राजगढ़। कभी राज्य प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना लेकर MPPSC की तैयारी शुरू करने वाले राजगढ़ के चिमन भूरिया ने लगातार पांच साल की असफलताओं के बाद भी हार नहीं मानी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य), द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के पद पर उनका चयन हो गया। खास बात यह है कि चिमन की मां आंगनवाड़ी सहायिका हैं और वर्ष 2021 में पिता के निधन के बाद सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी।
राजगढ़ की श्री राम कॉलोनी, पुलिस थाने के पीछे निवासी चिमन पिता स्व. कालूसिंह भूरिया के चयन की खबर सामने आते ही परिवार, शिक्षकों, मित्रों और क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है।
2020 से 2025 तक लगातार प्रयास, हर बार मिली असफलता
चिमन ने वर्ष 2016 में स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद राज्य प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया था। इसके बाद उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू की। वर्ष 2020 से 2025 तक उन्होंने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में लगातार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली।
लगातार असफलताओं के बावजूद चिमन ने तैयारी छोड़ने के बजाय हर प्रयास के बाद अपनी कमियों को पहचाना और रणनीति में सुधार किया। उनका कहना है कि असफलता ने उन्हें रोकने के बजाय अपनी तैयारी को और बेहतर करने की प्रेरणा दी।
पिता का निधन हुआ,मां के संघर्ष ने बढ़ाया हौसला
चिमन के जीवन में वर्ष 2021 मुश्किल दौर लेकर आया, जब उनके पिता स्व. कालूसिंह भूरिया का निधन हो गया। परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियां बढ़ गईं। इसके बावजूद चिमन ने अपनी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी जारी रखी।
उनकी मां आंगनवाड़ी सहायिका हैं। सीमित संसाधनों के बीच मां के संघर्ष, त्याग और सहयोग ने चिमन को अपने लक्ष्य से जुड़े रहने की ताकत दी। इसी संघर्ष के बीच उन्होंने MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन हासिल किया।
राजगढ़ में पढ़ाई,अब विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे
चिमन ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी की शिक्षा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजगढ़ से प्राप्त की। इसके बाद स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई श्री राजेन्द्रशूरी शासकीय महाविद्यालय, सरदारपुर से पूरी की।
चयन के बाद चिमन ने कहा कि वे असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा देने का प्रयास करेंगे। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना भी उनके प्रमुख उद्देश्यों में रहेगा।
असफलता के बाद भी जारी रखा संघर्ष
चिमन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक ही लक्ष्य के लिए कई वर्षों तक प्रयास किया। वर्ष 2020 से 2025 तक राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने अपना प्रयास नहीं छोड़ा। इसी दौरान उन्होंने अपने विषय में मेहनत जारी रखी और अंततः MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में सफलता हासिल की।
चिमन का कहना है कि लगातार असफलता का मतलब लक्ष्य का अंत नहीं होता। यदि व्यक्ति अपनी कमियों को पहचानकर मेहनत जारी रखे, तो परिस्थितियां बदल सकती हैं।
आंगनवाड़ी सहायिका के बेटे चिमन भूरिया का MPPSC के माध्यम से असिस्टेंट प्रोफेसर बनना राजगढ़ क्षेत्र के युवाओं के लिए संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास की प्रेरणादायी कहानी बन गया है। उनके चयन पर परिवारजनों, शिक्षकों, मित्रों, क्षेत्रवासियों और जनप्रतिनिधियों ने बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।


