जूनागढ़, गुजरात। वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से गुजरात के जूनागढ़ स्थित सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क में 2 से 8 अक्टूबर तक 72वां वन्यजीव सप्ताह आयोजित किया गया। इस दौरान डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकिंग, रील मेकिंग और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजन में प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल के जरिए वन्यजीवों की दुनिया को सामने रखा। डॉक्यूमेंट्री फिल्म प्रतियोगिता में अल्फेज भट्टी ने प्रथम स्थान हासिल किया। खास बात यह रही कि उनकी लगभग पांच मिनट की डॉक्यूमेंट्री का निर्माण केवल एंड्रॉयड मोबाइल फोन की मदद से किया गया।
मोबाइल फोन से बनाई सक्करबाग जू के इतिहास पर डॉक्यूमेंट्री
वन्यजीव सप्ताह के अंतर्गत 4 अक्टूबर को आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर अपनी फिल्में प्रस्तुत कीं। प्रतियोगिता में अल्फेज भट्टी प्रथम, जतीन वालवाणी द्वितीय और विशाल गोरड तृतीय स्थान पर रहे।
प्रथम पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री में सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क के ऐतिहासिक सफर और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उसके योगदान को दर्शाया गया। लगभग पांच मिनट की इस फिल्म की विशेषता इसका सीमित संसाधनों में तैयार होना रहा। इसे किसी बड़े पेशेवर फिल्म सेटअप के बजाय केवल एंड्रॉयड मोबाइल फोन की सहायता से बनाया गया।
फिल्म का कॉन्सेप्ट तैयार करने से लेकर निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, वॉयस ओवर और एडिटिंग तक की प्रमुख जिम्मेदारियां अल्फेज भट्टी ने स्वयं निभाईं। इस तरह मोबाइल फोन जैसे सामान्य डिजिटल उपकरण का उपयोग करते हुए उन्होंने वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत किया।
डॉक्यूमेंट्री के जरिए सक्करबाग जू के इतिहास और संरक्षण संबंधी गतिविधियों को सामने लाने का प्रयास किया गया। इसका मूल संदेश यह है कि वन्यजीवों की सुरक्षा और जैव विविधता का संरक्षण हमारी प्राकृतिक विरासत को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
रील मेकिंग प्रतियोगिता में किशन उपाध्याय प्रथम
डिजिटल दौर में युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहे शॉर्ट वीडियो माध्यम को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से रील मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें किशन उपाध्याय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि यश लिंबड़िया द्वितीय और आकाश ओडेदरा तृतीय स्थान पर रहे।
रील मेकिंग के माध्यम से प्रतिभागियों को वन्यजीवों, प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े विषयों को संक्षिप्त एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने का अवसर मिला। सोशल मीडिया पर वीडियो की व्यापक पहुंच को देखते हुए ऐसे प्रयास वन्यजीव संरक्षण के संदेश को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में रोनक ओडेदरा ने मारी बाजी
वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी प्रतियोगिता में रोनक ओडेदरा ने प्रथम स्थान हासिल किया। जयंत चौहाण दूसरे और किशन उपाध्याय तीसरे स्थान पर रहे।
फोटोग्राफी प्रतियोगिता के माध्यम से वन्यजीवों के व्यवहार, प्राकृतिक वातावरण और जैव विविधता के विभिन्न पहलुओं को कैमरे के जरिए प्रस्तुत करने का अवसर मिला। वन्यजीवों की तस्वीरें प्रकृति की सुंदरता को सामने लाने के साथ उनके प्राकृतिक आवास और संरक्षण की आवश्यकता के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने में भी सहायक होती हैं।
समापन समारोह में विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की स्क्रीनिंग
2 से 8 अक्टूबर तक चले वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। समापन समारोह के अवसर पर प्रतियोगिता में विजेता रही डॉक्यूमेंट्री फिल्मों की प्रोजेक्टर के माध्यम से स्क्रीनिंग भी की गई। इस दौरान सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों को जनसामान्य तक पहुंचाने का अवसर मिला। फिल्म, रील और फोटोग्राफी जैसे माध्यमों का उपयोग करके संरक्षण संबंधी संदेश को अधिक लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।
SBZP के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं वीडियो
सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क में वन्यजीव सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के वीडियो और प्रतियोगिताओं में विजेता रही डॉक्यूमेंट्री फिल्मों को जू के आधिकारिक यूट्यूब चैनल SBZP पर देखा जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण में जनभागीदारी जरूरी
वन्यजीव सप्ताह का उद्देश्य केवल वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों, जैव विविधता और वन्यजीवों के आवास की सुरक्षा के प्रति समाज की जिम्मेदारी को भी रेखांकित करना है।
सक्करबाग जूलॉजिकल पार्क में आयोजित इन प्रतियोगिताओं ने यह संदेश दिया कि संरक्षण के प्रयासों में रचनात्मकता और डिजिटल तकनीक की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग या विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता और भागीदारी भी प्रकृति के संरक्षण के लिए आवश्यक है।


