सोशल मीडिया और सिनेमा जगत में Vidyut Jammwal dangerous stunts को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। अपनी बेमिसाल फिटनेस और असली एक्शन के लिए पहचाने जाने वाले विद्युत जामवाल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वे सिर्फ फिल्मों के पर्दे पर ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी खतरों से खेलने वाले असली खिलाड़ी हैं। चाहे बर्फ से जमी झील में बिना कपड़ों के बैठना हो, जलती मोमबत्ती का पिघलता मोम अपने चेहरे पर डालना हो, या बिना किसी बॉडी डबल के ऊंची इमारतों से छलांग लगाना, उनका हर कारनामा लोगों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर देता है।
हाल ही में अपनी हॉलीवुड एक्शन फिल्म Street Fighter के एक प्रमोशनल इवेंट के दौरान उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसने वहां मौजूद मीडिया और दर्शकों के होश उड़ा दिए। इस फिल्म में वे 'धलसिम' (Dhalsim) का किरदार निभा रहे हैं, जो अपनी चमत्कारी योग शक्ति के लिए जाना जाता है। इस किरदार की तैयारी दिखाते हुए विद्युत स्टेज पर ध्यान की मुद्रा में बैठ गए। उन्होंने लगातार लगभग 15 से 16 मिनट तक अपनी सांस रोके रखी और करीब 20 मिनट तक अपनी आंखें खुली रखीं बिना पलक झपकाए।
जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनका शरीर तनाव की वजह से कांपने लगा और आंखों से आंसू बहने लगे, लेकिन उनका ध्यान अपनी जगह से नहीं हिला। जब उन्होंने अपनी साधना पूरी की, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। विद्युत ने बाद में बताया कि यह कोई जादू नहीं, बल्कि पतंजलि योग सूत्रों पर आधारित गहरी सांस नियंत्रण की कला है। उन्होंने बचपन से इसका कड़ा अभ्यास किया है, हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि आम लोगों को बिना सालों की ट्रेनिंग के ऐसी चीजें कभी नहीं दोहरानी चाहिए।
कड़ाके की ठंड और जलता मोम: शरीर पर दिमाग का नियंत्रण
विद्युत के लिए यह कोई पहला मौका नहीं है जब उन्होंने अपने शरीर की सीमाओं को चुनौती दी हो। कुछ समय पहले उनका एक वीडियो इंटरनेट पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें वे माइनस डिग्री तापमान वाले बर्फीले इलाके में नजर आए थे। चारों तरफ जमी बर्फ और हड्डियों को कंपा देने वाली हवाओं के बीच वे जमी हुई झील के ठंडे पानी में उतर गए। वहां वे बिना किसी कपड़े के पानी में ध्यान लगाकर काफी देर तक शांति से बैठे रहे, मानो उन्हें कड़ाके की ठंड का कोई एहसास ही न हो रहा हो
इसके अलावा एक और वीडियो में उन्होंने अपनी दर्द सहने की ताकत दिखाकर सबको चौंका दिया था। उस वीडियो में वे जलती हुई मोमबत्ती से पिघलती हुई गर्म मोम सीधे अपने चेहरे पर डालते दिखे। जहां थोड़ी सी गर्म मोम गिरने पर आम इंसान चीख उठता है, वहीं विद्युत के चेहरे पर न तो कोई शिकन थी और न ही कोई घबराहट। वे पूरी तरह शांत बने रहे। उनका मानना है कि अगर मन पर काबू पा लिया जाए, तो शरीर किसी भी तरह के दर्द और तकलीफ को आसानी से झेल सकता है।
विद्युत की इस बेमिसाल ताकत की नींव उनके बचपन में ही पड़ गई थी। जब बाकी बच्चे खेलकूद में वक्त बिताते थे, तब वे केरल की प्राचीन मार्शल आर्ट 'कलारीपयट्टू' (Kalaripayattu) की कड़ी ट्रेनिंग ले रहे थे। जानवरों की चाल, लचीलेपन और शरीर के संतुलन पर आधारित इस कला ने उन्हें न केवल फौलादी शरीर दिया, बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद मजबूत बना दिया। यही वजह है कि आज वे दुनिया के टॉप मार्शल आर्टिस्ट्स की लिस्ट में गिने जाते हैं।
बिना बॉडी डबल के असली एक्शन और हॉलीवुड का सफर
बॉलीवुड में जहां ज्यादातर बड़े एक्टर्स खतरनाक सीन्स के लिए बॉडी डबल्स और सेफ्टी केबल्स का सहारा लेते हैं, वहीं विद्युत अपने सभी स्टंट्स खुद शूट करना पसंद करते हैं। फिल्म कमांडो में तेज रफ्तार गाड़ियों के नीचे से सरकना हो या चलती खिड़की से कूदना, उन्होंने हमेशा स्क्रीन पर असली रोमांच दिखाया है। फिल्म जंगली की शूटिंग के दौरान तीसरी मंजिल से कूदते समय उनका सिर लोहे के खंभे से टकरा गया था और उन्हें गहरे टांके लगे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने स्टंट करने का अपना अंदाज कभी नहीं बदला।
अब हॉलीवुड फिल्म Street Fighter में उनका काम देखकर दुनिया भर के एक्शन डायरेक्टर्स भी उनके कायल हो रहे हैं। विदेशी मंचों पर भी वे भारतीय मार्शल आर्ट और योग परंपरा का परचम शान से लहरा रहे हैं।
उनका यह सफर युवाओं को यह सिखाता है कि असली ताकत किसी शॉर्टकट या नकली सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सालों के अनुशासन, रोज की मेहनत और कुदरती अभ्यास से हासिल की जाती है।


