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AI के विस्तार को लेकर CTO का विश्वास लगातार तीसरे साल कमजोर पड़ा: अक्कोडिस रिपोर्ट

"CTO क्या सोचते हैं 2026: आत्मविश्वास के साथ एजेंटिक उद्यम का विस्तार" में पहली बार यह बताया गया है कि डिजिटल निवेश का मुख्य चालक नवाचार (innovation) है, न कि कार्यक्षमता। यह कॉस्ट-फोकस्ड ऑप्टिमाइजेशन से विकास की ओर बढ़ने का संकेत देता है

ज्यूरिख, स्विट्जरलैंड
डिजिटल इंजीनियरिंग कंसल्टिंग में ग्लोबल लीडर और एडेको ग्रुप का हिस्सा, अक्कोडिस की आज जारी नई रिसर्च से पता चलता है कि AI को बढ़ाने में CTO का भरोसा कम हो रहा है, जो 2024 में 82% से घटकर 2026 में 48% हो जाएगा - भले ही AI अपनाने में तेज़ी आ रही है और कंपनियों पर बड़े पैमाने पर अपने मकसद को पूरा करने का दबाव बढ़ रहा है।
व्हाट CTOs थिंक 2026: एजेंटिक एंटरप्राइज को कॉन्फिडेंस के साथ बढ़ाना

अक्कोडिस की 'व्हाट CTOs थिंक' रिपोर्ट के तीसरे एडिशन, 'व्हाट CTOs थिंक 2026: स्केलिंग द एजेंटिक एंटरप्राइज विद कॉन्फिडेंस' में 500 चीफ तकनीक ऑफिसर्स (CTOs) की इनसाइट्स शामिल हैं, जो एडेको ग्रुप के बिजनेस लीडर्स 2026 रिसर्च का हिस्सा हैं, जिसमें 2,000 C-सूट एग्जीक्यूटिव्स, द ह्यूमन प्रीमियम: लीडरशिप बियॉन्ड द एल्गोरिदम शामिल हैं । यह स्पष्ट करता है कि AI में निवेश लगातार बढ़ रहा है, लेकिन संगठनों के लिए चुनौती तकनीक तक पहुँच नहीं, बल्कि AI को अपनी प्रणालियों, कार्यप्रवाहों और निर्णय-प्रक्रिया में प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट करना है।

एजेंटिक AI एक खास एंटरप्राइज ट्रेंड के तौर पर उभरा है
रिसर्च में एजेंटिक AI - यानी ऐसे सिस्टम जो योजना बनाने, फैसले लेने और काम पूरा करने में सक्षम हैं - को 2026 में संगठनों को आकार देने वाला सबसे असरदार तकनिकी ट्रेंड बताया गया है, जिसे 40% CTO ने असर का सबसे बड़ा कारण बताया है। यह बदलाव AI को काम में मदद करने वाले टूल से एक ऐसे टूल में बदलने का संकेत देता है जो काम पूरा करने में सक्रिय रूप से हिस्सा लेता है - जिससे गवर्नेंस, जवाबदेही और ऑपरेटिंग मॉडल डिज़ाइन के लिए नई ज़रूरतें शुरू होती हैं।

लेकिन, बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद, ज़्यादातर संगठन अभी भी इन सिस्टम को असरदार तरीके से बढ़ाने के लिए ज़रूरी स्ट्रक्चर नहीं बना पाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार आधे से ज़्यादा CTO (57%) ने बताया कि वे यह पता लगाने के लिए AI का इस्तेमाल करते हैं कि इंसानों के लिए कौन से काम सबसे अच्छे हैं और कौन से मशीनों के लिए, लेकिन कार्यों के स्पष्ट विभाजन को लेकर अभी भी स्पष्टता की कमी बनी हुई है, जो प्रगति में बाधा डाल रही है।

AI को बढ़ाने में कंपनियों को मुश्किल क्यों होती है?
नतीजे एक साफ़ बदलाव की ओर इशारा करते हैं: चुनौती अब AI को डिप्लॉय करना नहीं है, बल्कि इसे एंटरप्राइज़ के काम करने के तरीके में इंटीग्रेट करना है। जैसे-जैसे संगठन पायलट प्रोग्राम से आगे बढ़ते हैं, लीडरशिप अलाइनमेंट, गवर्नेंस और वर्कफ़ोर्स ट्रस्ट में एग्ज़िक्यूशन की जटिलता बढ़ती जाती है:
  • सिर्फ़ 44% CTO मानते हैं कि लीडरशिप टीमों को AI की काफ़ी समझ है
  • केवल 46% ज़िम्मेदार AI के लिए स्थापित फ्रेमवर्क की रिपोर्ट
  • केवल 36% लोग वर्कफोर्स ट्रस्ट स्तर से संतुष्ट हैं
CTOs द्वारा बताई गई लगातार रुकावटें प्रोग्रेस को रोक रही हैं:
  • इन-हाउस तकनिकी योग्यता की कमी (32%)
  • निवेश पर रिटर्न को लेकर अनिश्चितता (31%)
  • बिज़नेस स्तर पर अर्जेंसी की कमी (27%)
कुल मिलाकर, इन नतीजों से पता चलता है कि AI को बढ़ाना तकनीक की रुकावट नहीं, बल्कि एक ऑपरेशनल चुनौती बनता जा रहा है, जिसके लिए संगठनों को सिस्टम, प्रोसेस और निर्णय-प्रक्रिया के एक साथ काम करने के तरीके को फिर से डिज़ाइन करने की ज़रूरत है।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्षमता से नवाचार (innovation) की ओर शिफ्ट होता है
रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि संगठन डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की वैल्यू को कैसे परिभाषित करते हैं, इसमें एक बड़ा बदलाव आया है। पहली बार, CTOs ने डिजिटल के मुख्य चालक के तौर पर कार्यक्षमता को नहीं, बल्कि नवाचार (innovation) को बताया है, जो कॉस्ट-फोकस्ड ऑप्टिमाइज़ेशन से विकास, डिफरेंशिएशन और नए बिज़नेस मॉडल की ओर बढ़ने का संकेत देता है।

जैसे-जैसे AI की क्षमताएं बढ़ रही हैं, कार्यक्षमता से होने वाले मामूली फायदे कम हो रहे हैं, जिससे कॉम्पिटिटिव एडवांटेज के सोर्स के तौर पर नवाचार (innovation) की अहमियत बढ़ रही है। हालांकि यह बदलाव ग्लोबल है, लेकिन इंडस्ट्री के हिसाब से प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं - एयरोस्पेस में वर्कफोर्स डेवलपमेंट से लेकर लाइफ साइंसेज में नवाचार (innovation) एक्सेलरेशन और एनर्जी में रेजिलिएंस तक - जो AI को बढ़ाने के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक अप्रोच की ज़रूरत को दिखाता है।

AI काम को नया आकार दे रहा है, खत्म नहीं कर रहा
बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने के बजाय, AI योग्यता और कार्य के स्तर पर काम के स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल रहा है:
  • 50% CTOs ने ज़रूरी योग्यता में बदलाव की रिपोर्ट दी
  • 49% लोगों ने रोज़मर्रा की गतिविधियों में बदलाव की बात कही
  • सिर्फ़ 21% लोगों ने AI की वजह से वर्कफ़ोर्स में कमी की बात कही
इससे संगठनों के लिए हाइब्रिड ह्यूमन-AI वर्कफ़ोर्स को सपोर्ट करने के लिए कार्यप्रवाहों और ज़िम्मेदारियों को रीडिज़ाइन करने की ज़रूरत और बढ़ जाती है।

अक्कोडिस के प्रेसिडेंट और CEO Jo Debecker ने कहा, "अभी हम जो देख रहे हैं, वह AI अपनाने में कमी नहीं है, बल्कि यथार्थवाद को समझने का पल है। "संगठन अब प्रयोग से आगे बढ़ रहे हैं और मुश्किल माहौल में AI को बढ़ाने की असलियत का सामना कर रहे हैं। चुनौती अब AI को डिप्लॉय करना नहीं है, बल्कि इसे काम करने के तरीके में इंटीग्रेट करना है। जो कंपनियाँ तरक्की कर रही हैं, वे अपने ऑपरेटिंग मॉडल को रीडिज़ाइन कर रही हैं, तकनीक, ह्यूमन एक्सपर्टीज़ और गवर्नेंस को एक जैसा करके लगातार नतीजे दे रही हैं।"

पायलट से लेकर ऑर्केस्ट्रेशन तक: AI को बढ़ाने के लिए एक नए ऑपरेटिंग मॉडल की ज़रूरत है
रिपोर्ट में तीन उभरते हुए संगठनात्मक तरीकों की पहचान की गई है:
  • कार्य ऑटोमेटर्स - मुख्य रूप से कार्यक्षमता के लिए AI का इस्तेमाल करना
  • पायलट ऑपरेटर्स - AI के साथ प्रयोग कर रहे हैं लेकिन स्केल करने में मुश्किल हो रही है
  • एंटरप्राइज़ ऑर्केस्ट्रेटर - कार्यप्रवाहों और फ़ैसले लेने में AI को शामिल करना
जो संगठन सफल होते हैं, वे अलग-अलग पायलट से आगे बढ़कर सिस्टम, प्रोसेस और टीम में AI को ऑर्केस्ट्रेट करते हैं, और ऐसे नतीजे देने के लिए तकनीक को इंसानी एक्सपर्टीज़ के साथ इंटीग्रेट करते हैं जिन्हें मापा जा सके।

पूरी रिपोर्ट यहां देखें

अक्कोडिस के बारे में
अक्कोडिस एक ग्लोबल डिजिटल इंजीनियरिंग कंसल्टिंग कंपनी है जो संगठनों को टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इनोवेशन करने और तेज़ी से आगे बढ़ने में मदद करती है, ताकि प्रक्रियाओं और उत्पादों को बनाने, चलाने और बेहतर बनाने के तरीकों को नए सिरे से परिभाषित किया जा सके। AI, डेटा, क्लाउड, एज और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में गहरी विशेषज्ञता के साथ, यह कंपनी उच्च-स्तरीय तकनीकी कंसल्टेंसी सेवाएं प्रदान करती है। मजबूत और स्केलेबल डिलीवरी मॉडल तथा विशेषज्ञ प्रतिभा के माध्यम से, यह रणनीति और कंसल्टिंग से लेकर कार्यान्वयन तक एंड-टू-एंड समाधान देती है। अक्कोडिस इंटेलिजेंस के माध्यम से यह कंपनी तकनीक की शक्ति को मानव सोच और सहयोग के साथ जोड़कर व्यवसायों को बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करती है। यह एडेको ग्रुप का हिस्सा है और इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड में है। अक्कोडिस के पास 30 से अधिक देशों में 40,000 इंजीनियर और डिजिटल विशेषज्ञ हैं। इसकी सेवाएं कंसल्टिंग, सॉल्यूशंस और एकेडमी के रूप में उपलब्ध हैं। दुनिया के प्रमुख उद्योगों में अपने अनुभव के साथ, अक्कोडिस, कंपनियों को जटिल चुनौतियों को हल करने और स्थायी (sustainable) प्रभाव बनाने में मदद करती है।


एडेको ग्रुप के बारे में
एडेको ग्रुप दुनिया की सबसे बड़ी टैलेंट कंपनी है। हमारा मकसद है कि भविष्य में काम करने का मौका हर किसी को मिले। अपनी तीन ग्लोबल बिज़नेस यूनिट्स -एडेको, अक्कोडिस और LHH - के ज़रिए, हम 60 देशों में लोगों के लिए टिकाऊ और ज़िंदगी भर काम करने लायक रोज़गार के मौके बनाते हैं; बदलाव लाने के लिए डिजिटल और इंजीनियरिंग समाधान देते हैं; और संगठनों को अपने वर्कफ़ोर्स को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। एडेको ग्रुप खुद मिसाल बनकर आगे बढ़ता है और एक समावेशी संस्कृति को बढ़ावा देने, स्थायी रोजगार क्षमता (employability) विकसित करने, और मज़बूत अर्थव्यवस्थाओं और समुदायों को सहारा देने के लिए पूरी तरह से समर्पित है। एडेको ग्रुप AG का हेडक्वार्टर ज़्यूरिख़, स्विट्ज़रलैंड (ISIN: CH0012138605) में है और यह SIX Swiss Exchange (ADEN) पर लिस्टेड है। www.adeccogroup.com

Media Contact Details
ऐनी फ्रेडरिक
अक्कोडिस
SVP, ग्लोबल हेड ऑफ़ कम्युनिकेशंस
+4915174633470
लिसा बुशका
अक्कोडिस
VP, एक्सटर्नल कम्युनिकेशंस
+18604630770

 

पवई तहसील अंतर्गत ग्राम सुनेही में 101 जरूरतमंद बच्चों को वस्त्र वितरित किए गए KHF NGO







 



  पन्ना जिले की पवई तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सुनेही में कौशल्या ह्यूमैनिटी फाऊंडेशन (KHF) द्वारा 101 जरूरतमंद बच्चों को वस्त्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक सहायता पहुंचाना और समाज में मानवता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करना था।

  कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। नए वस्त्र प्राप्त कर बच्चों ने प्रसन्नता व्यक्त की, वहीं उनके अभिभावकों ने भी संस्था के इस प्रयास की सराहना की। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।

 इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल, समाज सेविका अंजू सिंगरौल, समाजसेवी नरेंद्र सिंगरौल एवं संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। संस्था द्वारा भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंद परिवारों की सहायता से जुड़े कार्य निरंतर जारी रखने की बात कही गई।



संघर्ष, सेवा और सामाजिक बदलाव की पहचान: अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल

  पन्ना जिले के पवई क्षेत्र में यदि महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, जनसेवा और सामाजिक जागरूकता की बात की जाए, तो अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। दोनों बहनों ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण किसी भी व्यक्ति को बदलाव का माध्यम बना सकता है।

  अर्चना सिंगरौल का जन्म ग्राम पंचायत सुनवारी से जुड़े किसान परिवार में हुआ। उनका पालन-पोषण पवई में हुआ, जहां उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। लेकिन शिक्षा के साथ-साथ उनके मन में समाज सेवा का भाव भी लगातार विकसित होता रहा।

  अर्चना सिंगरौल ने मात्र 15 वर्ष की आयु से समाज सेवा की शुरुआत कर दी थी। इस दिशा में उन्हें सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी बड़ी बहन अंजू सिंगरौल से मिली। अंजू सिंगरौल लंबे समय से जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और उन्होंने अनेक सामाजिक मुद्दों पर लोगों की आवाज बनने का कार्य किया है।

  एक समय ऐसा था जब पन्ना जिले की अनेक महिलाएं सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर, वीडियो या विचार साझा करने से झिझकती थीं। सामाजिक दबाव और आलोचनाओं के डर से महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाती थीं। ऐसे समय में अंजू सिंगरौल ने साहस के साथ सोशल मीडिया का उपयोग शुरू किया। उन्होंने सामाजिक मुद्दों को उठाया, अपनी बात निडरता से रखी और महिलाओं को यह विश्वास दिलाया कि उनकी आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी और की।

  उनके इस साहस का सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र में देखने को मिला। धीरे-धीरे अनेक महिलाएं सोशल मीडिया से जुड़ीं, अपनी बात रखने लगीं और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने लगीं। यह बदलाव केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में भी दिखाई दिया।

  वर्ष 2023 में अर्चना सिंगरौल ने समाज सेवा को संगठित रूप देने के लिए कौशल्या ह्यूमैनिटी फाऊंडेशन (KHF) की स्थापना की। स्थापना के बाद से संस्था पवई, पन्ना सहित कई जिलों और राज्यों में जरूरतमंद लोगों की सहायता, वस्त्र वितरण, सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और मानव सेवा से जुड़े कार्य कर रही है।

  दोनों बहनों का मानना है कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारों या बड़े संसाधनों से नहीं आता, बल्कि जागरूक नागरिकों और संवेदनशील लोगों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़ी क्रांति लाई जा सकती है। उनका उद्देश्य केवल सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों के भीतर सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करना है।

 आज अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल अनेक युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि इरादे नेक हों और लक्ष्य समाज की भलाई हो, तो साधारण परिवार से निकलकर भी असाधारण बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

समय रैना के साथ विज्ञापन में दिखे मुकेश खन्ना, सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस

 

‘शक्तिमान’ के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाल ही में वह कॉमेडियन और कंटेंट क्रिएटर समय रैना के साथ एक विज्ञापन में नजर आए, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। वायरल हो रहे इस विज्ञापन में मुकेश खन्ना अपने लोकप्रिय ‘शक्तिमान’ अवतार में दिखाई देते हैं। वीडियो में उनकी और समय रैना की बातचीत एक ब्रांड प्रमोशन के इर्द-गिर्द घूमती है। विज्ञापन के अंत में मुकेश खन्ना शक्तिमान के अंदाज में घूमते हुए उड़ जाते हैं और उनका चश्मा नीचे गिर जाता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हालांकि, इस विज्ञापन के सामने आने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मुकेश खन्ना को ट्रोल करना शुरू कर दिया है। लोगों का कहना है कि जिस समय रैना की उन्होंने पहले कड़ी आलोचना की थी, अब उसी के साथ विज्ञापन करना उनके पुराने बयानों के विपरीत नजर आता है। कई यूजर्स ने इस पर ‘सबसे बड़ा रुपैया’ जैसी टिप्पणियां भी की हैं। मुकेश खन्ना और समय रैना के बीच मतभेद पहले भी सार्वजनिक रूप से सामने आ चुके हैं। समय रैना के शो Still Alive में शक्तिमान को लेकर की गई एक टिप्पणी पर मुकेश खन्ना ने कड़ी नाराजगी जताई थी। उस दौरान उन्होंने समय रैना की आलोचना करते हुए कई तीखे बयान दिए थे, जिनकी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।

इसके अलावा, फरवरी 2025 में इंडियाज गॉट लेटेंट विवाद के दौरान भी मुकेश खन्ना ने समय रैना की आलोचना की थी। रणवीर इलाहाबादिया के विवादित बयान के बाद शो को लेकर हुए विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने समय रैना को मुख्य जिम्मेदार ठहराया था और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। वहीं, सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस विज्ञापन को सकारात्मक नजरिए से भी देख रहे हैं। उनका मानना है कि दोनों के बीच लंबे समय से चली आ रही बयानबाजी अब खत्म होती दिखाई दे रही है। हालांकि, कुछ लोगों का कहना है कि यह केवल एक पेशेवर सहयोग है और इसे व्यक्तिगत रिश्तों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

फिलहाल, समय रैना और मुकेश खन्ना का यह विज्ञापन इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक ओर जहां इसे लेकर ट्रोलिंग हो रही है, वहीं दूसरी ओर कई लोग दोनों को एक साथ देखकर हैरानी और खुशी भी जाहिर कर रहे हैं।

जिन्हें हम बचपन में विलेन समझते थे, वही हमारे जीवन के सबसे बड़े हीरो निकले: फादर्स डे पर Pocket FM की खास पेशकश 'The Villain Who Raised Me'

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

हर बच्चे को अपनी कहानी का एक विलेन जरूर याद रहता है।
 
वह शख्स जो हमेशा ‘ना’ कहता था।
 
देर रात बाहर जाने के लिए ना।
 
एक और घंटा टीवी देखने के लिए ना।
 
बाइक के लिए ना।
 
आसान रास्ता चुनने के लिए ना।
 
बहानों के लिए ना।
 
हम में से कई लोगों के लिए बचपन का वह विलेन हमारे पिता थे।

इस फादर्स डे पर Pocket FM लेकर आया है “The Villain Who Raised Me”, एक ऐसा अभियान जो उन पिताओं को समर्पित है जिन्होंने उस समय बच्चों की नाराज़गी और नापसंदगी स्वीकार की, लेकिन उनके बेहतर भविष्य के लिए सही फैसले लेने से कभी पीछे नहीं हटे।

भारतीय सिनेमा के सबसे पहचानने योग्य विलेन किरदारों में से कई को पर्दे पर जीवंत करने वाले वरिष्ठ अभिनेता मुकेश ऋषि के साथ बनाया गया यह अभियान एक बेहद सरल लेकिन सार्वभौमिक सच्चाई को सामने लाता है, कई पिता अपने बच्चों की कहानी में वर्षों तक विलेन बने रहते हैं, लेकिन उनके फैसलों के पीछे छिपी मंशा और प्यार को बच्चे अक्सर बड़े होने के बाद समझ पाते हैं।
 
चाहे अनुशासन बनाए रखना हो, सीमाएं तय करनी हों, कठिन फैसले लेने हों या फिर उस समय पूरी तरह जायज़ लगने वाली किसी मांग को ठुकराना हो, पिता अक्सर वह भूमिका निभाते हैं जिसमें उन्हें बच्चों की नजरों में कठोर या गैर-लोकप्रिय माना जाता है। लेकिन यही पल आगे चलकर उन सीखों, मूल्यों और आदतों की नींव बनते हैं जो हमारे व्यक्तित्व को आकार देते हैं।
 
यह अभियान फादर्स डे को एक अलग नज़रिए से देखने की कोशिश करता है। यहां पिता को उस हीरो के रूप में नहीं दिखाया गया है जो हर समस्या का समाधान लेकर आता है, बल्कि उस अभिभावक के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो किसी बड़े उद्देश्य के लिए गलत समझे जाने का जोखिम उठाता है।
 
इस विचार को जीवंत बनाने के लिए मुकेश ऋषि को चुना गया है, जिन्होंने दशकों तक अपने दमदार विलेन किरदारों से दर्शकों का मनोरंजन किया है। फिल्म में ऋषि एक हल्के-फुल्के अंदाज में उन सभी पिताओं का प्रतिनिधित्व करते नजर आते हैं जिन्हें कभी न कभी उनके बच्चों ने ‘विलेन’ कहा होगा। लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ यह भी सामने आता है कि उन कठिन फैसलों के पीछे प्यार, जिम्मेदारी और त्याग की भावना छिपी होती है।
 
इस अभियान के बारे में बात करते हुए विनीत सिंह, एसवीपी एवं ग्लोबल हेड, ब्रांड मार्केटिंग, कम्युनिकेशंस, पार्टनरशिप्स और पब्लिक अफेयर्स, Pocket FM, ने कहा, "ज्यादातर फादर्स डे कैंपेन पिता को हीरो के रूप में पेश करते हैं। हम पिता की उस भूमिका का सम्मान करना चाहते थे जिसे लगभग हर पिता अपने जीवन में निभाता है अपने बच्चे की कहानी में विलेन बनने की भूमिका। अक्सर वही व्यक्ति होता है जो ‘ना’ कहता है, सीमाएं तय करता है और ऐसे फैसले लेता है जिन्हें उस समय शायद सराहा नहीं जाता। बचपन में हम उन पलों से नाराज़ हो सकते हैं, लेकिन बड़े होने पर हमें एहसास होता है कि उन फैसलों के पीछे सिर्फ प्यार और चिंता थी। ‘The Villain Who Raised Me’ उन सभी पिताओं को हमारी श्रद्धांजलि है जिन्होंने इस बात की परवाह नहीं की कि उस पल हम उनके बारे में क्या सोचते हैं, बल्कि इस बात की परवाह की कि हम आगे चलकर क्या बनेंगे।”
 
अभियान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश ऋषि ने कहा, "हर पिता ने अपने जीवन में कभी न कभी विलेन की भूमिका जरूर निभाई है, और मैंने भी निभाई है। कई बार प्यार का मतलब ‘ना’ कहना होता है। इसका मतलब है सीमाएं तय करना, कठिन फैसले लेना और यह स्वीकार करना कि आपके बच्चे तुरंत आपकी बात नहीं समझ पाएंगे। यही बात इस अभियान को मेरे लिए बेहद व्यक्तिगत और आत्मीय बनाती है। मेरी ऑन-स्क्रीन विलेन की छवि के माध्यम से इस कहानी को कहना इसे और भी खास बना देता है।”
 
Pocket FM की इन-हाउस क्रिएटिव टीम द्वारा तैयार किया गया यह अभियान ब्रांड की उस निरंतर सोच को दर्शाता है, जिसके तहत वह ऐसी कहानियां सामने लाता है जो लोगों के जीवन से जुड़ी वास्तविक भावनाओं, रिश्तों और अनुभवों को छूती हैं।
 

यह फिल्म अब Pocket FM के सोशल मीडिया चैनलों पर लाइव है।
 
YouTube Link: youtu.be/0WAsp_AjU20?si=3UO21PshALyK_tqR

IG Link: www.instagram.com/reel/DZy-cjbsHrS/?igsh=bTZiZjZmZnA1M3R
 

बनारस महाकाल वॉरियर्स: काशी की संस्कृति, गौरव और क्रिकेट प्रतिभा का सशक्त प्रतीक



वाराणसी: काशी की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को क्रिकेट के मैदान पर नई पहचान देने वाली बनारस महाकाल वॉरियर्स आज काशी प्रीमियर लीग (KPL) की सबसे चर्चित और लोकप्रिय फ्रेंचाइज़ियों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रही है। यह टीम केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी की ऊर्जा, संघर्ष, सम्मान और गौरव का प्रतिनिधित्व भी करती है।

बनारस महाकाल वॉरियर्स के प्रमुख संरक्षकों में श्री कन्हैया लाल केशरी (के.के.) का नाम विशेष सम्मान के साथ लिया जाता है। बनारस में के.के. के नाम से प्रसिद्ध कन्हैया लाल केशरी का जन्म वर्ष 1982 में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डीएलडब्ल्यू इंटर कॉलेज से प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा काशी विद्यापीठ से पूरी की। वर्तमान में वे K.K. Enterprises के माध्यम से विभिन्न सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

खेलों के प्रति उनकी गहरी रुचि और युवाओं को आगे बढ़ाने की सोच ने बनारस महाकाल वॉरियर्स को एक नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका स्पष्ट उद्देश्य केवल एक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट टीम का निर्माण करना नहीं, बल्कि बनारस और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद क्रिकेट प्रतिभाओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए एक मजबूत मंच उपलब्ध कराना है।

श्री कन्हैया लाल केशरी के नेतृत्व में टीम अनुशासन, समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन के मूल्यों के साथ निरंतर आगे बढ़ रही है। खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सकारात्मक वातावरण, अनुभवी मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यही कारण है कि आज महाकाल वॉरियर्स युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा और अवसर दोनों का केंद्र बनती जा रही है।

काशी प्रीमियर लीग का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को बड़ा मंच प्रदान करना है, और बनारस महाकाल वॉरियर्स इस मिशन को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रही है। लीग निष्पक्ष चयन प्रक्रिया, पेशेवर क्रिकेट माहौल और देशभर के खिलाड़ियों को अवसर देने के लिए जानी जाती है।

बनारस महाकाल वॉरियर्स की पहचान केवल एक क्रिकेट टीम के रूप में नहीं, बल्कि काशी की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के प्रतिनिधि के रूप में भी स्थापित हो रही है। टीम मैदान पर अपने प्रदर्शन के साथ-साथ युवाओं में खेल भावना, नेतृत्व और सकारात्मक सोच को भी प्रोत्साहित कर रही है।

"महाकाल की नगरी से निकली यह टीम केवल क्रिकेट नहीं खेलती, बल्कि काशी की संस्कृति, संघर्ष और सम्मान का प्रतिनिधित्व करती है। श्री कन्हैया लाल केशरी के नेतृत्व में बनारस महाकाल वॉरियर्स आने वाले वर्षों में काशी प्रीमियर लीग की सबसे सशक्त और प्रतिष्ठित पहचान बनने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।"
 

दो वर्षों में बदली ओडिशा की तस्वीर: मोहन चरण माझी सरकार का विकास, सुशासन और निवेश मॉडल







 


  ओडिशा राज्य। जून 2024 में ओडिशा की जनता ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय लिखा। भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट जनादेश देकर जनता ने केवल सत्ता परिवर्तन नहीं किया, बल्कि विकास, सुशासन और जनकल्याण पर आधारित एक नए शासन मॉडल पर भरोसा जताया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपने दो वर्षों के कार्यकाल में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिन्होंने ओडिशा को राष्ट्रीय विकास विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है।
 
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" विजन के अनुरूप ओडिशा सरकार ने महिला सशक्तिकरण, औद्योगिक निवेश, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दी है। इन दो वर्षों में राज्य ने जिस गति से प्रगति की है, उसने ओडिशा को देश के सबसे तेजी से उभरते राज्यों में शामिल कर दिया है।
 
  माझी सरकार की सबसे चर्चित और प्रभावशाली पहल सुभद्रा योजना रही है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को पांच वर्षों में ₹50,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। अब तक 1.2 करोड़ से अधिक महिलाओं को योजना का लाभ मिल चुका है। इस पहल ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान की है।
   कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी सरकार ने उल्लेखनीय कार्य किया है। मुख्यमंत्री किसान योजना और अन्य कृषि-केंद्रित पहलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। साथ ही, ग्रामीण सड़कों और संपर्क मार्गों के विस्तार ने गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

   गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण को सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में रखा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ अंत्योदय गृह योजना के माध्यम से ऐसे परिवारों को भी आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है जो विभिन्न कारणों से अन्य योजनाओं से वंचित रह गए थे। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और कौशल विकास संस्थानों की स्थापना पर विशेष ध्यान दिया गया है।

   हालांकि, मोहन माझी सरकार के दो वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित करना माना जा रहा है। जनवरी 2025 में आयोजित उत्कर्ष ओडिशा – मेक इन ओडिशा कॉन्क्लेव ने निवेश के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। राज्य को ₹16.7 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे लगभग 12.9 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है। यह उपलब्धि ओडिशा को देश के सबसे आकर्षक निवेश गंतव्यों में शामिल करती है।
  देश के प्रमुख औद्योगिक समूहों ने भी ओडिशा में बड़े निवेश की घोषणा की है। अडानी समूह ने राज्य में अगले पांच वर्षों में ₹2.3 लाख करोड़ निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। ऊर्जा, बंदरगाह, सीमेंट, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में यह निवेश ओडिशा की आर्थिक क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
  इसी प्रकार जेएसडब्ल्यू समूह ने केन्दुझर में अत्याधुनिक इस्पात परियोजना के लिए ₹35,000 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। वहीं, जेएसडब्ल्यू और दक्षिण कोरिया की POSCO के बीच प्रस्तावित साझेदारी से लगभग ₹65,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश की संभावनाएं बनी हैं। इससे ओडिशा का स्थान देश के प्रमुख इस्पात और विनिर्माण केंद्रों में और मजबूत होगा।
  सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी ओडिशा तेजी से आगे बढ़ रहा है। Intel और अमेरिकी कंपनी 3D Glass Solutions द्वारा राज्य में लगभग ₹28,000 करोड़ की सेमीकंडक्टर परियोजना स्थापित करने की पहल ने ओडिशा को भारत की उभरती सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया है। इसके अलावा RIR Power Electronics और SiCSem जैसी कंपनियां भी राज्य में अत्याधुनिक विनिर्माण सुविधाएं स्थापित कर रही हैं।
  इन उपलब्धियों के पीछे केवल निवेश आकर्षित करने की नीति नहीं, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही पर सरकार का विशेष जोर भी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी स्वयं विभिन्न योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हैं और जिलों तक जाकर विकास कार्यों की प्रगति का आकलन करते हैं। इससे शासन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनी है।
  दो वर्षों का कार्यकाल किसी भी सरकार के लिए उसकी दिशा और दृष्टि का परिचायक होता है। मोहन चरण माझी सरकार ने इन दो वर्षों में यह स्पष्ट संकेत दिया है कि ओडिशा केवल प्राकृतिक संसाधनों का राज्य नहीं, बल्कि निवेश, नवाचार, प्रौद्योगिकी और समावेशी विकास का भी केंद्र बन सकता है। सुभद्रा योजना से लेकर रिकॉर्ड निवेश और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं तक, राज्य ने विकास की नई कहानी लिखनी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के नेतृत्व में ओडिशा आज एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भविष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ रहा है।

12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर डॉ. संध्या रायकवार का विशेष संदेश








 



 योगसंध्या वेलनेस स्टूडियो की संस्थापक ने देशवासियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का दिया आह्वान


 नई दिल्ली — 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर योगसंध्या वेलनेस स्टूडियो की संस्थापक एवं प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ डॉ. संध्या रायकवार ने देशवासियों को स्वास्थ्य, प्रसन्नता और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का प्रेरणादायी संदेश दिया।

योग के प्रति समर्पित एक अनोखी यात्रा

  डॉ. संध्या राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त योग एवं फिटनेस कोच हैं। वे पिछले एक दशक से भी अधिक समय से योग के माध्यम से राष्ट्रसेवा में समर्पित हैं। उन्होंने बिना दवाइयों के योग चिकित्सा द्वारा 10,000 से अधिक लोगों को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाकर उनके जीवन में नई ऊर्जा और आशा का संचार किया है।


'म्यूयो (MUYO)' - संगीत और योग का अनोखा संगम

  योग चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाली डॉ. संध्या ने "म्यूयो (MUYO - Music Yoga)" की अभिनव पद्धति का आविष्कार किया है। संगीत और योग के समन्वय पर आधारित यह विशेष तकनीक रोगियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध हो रही है।

प्रतिष्ठित प्रमाण-पत्र और मार्गदर्शन

  डॉ. संध्या देश की सबसे योग्य योग चिकित्सकों में से एक हैं। उन्होंने आयुष मंत्रालय, नई दिल्ली के योग सर्टिफिकेशन बोर्ड (YCB) की लेवल-6 परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की है। उन्हें विश्वविख्यात योग गुरु स्वामी रामदेव का आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन भी प्राप्त है।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

  देश के प्रति उनके समर्पण और निष्ठा के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है।


डॉ. संध्या का संदेश

  इस अवसर पर डॉ. संध्या ने कहा: "योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन जीने की कला है। इस 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर मेरा सभी देशवासियों से आग्रह है कि स्वयं खुश और स्वस्थ रहें तथा अपने आसपास भी खुशियां और स्वास्थ्य का संदेश फैलाएं। आइए, योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में योगदान दें।"

  उन्होंने आगे कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में योग शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। योग अपनाकर हम न केवल रोगों से बचाव कर सकते हैं, बल्कि सकारात्मक सोच और बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्राप्त कर सकते हैं।


  "खुश रहें, स्वस्थ रहें और हर जगह खुशी एवं स्वास्थ्य का प्रसार करें"इसी संदेश के साथ डॉ. संध्या ने सभी देशवासियों को 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

योगसंध्या वेलनेस स्टूडियो
स्वस्थ भारत, सशक्त भारत 🇮🇳