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Akhil Parashar की फिल्म ‘Kulli The Power of Devil’ से Monika Rao और Gauraansh Singh का बॉलीवुड डेब्यू


बॉलीवुड में नए टैलेंट को मौका देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक अखिल पराशर (Akhil Parashar) अपनी आगामी फिल्म ‘कुल्ली द पावर ऑफ डेविल (Kulli The Power of Devil)’ के जरिए दो नए चेहरों को लॉन्च करने जा रहे हैं। इस फिल्म से मोनिका राव (Monika Rao) और गौरांश सिंह (Gauraansh Singh) इंडस्ट्री में अपना पहला कदम रखेंगे।

जानकारी के अनुसार, फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है और अब यह अपने रिलीज फेज में प्रवेश कर चुकी है। निर्देशक द्वारा नए कलाकारों को लीड रोल में कास्ट करना इस बात का संकेत है कि फिल्म की कहानी और प्रस्तुति को प्राथमिकता दी गई है।

फिल्म का एक गाना “तेरे जिस्म की लिखावट (Tere Jism Ki Likhawat)” हाल ही में रिलीज हुआ था, जिसे वर्दान सिंह (Vardan Singh) ने कंपोज और अपनी आवाज दी है। गाने को दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है और यह फिल्म के प्रति उत्सुकता को और बढ़ा रहा है।

‘कुल्ली द पावर ऑफ डेविल (Kulli The Power of Devil)’ को एक डार्क सुपरनैचुरल ड्रामा के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें हॉरर और मनोवैज्ञानिक तत्वों का मेल होगा। हालांकि फिल्म की कहानी को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसके टोन और जॉनर को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मोनिका राव(Monika Rao) और गौरांश सिंह (Gauraansh Singh) के लिए यह फिल्म उनके करियर की एक महत्वपूर्ण शुरुआत साबित हो सकती है। इंडस्ट्री में पहले भी कई ऐसे उदाहरण रहे हैं, जहां नए कलाकारों ने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है।

अब जब फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है और प्रमोशनल गतिविधियां शुरू हो रही हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘कुल्ली द पावर ऑफ डेविल (Kulli The Power of Devil)’ दर्शकों पर कितना असर छोड़ती है।

राजगढ़ में भक्ति का उत्सव: गच्छाधिपतिश्री की निश्रा में महावीर मंदिर के शिखर पर लहराईं 24 ध्वजाएं,श्रावकों ने खींचा प्रभु का रथ





 



  राजगढ़ (धार)। श्री महावीर स्वामी की असीम कृपा से राजगढ़ की पावन धरा पर श्री महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव एवं हाथीवाला श्री महावीरजी मंदिर (राजेंद्र भवन) के प्राण प्रतिष्ठा दिवस की वर्षगांठ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। चैत्र सुदी तेरस के इस पावन अवसर पर समूचा नगर भक्ति और अध्यात्म के रंग में सराबोर नजर आया। यह गरिमामय आयोजन परम पूज्य गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब, मुनि श्री पीयूषचंद्र विजयजी, मुनि श्री रूपेंद्र विजयजी आदि ठाणा एवं साध्वी मंडल की पावन निश्रा में संपन्न हुआ। मंदिर की वर्षगांठ के पावन स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में इस वर्ष मंदिर के शिखर पर 24 ध्वजाएं चढ़ाई गईं, जो नगर की सुख-समृद्धि और अटूट श्रद्धा का प्रतीक बनीं। शुभ मुहूर्त में मंत्रोच्चार और विशेष पूजन-अर्चन के साथ जब ध्वजारोहण संपन्न हुआ, तो पूरा आकाश प्रभु के जयकारों से गूंज उठा। इससे पूर्व प्रातः काल में तहलटी से राजेंद्र भवन तक भव्य मंगल प्रवेश निकाला गया। यहाँ आयोजित समारोह में सकल जैन श्रीसंघ ने गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहेब को पूर्ण श्रद्धा के साथ कांबली ओढ़ाई। इसके पश्चात गुरुदेव ने उपस्थित जनसमूह को अमृतमयी मांगलिक श्रवण कराई। महोत्सव के दौरान विधि-विधान के साथ सत्तरभेदी पूजन का आयोजन भी किया गया।







  ध्वजारोहण एवं गच्छाधिपति एवं मुनि भगवन्तों के प्रवचन के बाद श्रीसंघ का स्वामीवात्सल्य का आयोजन हुआ । दोपहर में नगर में भव्य वरघोड़ा (शोभायात्रा) निकाला गया, जो मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। इस दौरान श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला जब प्रभु महावीर स्वामी के रथ को श्रद्धालु अपने हाथों से खींचते हुए नजर आए। ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के बीच श्रावकों ने पूरी श्रद्धा के साथ रथ खींचकर धर्म लाभ लिया। सकल जैन श्रीसंघ के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

"केसरिया तो हमारे तिरंगे का भी हिस्सा है..." राजगढ़ के विराट कवि सम्मेलन में देशभक्ति के स्वर, सुबह 4 बजे तक झूमे श्रोता






 



  राजगढ़ (धार)। धर्मनगरी राजगढ़ में प्रभु श्री राम, भगवान महावीर और श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन उपलक्ष्य में एक भव्य अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। हिन्दू उत्सव समिति द्वारा आयोजित और सराफा एसोसिएशन व दत्तीगांव सोशल ग्रुप के सहयोग से संपन्न हुआ यह गौरवमयी कार्यक्रम नगर के मुख्य चौराहे, भगवा चौक (मेन चौपाटी) पर आयोजित किया गया।
    कार्यक्रम के संयोजक निलेश सोनी ने बताया कि यह काव्य संध्या नगर की दिवंगत पुण्यात्माओं स्व. राजा श्री प्रेमसिंह दत्तीगांव, स्व. श्री चांदमल सोनी, स्व. श्री शांतिलाल सुराणा, स्व. श्री सुमेंतिलाल सराफ, स्व. श्री दिपेश फरबदा, स्व. श्री विशाल-श्रीमती गौरी सोनी और स्व. श्री राजेश ठाकर की पावन स्मृति को समर्पित रही। कवियों ने अपनी मार्मिक रचनाओं के माध्यम से इन विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन के दौरान नगर के प्रमुख समाजसेवियों का अभिनंदन भी किया गया।
   मंच का सफल संचालन लाला माहेश्वरी ने किया,जबकि स्वागत भाषण निलेश सोनी ने दिया और आभार प्रदर्शन अजय श्रीवास्तव द्वारा किया गया। रात्रि 9 बजे शुरू हुआ यह काव्योत्सव अलसुबह 4 बजे तक चला, जिसमें देश के विख्यात कवियों ने अपनी ओजस्वी और सुरीली प्रस्तुतियों से जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
    सम्मेलन में कवियों ने सामाजिक विसंगतियों पर गहरा प्रहार किया। "शहर वालों ने पैसा तो खूब कमाया पर सभ्यता नहीं दिखी, पालतू कुत्ते खूब नज़र आए पर गौ माता एक भी नहीं दिखी" जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया। राष्ट्रभक्ति का शंखनाद करते हुए कवियों ने कहा कि "गौत्र हमारा राष्ट्र धर्म, कुलदेवी भारत माता है"।
   उज्जैन की कवयित्री निशा पंडित ने प्रेम और आस्था का संगम प्रस्तुत करते हुए कहा कि "विष को भी अमृत कर दे, प्रेम वो अमर बूटी है"। उन्होंने अयोध्या के गौरव पर प्रहार करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि "बाबर के बाप-दादा की जागीर नहीं है, बरसों से हमारी थी और हमारी ही रहेगी अयोध्या"।
  कवि नगेन्द्र ठाकुर ने ओजपूर्ण स्वर में देशद्रोहियों को ललकारते हुए कहा कि "सोने की चिड़िया रहे भारत, सोने का शेर बनाएंगे हम, पर औरंगजेब-बाबर की जयकार करने वाली औलाद नहीं चाहिए"। शाजापुर के पंडित अशोक नागर ने केसरिया के महत्व को तिरंगे से जोड़ते हुए कहा कि "जिस केसरिया में लोगों को उग्रवाद की बू आ रही है, वो तो हमारे तिरंगे का सबसे ऊपर वाला हिस्सा है"। वहीं व्यंग्यकार अर्जुन अल्हड़ ने समसामयिक मुद्दों पर तीखे कटाक्ष किए।
  अतुल ज्वाला ने कविता पाठ करते हुए भगवान ने धरती पे उतारी है अयोध्या सूरज के वंशजो ने संवरी है अयोध्या बाबर के बाप दादा की जागीर नहीं है बरसो से हमारी थी हमारी है अयोध्या। 
 इस विराट आयोजन में जनसमूह ने पूरी रात उत्साह के साथ कवियों का साथ दिया।

IHRCT की ऑनलाइन कार्यशाला में पदाधिकारियों ने सीखे उपभोक्ता संरक्षण के गुर






 




  राजगढ़ (धार)। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट (IHRCT) द्वारा उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम पर आधारित अपनी प्रथम राज्य स्तरीय कौशल विकास कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह कार्यशाला प्रदेश समन्वयक महेश कुमार वर्मा के कुशल मार्गदर्शन एवं निर्देशन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आयोजित हुई। शनिवार रात आयोजित इस विशेष सत्र में मध्य प्रदेश के सभी जिलों के पदाधिकारियों ने सहभागिता कर उपभोक्ता अधिकारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
  कार्यशाला के मुख्य अतिथि संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव रहे, जबकि अध्यक्षता राष्ट्रीय संयोजक प्रेम कुमार वैद्य ने की। मुख्य वक्ता के रूप में इंदौर संभाग के विधि प्रभारी अधिवक्ता प्रवीण कुमार शर्मा ने पदाधिकारियों का मार्गदर्शन किया। कार्यशाला का प्राथमिक उद्देश्य संगठन के सदस्यों को 'उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019' के नवीनतम प्रावधानों से लैस करना था। चर्चा के दौरान उपभोक्ताओं के शोषण को रोकने, भ्रामक विज्ञापनों की पहचान और वैधानिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।
   अधिवक्ता शर्मा ने बताया कि वर्तमान कानून के तहत उपभोक्ताओं को सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, निवारण और शिक्षा के छह मौलिक अधिकार प्राप्त हैं। साथ ही उन्होंने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा भ्रामक विज्ञापनों पर लगाए जाने वाले जुर्माने और दंडात्मक प्रावधानों की भी जानकारी दी। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों ने व्यावहारिक कौशल विकसित कर अपनी कार्यक्षमता को बढ़ाया और समाज में मानव अधिकारों के संरक्षण का संकल्प दोहराया।
   उल्लेखनीय है कि भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट समाज में मानवाधिकारों की रक्षा,महिला-बाल संरक्षण और दहेज निषेध जैसे क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय है। यह कार्यशाला ट्रस्ट द्वारा शुरू की गई प्रशिक्षण श्रृंखला का प्रथम सोपान है, जिसके आगामी चरणों में विभिन्न अन्य सामाजिक कानूनों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम का सफल संचालन धार जिला अध्यक्ष योगेन्द्र तिवारी द्वारा किया गया।

राजगढ़ और सरदारपुर नगर परिषद को मिले नए एल्डरमैन,शासन ने जारी की सूची









​  राजगढ़/सरदारपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा नगर परिषदों में मनोनीत पार्षदों (एल्डरमैन) की घोषणा कर दी गई है। नगर परिषद राजगढ़ से प्रफुल्ल जैन,गणेशलाल शर्मा, श्रीमती हेमलता और मनोज माहेश्वरी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं नगर परिषद सरदारपुर से राजेन्द्र गर्ग (रज्जु), झमकलाल चौधरी,दिनेश मावी और संजय सेठिया को मनोनीत किया गया है। इन नियुक्तियों से स्थानीय कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।


राजगढ़ में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन,देशभर के ख्यातनाम कवि देंगे प्रस्तुति,नगर के समाजसेवी जन का किया जाएगा अभिनंदन






 


  राजगढ़ (धार)। धर्मनगरी राजगढ़ में भगवान श्री राम जन्मोत्सव, भगवान श्री महावीर जन्मोत्सव एवं भगवान श्री हनुमान जन्मोत्सव के पावन पर्व के उपलक्ष्य में एक भव्य अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। कार्यक्रम संयोजक निलेश सोनी ने बताया कि हिन्दू उत्सव समिति द्वारा आयोजित और सराफा एसोसिएशन व दत्तीगांव सोशल ग्रुप के सहयोग से होने वाला यह आयोजन दिवंगत पुण्यात्माओं की पावन स्मृति को समर्पित किया गया है।आयोजन में नगर के समाजसेवियों का अभिनंदन किया जाएगा ताकि समाज उनके द्वारा समाजसेवा में दिए गए योगदान से प्रेरणा ले सके। यह गौरवमयी कार्यक्रम आगामी 30 मार्च, सोमवार को रात्रि 8 बजे से नगर के मुख्य चौराहे, भगवा चौक (मेन चौपाटी) पर आयोजित किया जाएगा।
  
  इस विराट कवि सम्मेलन में काव्य जगत के दिग्गज हस्ताक्षर अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे। आमंत्रित कवियों में अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि पंडित अशोक नागर (शाजापुर), हास्य रस के प्रसिद्ध कवि अर्जुन अल्हड़ (कोटा), राष्ट्रीय गीतकार नरेंद्र अटल (बड़नगर), और वीर रस की सशक्त कवयित्री सुश्री निशा पंडित (उज्जैन) मुख्य रूप से शामिल होंगे। इनके साथ ही हास्य-व्यंग्य के कवि शंकर सिसोदिया (आगर मालवा), राष्ट्रीय हास्य कवि एवं मंच संचालक अतुल ज्वाला (इंदौर) और वीर रस के कवि नगेंद्र ठाकुर (राजगढ़,धार) भी अपनी कविताओं के माध्यम से समां बांधेंगे।

  हिन्दू उत्सव समिति ने नगर के सभी धर्मप्रेमी जनता और काव्य प्रेमियों से इस गरिमामयी आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर काव्य रसपान करने की अपील की है। आयोजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पूरे क्षेत्र में इस भव्य समागम को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह : श्रमण डॉ पुष्पेंद्र




 


  आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के अनेक क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष, आतंकवाद, सामरिक प्रतिस्पर्धा और आंतरिक कलह यह संकेत देते हैं कि भौतिक प्रगति के बावजूद मनुष्य अभी भी मानसिक और नैतिक रूप से अस्थिर है।
   ऐसे समय में जब राष्ट्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन हथियारों और युद्ध के माध्यम से कर रहे हैं, मानव जीवन का मूल्य कहीं पीछे छूटता जा रहा है। युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज, परिवार और व्यक्ति के मनोविज्ञान को भी प्रभावित करता है। हिंसा का यह वातावरण भय, असुरक्षा और अविश्वास को जन्म देता है, जिससे शांति और सह-अस्तित्व की संभावनाएं क्षीण हो जाती हैं।
   वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि हिंसा कभी भी स्थायी समाधान नहीं दे सकती। युद्ध भले ही किसी समस्या का तात्कालिक समाधान प्रतीत हो, लेकिन वह दीर्घकाल में और अधिक संघर्षों को जन्म देता है। आज आवश्यकता है एक ऐसे दृष्टिकोण की, जो केवल शक्ति और प्रभुत्व पर नहीं, बल्कि संवेदना, सह-अस्तित्व और नैतिकता पर आधारित हो।
   यहीं पर तीर्थंकर भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांत की प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। भगवान महावीर ने अहिंसा को केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे विचार, वचन और कर्म—तीनों स्तरों पर लागू किया। उनके अनुसार किसी भी प्राणी को पीड़ा पहुंचाना हिंसा है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।
   प्रभु महावीर का अहिंसा का सिद्धांत आज के युद्धग्रस्त विश्व के लिए एक नैतिक दिशा प्रदान करता है। यदि हम उनके विचारों को गहराई से समझें, तो यह स्पष्ट होता है कि युद्ध की जड़ें बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर उत्पन्न होने वाले राग, द्वेष, अहंकार और लालच में निहित हैं। जब तक इन मानसिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण नहीं किया जाएगा, तब तक बाहरी शांति स्थापित नहीं हो सकती।
   आज के समय में हिंसा केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। यह हमारे दैनिक जीवन में भी विभिन्न रूपों में उपस्थित है—विचारों की कट्टरता, शब्दों की कठोरता, सामाजिक विभाजन और डिजिटल माध्यमों पर फैलती नफरत के रूप में। महावीर का संदेश हमें यह सिखाता है कि वास्तविक अहिंसा का पालन तभी संभव है, जब हम अपने भीतर की नकारात्मकता को पहचानकर उसे नियंत्रित करें।
विशेष रूप से वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में, जहां राष्ट्रों के बीच अविश्वास और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, ऐसे वक्त पर तीर्थंकर महावीर का “जियो और जीने दो” का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक है। यह सिद्धांत केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है। यदि राष्ट्र एक-दूसरे के अस्तित्व, संप्रभुता और हितों का सम्मान करें, तो संघर्ष की संभावनाएं स्वतः कम हो सकती हैं।
  इसके साथ ही,महावीर का अपरिग्रह का सिद्धांत भी वर्तमान युद्ध और हिंसा के मूल कारणों को समझने में सहायक है। संसाधनों की अंधाधुंध होड़, विस्तारवादी नीतियां और आर्थिक लालसा ही कई संघर्षों का आधार हैं। यदि सीमित इच्छाओं और संतुलित उपभोग को अपनाया जाए, तो न केवल सामाजिक असमानताएं कम होंगी, बल्कि युद्ध के कारण भी कमजोर पड़ेंगे।
महावीर द्वारा प्रतिपादित रत्नत्रय—सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र—आज के समय में एक समग्र समाधान प्रस्तुत करता है। सम्यक दर्शन हमें पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर वस्तुस्थिति को समझने की प्रेरणा देता है। सम्यक ज्ञान हमें सत्य और असत्य में भेद करने की क्षमता प्रदान करता है, जिससे हम गलत सूचनाओं और भ्रामक विचारों से बच सकते हैं। और सम्यक चरित्र इन दोनों का व्यावहारिक रूप है, जो हमारे आचरण को नैतिक और संतुलित बनाता है।
  अतः यह स्पष्ट है कि वर्तमान समय में जब विश्व हिंसा और युद्ध की आग में झुलस रहा है, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत केवल एक आध्यात्मिक आदर्श नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक आवश्यकता बन चुका है। यदि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र इस सिद्धांत को अपने जीवन और नीतियों में स्थान दें, तो न केवल संघर्षों को कम किया जा सकता है, बल्कि एक स्थायी और समरस विश्व की स्थापना भी संभव है।
  अंततः, शांति किसी बाहरी व्यवस्था का परिणाम नहीं, बल्कि आंतरिक चेतना का प्रतिबिंब है। जब मनुष्य अपने भीतर अहिंसा, करुणा और संतुलन को विकसित करेगा, तभी वह बाहरी दुनिया में भी शांति स्थापित कर सकेगा। यही तीर्थंकर महावीर का संदेश है—और यही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता।