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राजगढ माहेश्वरी समाज एवं माहेश्वरी युवा संगठन के निर्वाचन सम्पन्न











   राजगढ :  मंगलवार को राजगढ माहेश्वरी समाज एवं माहेश्वरी युवा संगठन की बैठक त्रिमूर्ति कालोनी मे सम्पन्न हुई जिसमे सर्वानुमति से राजगढ माहेश्वरी समाज के अध्यक्ष पद पर मुकेश सत्यनारायण बजाज एवं कोषाध्यक्ष पद पर गोपाल रामचंद्र बजाज और माहेश्वरी युवा संगठन के अध्यक्ष पद पर मधुर मनोज पलोड निर्वाचित हुए है। इस निर्वाचन प्रक्रिया के पूर्व समाज के आय - व्यय का ब्योरा कोषाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत किया गया । 
   दोनो निवृत्तमान अध्यक्ष जानकीलाल माहेश्वरी(सर) (माहेश्वरी समाज) एवं गोविंद अशोक पलोड (माहेश्वरी युवा संगठन) का बहुमान समाज द्वारा किया गया और साथ ही राजगढ नगर परिषद मे भाजपा की ओर से एल्डरमेन के रूप मे मनोज राधाकिशन पलोड को नियुक्त होने पर समाज द्वारा उनका भी बहुमान किया गया।
 आगामी कार्यक्रम की रुपरेखा भी तय हुई जिसमे माहेश्वरी समाज ने उत्पत्ती दिवस  महेश जयंति पर्व हर्षोल्लास मनाने का निर्णय लिया गया । समाज के नवीन पदाधिकारी की नियुक्ति पर कैलासजी बजाज,भगवानदास बजाज , सुनिल कोठारी , जानकीलाल माहेश्वरी(सर) , अनिल पलोड , मनोज पलोड , रविकांत पलोड , मनिष बजाज , महेश पलोड , आशीष बजाज , गौरव बाहेती  , पवन पलोड , नितेश सोमानी , अमित कोठारी , गोविंद पलोड , राघव पलोड एवं प्रिंस माहेश्वरी ने हर्ष व्यक्त किया है।
 

डॉ आंबेडकरजी जन्म जयंती पर राजगढ़ भाजपा मंडल द्वारा कार्यक्रम आयोजित






 



  राजगढ़ (धार) भारतीय जनता पार्टी मंडल राजगढ़ द्वारा संविधान निर्माता डॉ.भीमराव आंबेडकरजी की जन्म जयंती पर कुक्षी नाका स्थित प्रतिमा स्थल पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर डॉ आंबेडकरजी की प्रतिमा स्थल पर साफ सफाई की गई एवम प्रतिमा का अभिषेक किया गया। प्रतिमा स्थल पर दीप प्रज्ज्वलन किया गया।स्वच्छता एवम दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में कार्यक्रम के जिला सहसंयोजक व विधानसभा प्रभारी डॉ बलबहादुरसिंह छढावद,मण्डल अध्यक्ष सोहन पटेल,वरिष्ठ नेता ज्ञानेंद्र मूणत,भाजपा नेता निलेश सोनी,मण्डल महामंत्री प्रीतम ठाकुर,प्रेमकुमार वैद्य,महेश राठौड़,सुशील जैन,महेश वर्मा,भाजपा महिला मोर्चा मण्डल अध्यक्ष सीमा जैन,हर्षा व्यास,दीपिका ठाकुर,सहित भाजपा नेता कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

   जन्म जयंती 14 अप्रैल को बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। प्रतिमा पूजन कर दीपक अगरबत्ती द्वारा बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

 माल्यार्पण कार्यक्रम में प्रभारी डॉ बलबहादुरसिंह छड़ावद,मण्डल अध्यक्ष सोहन पटेल,भाजपा नेता निलेश सोनी,एल्डरमैन प्रफुल्ल रावल,मण्डल महामंत्री प्रीतम ठाकुर,मण्डल महामंत्री लाला शर्मा,पार्षद प्रति.शंभु परवार,पार्षद चिंटू चौहाण,पार्षद पंकज बारोड,पार्षद रमेश राजपूत,मण्डल पदाधिकारीगण सर्व श्री अंतिम पँवार,नरेश जैन,तोलसिंह पटेल,पप्पूसिंह भूरिया,सुनील गौड़,समाजसेवी लक्ष्मण डामेचा,प्रभुलाल जाट,शैलेष डामेचा,राजा चौधरी सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।

14 अप्रैल को नगर में आचार्य द्वय का भव्य मंगल प्रवेश




 


  राजगढ़। नगर में आगामी 14 अप्रैल को दो जैन आचार्य भगवंतों का एक साथ भव्य मंगल प्रवेश होने जा रहा है, जिसको लेकर जैन समाज ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
    जानकारी के अनुसार आचार्य श्री लेखेंद्रसूरीश्वर जी महाराज एवं आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी महाराज का नगर में एक साथ भव्य प्रवेश होगा। श्री त्रिस्तुति श्री संघ के अध्यक्ष संदीप खजांची एवं समाजसेवी अशोक भंडारी ने बताया कि आचार्य द्वय का मंगल प्रवेश मेला मैदान स्थित शिव वाटिका से प्रारंभ होगा। यहां से शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए राजेंद्र भवन पहुंचेगी, जो धर्मसभा में परिवर्तित होगी। 
   खजांची ने बताया कि आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरीश्वर जी महाराज के नगर प्रवेश के लिए बुधवार को श्रीसंघ द्वारा सिंघाना पहुंचकर भावपूर्ण विनती की गई थी, वहीं आचार्य श्री लेखेंद्रसूरीश्वर जी महाराज से गुरुवार श्रीसंघ ने दाहोद पहुंचकर नगर आगमन का आग्रह किया गया। दोनों ही आचार्यों ने श्रीसंघ की विनती स्वीकार कर अपनी सहमति प्रदान की।
  आचार्य द्वय का मंगल प्रवेश 14 अप्रैल को प्रातः 8:00 बजे होगा। इस अवसर पर शिव वाटिका में नवकारसी का आयोजन रखा गया है, जिसका लाभ शैलेंद्र कुमारअशोक कुमार परिवार द्वारा लिया गया है।
 विनती के दौरान अशोक भंडारी, सुनील चत्तर, निलेश जैन, दीपक जैन सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे। आचार्य श्री लेखेंद्रसूरीश्वर जी महाराज दाहोद से झाबुआ, कालीदेवी, दत्तीगांव होते हुए राजगढ़ पहुंचेंगे, वहीं आचार्य श्री हितेशचंद्र सूरीश्वरजी महाराज मनावर, जीराबाद, अमझेरा मार्ग से नगर में प्रवेश करेंगे।

फिल्मकार ऋत्विक घटक पर महत्वपूर्ण चर्चा और दो पुस्तकों का विमोचन




 


  मुंबई। ऋत्विक घटक (1925–1976) बांग्ला सिनेमा के उन महान फिल्मकारों में हैं जिन्होंने बंगाल विभाजन की पीड़ा, विस्थापन, शरणार्थी जीवन और सामाजिक विघटन को अपनी फिल्मों में गहरी संवेदना और वैचारिक तीक्ष्णता के साथ चित्रित किया। उनका सिनेमा यथार्थवाद, मेलोड्रामा, ब्रेख्तियन शैली, मिथकीय प्रतीक और अभिव्यक्तिवादी ध्वनि के अनोखे संयोजन के लिए जाना जाता है। उन्होंने केवल आठ फीचर फिल्में बनाईं, पर उनकी विभाजन त्रयी विशेष रूप से चर्चित रही।

  जनवादी लेखक संघ एवं स्वर संगम फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में कल इंदिरा गाँधी हास्पिटल में स्थित विरूंगला केन्द्र, मीरा रोड में आयोजित कार्यक्रम में जाहिद खान एवं जयनारायण प्रसाद द्वारा संपादित पुस्तक ‘ऋत्विक घटक: नव यथार्थवाद सिनेमा का कलात्मक सर्जक’ का विमोचन हुआ। इसी अवसर पर जाहिद खान द्वारा अनुवादित कृष्ण चंदर का उर्दू नाटक ‘दरवाजा खोल दो’ (हिंदी अनुवाद) का भी विमोचन किया गया।

  इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता पुलक चक्रवर्ती ने बताया कि, ऋत्विक घटक मार्क्सवादी विचारधारा से गहराई से प्रभावित थे। उन्होंने 1948 में भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) से जुड़कर अपनी सांस्कृतिक यात्रा शुरू की, जो उस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआय) का सांस्कृतिक मोर्चा था। विभाजन, अकाल और सामाजिक अन्याय ने उन्हें मार्क्सवाद की ओर आकर्षित किया। वे आईपीटीए के सक्रिय सदस्य रहे, नाटक लिखे-निर्देशित किए और 1951 में पार्टी के लिए ‘ऑन द कल्चरल फ्रंट’ नामक महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किया, जिसमें उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी की सांस्कृतिक नीति पर जोर दिया कि कला को जनता की पीड़ा और आकांक्षाओं को व्यक्त करना चाहिए। हालांकि उनका जुड़ाव केवल संगठनात्मक नहीं था — वे सच्चे अर्थों में क्रांतिकारी कलाकार थे। मार्क्सवाद उनकी फिल्मों की रीढ़ बना रहा — उनकी रचनाएँ पूंजीवाद की विनाशकारी प्रवृत्तियों, वर्ग संघर्ष, विभाजन की त्रासदी और बौद्धिक संकट के खिलाफ निरंतर विद्रोह का रूप लेती रहीं। घटक ने कला के माध्यम से मानवता और सामाजिक न्याय के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता निभाई।

 उनकी प्रसिद्ध फिल्म मेघे ढाका तारा शरणार्थी परिवार की त्रासदी के माध्यम से स्त्री-त्याग और शोषण की मार्मिक कथा कहती है और उनकी सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। कोमल गांधार थिएटर आंदोलन और सांस्कृतिक पुनर्मिलन की आकांक्षा को राजनीतिक विभाजन के संदर्भ में प्रस्तुत करती है, जबकि सुवर्णरेखा विस्थापन, जाति-वर्ग और नैतिक संकट की दार्शनिक पड़ताल करती है। अजान्त्रिक में मनुष्य और मशीन के संबंध को प्रतीकात्मक ढंग से दिखाया गया है। बांग्लादेश में बनी तितास एक्टी नदीर नाम एक लुप्त होती नदी-सभ्यता की महाकाव्यात्मक कथा है, जबकि जुक्ति, तक्को आर गप्पो राजनीतिक बहस और बौद्धिक संकट पर आधारित अर्ध-आत्मकथात्मक फिल्म है। उनकी प्रारंभिक फिल्म नागरिक और बाड़ी थेके पालिए भी उल्लेखनीय हैं।

 कार्यक्रम में अनारकली ऑफ आरा और कागज-2 जैसी सामाजिक-राजनीतिक मुद्दे पर आधारित फिल्में, और रात बाकी है व शी नामक क्राइम-ड्रामा सीरीज़ बना चुके फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने कहा, “ऋत्विक घटक का सिनेमा सबसे ज़्यादा ओरिजिनल सिनेमा है। उन्होंने सिनेमा का पूरा व्याकरण खड़ा किया है। उनका कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ाव केवल संगठनात्मक नहीं था, इसलिए जब उन्हें लगा कि वह इस संगठन के साथ बहुत दूर तक नहीं जा सकते, तो उन्होंने संगठन छोड़ दिया।” अविनाश दास ने एक फिल्म डायरेक्टर की विवशताओं का जिक्र करते हुए बताया कि फिल्म बनाने में कितनी मशक्कत, चिरौरी और तानों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी के हवाले से कहा कि “डायरेक्टर का जन्म अपमानित होने के लिए होता है।” ऐसे में ऋत्विक घटक द्वारा अपनी शर्तों पर सिनेमा बनाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने मीरा रोड के स्वर संगम फाउंडेशन की तुलना कलकत्ता के उस सृजनात्मक माहौल से की, जिसमें ऋत्विक घटक और मृणाल सेन एक-दूसरे को सहयोग देते थे।

  मुंबई विश्व विद्यालय के हिन्दी विभाग के भूतपूर्व प्रोफेसर डॉ.हूबनाथ पांडे ने ऋत्विक घटक की फिल्मों को समझने के अपने शोध संस्मरण साझा किए और बताया कि बंगाली न समझने के बावजूद उन्होंने विजुअल्स के सहारे घटक की फिल्मों को देखा। उन्होंने ‘खुद्दार’ फिल्म में अमिताभ बच्चन के सीन का उदाहरण देकर परसानीफिकेशन की घटक की अनोखी अवधारणा पर प्रकाश डाला। डॉ. पांडेय ने हर महीने कम से कम एक फिल्म दिखाने की पेशकश की और कहा कि हमें फिल्में देखना सीखना होगा। उन्होंने फिल्म सोसाइटी की स्थापना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “बी. शांताराम की फिल्म सोसाइटी बंद हो चुकी है। इसकी शुरुआत मीरा रोड से की जा सकती है। मेरे पास दस हजार फिल्मों का संकलन है।”

  पुस्तक के संपादक जाहिद खान ने बताया कि हिंदी पट्टी में ऋत्विक घटक को मुख्यतः ‘मधुमती’ और ‘मुसाफिर’ जैसी फिल्मों के स्क्रिप्ट लेखन के लिए जाना जाता है, जबकि उनका नाम मृणाल सेन और सत्यजीत राय के साथ क्लासिकल डायरेक्टर के रूप में लिया जाता है। उन्होंने ऋत्विक घटक को मूल रूप से नाटककार बताया, जो आईपीटीए से जुड़े रहे और बाद में सिनेमा की ओर मुड़े क्योंकि सिनेमा के पास अधिक दर्शक थे। जाहिद खान ने कहा कि घटक कला के माध्यम से मानवता और मानवीय मूल्यों को क्षरण से बचाने के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। उन्होंने श्रोताओं से अपील की कि ऋत्विक घटक के पूरे व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने के लिए यह पुस्तक अवश्य पढ़ें।

  जलेस के केन्द्रीय कमिटी सदस्य संजय भिसे ने कहा कि, ऋत्विक घटक का महत्व इस बात में है कि उन्होंने सिनेमा को मात्र मनोरंजन नहीं माना, बल्कि उसे इतिहास, राजनीति और मानवीय संवेदना का माध्यम बनाया। उनकी फिल्मों में विभाजन की त्रासदी निजी जीवन की कहानियों से जुड़कर व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय संदर्भ ग्रहण करती है। उन्होंने सिनेमा की भाषा को नए ढंग से गढ़ते हुए दर्द को विद्रोह और कविता में रूपांतरित किया, जिससे उनका सिनेमा आज भी गहरे प्रभाव के साथ याद किया जाता है। मराठी फिल्म उद्योग क्षेत्र से जुड़े कई लोगों ने अपने बच्चों के नाम ऋत्विक घटक से प्रभावित होकर ऋत्विक रखा है।

  कलकत्ता से विशेष रूप से आए जयनारायण प्रसाद ने सत्यजीत राय, मृणाल सेन और ऋत्विक घटक के बीच के संबंधों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ‘मेघे ढाका तारा’ फिल्म का विशेष उल्लेख किया और कहा कि विभाजन की पीड़ा और शरणार्थियों की समस्या को इस फिल्म में अद्भुत रूप से प्रस्तुत किया गया है।

  कार्यक्रम में रंगमंच और सिनेमा अभिनेता अजय रोहिल्ला ने ऋत्विक घटक के सिनेमा की स्ट्रांग विजुअल सेंस की तारीफ की। सिने पत्रकार हरि मृदुल ने बताया कि घटक बड़े कथाकार भी थे और उनकी कहानियों का अनुवाद ‘संभावना प्रकाशन’ से आया है। सिने जगत से जुड़े फरीद खान ने भी ‘मेघ ढके तारा’ का उल्लेख करते हुए ऋत्विक घटक को यथार्थवादी सिनेमा का महत्वपूर्ण हस्ताक्षर बताया।

 हृदयेश मयंक, चेयरमैन, स्वर संगम फाउंडेशन एवं अध्यक्ष, विरूंगला केन्द्र, मीरा रोड ने बताया कि प्रो. हूबनाथ पांडेय के प्रस्ताव पर स्वर संगम फाउंडेशन शीघ्र ही कमेटी की बैठक बुलाकर फिल्म सोसाइटी संबंधी विचार करेगी।

 कार्यक्रम का संचालन रमन मिश्र ने किया। हरिप्रसाद राय ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए इस समृद्ध करने वाला अनुभव बताया।

खामोश हुई सुरों की मलिका: 12 हजार गीतों की अमर आवाज Asha Bhosle का 92 वर्ष की उम्र में निधन

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  मुंबई/इंदौर (टाइम्स ऑफ मालवा): भारतीय संगीत जगत ने अपनी सबसे चमकदार आवाजों में से एक को खो दिया है। दिग्गज और लेजेंड्री गायिका आशा भोंसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। 92 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही पूरे देश में गहरा शोक छा गया और संगीत प्रेमियों के दिलों में एक खालीपन महसूस होने लगा।

  करीब आठ दशकों तक चले अपने शानदार करियर में आशा भोंसले ने 12 हजार से अधिक गीतों को अपनी आवाज दी और भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी आवाज में वह विविधता और जादू था, जिसने हर दौर के श्रोताओं को अपना दीवाना बनाया। उनके गीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं का जीवंत दस्तावेज बन गए।

  परिजनों के अनुसार, सोमवार को सुबह 11 बजे उनके निवास पर पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जहां आम लोग और उनके प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। इसके बाद दोपहर 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 आशा भोंसले के जाने के साथ ही भारतीय संगीत का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया है, लेकिन उनकी आवाज और उनके गीत हमेशा अमर रहेंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

हिंदू उत्सव समिति ने एसडीएम सुश्री सलोनी अग्रवाल का किया अभिनंदन






 




  राजगढ़ (धार)। हिंदू उत्सव समिति द्वारा एसडीएम सुश्री सलोनी अग्रवाल का उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए विशेष अभिनंदन किया गया। यह सम्मान समारोह क्षेत्र में सद्भावना बनाए रखने और सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में उनके सराहनीय योगदान के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष निलेश सोनी ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि समिति ने इस वर्ष भगवान श्री राम जन्मोत्सव, भगवान श्री महावीर जन्मोत्सव और भगवान श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर एक विशेष पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत नगर के प्रमुख समाजसेवियों और क्षेत्र के विकास के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले सम्मानित व्यक्तियों का अभिनंदन किया जा रहा है।

  इसी क्रम में, एसडीएम सुश्री सलोनी अग्रवाल की कार्यकुशलता और प्रशासन के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। समिति का मानना है कि ऐसे अधिकारियों के प्रोत्साहन से क्षेत्र में विकास कार्यों को गति मिलती है और आमजन का प्रशासन पर विश्वास और भी सुदृढ़ होता है।

राष्ट्रीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा द्वारा 12 अप्रैल को ऑनलाइन सदस्यता अभियान का आयोजन,डॉ. अतुल मलिकराम सहित कई दिग्गज होंगे शामिल






 
  भोपाल : राष्ट्रीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा द्वारा 'समाज हित सर्वोपरि, शिक्षित समाज-विकसित समाज' के मूल मंत्र के साथ आगामी 12 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे से एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया जा रहा है। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य संगठन के सदस्यता अभियान को गति प्रदान करना और समाज के बौद्धिक व सामाजिक विकास की रूपरेखा तैयार करना है। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता राघव पटेल, राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ रामायण पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन डिजिटल माध्यम से देश भर के स्वजातीय बंधुओं को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास है, जिसमें सामाजिक एकजुटता और शिक्षा के महत्व पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

  संगठन के राष्ट्रीय महासचिव अधिवक्ता *राघव पटेल* ने आगामी सत्र के महत्व पर बात करते हुए कहा कि "हमारा लक्ष्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज के हर अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सदस्यता अभियान महासभा की एकता का आधार बनेगा, क्योंकि जब तक समाज का हर व्यक्ति जागरूक और शिक्षित नहीं होगा, तब तक सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को साकार नहीं किया जा सकता। 

  इस सत्र में विशेष रूप से शामिल हो रहे राजनीतिक रणनीतिकार *डॉ. अतुल मलिकराम* ने सामाजिक सशक्तिकरण पर अपना दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि "आज के दौर में सही रणनीति और वैचारिक स्पष्टता उन्नति के लिए अनिवार्य है। किसी भी समाज के उत्थान के लिए उसकी संगठनात्मक शक्ति और सही दिशा का तालमेल होना बहुत जरूरी है। इस ऑनलाइन सत्र के माध्यम से यह साझा किया जाएगा कि कैसे आधुनिक संसाधनों और सामूहिक प्रयासों का उपयोग कर समाज को सामाजिक व राजनीतिक रूप से और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सकता है।"

  राष्ट्रीय प्रवक्ता *डॉ रामायण पटेल* ने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि "किसी भी संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित सदस्यों में निहित होती है। 12 अप्रैल का यह सत्र कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूँकने का काम करेगा और आधुनिक तकनीक के माध्यम से पूरे देश के समाजजनों को एक मंच पर लाकर 'शिक्षित समाज-विकसित समाज' के सपने को हकीकत में बदलेगा।"

  महासभा ने समाज के सभी प्रबुद्ध जनों, युवाओं और मातृशक्ति से इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।