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श्री केसरियाजी पैदल यात्रा संघ की 29वीं भव्य पदयात्रा 11 मार्च को







 



   राजगढ़ (धार)। जैन मित्र मण्डल, राजगढ़ के तत्वावधान में इस वर्ष भी आराध्य देव भगवान श्री आदिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव के पावन प्रसंग पर श्री केसरियाजी (झकनावदा) पैदल यात्रा संघ की 29वीं भव्य पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। भक्ति और श्रद्धा से सराबोर यह यात्रा आगामी 11 मार्च 2026, बुधवार को प्रातः 5:30 बजे स्थानीय हाथीवाला जैन मंदिर से जयकारों के साथ प्रस्थान करेगी।

  जैन मित्र मण्डल के अनुसार इस यात्रा को लेकर भारी उत्साह है। मण्डल ने समाज के सभी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में सम्मिलित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। पदयात्रियों के लिए वापसी हेतु वाहन सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।

  इस आयोजन की तैयारियों में सुनील चतर, पुखराज मेहता, प्रदीप मेहता, दिलीप मेहता, राकेश बाफना, राकेश मुणत, जितेन्द्र मुणत, कनक भण्डारी, सुनील लोढ़ा, रतन जैन, प्रमोदराज जैन ‘पप्पू’, त्रिलोक छाजेड़, अजीत मेहता एवं दीपक नखरा सहित जैन मित्र मण्डल परिवार के सभी सदस्य सक्रिय रूप से जुटे हुए हैं।

हर आंगन में सुख,शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरता है होली का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव






 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतों , समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मीडिया के साथियों के साथ खेली होली
मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी को दीं मंगलकामनाएं
सभी ने हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर दीं बधाई
ब्रज, बरसाने और होली गीतों के साथ मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सराबोर हुआ वातावरण


     मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में प्रदेशवासियों को उत्साह, उमंग और समरसता के पावन पर्व होली की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरे और समाज में सद्भाव-सकारात्मकता और एकता का रंग सदा चटक रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से आत्मीयता और सौहार्द के साथ त्यौहार मनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होली पर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे नागरिकों के साथ होली की मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। वरिष्ठ और गणमान्य नागरिकों का अभिवादन किया तथा सभी आगंतुकों पर पुष्प वर्षा एवं गुलाल उड़ाकर मेजबान के रूप में सबका स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को गुलाल लगाया और पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ उनके सुर में सुर भी मिलाया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मुख्यमंत्री निवास पधारे राज्य मंत्री श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, वरिष्ठ सांसद श्री विष्णु दत्त शर्मा, विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री शिवशेखर शुक्ला , प्रमुख सचिव श्री उमाकांत उमराव , सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क श्री मनीष सिंह, खाटू श्याम मंदिर भोपाल के प्रमुख प्रचारक पूज्य अनिल आनंद महाराज सहित कई जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, पत्रकार गण और वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगल कामनाएं दीं।

   मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में उड़ते रंग गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच, ब्रज-बरसाने के होली गीतों, पारंपरिक संगीत और मयूर नृत्य के साथ उल्लास और उमंग से सराबोर वातावरण में सभी ने शालीनता के साथ पर्व का आनंद लिया। मंच पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों ने रंग बरसे, होली के दिन दिल खिल जाते हैं, होली खेलें रघुवीरा, आज ब्रज में होली रे रसिया जैसे होली गीतों का सस्वर गायन कर सभी के उल्लास को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री निवास में होली पर्व पर आयोजित मिलन समारोह में सभी को गुजिया, बालूशाही, ठंडाई सहित कई परंपरागत व्यंजन परोसे गए।

राजगढ़ नगर मंडल की नई समिति की घोषणा, नवीन सदस्यों का स्वागत समारोह संपन्न






 



 राजगढ़ (धार) । भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल के निर्देश पर भाजपा जिला अध्यक्ष निलेश भारती की सहमति से भाजपा राजगढ़ नगर मंडल के मंडल अध्यक्ष सोहन पटेल द्वारा मंडल समिति की घोषणा की गई। उपाध्यक्ष जिसमें मोहन प्रजापत ,पंकज बारोड ,प्रवीन कटारा ,अमरसिंह चौधरी ,महेश शर्मा एवं कला कन्नू ठाकुर, महामंत्री निलेश शर्मा व प्रीतम ठाकुर को मंत्री पीडु बारिया, तोलसिंह पटेल ,हरिराम सोलंकी ,उदयसिंह भुरा, महेश राठौड , प्रीति बाला चौहान को मनोनीत किया गया। वही अरुणा धर्मेंद्र कुमावत को कोषाध्यक्ष, अंतिम ठाकुर को सह कोषाध्यक्ष, गोविंद चौधरी को कार्यालय मंत्री, घनश्याम सिंगार को सह कार्यालय मंत्री, धर्मेंद्र भंडारी को मीडिया प्रभारी, देमा भूरिया को सह मीडिया प्रभारी, आकाश झुंजे को सोशल मीडिया प्रभारी, कंवरलाल वसुनिया को सह सोशल मीडिया प्रभारी, दीपेश ठाकुर को आईटी सेल प्रभारी, हरिओम यादव को सह आईटी सेल प्रभारी, गौरव भंडारी को मन की बात प्रभारी, निर्भयसिंह निनामा को मन की बात सह प्रभारी, माया खराड़ी को व्हाट्सएप ग्रुप प्रमुख एवं हेमराज भाबर को सह व्हाट्सएप ग्रुप प्रमुख मनोनीत किया गया।

  मंडल समिति की नियुक्ति के पश्चात सभी नवनियुक्त पदाधिकारीयो का स्वागत समारोह रखा गया। जिसमें पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया ,पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष सुरेश तातेंड, वरिष्ठ भाजपा नेता गोपाल सोनी एवं मुकेश कावड़िया, भाजपा पार्षद रमेश राजपूत एवं पार्षद प्रतिनिधि शंभू परवार ने सभी नवनियुक्त पदाधिकारीयो का माला पहनाकर स्वागत किया एवं उनको मिठाई खिलाई ।अतिथियों के उद्बोधन के पश्चात नवनियुक्त पदाधिकारीयो ने भी अपनी अपनी बात रखी ।सभी नवनियुक्त पदाधिकारीयो को सभी इष्ट मित्रों एवं शुभचिंतको ने बधाई प्रेषित की है ।उक्त जानकारी राजगढ़ नगर मंडल के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र भंडारी ने दी ।

कृष्णगढ़ में कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन ने बिखेरे सेवा के रंग: जरूरतमंदों के संग मनाई खुशियों वाली होली






 



    पवई। पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत कृष्णगढ़ में इस वर्ष होली का पर्व केवल पारंपरिक रंगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सेवा, संवेदना और सामाजिक समरसता के एक अनूठे संगम के रूप में सामने आया। कौशल्या ह्यूमैनिटी फाउंडेशन (KHF) द्वारा आयोजित 'विशेष होली सेवा अभियान' के तहत संस्था ने समस्त ग्रामवासियों के साथ मिलकर त्योहार की खुशियाँ बांटीं।

    इस सेवा अभियान के दौरान फाउंडेशन द्वारा गांव के बच्चों, माताओं, बहनों और बुजुर्गों सहित सभी जरूरतमंद परिवारों के बीच मिठाई, पिचकारी, रंग, गुलाल, मास्क और गुब्बारों का वितरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान जब छोटे-छोटे बच्चों के चेहरों पर खिलखिलाहट आई और बुजुर्गों ने स्नेहपूर्ण आशीर्वाद दिया, तो पूरा वातावरण आत्मीयता से भर गया। संस्था के सदस्यों का मानना है कि माताओं-बहनों की आंखों में झलकी यही खुशी इस अभियान की वास्तविक सफलता है।

  कार्यक्रम का सफल नेतृत्व समाज सेविका और KHF की संस्थापक अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि त्योहार मनाने का असली अर्थ तभी सार्थक होता है, जब हम अपनी खुशियों में समाज के हर वर्ग, विशेषकर वंचित वर्ग को शामिल करें। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जरूरतमंदों के चेहरे पर मुस्कान लाना ही संस्था का मुख्य उद्देश्य है।

  यह आयोजन न केवल एक सामाजिक पहल के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि इसने पूरे क्षेत्र में यह संदेश भी प्रसारित किया है कि 'सेवा ही सच्चा उत्सव है'। कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों ने संस्था के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता की एक प्रेरणादायक मिसाल बताया।

संघ संस्थापकों ने की थी राष्ट्र सर्वोपरि के भाव को सशक्त करने और भविष्य के बेहतर भारत की कल्पना : मुख्यमंत्री डॉ. यादव,राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पबद्ध प्रत्येक नागरिक देखे फिल्म शतक

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    भोपाल :  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्र प्रेम और राष्ट्र निर्माण के लिए संकल्पबद्ध प्रत्येक नागरिक को फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" देखना चाहिए। यह एक प्रेरक फिल्म है जो राष्ट्र के लिए कर्म प्रधान भूमिका का आहवान करती है। भारत के इतिहास के अध्ययन और अतीत से अवगत होकर संघ संस्थापकों और पदाधिकारियों ने राष्ट्र सर्वोपरि के भाव को सशक्त बनाने और भविष्य को बेहतर बनाने की कल्पना कर ली थी। संघ के माध्यम से बाहरी शक्तियों के कृत्यों के विरुद्ध मजबूती से मुहीम चलाई गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री रामेश्वर शर्मा, श्री राहुल कोठारी, श्री रविंद्र यति सहित जनप्रतिनिधियों के साथ फिल्म देखने के बाद ये विचार व्यक्त किये।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को भोपाल के डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी नगर स्थित दृष्टि कॉम्प्लेक्स में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के गठन 1925 से लेकर पूर्ण हुई एक शताब्दी की सेवा और समर्पण भरी यात्रा पर केंद्रित फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" के प्रदर्शन अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फिल्म "शतक" को मध्यप्रदेश शासन द्वारा टैक्स फ्री घोषित किया गया है। फिल्म का कथानक, समाजोपयोगी संदेश और सांस्कृतिक उत्थान के महत्व को रेखांकित करने के कारण प्रदेश में फिल्म "शतक : संघ के 100 वर्ष" कर मुक्त रहेगी। 

   फिल्म शतक के निर्देशक श्री आशीष मल्ल हैं। फिल्म की विशेषता यह भी है कि इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत ग्राफिक्स का उपयोग कर स्वातंत्र्य वीर सावरकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर्दे पर जीवंत किए गए हैं। फिल्म में अभिनेता अजय देवगन ने स्वर दिया है। फिल्म निर्माता वीर कपूर हैं। फिल्म के महत्व को देखते हुए मध्यप्रदेश सहित छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्य सरकारों ने भी इसे टैक्स फ्री कर दिया है ताकि अधिक से अधिक युवा इसे देख सकें।

धार जिले के राजगढ़ नगर मण्डल की नई कार्यकारिणी घोषित

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  राजगढ़ (धार)। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को गति देते हुए भाजपा जिला धार के जिला अध्यक्ष निलेश भारती की सहमति से राजगढ़ नगर मण्डल की नई मण्डल समिति की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 196 के अंतर्गत आने वाले राजगढ़ नगर मण्डल के अध्यक्ष सोहन पटेल ने प्रदेश नेतृत्व के निर्देशानुसार इस नई कार्यकारिणी की सूची जारी की है। इस नई समिति में अनुभवी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ युवाओं और महिलाओं को भी महत्वपूर्ण पदों पर स्थान दिया गया है ताकि मण्डल स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।

 मण्डल अध्यक्ष सोहन पटेल द्वारा जारी सूची के अनुसार, संगठन की मजबूती के लिए पदाधिकारियों का चयन क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया गया है। घोषित कार्यकारिणी में मोहन प्रजापत, पंकज बारोड, प्रविण कटारा, अमरसिंह चौधरी, महेश शर्मा और श्रीमती कला कनु ठाकुर को उपाध्यक्ष बनाया गया है। संगठन के महत्वपूर्ण दायित्वों के लिए निलेश शर्मा और प्रीतम ठाकुर को महामंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि मंत्री के रूप में पिडु बारीया, तोलसिंह पटेल, हरिराम सोंलकी, उदयसिंह भुरा, महेश राठौड़ और श्रीमती प्रीतिबाला अजय चौहान को जिम्मेदारी दी गई है।

   वित्तीय व्यवस्थाओं के लिए श्रीमती अरूणा धर्मेन्द्र कुमावत को कोषाध्यक्ष और अंतिम ठाकुर को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इसी तरह कार्यालय के कार्यों के लिए गोविन्द चौधरी को मन्त्री और घनश्याम सिंगार को सह मन्त्री नियुक्त किया गया है। आधुनिक प्रचार-प्रसार और तकनीकी संपर्क को सुदृढ़ करने हेतु धर्मेन्द्र भंडारी को मीडिया प्रभारी, आकाश झुंझे को सोशल मीडिया प्रभारी, दीपेश ठाकुर को आईटी सेल प्रभारी और गौरव भण्डारी को मन की बात प्रभारी बनाया गया है। इन सभी विभागों में सहयोग के लिए सह-प्रभारियों की भी नियुक्ति की गई है। इसके अतिरिक्त व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल संवाद के लिए श्रीमती माया कन्हैयालाल खराडी और हेमराज भाबर को प्रमुख दायित्व सौंपे गए हैं। इस नई टीम की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं में हर्ष का माहौल है।

मेरी व्यथा… – डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)





 



  दफ्तर की खामोशी बहुत कुछ कहती है। दिनभर की चहल-पहल के बाद जब कुर्सियाँ खाली हो जाती हैं, कंप्यूटर स्क्रीन्स बंद हो जाती हैं और बालकनी में सन्नाटा फैल जाता है, तब एक उद्योगपति का मन अक्सर सवालों से भर जाता है। क्या यह वही सपना है, जिसे कभी शून्य से शुरू किया था? क्या यह वही संस्थान है, जिसे अपने खून-पसीने से सींचा था? और क्या यह वही टीम है, जिसे साथ लेकर भविष्य की इमारत खड़ी करने का संकल्प लिया था?
   यह केवल मेरी नहीं, उन तमाम उद्योगपतियों की व्यथा है, जिन्होंने एक विचार से शुरुआत की। जिनके पास शुरुआत में पूँजी कम थी, पर हौसला बड़ा था। एक छोटी-सी मेज, सीमित संसाधन, अनिश्चित भविष्य लेकिन एक स्पष्ट लक्ष्य। उस समय हर कर्मचारी, हर सहयोगी, हर साझेदार को यह एहसास था कि यदि आज हमने पूरी ताकत नहीं लगाई, तो कल शायद यह अवसर न बचे। तब संस्थान 'किसी एक का' नहीं था; वह संघर्ष सबका था।
   समय बदला, संस्थान बढ़ा, संरचना मजबूत हुई। छोटे दफ्तर की जगह बड़ी बिल्डिंग ने ले ली। कुछ कर्मचारी प्रबंधक बने, कुछ प्रशिक्षु विशेषज्ञ बने। कारोबार स्थिर हुआ, ब्रांड बना, बाजार में पहचान बनी। पर इसी विकास के साथ एक बदलाव भी आया, अपनापन धीरे-धीरे जिम्मेदारी में बदल गया, और जिम्मेदारी धीरे-धीरे औपचारिकता में। एक उद्योगपति की व्यथा यहीं से शुरू होती है।
   वह देखता है कि शाम पाँच बजते ही घड़ियाँ देखने की आदत बढ़ गई है। प्रोजेक्ट 'मेरे हिस्से का' और 'तुम्हारे हिस्से का' बन गए हैं। ग्राहक की समस्या अब व्यक्तिगत चुनौती नहीं, विभागीय फाइल बन गई है। वेतन की तारीख याद रहती है, पर लक्ष्य की तारीख धुंधली हो जाती है। संस्थान, जो कभी साझा सपना था, अब कई लोगों के लिए सिर्फ नौकरी का स्थान बनकर रह गया है।
   एक बॉस के रूप में वह शिकायत नहीं करता। उसे मालूम है कि नेतृत्व की जिम्मेदारी उसी ने चुनी है। बैंक का कर्ज, निवेशकों का भरोसा, ग्राहकों की अपेक्षाएँ और कर्मचारियों के परिवारों की सुरक्षा, इन सबका भार अंततः उसी के कंधों पर आता है। जब बाकी लोग घर लौटते हैं, वह अगले महीने की रणनीति बनाता है। जब टीम छुट्टी पर होती है, वह संभावित जोखिमों की गणना करता है। यह उसका कर्तव्य है, और वह उससे पीछे नहीं हटता। पर उसकी व्यथा यह नहीं कि उसे अधिक काम करना पड़ता है। उसकी व्यथा यह है कि वह अकेला महसूस करने लगता है, उस यात्रा में, जो कभी सामूहिक थी।
   हर उद्योगपति चाहता है कि उसकी टीम उसे 'सर' या 'मालिक' भर न माने, बल्कि एक सहभागी समझे। वह चाहता है कि कर्मचारी यह महसूस करें कि जिस कुर्सी पर वे बैठे हैं, जिस वेतन से उनका घर चलता है, जिस पहचान से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, वह सब एक साझा प्रयास का परिणाम है। कंपनी केवल पूँजी से नहीं बनती; वह विश्वास, समर्पण और स्वामित्व की भावना से बनती है।
   समस्या यह नहीं कि आज के कर्मचारी सक्षम नहीं हैं। वे प्रतिभाशाली हैं, शिक्षित हैं, तकनीकी रूप से दक्ष हैं। समस्या यह है कि संस्थान से भावनात्मक जुड़ाव कम होता जा रहा है। जब संगठन छोटा था, हर निर्णय जीवन-मरण जैसा लगता था। आज संरचना बड़ी है, प्रक्रियाएँ जटिल हैं, और व्यक्तिगत योगदान का प्रभाव दिखाई कम देता है। परिणामस्वरूप, 'यह मेरा भी है' वाली भावना धुंधली पड़ने लगती है।
   यह व्यथा केवल उद्योगपति की ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की उस भूमिका की है जो समझती है कि संस्थान एक जीवित इकाई है। वह मशीन नहीं, जिसे एक बार चालू कर दिया जाए और वह स्वयं चलती रहे। उसे हर दिन विचारों की, प्रतिबद्धता की और विश्वास की ऊर्जा चाहिए।
   सच्चाई यह है कि अधिकतर कर्मचारी ईमानदार होते हैं। वे मेहनत करते हैं, सीखना चाहते हैं, आगे बढ़ना चाहते हैं। पर उन्हें बार-बार यह याद दिलाने की आवश्यकता होती है कि वे केवल वेतनभोगी नहीं, बल्कि निर्माता भी हैं। उद्योगपति की सबसे बड़ी चुनौती यही है 'सपने को साझा सपना बनाए रखना'।
  एक उद्योगपति की व्यथा का निचोड़ यही है कि वह अपनी कंपनी को अगली ऊँचाई पर ले जाना चाहता है, पर अकेले नहीं। वह चाहता है कि टीम लक्ष्य को 'कंपनी का लक्ष्य' नहीं, 'अपना लक्ष्य' माने। वह चाहता है कि कर्मचारी केवल कार्य-घंटों की गणना न करें, बल्कि योगदान की गुणवत्ता को भी मापें। वह चाहता है कि संस्थान पर गर्व केवल बोर्डरूम तक सीमित न रहे, बल्कि हर डेस्क तक पहुँचे।
   पर इसके साथ ही उद्योगपति को भी आत्ममंथन करना होता है। क्या उसने संवाद कम कर दिया? क्या उसने विकास की कहानी साझा करना छोड़ दिया? क्या उसने यह मान लिया कि लोग स्वतः समझ रहे हैं? नेतृत्व का अर्थ केवल दिशा देना नहीं, बल्कि निरंतर संवाद बनाए रखना भी है।
  आज आवश्यकता किसी चमत्कार की नहीं, बल्कि पुनः जागृत विश्वास की है। जब कर्मचारी संस्थान को अपना मानते हैं, तो वे केवल काम नहीं करते, वे निर्माण करते हैं। और जब उद्योगपति अपनी टीम को सहभागी मानता है, तो वह केवल प्रबंधन नहीं करता, बल्कि प्रेरित करता है।
  'मेरी व्यथा…' दरअसल एक पुकार है, साझेदारी की, स्वामित्व की और उस सामूहिक संकल्प की, जिसने कभी एक छोटे से विचार को बड़े संस्थान में बदला था। यदि यह भावना फिर से जीवित हो जाए, तो कोई भी कंपनी केवल बाजार में नहीं, इतिहास में भी अपनी पहचान बना सकती है।