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जब फ्रांस में प्रधानमंत्री मोदी भारत की नवाचार गाथा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत कर रहे हैं, तब hackFront India देश के भीतर नवाचार आंदोलन को नई गति दे रहा है

नई दिल्ली, दिल्ली, भारत
ऐसे समय में जब माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस शहर में प्रतिष्ठित "भारत इनोवेट्स" पहल के माध्यम से भारत की वैश्विक नवाचार पहुँच का नेतृत्व कर रहे हैं, राष्ट्रीय राजधानी में भारत के अगली पीढ़ी के नवोन्मेषकों को पोषित करने का एक समानांतर आंदोलन आकार ले रहा है।
नीति-निर्माता, उद्योग, शिक्षाजगत और नवाचार क्षेत्र के अग्रणी नेता hackFront India के शुभारंभ हेतु एकजुट हुए, ताकि भारत के नवाचार दशक को गति मिले और अगले दस लाख नवोन्मेषकों को अवसर मिल सके। 

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में आयोजित hackFront India लीडरशिप फोरम, hackFront India के आधिकारिक शुभारंभ का प्रतीक है — एक राष्ट्रीय नवाचार लीग जो देश भर के छात्र नवोन्मेषकों, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी निर्माताओं की पहचान करने, उन्हें पोषित करने और गति देने के लिए बनाई गई है। hackFront India अग्रणी इनोवेशन टेक स्टार्टअप Where U Elevate की पहल है।

इस आयोजन का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जब भारत "भारत इनोवेट्स" के माध्यम से फ्रांस में वैश्विक निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं के सामने 120 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप, प्रमुख संस्थान और अभूतपूर्व नवाचार प्रदर्शित कर रहा है, तो hackFront India उस जमीनी नवाचार पाइपलाइन को मजबूत करना चाहता है जो ऐसी सफलता की अगली कड़ी तैयार करेगी।

"भारत इनोवेट्स" की दृष्टि से प्रेरणा
hackFront India प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस निरंतर आह्वान से प्रेरणा लेता है, जिसमें उन्होंने एक नवाचार-आधारित भारत बनाने का आग्रह किया है जहाँ प्रौद्योगिकी मानवता की सेवा करे, उद्यमिता समृद्धि को गति दे और युवा मस्तिष्क प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता बनने की बजाय उसके निर्माता बनें।

hackFront India का शुभारंभ PM मोदी की उस दृष्टि की भावना को दर्शाता है जो प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार को जोड़कर भारत को एक वैश्विक नवाचार महाशक्ति के रूप में परिवर्तित करने की परिकल्पना करती है।

भारत के नवाचार दशक का निर्माण
Where U Elevate द्वारा आयोजित hackFront India लीडरशिप फोरम में उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप, सरकार और निवेश पारिस्थितिकी तंत्र के नेता एकत्रित हुए और भारत में नवाचार, उद्यमिता और उभरती प्रौद्योगिकियों के भविष्य पर विचार-विमर्श किया।

यह पहल हैकाथॉन, नवाचार चुनौतियों, स्टार्टअप एक्सेलरेटर और मेंटरशिप कार्यक्रमों की एक संरचित, अखिल भारतीय लीग बनाने का लक्ष्य रखती है जो छात्रों और युवा उद्यमियों को प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए सशक्त बनाएगी।

आंदोलन का नेतृत्व करने वाले अगुवा
hackFront India का नेतृत्व Where U Elevate के सह-संस्थापक एवं CEO श्री ऋषभ इलवादी कर रहे हैं, जिनकी दृष्टि नवाचार, उद्यमिता और युवा नेतृत्व के लिए एक राष्ट्रव्यापी मंच बनाना है। उन्हें शिक्षा, उद्योग, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और सार्वजनिक नीति के नेताओं से मिलकर बनी एक सुदक्ष कार्यकारी परिषद का सहयोग प्राप्त है।

यह पहल एक प्रतिष्ठित सलाहकार एवं मेंटरशिप परिषद द्वारा निर्देशित है जिसमें उद्योग जगत के दिग्गज श्री अमरेश खर और AutoBridge Ventures के संस्थापक एवं CEO श्री धीरज त्रिपाठी, तथा IIIT दिल्ली में इनोवेशन के समन्वयक एवं प्रमुख डॉ. आलोक निखिल झा शामिल हैं। ये सभी मिलकर रणनीतिक विशेषज्ञता, उद्योग अंतर्दृष्टि और मेंटरशिप प्रदान करते हैं।

नेतृत्व की आवाजें
इस शुभारंभ पर बोलते हुए, फोरम में उपस्थित विशिष्ट सम्मानित अतिथियों और विचार-नेताओं — जिनमें डॉ. विनोद बिंद (सांसद, लोकसभा), श्री अंशू पांडेय (निदेशक, खान मंत्रालय), डॉ. पंकज त्रिपाठी (चिकित्सक एवं समाजसेवी), श्री विनीत गोयनका (सचिव, सेंटर फॉर नॉलेज सॉवरेनिटी) और सुश्री माल्गोर्जाता वेजसिस-गोलेबियाक (निदेशक, पोलिश इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली) शामिल थे — ने इस बात पर बल दिया कि भारत की नवाचार यात्रा केवल बोर्डरूम और शोध प्रयोगशालाओं में नहीं बन सकती। इसे स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में लाखों युवा मस्तिष्कों द्वारा संचालित होना चाहिए। 

उन्होंने शैक्षणिक शिक्षा और उद्योग की आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने, युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने, उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और कॉर्पोरेट तथा सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों में सार्थक करियर के मार्ग बनाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित किया।

उद्योग और शिक्षा जगत के नेताओं में श्री मनीष गुरनानी (CTO, Ksolves India Limited), श्री प्रवीण द्विवेदी (VP-पब्लिक सेक्टर, iLink Digital), श्री भावेश कटारिया (CEO, Telio Talent), श्री मुकेश बंसल (DGM - नवीकरणीय ऊर्जा, Havells), श्री ओम प्रकाश मौर्य (डिलीवरी हेड, Ksolves India Limited), डॉ. राजेश पाठक (कुलपति, Metro University), इमरान युसुफ (COO, Electropreneur Park - STPI), डॉ. सुनीता यादव (डीन, कंप्यूटर साइंस, इंदरप्रस्थ इंजीनियरिंग कॉलेज), डॉ. अंजनी कुमार भटनागर (अतिरिक्त निदेशक - प्लेसमेंट्स, Amity University), डॉ. अभिनव जुनेजा (निदेशक, CRPC, KIET University) शामिल थे। उन्होंने छह महीने की hackFront India इनोवेशन लीग से उभरने वाले प्रतिभाशाली नवोन्मेषकों को संरचित मेंटरशिप, इनक्यूबेशन सहायता, उद्योग एक्सपोजर और निवेशक पहुँच प्रदान करने के महत्व को उजागर किया।

"जब भारत इनोवेट्स दुनिया के सामने भारत की नवाचार उत्कृष्टता प्रदर्शित कर रहा है, hackFront India उन नवोन्मेषकों को खोजने, पोषित करने और सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता है जो आने वाले वर्षों में ऐसे वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। रोजगार क्षमता, उद्यमिता और इनक्यूबेशन सहायता को मजबूत करके, हम एक भविष्य-सज्जित कार्यबल बनाने में योगदान दे रहे हैं और भारत के नवाचार दशक का निर्माण कर रहे हैं।"

आयोजन विवरण
आयोजन: hackFront India लीडरशिप फोरम
तिथि: 13 जून 2026
स्थान: कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली
थीम: भारत के नवाचार दशक का निर्माण – प्रतिभा, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता पर एक राष्ट्रीय संवाद
फोरम में देश भर से उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप, सरकारी संस्थानों, निवेशकों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

hackFront India के बारे में
hackFront India – Where U Elevate की एक पहल – एक राष्ट्रीय नवाचार लीग है जो हैकाथॉन, नवाचार चुनौतियों, मेंटरशिप, इनक्यूबेशन सहायता और उद्योग जुड़ाव के माध्यम से युवा बिल्डर्स, उद्यमियों और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों को पोषित करने के लिए समर्पित है। यह पहल एक राष्ट्रव्यापी मंच बनाने का प्रयास करती है जो विचारों को प्रभावशाली उद्यमों में रूपांतरित करे और भारत के वैश्विक नवाचार नेता के रूप में उभरने में योगदान दे।

Checkmarx One ने इंडस्ट्री की सबसे बेहतरीन स्कैनिंग सटीकता हासिल की, पुराने टूल्स और AI मॉडल्स दोनों को पीछे छोड़ा


 पैरामस, न्यू जर्सी

एजेंटिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी' में ग्लोबल लीडर Checkmarx ने आज अपने Checkmarx One प्लेटफॉर्म में एक बड़े अपडेट की घोषणा की है। यह एक नया हाइब्रिड स्टेटिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी टेस्टिंग (SAST) स्कैनिंग इंजन है, जो इंडस्ट्री में सबसे बेहतरीन फिडेलिटी देने के लिए तैयार है, जिसे तकनीकी भाषा में 'F1 स्कोर' कहा जाता है। AI की मदद से तेजी से हो रहे सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के कारण सुरक्षा कमियों (vulnerabilities) में भी भारी बढ़ोतरी हो रही है। इससे कंपनियों के सामने एक ऐसा बड़ा खतरा पैदा हो गया है जिससे कोई भी अकेला स्कैनिंग टूल नहीं निपट सकता।

न तो पुराने नियमों पर आधारित टूल और न ही सिर्फ AI मॉडल्स इस खतरे का पूरा समाधान दे सकते हैं। नियमों पर आधारित पारंपरिक स्कैनिंग अपनी चुनी हुई भाषाओं के लिए तो एकदम सटीक है, लेकिन AI कोडिंग ने कई ऐसी नई भाषाएं पेश कर दी हैं जो इन पुराने नियमों के दायरे में नहीं आतीं। AI इन नई उभरती हुई जगहों पर भी सुरक्षा जांच को आपने दायरे में लाता है। लेकिन जब बड़े पैमाने पर कोड स्कैन होता है, तो इतनी सारी कमियां सामने आती हैं कि टीमें उन पर काम ही नहीं कर पातीं और असली खतरे फालतू अलर्ट्स की भीड़ में दब जाते हैं। आज प्रोडक्शन में मौजूद 49% कोड AI द्वारा लिखा गया है जो काफी हद तक असुरक्षित है और हैकर्स को सिस्टम में सेंध लगाने में अब महीनों नहीं, बल्कि सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं। इसलिए कंपनियों को आज सटीक पारंपरिक स्कैनिंग और AI की व्यापक पहुंच दोनों की जरूरत है।

इसी जरूरत को पूरा करने के लिए Checkmarx अपने Checkmarx One प्लेटफॉर्म में एक नया नेक्स्ट-जेनरेशन SAST हाइब्रिड स्कैनिंग इंजन पेश कर रहा है। यह सुरक्षा की तीन लेयर्स को एक साथ मिलाता है: पहला, नियमों पर आधारित एक मजबूत आधार जिसे दो दशकों के एंटरप्राइज़ AppSec अनुभव से तैयार किया गया है; दूसरा, एक खास ट्यून्ड LLM इंजन जो इस सुरक्षा को किसी भी भाषा (चाहे वह AI जनरेटेड कोड हो या नई भाषाएं) तक पहुंचाता है; और तीसरा, नया Finding Analysis Engine (FAE), जो डेवलपर्स तक रिपोर्ट पहुंचने से पहले ही असली खतरों की पुष्टि करता है और 'फॉल्स पॉजिटिव' को रोक देता है।

Checkmarx के CEO Sandeep Johri ने कहा, "कोई भी एक तरीका, चाहे वह पारंपरिक नियमों वाला हो या AI—अकेले पूरा काम नहीं कर सकता। सटीक नतीजों के लिए पारंपरिक स्कैनिंग सबसे भरोसेमंद है और AI उस कोड तक पहुंच बनाता है जिसके लिए कभी नियम लिखे ही नहीं गए थे। लेकिन इनमें से कोई भी टूल अकेले काम की कमियों और फालतू अलर्ट के बीच फर्क नहीं कर पाता। आज के समय में कोड का वॉल्यूम इतना ज्यादा है कि यह फालतू अलर्ट ही टीमों की रफ्तार धीमी करते हैं और लागत बढ़ाते हैं। Checkmarx One के हाइब्रिड इंजन एक बिल्कुल नए आर्किटेक्चर में इन दोनों की सबसे बेहतरीन खूबियों को एक साथ लाते हैं।"

सात असली प्रोडक्शन कोडबेस पर की गई सीधी टेस्टिंग में, Checkmarx One के हाइब्रिड इंजन ने 0.64 का F1 स्कोर हासिल किया। यह Checkmarx द्वारा परखे गए अन्य प्रतिस्पर्धी तरीकों के 0.20 औसत से तीन गुना से भी ज्यादा है। साथ ही, इसने 'फॉल्स पॉजिटिव' को 60% तक कम कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि टीमें ढेरों फालतू अलर्ट्स के बीच से सिर्फ एकदम सटीक और काम की चेतावनियों पर फोकस कर पाती हैं। वे उन कमियों को दूर करने पर ध्यान लगा सकती हैं जिनका सच में हैकर्स द्वारा फायदा उठाया जा सकता है और AI द्वारा लिखे गए कोड से पैदा होने वाले नए खतरों से भी सुरक्षित रह सकती हैं।

 
नए Checkmarx One हाइब्रिड स्कैनिंग इंजन की प्रमुख खूबियां इस प्रकार हैं:

Finding Analysis Engine (FAE): यह हर एक शुरुआती कमी का विश्लेषण करता है, 'फॉल्स पॉजिटिव' को रोकता है और सिर्फ असली कमियों की पुष्टि करता है। यह कमज़ोर सिग्नल्स को एकदम सटीक नतीजों में बदल देता है जिन पर टीमें तुरंत एक्शन ले सकती हैं।

हर भाषा के लिए कारगर (Language-agnostic scanning): यह अपनी जांच के दायरे को किसी भी भाषा तक बढ़ाता है, जिसमें AI द्वारा लिखा गया कोड, नई भाषाएं और 'पॉलीग्लॉट' कोडबेस (ऐसे एप्लिकेशन जो कई प्रोग्रामिंग भाषाओं को मिलाते हैं) शामिल हैं। यह पुरानी और स्थापित भाषाओं पर अपनी सटीकता से समझौता किए बिना, AI कोडिंग टूल्स से पैदा होने वाली नई कमियों को भी दूर करता है।

मजबूत गवर्नेंस (Defensible governance): यह सिर्फ कमियों की गिनती बताने के बजाय असली खतरों पर फोकस करता है। यह मैनेजमेंट और बोर्ड को इस बात का पुख्ता सबूत देता है कि किस खतरे का सच में फायदा उठाया जा सकता है और किसे ठीक कर लिया गया है, ताकि लीडर्स सही फैसले ले सकें।

Checkmarx के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर Jonathan Rende ने कहा, "AI ने डेवलपर्स के काम की रफ्तार को काफी बढ़ा दिया है लेकिन स्वतंत्र जांचों से पता चलता है कि सबसे बेहतरीन AI मॉडल्स भी एक तिहाई से लेकर लगभग आधे मामलों में असुरक्षित कोड बनाते हैं और इस असुरक्षित कोड को पकड़ने वाले टूल्स सिर्फ 'फॉल्स पॉजिटिव' के पीछे भागते हुए कंपनियों का भारी बजट बर्बाद कर सकते हैं। टीमों को सिर्फ ज्यादा कमियों की लिस्ट नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें भरोसा और सटीक जानकारी चाहिए: यानी ऐसी कमियों का पता चलना जो सच में मायने रखती हैं, फालतू का शोर खत्म होना और यह सब बिना बजट बिगाड़े होना। Checkmarx One अब अपने हर ग्राहक को यही भरोसा देता है– बजट के अंदर इंडस्ट्री की सबसे बेहतरीन एक्यूरेसी।"

 
नए हाइब्रिड स्कैनिंग इंजन और Finding Analysis Engine अब Checkmarx One प्लेटफॉर्म के हिस्से के रूप में 'अर्ली एक्सेस' के लिए उपलब्ध हैं। अधिक जानकारी के लिए checkmarx.com पर जाएं या 16 जून 2026 को होने वाले आगामी वर्चुअल समिट Agentic AppSec Unleashed ’26 में हिस्सा लें।

Checkmarx के बारे में
Checkmarx 'एजेंटिक एप्लिकेशन सिक्योरिटी' में लीडर है, जो इंजीनियरिंग लागत को कम करते हुए और डेवलपमेंट की रफ्तार को बढ़ाते हुए एंटरप्राइज़-ग्रेड की सुरक्षा प्रदान करता है। Checkmarx One प्लेटफॉर्म हर साल कंपनियों के लिए खरबों (trillions) लाइनों का कोड स्कैन करता है, और कमजोरियों को आधे से भी ज्यादा कम कर देता है। इसके ऑटोनोमस सिक्योरिटी एजेंट्स SDLC में AI-आधारित खतरों का पता लगाते हैं और उन्हें रोकते हैं। यह बड़े एंटरप्राइज़ स्तर पर पुराने, आधुनिक और AI-जनरेटेड कोड के लिए 'प्रिवेंशन-फर्स्ट' (रोकथाम पहले) सुरक्षा प्रदान करता है। Checkmarx को LinkedIn, YouTube, और X पर फॉलो करें।

 
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: PR@checkmarx.com

राजगढ़ के व्यापारियों के लिए बड़ी राहत: कॉम्प्लेक्स खाली करने का नोटिस स्थगित,मरम्मत पर होगा मंथन







 



  राजगढ़ (धार): राजगढ़ नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले बाल विनय मंदिर कॉम्प्लेक्स और राजीव कॉम्प्लेक्स के सैकड़ों व्यापारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्रशासन द्वारा दुकानों को रिक्त करने के लिए जारी किया गया अंतिम नोटिस फिलहाल रोक दिया गया है। पार्षद रीतु निलेश सोनी की पहल और उनके द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को सौंपे गए ज्ञापन के बाद यह सकारात्मक निर्णय लिया गया है।

क्या था मामला?

  पिछले कुछ समय से इन दोनों कॉम्प्लेक्सों के दुकानदारों पर अपनी दुकानें खाली करने का दबाव था, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे थे। ये दुकानदार पिछले 20-25 वर्षों से अपना व्यवसाय यहाँ सफलतापूर्वक चला रहे हैं। अचानक आए इस नोटिस के कारण व्यापारियों में भारी चिंता का माहौल था और वे बेरोजगारी की आशंका से भयभीत थे।

 पार्षद के हस्तक्षेप से टली कार्रवाई

 मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पार्षद रीतु निलेश सोनी ने नगर परिषद प्रशासन के समक्ष व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखा। पार्षद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि:
 * दुकानदार नियमित रूप से किराया जमा कर रहे हैं।
 * अधिकांश दुकानदार दशकों से यहाँ कार्यरत हैं, जिन्हें अचानक हटाना अनुचित है।
 * व्यापारी स्वयं कॉम्प्लेक्स की मरम्मत में आर्थिक सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
इन तर्कों पर विचार करते हुए प्रशासन ने फिलहाल निष्कासन की कार्यवाही को रोकने का निर्णय लिया है।

अब आगे क्या? (16 जून की बैठक पर टिकी निगाहें)

  आगामी परिषद बैठक 16 जून को हे जिसमे पार्षद रीतु निलेश सोनी कॉम्प्लेक्स के जीर्णोद्धार (रिपेयरिंग) का प्रस्ताव रखेंगी। उद्देश्य यह है कि दुकानों को खाली कराने के स्थान पर, उनकी मरम्मत करवाकर उन्हें सुरक्षित और व्यवस्थित किया जाए।

 व्यापारियों में खुशी की लहर

  नोटिस पर रोक लगने की सूचना मिलते ही व्यापारियों में खुशी का माहौल है। राजीव कॉम्प्लेक्स के एक पुराने व्यापारी ने भावुक होकर कहा, "25 साल से हम इस दुकान के भरोसे अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। नोटिस ने हमारी नींद उड़ा दी थी, लेकिन पार्षद मैडम के सहयोग से हमें नई उम्मीद मिली है।"

  पार्षद रीतु निलेश सोनी ने कहा: "हमारा मकसद किसी को उजाड़ना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना है। हम चाहते हैं कि व्यापारी बिना किसी डर के अपना काम जारी रखें। 16 जून की बैठक में हम रिपेयरिंग का एस्टीमेट पास करवाकर कॉम्प्लेक्स के कायाकल्प की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।"

 अब क्षेत्र के सभी व्यापारियों की नजरें 16 जून को होने वाली नगर परिषद की बैठक पर टिकी हैं, जिसमें मरम्मत कार्य और नई किराया नीति पर अंतिम मुहर लग सकती है।

भारत 2030: इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति जो लोगों और गणित की ताकत से शुरू होगी

पुणे, महाराष्ट्र, भारत

भारत में बिजली की मांग पहले ही 250 गीगावाट से ज़्यादा है और 2032 तक इसके 400 गीगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। अकेले AI डेटा सेंटर के विकास से 2031 तक 13 गीगावाट और जुड़ सकते हैं। AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डेडिकेटेड हर गीगावाट औद्योगिक विकास, शहरी विकास और घरेलू मांग से मुकाबला करता है। फिर भी, करोड़ों भारतीय रोज़ाना बिजली कटौती, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव, या मामूली ग्रिड कनेक्शन के बावजूद डीज़ल बैकअप पर निर्भरता का अनुभव करते हैं।


यह फ़र्क मायने रखता है: ग्रिड से जुड़ा होना और लगातार बिजली उपलब्ध होना, दो अलग-अलग बातें हैं। सिर्फ़ सेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाकर उस अंतर को कम करने के लिए जेनरेशन, ट्रांसमिशन और स्टोरेज में सैकड़ों अरबों डॉलर के निवेश की ज़रूरत होगी। भारत की ऊर्जा चुनौती सिर्फ़ इसके बड़े पैमाने (स्केल) को लेकर नहीं है, बल्कि इसके बुनियादी ढांचे की बनावट (आर्किटेक्चर) से जुड़ी है।

न्यूट्रिनो ® एनर्जी ग्रुप , जो गणितज्ञ होल्गर थॉर्स्टन शुबार्ट के बनाए गणित और इंजीनियरिंग फ्रेमवर्क पर काम करता है, एक पूरक समाधान पेश करता है: लाखों इंटेलिजेंट डीसेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर नोड्स, जिनमें से हर एक कंजम्प्शन पॉइंट पर लगातार पावर जेनरेट करता है, मिलकर वह प्रोड्यूस करता है जो सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम नहीं कर सकते: भरोसेमंद, डिस्ट्रिब्यूटेड बेसलोड बिना इंफ्रास्ट्रक्चर चेन के जो एक्सपेंशन को धीमा और महंगा बनाते हैं।

नेगावाट अंकगणित​
आर्थिक तर्क नंबरों पर आधारित है। एक मिलियन लाइफ क्यूब यूनिट एक किलोवाट के लगातार आउटपुट पर काम करते हुए एक गीगावाट का डीसेंट्रलाइज़्ड बेसलोड बनाते हैं। दस मिलियन यूनिट दस गीगावाट बनाते हैं । पचास मिलियन यूनिट पचास गीगावाट बनाते हैं। लेकिन असली कीमत पैदा हुए वॉट में नहीं है । यह सेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के गीगावाट में है जिसे कभी बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती : ट्रांसमिशन कैपेसिटी, स्टोरेज सिस्टम, रिज़र्व जेनरेशन, डिस्ट्रीब्यूशन को मज़बूत करना।
 
उपभोग स्थल पर लगाई गई हर इकाई उस इंफ्रास्ट्रक्चर चेन को समाप्त कर देती है, जो उस स्थान तक बिजली पहुँचाने के लिए आवश्यक होती। डीसेंट्रलाइज़्ड लगातार-जेनरेशन प्लेटफॉर्म नई जेनरेशन कैपेसिटी को सीधे खपत की जगह पर लाकर इस टकराव को कम करने में मदद कर सकते हैं। भारत के फिस्कल संदर्भ में, जहां ग्रिड बढ़ाने की लागत सैकड़ों अरबों डॉलर में आती है, यह सिस्टमिक नेगावाट इफ़ेक्ट कोई फिलॉसफी नहीं है। यह सस्ती ऊर्जा उपलब्धता और डेफर्ड डेवलपमेंट की एक और जेनरेशन के बीच का अंतर है।
 
द टेक्नोलॉजी

न्यूट्रिनो ® एनर्जी ग्रुप के कन्वर्ज़न सिस्टम, ओपन नॉन-इक्विलिब्रियम सिस्टम के तौर पर काम करने वाले ग्रेफीन-सिलिकॉन नैनोस्ट्रक्चर के ज़रिए थर्मल ग्रेडिएंट, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैकग्राउंड फील्ड और कॉस्मिक पार्टिकल इंटरैक्शन सहित मल्टी-चैनल एम्बिएंट फ्लक्स को इकट्ठा करते हैं। इसका मुख्य फ्रेमवर्क शुबार्ट मास्टर फ़ॉर्मूला है:
 

यह इक्वेशन मल्टी-चैनल एम्बिएंट फ्लक्स से लगातार इलेक्ट्रिकल आउटपुट को बताता है, जो एक्टिव मटीरियल वॉल्यूम में इंटीग्रेटेड है, और थर्मोडायनामिक एफिशिएंसी कंस्ट्रेंट से घिरा हुआ है।

यह आउटपुट लगातार होता है, लोकेशन से अलग होता है, और इसके लिए किसी फ्यूल, मूविंग पार्ट्स और ग्रिड कनेक्शन की ज़रूरत नहीं होती। इंटरनल मोंटे कार्लो सिमुलेशन और मल्टी-पैरामीटर इवैल्यूएशन से पता चलता है कि स्टैटिस्टिकल कंसिस्टेंसी 5.9 से 6.0 सिग्मा तक पहुँचती है, जो मॉडर्न फिजिक्स में कन्वेंशनल
फाइव-सिग्मा डिस्कवरी थ्रेशहोल्ड से ऊपर है।

यह दावा औद्योगिक स्तर पर इसके व्यावसायिक प्रदर्शन (कमर्शियल परफॉर्मेंस) को प्रमाणित नहीं करता है। यह स्थापित एक्सपेरिमेंटल फ़िज़िक्स के मुकाबले फ़िज़िकल फ्रेमवर्क की अंदरूनी कंसिस्टेंसी को एक कॉन्फिडेंस लेवल पर मापता है, जहाँ एक्सीडेंटल कंसिस्टेंसी की संभावना लगभग पाँच सौ मिलियन में से एक है।

द लाइफ क्यूब 
लाइफ क्यूब एक ऑटोनॉमस इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेटफॉर्म है जिसे 1 से 1.5 किलोवाट रेंज में लगातार आउटपुट देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें इंटीग्रेटेड क्लाइमेट कंट्रोल और हवा से पानी को साफ करने की सुविधा है, जो मौसम के हिसाब से हर दिन 12 से 25 लीटर साफ पीने का पानी बनाता है। यह बिना किसी बाहरी बिजली सप्लाई, बिना फ्यूल लॉजिस्टिक्स और बिना ग्रिड पर निर्भर हुए काम करता है।

राजस्थान के एक दूर-दराज के क्लिनिक के लिए, इसका मतलब है लाइट, रेफ्रिजेरेटेड दवाइयां, और एक ही यूनिट से साफ पानी, जो सड़क से आता है और जिसे दोबारा सप्लाई की ज़रूरत नहीं होती। बिहार के एक गांव के स्कूल के लिए, इसका मतलब है लगातार कनेक्टिविटी और कूलिंग। वहीं, ओडिशा के किसी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र के लिए इसका मतलब है—कागज़ पर ग्रिड से जुड़े होने और असल में भरोसेमंद बिजली मिलने के बीच का अंतर खत्म होना, वो भी उस बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का इंतजार किए बिना जिसे आने में शायद दशक लग जाएं। 

भारत के क्लाइमेट में खास तौर पर वह कंपाउंडिंग इफ़ेक्ट है जिसके बारे में शुबार्ट बताते हैं: एनर्जी से कूलिंग होती है, कूलिंग से कंडेंसेशन होता है, और कंडेंसेशन से साफ़ पानी बनता है। एक प्लैटफ़ॉर्म से, इंसानी विकास का एक साइकिल शुरू होता है।

भारत की AI महत्वाकांक्षा और इसकी ऊर्जा बाधा
भारत का लक्ष्य एक ग्लोबल AI पावर बनना है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार, स्टेबल बिजली की ज़रूरत होती है, जिसकी गारंटी कभी-कभी मिलने वाले रिन्यूएबल एनर्जी स्ट्रक्चरल तौर पर नहीं दे सकते। वही डीसेंट्रलाइज़्ड आर्किटेक्चर जो गांव में ऊर्जा की कमी को दूर करता है, वह AI एज कंप्यूटिंग की लगातार बेसलोड ज़रूरत को भी पूरा करता है। लाइफ क्यूब और पावर क्यूब प्लेटफॉर्म भारत के रिन्यूएबल बिल्डआउट का विकल्प नहीं हैं। वे लगातार जेनरेशन लेयर हैं जो उस बिल्डआउट को पूरा करते हैं।

एक साझेदारी, बिक्री नहीं
शुबार्ट इस एंगेजमेंट के नेचर के बारे में सीधे कहते हैं, “मैं भारत में एक विक्रेता (Seller) के रूप में नहीं, बल्कि एक एक साझेदार के रूप में आया हूँ। कुछ लेने नहीं , बल्कि साथ मिलकर कुछ बनाने के लिए।”

हमारा दृष्टिकोण (विज़न) यह है कि इंडियन इंजीनियर, इंडियन मैन्युफैक्चरर, इंडियन बैटरी स्पेशलिस्ट, इंडियन सॉफ्टवेयर डेवलपर और इंडियन एंटरप्रेन्योर भारत में यह इंफ्रास्ट्रक्चर बनाएं। अंतरराष्ट्रीय साझेदार ज्ञान प्रदान करते हैं, प्लेटफ़ॉर्म को मिलकर विकसित करते हैं, और ऐसी औद्योगिक क्षमता बनाते हैं जो लंबे समय तक इंडियन इंडस्ट्री से जुड़ी रहे। यह इम्पोर्ट पर डिपेंडेंसी नहीं है। यह एक टेक्नोलॉजी पैराडाइम का इंडियन हाथों में ट्रांसफर है।

 “अगर हम ऊर्जा, पानी, कूलिंग और कनेक्टिविटी की चुनौतियों का मिलकर समाधान खोज लेते हैं, तो हम केवल एक नए इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं करेंगे; बल्कि हम नई संभावनाओं को जन्म देंगे—परिवारों के लिए, छात्रों के लिए, डॉक्टरों के लिए, गांवों के लिए, शहरों के लिए और अंततः पूरे देश के लिए।"

भारत ने एक समय दुनिया को ज़ीरो का कॉन्सेप्ट दिया था। शायद भारत 21वीं सदी में दुनिया को दिखाएगा कि कैसे अरबों लोग इंटेलिजेंट डीसेंट्रलाइज़्ड इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए ऊर्जा, पानी, शिक्षा और खुशहाली पा सकते हैं।

अगली इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति पावर प्लांट से शुरू नहीं होगी, बल्कि लोगों और गणित की ताकत से शुरू होगी।

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ब्रिक्स (BRICS) प्रतिनिधि मण्डल के माण्डू भ्रमण की तैयारियाँ पूर्ण; कल जहाज महल में होगा अंतर्राष्ट्रीय डेलिगेशन का भव्य स्वागत








 



सांस्कृतिक कार्यक्रमों,भव्य लाइट एंड साउंड शो और गाला डिनर से सजेगी माण्डू की शाम

कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने जहाज महल पहुँचकर सुरक्षा और वी.आई.पी. प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं का लिया अंतिम जायजा

    धार। ऐतिहासिक पर्यटन नगरी माण्डू में कल, 12 जून 2026 को आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) प्रतिनिधि मण्डल के अंतर्राष्ट्रीय भ्रमण को लेकर जिला प्रशासन द्वारा सभी तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। इस अत्यंत महत्वपूर्ण और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वी.आई.पी. आयोजन की व्यवस्थाओं की अंतिम समीक्षा करने के लिए कलेक्टर श्री राजीव रंजन मीना एवं पुलिस अधीक्षक श्री सचिन शर्मा विशेष रूप से 'जहाज महल' पहुँचे। अधिकारियों ने सुरक्षा, रूट और स्वागत-सत्कार से जुड़ी तमाम बारीकियों का धरातलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया।
  कलेक्टर श्री मीना ने निर्देश दिए हैं कि संपूर्ण आयोजन अंतर्राष्ट्रीय मापदंडों और वी.आई.पी. प्रोटोकॉल के अनुरूप गरिमामय और चाक-चौबंद होना चाहिए, जिसमें किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जाए।

पारंपरिक संस्कृति और 'बाग प्रिंट' से रूबरू होंगे विदेशी मेहमान

  तय कार्यक्रम के अनुसार, 12 जून को ब्रिक्स प्रतिनिधि मण्डल माण्डू के विश्व प्रसिद्ध 'जहाज महल' का दीदार करेगा। विदेशी मेहमानों के जहाज महल पहुँचने पर आजीविका समूह की दीदियों द्वारा पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुसार उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इसके पश्चात, प्रतिनिधि मण्डल मुख्य द्वार के समीप आजीविका समूह की दीदियों द्वारा लगाई गई धार जिले की विश्व प्रसिद्ध 'बाग प्रिंट' की विशेष स्टॉल्स का अवलोकन करेगा।

लोक नृत्य और लाइट एंड साउण्ड शो का आकर्षण

भ्रमण के दौरान मुख्य द्वार पर स्थानीय नृत्य दल द्वारा पारंपरिक लोक नृत्य की जीवंत प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्य द्वार से जहाज महल में प्रवेश के बाद अधिकृत टूरिस्ट गाइड्स द्वारा विदेशी मेहमानों को माण्डू और जहाज महल के गौरवशाली इतिहास तथा स्थापत्य कला की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
     शाम को विशेष आकर्षण के रूप में ऐतिहासिक प्राचीर पर भव्य 'लाइट एंड साउण्ड शो' का प्रदर्शन किया जाएगा। 

गाला डिनर के साथ होगा समापन

  सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भ्रमण के उपरांत, जिला प्रशासन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय डेलीगेट्स के सम्मान में एक शानदार गाला डिनर का आयोजन किया जाएगा, जहाँ मेहमान विशेष व्यंजनों का स्वाद लेंगे। 
  निरीक्षण के दौरान मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

बर्ड वाचिंग के 25 वर्षों में पहली बार दिखा रेड-नैप्ड आइबिस; पर्यावरण के लिए शुभ संकेत









 



  सरदारपुर (धार) : इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-47 पर फुलगांवड़ी से चिंचोड़िया मार्ग के बीच स्थित खेतों में 'रेड-नैप्ड आइबिस' (Pseudibis papillosa) पक्षी देखा गया है। पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन, जो पिछले 25 वर्षों से इस क्षेत्र में बर्ड वाचिंग (पक्षी अवलोकन) कर रहे हैं, ने इस पक्षी के दिखाई देने की पुष्टि की है।

पक्षी की विशेषताएं और पारिस्थितिकी

  रेड-नैप्ड आइबिस, जिसे 'इंडियन ब्लैक आइबिस' भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप का एक स्थानीय (resident) पक्षी है। यह मुख्य रूप से खुले मैदानों, कृषि क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास पाया जाता है। काले-धूसर रंग के इस पक्षी की पहचान इसके कंधों पर मौजूद विशिष्ट सफेद पैच (white shoulder patch) और सिर पर मौजूद लाल रंग की त्वचा (red warty skin) से की जाती है। इसकी लंबी, नीचे की ओर झुकी हुई चोंच इसे खेतों में कीड़े-मकोड़े और छोटे जीवों को खोजने में मदद करती है।

जैव-विविधता का सकारात्मक संकेत

  पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन ने बताया कि इस क्षेत्र में सामान्यतः ब्लैक हेडेड आइबिस देखे जाते हैं, लेकिन रेड-नैप्ड आइबिस का इस विशेष मार्ग पर दिखना स्थानीय जैव-विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। पास ही स्थित आनंदखेड़ी तालाब के कारण यह क्षेत्र पक्षियों के लिए भोजन का एक अच्छा स्रोत बना हुआ है। इस पक्षी का यहाँ विचरण करना पर्यावरण के संतुलित और स्वस्थ होने का एक सकारात्मक संकेत है।
 
 

मोबाइल छोड़ो,कागज़ की नाव जोड़ो: दिनेश गुप्ता का एक और गिनीज़ रिकॉर्ड प्रयास







 





  कल्याण | – प्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर, लेखक एवं 8 गिनीज़ रिकॉर्ड धारक दिनेश गुप्ता (माइंडसेट गुरु) ने बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करने और रचनात्मक गतिविधियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक घंटे में 275 ओरिगामी (कागज़ की) नावें बनाकर नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करने का प्रयास किया। उनका संदेश है, "बारिश आ रही है और हमारी नाव तैयार है", अर्थात बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के बजाय कागज़ की नाव बनाकर, खेलकर और अपनी कल्पनाशक्ति का विकास करें। यह प्रयास एक घंटे में सबसे अधिक नावें श्रेणी के अंतर्गत किया गया, जिसमें पूर्व रिकॉर्ड 250 नावों का था। रिकॉर्ड प्रयास के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया, संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई तथा आवश्यक साक्ष्य तैयार किए गए। हालांकि इस उपलब्धि की गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है और अंतिम परिणाम सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद घोषित किया जाएगा।