पगड़ी रस्म के दौरान चिकित्सक को सौंपी कमरों की चाबी,चार स्टील की कुर्सियां भी की दान
अमझेरा। विक्रमसिंह राठौर। कलयुग में जहां पिता-पुत्र के बीच बढ़ते विवादों की खबरें अक्सर सामने आती हैं, वहीं कभी-कभी ऐसी प्रेरणादायी खबरें भी सामने आती हैं, जो समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं। अमझेरा में सामने आई ऐसी ही एक पहल ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।
अमझेरा के वयोवृद्ध धार्मिक एवं सामाजिक कार्यकर्ता स्व. मुरलीधरजी खंडेलवाल ने अपने जीवन में धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के साथ जनसेवा के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके इन्हीं सेवा कार्यों और संस्कारों को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र महेश (राजा) खंडेलवाल ने अपने पिता की स्मृति को जनहित से जोड़ने की सराहनीय पहल की है।
महेश खंडेलवाल द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमझेरा के परिसर में मरीजों एवं उनके परिजनों की सुविधा के लिए दो कमरों का निर्माण करवाया गया है। इन कमरों के निर्माण से दूर-दराज से उपचार के लिए आने वाले मरीजों के परिजनों को रात्रि में ठहरने एवं विश्राम करने के लिए सुविधा मिल सकेगी।
30×15 फीट आकार के दो कमरों का निर्माण
अस्पताल परिसर में बनाए गए दोनों कमरों का आकार लगभग 30×15 फीट है। कमरों में टाइल्स, लाइट, पंखे, रंगाई-पुताई, खिड़की और दरवाजे सहित आवश्यक कार्य पूरे कराए गए हैं। इस तरह मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान तैयार किया गया है।
इसके साथ ही महेश खंडेलवाल द्वारा मरीजों एवं उनके परिजनों के बैठने की सुविधा के लिए चार स्टील की कुर्सियां भी दान की गई हैं। अस्पताल में आने वाले लोगों के लिए यह सुविधा उपयोगी साबित होगी।
पगड़ी रस्म के दौरान चिकित्सक को सौंपी कमरों की चाबी
स्व. मुरलीधरजी खंडेलवाल की स्मृति में किए गए इस जनहितकारी कार्य के तहत पगड़ी रस्म के दौरान खंडेलवाल परिवार द्वारा दोनों कमरों की चाबी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमझेरा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशांत बहादुर को सौंपी गई।
इस अवसर पर डॉ. सुशांत बहादुर ने बताया कि अमझेरा अस्पताल में दूर-दराज के क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए आते हैं। कई बार मरीजों के साथ आने वाले परिजनों को रात में रुकने एवं सोने के लिए उचित स्थान नहीं मिल पाने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ता था। विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले परिवारों के लिए यह एक बड़ी समस्या थी।
उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर में इन दो कमरों के निर्माण से मरीजों के परिजनों को जरूरत के समय ठहरने और विश्राम करने के लिए काफी सुविधा मिलेगी।
अस्पताल में बैठने की सुविधा भी बढ़ी
डॉ.सुशांत बहादुर ने बताया कि मरीजों एवं उनके परिजनों के लिए चार स्टील की कुर्सियां उपलब्ध कराए जाने से अस्पताल में बैठने की सुविधा भी बेहतर होगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए इस प्रकार का सहयोग निश्चित रूप से सामाजिक एवं जनहितकारी कार्य है।
उन्होंने खंडेलवाल परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज के सक्षम लोगों द्वारा स्वास्थ्य एवं जनसेवा के क्षेत्र में इस प्रकार सहयोग किया जाना सराहनीय है। महेश खंडेलवाल एवं उनके परिवार द्वारा की गई इस पहल से अन्य लोग भी जनसेवा के कार्यों के लिए प्रेरित होंगे।
पिता की स्मृति को जनसेवा से जोड़ा
खंडेलवाल परिवार द्वारा अपने स्वर्गीय परिजन की स्मृति को किसी व्यक्तिगत आयोजन तक सीमित रखने के बजाय उसे जनहित और स्वास्थ्य सेवा से जोड़ने की पहल की गई है। इससे अमझेरा अस्पताल में आने वाले मरीजों एवं उनके परिजनों को प्रत्यक्ष रूप से सुविधा मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों एवं अस्पताल से जुड़े लोगों ने भी महेश खंडेलवाल और खंडेलवाल परिवार की इस पहल की सराहना की। लोगों का कहना है कि सामाजिक सेवा के ऐसे कार्य जरूरतमंद लोगों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ समाज में सेवा और मानवता की भावना को भी मजबूत करते हैं।
स्व.मुरलीधरजी खंडेलवाल के सेवा कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उनके पुत्र महेश (राजा) खंडेलवाल द्वारा अमझेरा अस्पताल में कराए गए दो कमरों के निर्माण और स्टील की कुर्सियों के दान की यह पहल क्षेत्र में जनसेवा और सामाजिक सहयोग का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आई है।

