्मिक है —

 "मरने से पहले हमें जी लेना चाहिए। सारी अधूरी बातों को पूरा कर लेना चाहिए। कभी किसी से कुछ कहना था, तो कह देना चाहिए। कोई इकरार था, तो कर देना चाहिए। कब, कैसे और किस विषय पर क्या महसूस किया, वह भी बता देना चाहिए।"

 "दुनिया की भीड़ से कभी हटकर खुद को भी ढूँढ़ना चाहिए। और जो लोग आज हमारे पास हैं, उनकी अहमियत समय रहते समझ लेनी चाहिए।"

 पूजा शांति चौबे का यह साक्षात्कार केवल एक किताब की चर्चा नहीं है — यह जीवन, मृत्यु, प्रेम, वियोग, अधूरापन और पूर्णता के दार्शनिक पक्षों को उजागर करता है। उनकी कविताएँ, उनके शब्द और उनका दृष्टिकोण यह सिखाता है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों को समझने और जीवन को बेहतर ढंग से जीने का एक माध्यम है।

"जज़्बात जो कविता बन गए" सिर्फ एक किताब नहीं — यह उन सभी भावनाओं का आईना है, जिन्हें हम अक्सर जीते तो हैं, पर कभी कह नहीं पाते।

प्राण वायु का स्थाई प्रबंध है एक पेड़ मां के नाम अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव







 


वृक्ष जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी
इन्दौर में हुई 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना के महाभियान की शुरुआत
मुख्यमंत्री ने अपनी माताश्री की स्मृति में संतरे का पौधा लगाकर किया महाभियान का शुभारंभ
पौधरोपण एवं जल बचाने में सहयोगी पृथ्वी संस्था और नक्सल उन्मूलन में सेवाएं दे चुके बीएसएफ के 2 जवानों को दिए जाएंगे 2-2 लाख रुपये
मुख्यमंत्री डॉ. यादव इंदौर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम में हुए शामिल



 इंदौर । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जो हमें जीवन दें, सद्मार्ग पर ले जाए, वह सदैव वंदनीय है। हमारे लिए प्रकृति ही परमेश्वर के स्वरूप है, क्योंकि यह हमें जीवन देती है, हमारा उदर-पोषण करती है। इसलिए हम सबको प्रकृतिपूजक बनकर इसकी वंदना करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का आधार भी हैं और वसुधा का श्रृंगार भी। वृक्ष ऋषि मुनियों के समान एक ही स्थान पर रहकर साधना करते हैं। यह हमारी नकारात्मक ऊर्जा को स्वयं ग्रहण कर हमें सकारात्मक ऊर्जा (प्राण वायु) देने वाले उदार साधक होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंजर भूमि को हरियाली की चादर ओढ़ाना प्रकृति माता को हरी चुनरी ओढ़ाने जैसा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर चलाया जा रहा है 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान कोई शासकीय कार्यक्रम नहीं, ये जीवन के लिए सांसों का स्थायी प्रबंध करने का अभियान है। जल, जंगल, जमीन और जानवर जिनसे हमारा पारिस्थितिकीय-तंत्र तैयार होता है, यह अभियान इनकी सुरक्षा का मिशन है।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव रविवार को इन्दौर जिले के ग्राम बुढ़ानिया स्थित सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) परिसर में आयोजित पौधरोपण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने यहां अपनी पूजनीय माता स्व. श्रीमती लीला बाई यादव की स्मृति में संतरे का फलदार पौधा लगाकर इन्दौर में 21 लाख पौधारोपण एवं 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयों की स्थापना (निर्माण) कार्य के महाभियान का दीप प्रज्ज्‍वलन कर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में पंच महाभूतों का मान्यता मिली है। इसमें सबसे प्रमुख है जल। जल से ही हमारा जीवन है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान तथा जल, जंगल एवं पर्यावरण बचाने के पुनीत महाभियान में पूरे समाज की सहभागिता बेहद सराहनीय है। हम सबको मिलकर इस दिशा में आगे आना ही चाहिए।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पौधरोपण एवं जल संचयन में सरकार और समाज की सहयोगी सामाजिक संस्था पृथ्वी को प्रोत्साहन स्वरूप 2 लाख रुपये और प्रदेश में चलाए गए नक्सल उन्मूलन अभियान में उल्लेखनीय सेवाएं देने वाले बीएसएफ के दो जवानों को मंच से सम्मानित कर 2-2 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।

इंदौर ने दिखाई जल संरक्षण में बेहतर करने की दिशा

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मां अहिल्या की नगरी इंदौर अतीत के उस गौरवशाली पृष्ठ के रूप में जानी जाती है, जिसने सनातन संस्कृति को पुनर्जीवित किया। देवी अहिल्या माता ने अपने शासनकाल में अपने मूल उत्तरदायित्व के साथ-साथ प्रकृति के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर कुंए और बावड़ियां बनाई। उन्हीं से प्रेरणा लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने जल संरक्षण की दिशा में नदी, तालाब, कुंए, बावड़ियों की सफ़ाई और इनके पुनर्निर्माण का अभियान चलाया है। इंदौर में बड़े पैमाने पर जल संरक्षण का काम हुआ। इंदौर ने देश को जल संरक्षण की दिशा दिखाई है। इससे देश में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में अलनीनो जैसी जलवायु से जुड़ी चुनौती हमारे सामने हैं। ऐसे में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पौधरोपण ही सबसे प्रभावी उपाय है। 'एक पेड़ - मां के नाम' अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन्दौर जब भी कुछ करता है, रिकार्ड ही बनाता है। जल हो या जंगल, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इन्दौर में बहुत अच्छा काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि पौधरोपण अभियान में 8 से 10 फिट के पौधे लगाए जा रहे हैं, जो जल्दी ही बड़े होकर फल देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह इस अभियान तीसरा साल है और हर साल इसमें समाज की सहभागिता बढ़ती ही जा रही है। अगले तीन दिनों में यहां 1 लाख से अधिक वन प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने इस अमृत हरित महोत्सव-2026 में इन्दौर जिले में 21 लाख पौधे लगाने का संकल्प लेने के लिए जिलेवासियों को बधाई दी।

  वरिष्ठ विधायक एवं प्रदेशाध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि इन्दौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ अब पर्यावरण संरक्षण की दिशा तय कर रहा है। 'एक पेड़ - मां के नाम' के तहत 21 लाख पौधे लगाने के संकल्प का महाभियान नि:संदेह बेहद सराहनीय है।

  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि धरती माता ने हमें जल, जंगल, जैव संपदा और खनिजों का अमूल्य आर्शीवाद दिया है। हमारा मध्यप्रदेश प्रकृति पुत्र है। एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए पूरा इंदौर जुट गया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आहृवान पर यह अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है।

 इंदौर महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि हम राज्य सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान को और गति दे रहे हैं। हम 51 हजार वर्षा जल संचयन इकाइयां बनाने के लक्ष्य की दिशा में अब तक 8 हजार 500 जल इकाइयां बना चुके हैं। इंदौर में जल संवर्धन को हमने जन क्रांति का रूप दे दिया है।

 कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल, जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, इंदौर सांसद श्री शंकर लालवानी, वरिष्ठ समाजसेवी श्री अजय जामवाल, वरिष्ठ नेता श्री कृष्णमुरारी मोघे, पूर्व मंत्री एवं विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया, विधायक श्री मधु वर्मा, विधायक श्री रमेश मेंदोला, विधायक श्री गोलू शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीना सतीश मालवीय, श्री श्रवण चावड़ा, श्री विशाल पटेल, श्री सुमित मिश्रा, पूर्व विधायक श्री आकाश विजयवर्गीय सहित बीएसएफ के आईजी श्री सिंधु, पौधारोपण और जलसंरक्षण को जन आंदोलन बनाने वाली सभी धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, स्वंयसेवी संस्थाओं के स्वंयसेवक तथा बड़ी संख्या में बीएसएफ के जवान उपस्थित थे।

ईमानदारी की मिसाल बने प्रतीक कुमार जैन: सड़क पर मिला महंगा मोबाइल मालिक तक सुरक्षित पहुँचाया








 





  राजगढ़ (धार) – आज के दौर में जहाँ भौतिकता ने मानवीय मूल्यों को कहीं पीछे छोड़ दिया है, वहीं राजगढ़ निवासी प्रोफेसर आर.के. जैन के पुत्र प्रतीक कुमार जैन ने अपनी सजगता, संवेदनशीलता और ईमानदारी से एक मिसाल कायम की है।

  हाल ही में प्रतीक कुमार जैन अपने परिवार के साथ मोहनखेड़ा जैन तीर्थ के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान सड़क किनारे उन्हें एक प्रतिष्ठित कंपनी का अत्याधुनिक एवं महंगा मोबाइल पड़ा हुआ मिला। बिना किसी लालच या झिझक के उन्होंने तुरंत अपनी कार रोकी, मोबाइल सुरक्षित उठाया और निर्णय लिया कि इसे बिना किसी देरी के उसके असली मालिक तक पहुँचाया जाएगा।

   इस संबंध में प्रतीक जैन ने तत्काल सरदारपुर एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार को पूरी स्थिति से अवगत कराया और मोबाइल के हालिया कॉल विवरण के आधार पर मालिक के पुत्र से संपर्क स्थापित किया। उस समय तक परिवार मोहनखेड़ा से काफी आगे झाबुआ तक पहुँच चुका था। सूचना पाकर वे तुरंत वापस लौटे।

  बाद में पता चला कि यह मोबाइल संजेली (जिला दाहोद, गुजरात) निवासी ललित कुमार बाबूलाल जैन की धर्मपत्नी विमला जैन का था।

  प्रतीक कुमार जैन ने अपने निजी निवास पर एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार की उपस्थिति में यह मोबाइल उसके वास्तविक स्वामियों को सुरक्षित और सकुशल सौंप दिया। इस परिवार ने मोबाइल वापस पाकर प्रतीक जैन के इस सराहनीय कृत्य के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया तथा उनकी निष्ठा व मानवीय दृष्टिकोण की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

  प्रोफेसर आर.के. जैन के पुत्र के इस कार्य ने यह सिद्ध कर दिया है कि ईमानदारी, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी आज भी जीवित हैं। एक छोटी-सी सजगता न केवल किसी की बड़ी परेशानी दूर कर सकती है, बल्कि समाज में विश्वास को भी पुनर्स्थापित करती है।

  इस उत्कृष्ट कार्य की जानकारी मिलने पर राजगढ़ थाना प्रभारी समीर पाटीदार ने भी प्रतीक कुमार जैन को उनकी इस अनुकरणीय पहल,जिम्मेदारी और सामाजिक मूल्यों के प्रति समर्पण के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

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धार में कलेक्टर का सख्त फरमान: 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' अभियान शुरू,6 सितंबर तक रहेगा प्रभावी








 





   धार। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही निरंतर वृद्धि और उनमें होने वाली जनहानि को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने एक अत्यंत कठोर कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी श्री राजीव रंजन मीना ने भारतीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करते हुए जिले में 'नो हेलमेट, नो पेट्रोल' व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी है। अब जिले की राजस्व सीमा के भीतर बिना हेलमेट पहने दोपहिया वाहन चालकों को किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिलेगा।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 129 के अनुसार दोपहिया चालकों के लिए आई.एस.आई. मार्का हेलमेट पहनना अनिवार्य है। यह प्रतिबंध 10 जुलाई 2026 से प्रभावी होकर 06 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा। आदेश के अनुसार, केवल चिकित्सा संबंधी आपातकालीन स्थितियों (Medical Emergency) में ही इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। यदि कोई पेट्रोल पंप संचालक बिना हेलमेट वाले चालकों को ईंधन देता है या आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।

   इस अभियान को धरातल पर कड़ाई से लागू करने के लिए जिला दंडाधिकारी ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है और इसके लिए विशेष औचक निरीक्षण टीमों का गठन किया गया है। जिले के प्रत्येक अनुभाग में अनुविभागीय दंडाधिकारियों (SDM) के नेतृत्व में तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों, राजस्व निरीक्षकों, पटवारियों, पुलिस और खाद्य विभाग के अधिकारियों की टीमें तैनात की गई हैं, जो नियमित रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करेंगी।

   अभियान की निगरानी हेतु धार और पीथमपुर के लिए श्रीमती अंकिता प्रजापति, बदनावर के लिए श्रीमती प्रियंका जिमरोट, सरदारपुर के लिए श्रीमती सलोनी अग्रवाल, मनावर/गंधवानी व धरमपुरी के लिए श्री प्रमोद गुर्जर तथा कुक्षी/डही के लिए श्री विशाल धाकड़ को प्रभार सौंपा गया है। जिला प्रशासन ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को चेतावनी दी है कि वे नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें, अन्यथा उन्हें कठोर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे सड़क सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण निर्णय में सहयोग करें और स्वयं की सुरक्षा के लिए हेलमेट का अनिवार्य रूप से उपयोग करें।

पौधा आप लगाए,पेड़ हम बनाएंगे": डॉ.बलबहादुरसिंह राठौड़







 



  राजगढ़ (धार)। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से आज श्री खेड़ापति हनुमानजी मंदिर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन भाजपा नेता डॉ बलबहादुरसिंह राठौड़ एवम डॉक्टर एसोसिएशन के द्वारा वरिष्ठ डॉक्टर श्री एमएल जैन के मुख्य आतिथ्य में किया गया।भाजपा नेता डॉ बलबहादुरसिंह ने कहाँ की पौधा आप लगाए पेड़ हम बनाएँगे एक अभियान का रूप ले चुका है।उनके द्वारा इस वर्षाकाल में क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर 1008 पौधे लगाए जाने का लक्ष्य रखा गया है और उन्हें पौधे से पेड़ बनाने तक देखरेख करने का उद्देश्य भी है।

 कार्यक्रम में भाजपा नेता निलेश सोनी भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला सह संयोजक डॉ आशीष वैद्य ,डॉ जेपी कोठारी,डा नंदन वैद्य,डॉ सुमित जैन,डॉ प्रणेता जायसवाल,डॉ सीमा कटारा भाजयुमो के महेंद्र राजपूत,ओम यादव सहित पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।मुख्य अतिथि डॉ. एमएल जैन ने पौधारोपण को समय की मांग बताते हुए कहा कि डॉक्टर होने के नाते हमारा कर्तव्य है कि हम स्वस्थ समाज के साथ-साथ स्वस्थ पर्यावरण के लिए भी काम करें। एक पेड़ सैकड़ों लोगों को जीवन देता है।

 कार्यक्रम में सभी ने मिलकर पौधा लगाया और उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया। उपस्थित सभी लोगों ने पर्यावरण बचाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री के आगामी दौरे की तैयारियों को लेकर कलेक्टर व एसपी ने किया स्थल निरीक्षण,दिए आवश्यक निर्देश






 



   धार । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आगामी धार जिले में प्रस्तावित कार्यक्रम और 'राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन' की तैयारियों को लेकर प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय हो गया है। आज कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना ने कार्यक्रम स्थल और हेलीपेड का औचक निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

राजेन्द्रसुरी महाविद्यालय परिसर में होगा आयोजन

  यह राज्य स्तरीय सहकारिता सम्मेलन सरदारपुर के राजगढ़ स्थित राजेन्द्रसुरी महाविद्यालय परिसर में आयोजित किया जाएगा। कलेक्टर श्री मीना ने आज महाविद्यालय परिसर पहुंचकर कार्यक्रम स्थल, हेलीपेड, मंच निर्माण, बैठक व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल और सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की।

अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

  निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना के साथ पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक चौधरी, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सहित संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुख्यमंत्री के आगमन और सहकारिता सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां समय-सीमा के भीतर और उच्च मानकों के अनुरूप पूरी कर ली जाएं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और आमजन की सुविधाओं को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देश दिए।
        पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा ने कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। जिला प्रशासन ने इस गरिमामयी कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा है।

श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट व चातुर्मास समिति के नेतृत्व में धर्मयात्रा संपन्न,संतों के सानिध्य में हुआ दर्शन-लाभ







 




  राजगढ़ (धार) - राजगढ़, श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट के ट्रस्टी, चारथूई श्रीसंघ अध्यक्ष, गौरव जैन {नाना सेठ} एवं आत्मलक्षी चातुर्मास समिति अध्यक्ष हर्षित पोसित्रा "बल्ली" के नेतृत्व में 20 सदस्यों की टीम ने एक दिवसीय यात्रा का आयोजन संपन्न किया गया।

  इस यात्रा में सर्वप्रथम नामली के पास सेमलियाजी तीर्थ, सोलहवें तीर्थंकर शांतिनाथ जी भगवान के मंदिर में दर्शन, सेवा, पूजा एवं भोजन का लाभ लिया। तत्पश्चात जावरा में स्थित शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर में दर्शन, सेवा, पूजा का लाभ लिया गया।

  इसके पश्चात साध्वी श्री हेमेंद्र श्रीजी महाराज साहब के सानिध्य में, पांच आदि ठाणा के दर्शन-वंदन एवं राजगढ़ नगर चातुर्मास संबंधी मीटिंग हुई जिसमें चातुर्मास संबंधी कई बिंदुओ पर चर्चा एवं कार्यक्रम की रूपरेखा बनाई गई!

  तत्पश्चात रतलाम के पास में शिवगढ़ में, विराजमान साध्वी श्री हेमप्रज्ञा श्रीजी महाराज साहब छ. आदि ठाणा एवं राजगढ़ रत्ना.. पारख परिवार की कुल दीपिका साध्वी श्री सिद्धर्षिनिधि म.सा. एवं साध्वी श्री राजर्षिनिधि म.सा. के तृतीय दीक्षा दिवस के उत्सव पर राजगढ़ चारथूई श्री संघ दर्शन लाभ लिया। साध्वी श्री के सानिध्य में शीतलनाथ जी भगवान के मंदिर में दर्शन-वंदन का लाभ लिया गया।

 यह धर्म यात्रा का दिनांक 7 जुलाई 2026, मंगलवार को संपन्न हुई ।