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नए स्टार्टअप्स की डिजिटल पहचान मजबूत करने में जुटे युवा उद्यमी Pradum Shukla

भारत में पिछले कुछ वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा उद्यमी नए विचारों और नवाचारों के साथ सामने आ रहे हैं। लेकिन किसी भी नए स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ी चुनौती केवल एक अच्छा आइडिया बनाना नहीं होती, बल्कि अपनी पहचान बनाना और लोगों तक पहुँचना भी होता है। शुरुआती दौर में कई स्टार्टअप्स को अपनी कंपनी के बारे में जानकारी फैलाने और सही दर्शकों तक पहुँचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
Pradum Shukla Founder of Desh Crux


इसी चुनौती को समझते हुए युवा उद्यमी Pradum Shukla ने एक डिजिटल पहल की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य नए स्टार्टअप्स और कंपनियों को ऑनलाइन दुनिया में बेहतर पहचान दिलाने में मदद करना है।

Desh Crux के पीछे की सोच

Pradum Shukla ने Desh Crux नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया है, जो स्टार्टअप्स और कंपनियों को अपनी जानकारी साझा करने और डिजिटल पहचान बनाने का अवसर देता है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर कंपनियाँ अपनी प्रोफ़ाइल बनाकर अपने फाउंडर्स, सेवाओं, उद्देश्य और अपने काम से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी लोगों तक पहुँचा सकती हैं।

आज के समय में जब इंटरनेट किसी भी व्यवसाय की पहचान बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है, ऐसे प्लेटफ़ॉर्म स्टार्टअप्स के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकते हैं। Desh Crux का उद्देश्य यही है कि नए और उभरते स्टार्टअप्स को एक ऐसा डिजिटल
मंच मिले जहाँ वे अपने विचार और काम को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकें।

पढ़ाई के साथ उद्यमिता की यात्रा

Pradum Shukla का जन्म 24 जून 2006 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में हुआ। कम उम्र में ही उन्होंने डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स और उद्यमिता से जुड़े विचारों पर काम करना शुरू कर दिया।

उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा Chandraprabha Public School से पूरी की और बाद में Divine Sainik School से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वे Greater Noida स्थित IIMT Group of Colleges में B.Tech की पढ़ाई कर रहे हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ उद्यमिता पर काम करना आज कई युवाओं के बीच एक नई सोच बन चुकी है, और Pradum Shukla भी उन्हीं युवाओं में से एक हैं जो शिक्षा के साथ अपने विचारों को वास्तविक रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

लेखन के माध्यम से प्रेरणा

उद्यमिता के अलावा Pradum Shukla ने लेखन के क्षेत्र में भी कदम रखा है। उन्होंने “The Power to Outgrow” नाम की एक मोटिवेशनल किताब लिखी है, जो व्यक्तिगत विकास, अनुशासन और सकारात्मक सोच जैसे विषयों पर आधारित है।

इस पुस्तक के माध्यम से वे लोगों को अपने जीवन में निरंतर सीखने, खुद को बेहतर बनाने और अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

आगे की राह

भारत में स्टार्टअप्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ ही ऐसे प्लेटफ़ॉर्म्स की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है जो नए व्यवसायों को पहचान बनाने में मदद कर सकें।

Desh Crux जैसी पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है। युवा उद्यमियों के ऐसे प्रयास यह दिखाते हैं कि नई पीढ़ी केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि पूरे स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए अवसर बनाने की कोशिश कर रही है।

डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा—समृद्ध किसान ही विकसित भारत की नींव, ‘किसान कल्याण वर्ष’ में अन्नदाताओं को बड़ी सौगातें

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  भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। राज्य सरकार ने इस वर्ष को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और किसानों के जीवन में खुशहाली लाना है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में "सच्चा वादा और पक्का काम" के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से किया हर वादा प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

गेहूं उपार्जन के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि और नई व्यवस्थाएं

  किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि प्रदेश में गेहूं उत्पादन के रिकॉर्ड को देखते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की बड़ी बढ़ोत्तरी किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए अब गेहूं की खरीदी सप्ताह में 6 दिन की जाएगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा। स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर अब 9 मई तक कर दिया गया है, जिससे अंतिम छोर का किसान भी अपनी फसल आसानी से बेच सके।

भू-अर्जन पर 4 गुना मुआवजा और फसलों पर विशेष बोनस

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक और ऐतिहासिक कदम की जानकारी दी। अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, जो उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा फैसला है। केवल इतना ही नहीं, सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीदी पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। सरसों के उत्पादन में भी भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन से किसानों को बाजार में एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं।

सिंचाई के लिए दिन में बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर

  प्रदेश के अन्नदाताओं को रात की परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार अब रात के बजाय दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिए जा रहे हैं। साथ ही, कृषक मित्र योजना के माध्यम से किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश का किसान बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और खेती की लागत में भी कमी आएगी।

मध्यप्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' बनाने का लक्ष्य

  खेती के साथ-साथ पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई 1752 दुग्ध समितियों के गठन के बाद प्रतिदिन का दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम के पार पहुंच गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अब प्रति किलो 8 से 10 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके फलस्वरूप अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह क्रांति न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और आधुनिक वितरण प्रणाली

  वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए खाद और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसानों को बिना लंबी कतारों में लगे, उनके मनचाहे स्थान से खाद मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनका परिवार है और वे हर परिस्थिति में आखिरी दम तक किसानों के साथ खड़े रहेंगे।

माही नदी की दुर्दशा देख छलका पार्षद रितु सोनी का दर्द,नागरिकों से स्वच्छता बनाए रखने की भावुक अपील








 



 राजगढ़ /धार। नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 10 की पार्षद श्रीमती रितु नीलेश सोनी ने माही नदी के तट पर फैली गंदगी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए नागरिकों से नदी की स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने का आह्वान किया है। हाल ही में नदी क्षेत्र का निरीक्षण करने पहुंचीं पार्षद ने पाया कि पूर्व में चलाए गए सफाई अभियानों के बावजूद तटों पर पुनः कचरे का अंबार लग गया है, जो न केवल पर्यावरण के लिए घातक है बल्कि हमारी धार्मिक आस्थाओं को भी ठेस पहुँचाता है।
   पार्षद श्रीमती सोनी ने इस स्थिति पर दुःख प्रकट करते हुए कहा कि कुछ समय पूर्व ही 'वाइब्रेंट वूमेन ' समूह द्वारा 'जय माँ माही स्वच्छता अभियान' के माध्यम से यहाँ व्यापक सफाई की गई थी। लेकिन यह बेहद विडंबनापूर्ण है कि जिस नदी को हम माँ का दर्जा देते हैं और जिसकी पूजा करते हैं, उसी के आंचल को हम कचरे से दूषित कर रहे हैं। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों और क्षेत्रीय नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा जगह-जगह कूड़ेदान (डस्टबिन) की व्यवस्था की गई है, अतः यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है कि वे कचरा इधर-उधर न फेंक कर निर्धारित स्थान पर ही डालें।

















   आगामी वर्ष 2028 में उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले का संदर्भ देते हुए पार्षद ने कहा कि मध्य प्रदेश की पहचान यहाँ की पवित्र नदियों से है। उन्होंने अपील की कि शिप्रा, नर्मदा और गंगा की तरह माही नदी की पवित्रता को अक्षुण्ण रखना हम सबकी साझी जिम्मेदारी है। सिंहस्थ के दौरान देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के समक्ष हमें अपनी नदियों और नगर की एक स्वच्छ छवि प्रस्तुत करनी चाहिए।
श्रीमती सोनी ने अंत में कहा कि स्वच्छता केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह जन-भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने 'गंगा, नर्मदा, शिप्रा या माही, सबकी स्वच्छता और पवित्रता हमारी जिम्मेदारी' का संकल्प दोहराते हुए विश्वास जताया कि राजगढ़ और सरदारपुर क्षेत्र के जागरूक नागरिक इस दिशा में सकारात्मक सहयोग करेंगे और माही तट को पुनः स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे।

कंसाई नेरोलैक ने अपने पेंट को भारतीय इतिहास के सबसे कठिन टेस्ट से पार किया

मुंबई, महाराष्ट्र, भारत

कुछ लोग सिर्फ दावे करते हैं और कुछ लोग दावे साबित करते हैं। कंसाई नेरोलैक (Kansai Nerolac) ने मुश्किल रास्ता चुना।

 
भारतीय पेंट उद्योग में अपनी तरह के पहले वैज्ञानिक प्रमाणीकरण (scientific validation) में भारत के प्रतिष्ठित और सबसे भरोसेमंद पेंट ब्रांडों में से एक, कंसाई नेरोलैक ने पृथ्वी से 86,000 फीट ऊपर एक स्ट्रैटोस्फेरिक गुब्बारा (stratospheric balloon) लॉन्च किया। अपनी एक्सटीरियर रेंज की गुणवत्ता को प्रदर्शित करने के लिए इस गुब्बारे में कंसाई नेरोलैक के 'एक्सेल एवरलास्ट' (Excel Everlast) पेंट से रंगा हुआ एक पेलोड (payload) भेजा गया था। उस ऊंचाई पर जहाँ तापमान -64°C से भी नीचे चला जाता है, यूवी रेडिएशन (UV radiation) पूरी तरह से अनफिल्टर्ड होता है और वायुमंडलीय दबाव समुद्र तल पर मौजूद दबाव का एक छोटा सा अंश मात्र होता है। ऐसी स्थितियां अधिकांश सतहों को नष्ट कर सकती हैं। यह पेंट न केवल इन चरम स्थितियों में बचने में सफल रहा; बल्कि यह बिना किसी खरोंच या दाग के वापस आ गया।

इस पहल को क्रिएटिव एजेंसी 'उल्का' (ULKA) द्वारा तैयार किया गया था जिसने लैब सिमुलेशन (lab simulation) या नियंत्रित वातावरण से परे जाकर इस पेंट परीक्षण की परिकल्पना की। यह कैंपेन फिल्म एक ऐसे वास्तविक पेलोड का दस्तावेजीकरण करती है जो स्ट्रैटोस्फीयर (समताप मंडल) में गया और बिल्कुल सुरक्षित (intact) वापस आ गया। यह एक ऐसा प्रमाण है जिसे किसी 'डिस्क्लेमर' की आवश्यकता नहीं है।


#OutofThisWorld अभियान कंसाई नेरोलैक की विरासत के शिखर को दर्शाता है: एक ऐसा पेंट जिसे प्रकृति की सबसे कठोर परिस्थितियों में भी टिके रहने के लिए इंजीनियर किया गया है। यह अभियान उस वादे का प्रमाण है, जिसे उस पैमाने पर अंजाम दिया गया है जिसका विज्ञापन की दुनिया में 'होम पेंट्स' के लिए पहले कभी प्रयास नहीं किया गया था।

 

कंसाई नेरोलैक के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर, रामकृष्ण नाइक ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “एक्सेल एवरलास्ट रेंज हमेशा से एक ही बात के लिए जानी जाती है, वह पेंट जो हार मानने से इंकार कर देता है। जब हमने जापानी तकनीक के साथ भारत का पहला सेल्फ-क्लीनिंग पेंट, 'एवरलास्ट 14' लॉन्च किया, तो हम वहीं नहीं रुके बल्कि वास्तव में हमने नैनो-सिलिका तकनीक द्वारा संचालित 'बुलेट प्रूफ प्रोटेक्शन' के साथ 'एक्सेल एवरलास्ट 20' विकसित किया। इसमें 30% अधिक कठोरता और क्रैक-ब्रिजिंग क्षमता है जो किसी भी प्रतिस्पर्धी को पीछे छोड़ देती है। यह वह पेंट है जिसने भारत की पहली 20-वर्षीय वारंटी हासिल की है। इसे स्ट्रैटोस्फीयर में भेजना दुनिया के सामने इसे पेश करने का एकमात्र उपयुक्त तरीका लगा। क्योंकि इतना बेजोड़ उत्पाद एक ऐसे ही असाधारण मंच का हकदार था।”

 इस प्रयोग के पीछे के विचार पर बोलते हुए, ULKA के चीफ क्रिएटिव एक्सपीरियंस ऑफिसर राकेश मेनन ने कहा, “यह विचार भरोसे के साथ आया है: यदि कोई एक्सटीरियर पेंट अंतरिक्ष में टिक सकता है, तो वह पृथ्वी पर किसी भी स्थिति में टिक सकता है। हमारे लिए जो बात मायने रखती थी, वह इसे सच में करना था। कोई सिमुलेशन नहीं, कोई शॉर्टकट नहीं। बस उत्पाद को अंतिम और सबसे कड़े परीक्षण से गुजारना।”

 क्रेडिट्स (Credits)

बिजनेस: कुलविंदर अहलूवालिया, वंदना जोशी, अभिमन्यु जुनेजा, रिकी बारेटो, शिवम दवे

क्रिएटिव: राकेश मेनन, विशाल निकोलस, सागर परब, पार्थ पंड्या, खुशी बागरी, परेश जाधव, क्षितिजा राउत, साहिल देसाई, ओंकार म्हासकर, अरिजीत बनर्जी, कार्तिकेय तिवारी

स्ट्रेटेजी : मनीषा सुदर्शन, अखिल वदान

 
कंसाई नेरोलैक पेंट्स लिमिटेड के बारे में

अपने 106वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी, कंसाई नेरोलैक पेंट्स उच्च गुणवत्ता वाले पेंट्स की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करते हुए पेंट निर्माण में सबसे आगे रही है। कंसाई नेरोलैक भारत की अग्रणी पेंट कंपनियों में से एक है और इंडस्ट्रियल पेंट्स में मार्केट लीडर है। कंपनी के पास पूरे भारत में रणनीतिक रूप से स्थित आठ मैनुफेक्चरिंग इकाइयां और देश भर में एक मजबूत डीलर नेटवर्क है। कंपनी घरों, कार्यालयों, अस्पतालों और होटलों के लिए सजावटी पेंट्स कोटिंग्स से लेकर अधिकांश उद्योगों के लिए परिष्कृत औद्योगिक कोटिंग्स तक विविध उत्पादों का निर्माण करती है।

 
अधिक जानकारी के लिए कृपया www.nerolac.com पर जाएं।

दिनेश गुप्ता ने World Book Day पर रचा इतिहास,नया Guinness World Records बनाने का दावा

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   कल्याण, महाराष्ट्र |  विश्व पुस्तक दिवस के खास अवसर पर महाराष्ट्र के कल्याण शहर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। प्रसिद्ध ट्रेनर और मोटिवेशनल स्पीकर Dinesh Gupta (माइंडसेट गुरु) ने अपनी अद्भुत तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित करने का दावा किया है।

   दिनेश गुप्ता ने “सबसे तेज समय में प्लग वायर करने” की श्रेणी में शानदार प्रदर्शन करते हुए मात्र 23.43 सेकंड में एसी इलेक्ट्रिकल प्लग को पूरी तरह से वायर कर दिखाया। इस दौरान उन्होंने तार की इंसुलेशन हटाने से लेकर तारों को व्यवस्थित करने, प्लग को सुरक्षित तरीके से असेंबल करने और अंत में लैंप जलाकर उसका सफल परीक्षण करने तक की पूरी प्रक्रिया बेहद सटीकता और सुरक्षा के साथ पूरी की।

  यह उपलब्धि यूं ही नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का अभ्यास, तकनीकी समझ और मजबूत माइंडसेट है। दिनेश गुप्ता का कहना है कि—
“लगातार अभ्यास, सही सोच और अनुशासित प्रयास से सबसे कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।”

  गौरतलब है कि इससे पहले यह रिकॉर्ड यूनाइटेड किंगडम के Lee Carney के नाम दर्ज था। अब दिनेश गुप्ता ने इस रिकॉर्ड को चुनौती देते हुए नया बेंचमार्क सेट किया है।

  हालांकि, इस उपलब्धि को आधिकारिक तौर पर Guinness World Records के पास सत्यापन के लिए भेजा गया है और इसकी पुष्टि आने वाले महीनों में होने की संभावना है।

राजगढ़ में श्री आदेश्वरजी व श्री नवरत्न हेमकमल शत्रुंजय धाम का भव्य ध्वजारोहण महोत्सव संपन्न

A grand flag hoisting ceremony was successfully आयोजित at Adeshwarji Jain Temple and Navratna Hemkamal Shatrunjay Dham in Rajgarh with religious fervor and devotion.






 







   राजगढ़ (धार)। राजगढ़ । नगर के श्री आदेश्वर जैन मंदिर एवं श्री शत्रुंजयावतार हेमकमल धाम की वर्षगांठ गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। महोत्सव के दौरान “ओम प्रियांहतम-प्रियांहतम, ओम पुण्याहं-पुण्याहं” के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। आयोजन आचार्यश्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी के शिष्य मुनिश्री पीयूषचंद्र विजयजी महाराज की पावन निश्रा में संपन्न हुआ।

   महोत्सव के अंतर्गत प्रातः श्री नवरत्न आराधना भवन से ध्वजा का भव्य चल समारोह निकाला गया। लाभार्थी परिवारों ने आस्था के साथ केसरिया ध्वजाएं सिर पर धारण कीं। बैंड-बाजों पर बजते भक्ति गीतों और जयकारों के बीच शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई आदेश्वरजी मंदिर पहुंची, जहां श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारियों ने अगवानी की।

  मंदिर परिसर में मुनिश्री के सान्निध्य में सत्तरभेदी पूजन कराया गया। इसके पश्चात लाभार्थी परिवारों ने ध्वजा लेकर मंदिर की तीन परिक्रमा की और विधि-विधान से ध्वज दंड की पूजा-अर्चना कर शुभ मुहूर्त में पुरानी ध्वजा उतारकर नई ध्वजा फहराई। ध्वजारोहण के साथ ही श्रद्धालुओं ने उल्लासपूर्वक जयकारे लगाए।

इसी प्रकार पुराना बस स्टैंड स्थित श्री शत्रुंजयावतार हेमकमल धाम पर भी विधिपूर्वक ध्वजारोहण संपन्न हुआ। समारोह के समापन पर श्रद्धालुओं को श्रीफल की प्रभावना वितरित की गई।

  ध्वजारोहण के पश्चात मुनिश्री पीयूषचंद्र विजयजी महाराज ने मांगलिक का श्रवण कराते हुए धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने गुरु तत्व की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा और उनके बताए मार्ग पर चलने से जीव के अनेक जन्मों के दोषों का शमन होता है। अनीति से अर्जित धन कभी धर्म कार्यों में फलदायी नहीं होता, इसलिए सदैव शुद्ध आचरण अपनाना चाहिए। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्म’ और ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।

  इस अवसर पर वर्षीतप की उग्र साधना में लीन मुनिश्री का संघ एवं ट्रस्ट द्वारा कांबली ओढ़ाकर भावपूर्ण बहुमान भी किया गया। समारोह में समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

  यात्रा एवं आयोजन में ट्रस्ट के कार्यवाहक अध्यक्ष गौरव जैन नानासेठ, उपाध्यक्ष अनील पारख, ट्रस्टी सुशील जैन, सचिव निर्मल जैन, नितेश फर्शीवाला, मीडिया प्रभारी नितिन पारख, विनोद गुगलिया, सेंडी एमआर सहित अनेक पदाधिकारी एवं समाजजन मौजूद रहे।

  समापन अवसर पर प्रतिष्ठा लाभार्थी परिवार द्वारा सकल श्रीसंघ के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

  महोत्सव के दौरान श्री आदेश्वरजी मंदिर में 9 तथा हेमकमल धाम में 45 ध्वजाएं चढ़ाई गईं, जिससे पूरे नगर में उत्सव और श्रद्धा का माहौल बना रहा।

इंदौर की डॉ. इशिता जोशी को Malaika Arora ने पहनाया ताज,‘नारीफर्स्ट ज्वेल ऑफ इंडिया सीजन 3’ का खिताब जीता









 
 

 इंदौर । चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्टता और व्यक्तिगत उपलब्धि का शानदार संगम पेश करते हुए इंदौर की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. इशिता जोशी ने नारीफर्स्ट ज्वेल ऑफ इंडिया सीजन 3 – ब्यूटी पेजेंट में प्रिंसेस कैटेगरी का खिताब जीतकर शहर का नाम रोशन किया है।

  डॉ. जोशी, जो एक लेप्रोस्कोपिक सर्जन और कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजिस्ट हैं, को यह ताज बॉलीवुड अभिनेत्री Malaika Arora ने एक भव्य समारोह में पहनाया। इस कार्यक्रम का आयोजन नारीफर्स्ट की संस्थापक Aikata Sharma द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


  मध्य प्रदेश के छोटे शहर Neemuch से आने वाली डॉ. जोशी की यह उपलब्धि उनके संघर्ष और दृढ़ संकल्प की प्रेरणादायक कहानी के रूप में देखी जा रही है।

  एक योग्य चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में डॉ. जोशी ने Sri Aurobindo Institute of Medical Sciences से एमबीबीएस किया है, साथ ही उन्होंने एमएस Bharati Vidyapeeth Medical College and Research Centre Pune किया है, एफएमएएस, डीएमएएस और एफआईसीओजी की डिग्रियां भी हासिल की हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और उन्नत सर्जिकल विशेषज्ञता उन्हें विशेष बनाती है। उनकी यह जीत इस बात का उदाहरण है कि पेशेवर लोग अपने मुख्य क्षेत्र के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्टता हासिल कर सकते हैं।

  अपनी जीत के बाद डॉ. जोशी ने आभार व्यक्त करते हुए महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्म-विश्वास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “यह मंच शक्ति, बुद्धिमत्ता और व्यक्तित्व का उत्सव है। राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए गर्व की बात है।”

  उनकी इस उपलब्धि की Indore में व्यापक सराहना हो रही है और कई लोग उन्हें युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा मान रहे हैं, जो पेशेवर सफलता के साथ अपने व्यक्तिगत सपनों को भी पूरा करना चाहती हैं।

  यह पेजेंट, जो सशक्तिकरण और विविधता को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है, में कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे डॉ. जोशी की यह जीत उनके लिए और शहर के चिकित्सा समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बन गई है।