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राजगढ़ में श्रीराम कथा का भव्य समापन :ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम भारद्वाज ने शिव धनुष प्रसंग से जगाई धर्म की अलख








 




  राजगढ़ (धार)। राजगढ़ के सोसायटी ग्राउंड पर आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने व्यासपीठ से शिव धनुष भंग के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने केवल शिव के प्राचीन और भारी धनुष को नहीं तोड़ा, बल्कि वहां मौजूद अभिमानी राजाओं के अहंकार और 'मैं' को भी छिन्न-भिन्न कर दिया। यह क्षण केवल एक राजकुमारी के विवाह का नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बन गया।
    ज्योतिषाचार्य ने विनम्रता का महत्व समझाते हुए कहा कि भगवान ने इतना बड़ा कार्य करने के बाद भी सीता जी के समक्ष मस्तक झुकाकर अपनी नम्रता का परिचय दिया, जबकि धनुष न तोड़ पाने वाले राजा अब भी छाती तानकर बैठे थे। जैसे ही वह विशाल धनुष टूटा, उसकी गर्जना ने पूरे संसार को चकित कर दिया और इसी गर्जना को सुनकर भगवान परशुराम अत्यंत क्रोध में सभा में पधारे।
   कथा के दौरान परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने श्रोताओं को रोमांचित कर दिया। जहाँ एक ओर लक्ष्मण जी का तेज और उनके तर्क थे, जो परशुराम जी के क्रोध को और हवा दे रहे थे, वहीं दूसरी ओर श्री राम की अगाध शांति थी। श्री राम परशुराम जी के क्रोध को शांत करने के लिए जल के समान शीतल बने रहे। अंततः श्री राम ने अपनी विनम्रता और मधुर वचनों से परशुराम जी के भीतर छिपे भगवान नारायण के अंश को जागृत किया और परशुराम जी उन्हें आशीर्वाद देकर महेंद्र पर्वत की ओर चले गए। व्यासपीठ से यह संदेश दिया गया कि जीवन में जो नम्र होकर चलता है, उसकी सदैव जय-जयकार होती है।
    इसके बाद जनकपुर में उत्सव का वातावरण बन गया। अयोध्या से राजा दशरथ बारात लेकर आए और वहां केवल एक नहीं, बल्कि चार दिव्य मिलन हुए। राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुति कीर्ति का विवाह संपन्न हुआ, जो रिश्तों की मर्यादा और समर्पण का अनुपम उदाहरण है।
   जब ये चारों वधुएं अयोध्या पहुंचीं, तो पूरी नगरी दीपों के प्रकाश और खुशियों से भर गई। कथा में यह समझाया गया कि जैसे अयोध्या में राम के आने से उजाला हुआ, वैसे ही जब मनुष्य के हृदय में राम-नाम और संस्कारों का प्रवेश होता है, तो अज्ञान का अंधकार मिट जाता है। माता कौशल्या ने बहुओं को कुल की मर्यादा और सेवा का जो उपदेश दिया, वह आज भी हर परिवार के लिए प्रेरणा है।














    इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने कथा का लाभ लिया,जिनमें एसडीएम सलोनी अग्रवाल, थाना प्रभारी समीर पाटीदार, नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक जैन, पार्षद पंकज बारोड़,नवीन बानिया,ललित कोठारी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष व भाजपा नेता सुरेश तातेड और अशोक भंडारी सहित राजगढ़ नगर एवं आसपास के अनेक जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

   धार्मिक कार्यक्रमों की इसी कड़ी में राजगढ़ पुलिस थाना परिसर स्थित श्री सांई मंदिर में श्री सांई बाबा की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा का आयोजन भी संपन्न हुआ। इसके साथ ही आगामी 13 मई को राजगढ़ में होने वाले सर्व समाज के निशुल्क सामूहिक विवाह और नगर चौरासी महोत्सव के लिए सभी धर्मप्रेमी जनता को आमंत्रित किया गया है।
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