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सरदारपुर के श्री झिर्णेश्वर मंदिर के पास लकड़बग्घे के कुनबे की हलचल, वन विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह




 

  सरदारपुर। सरदारपुर के समीप स्थित प्रसिद्ध झिर्णेश्वर मंदिर के आसपास के राजस्व क्षेत्र में पिछले दो दिनों से वन्य प्राणी लकड़बग्घे (Hyena) के विचरण की सूचना से क्षेत्र में सनसनी है। दिनांक 14.01.2026 व 15.01.2026 को ग्रामीणों द्वारा वन्य प्राणी देखे जाने की सूचना वन विभाग को दी गई थी।

वन विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई

  सूचना मिलते ही वनमंडलाधिकारी धार विजयंनथम टीआर एवं उपवनमंडलाधिकारी सरदारपुर सुनिल सुलिया के मार्गदर्शन में रेस्क्यू दल सक्रिय हुआ। दल प्रभारी जोगडसिंह जमरा, अमनसिंह टेगोर एवं अन्य सदस्यों द्वारा संपूर्ण क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान चलाया गया। जांच के दौरान क्षेत्र के नमी वाले स्थानों पर वन्य प्राणी के पगमार्क (पदचिह्न) और विष्ठा पाई गई, जिनकी पुष्टि लकड़बग्घे के रूप में हुई है।

  प्रत्यक्षदर्शियों का दावा: परिवार के साथ है वन्य जीव

   क्षेत्र के प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यहाँ 02 वयस्क लकड़बग्घे अपने 03 छोटे बच्चों के साथ देखे गए हैं। वन विभाग के अनुसार, ये वन्य प्राणी अक्सर टांडा एवं भीलखेड़ी घाट के जंगलों से शिकार और पानी की तलाश में भटकते हुए राजस्व क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं।

स्थानीय निवासियों को दी गई समझाइश

  वन विभाग की टीम ने स्थानीय ग्रामीणों और खेतों में काम करने वाले कृषकों को सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण समझाइश दी है:

* रात्रि के समय खेतों या बाहर अकेले न निकलें।
* छोटे बच्चों को अकेले घर से बाहर न जाने दें।
* हमेशा समूह में आवागमन करें और सतर्कता बरतें।

सतत निगरानी जारी
  
  वन परिक्षेत्राधिकारी सरदारपुर,शैलेंद्र सोलंकी ने बताया कि रेस्क्यू दल द्वारा दिन व रात लगातार क्षेत्र की सर्चिंग की जा रही है और वन्य प्राणी के मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। वर्तमान में लकड़बग्घा आसपास दिखाई नहीं दिया है, फिर भी सुरक्षा के मद्देनजर लोगों से अपील की गई है कि कोई भी मांसाहारी वन्य जीव दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचित करें।


अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय का तीसरा कैंपस राँची में शुरु होगा, इसका मकसद झारखण्ड और देश के पूर्वी हिस्से में शिक्षा को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण बनाना है

राँची, झारखण्ड, भारत

आज अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय ने राँची में अपने तीसरे कैंपस की शुरुआत करने की घोषणा की है। इस कैंपस की शुरुआत के साथ ही अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन ने पूर्वी भारत में समाज से जुड़ी हुई और संदर्भ के मुताबिक शिक्षा देने की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया है। नया कैंपस विश्‍वविद्यालय के शिक्षा, विकास, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रशासन के क्षेत्र में लंबे अनुभवों पर आधारित है। यह अकादमिक शिक्षा को समाज और क्षेत्र की ज़मीनी स्तर की सच्चाइयों को जोड़ने के नज़रिए को दिखाता है।

अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय, राँची कैंपस के नामित कुलपति, ज़ुल्फ़िकार हैदर ने कैंपस के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए कहा, “हम चाहते हैं कि हमारा राँची कैंपस भी क्षेत्र की सामाजिक और विकास की ज़रूरतों से नज़दीकी से जुड़े। हम चाहते हैं कि हमारा कैंपस क्षेत्र में ज्ञान को बढ़ावा देकर मानवीय विकास की राहें और भी बेहतर बनाए। विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की सीखने की ज़रूरतों और अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले कामकाजी पेशेवरों को ध्यान में रखकर कई तरह के कोर्सेस व कार्यक्रम शुरु किए जाएँगे। झारखंड के विविध आदिवासी और दूसरे सभी समुदायों की परंपराओं, इतिहास, ज्ञान परंपराओं और दुनिया के देखने-समझने के नज़रिए से अच्‍छी तरह से जुड़ना अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय का मकसद है।”
 
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय का 150 एकड़ का कैंपस इटकी में बन रहा है। इस कैंपस में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त क्लासरूम, प्रयोगशालाएँ, खेल-कूद की सुविधाएँ और विद्यार्थियों के लिए छात्रावास व शिक्षकों के लिए आवास की सुविधाएँ बनाई जाएँगी। इस कैंपस में एक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज भी बनाने की योजना है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इस कैंपस को ऊर्जा-कुशल सिस्टम से युक्त बनाया जाएगा और बारिश के पानी को इकट्ठा कर इस्तेमाल करने लायक बनाने सुविधा भी होगी।
 
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के राँची कैंपस में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और सतत शिक्षा कार्यक्रम होंगे। इसमें एजुकेशन, विकास अध्ययन, अर्थशास्त्र, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन व सस्टेनेब्लिटी जैसे विषयों का अध्ययन होगा। ये कार्यक्रम झारखंड और पूर्वी भारत के विकास की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं। इन कार्यक्रमों को अकादमिक और जमीनी अनुभव रखने वाले शिक्षक पढ़ाएँगे।
 
इस अकादमिक वर्ष में दो मास्‍टर्स प्रोग्रैम शुरू किए जाएँगे – एम.ए. अप्लाइड इकोनॉमिक्स और एम.ए.डेवलपमेंट। इसके साथ ही लोकल डेवलपमेंट, प्रारंभिक बाल शिक्षा और शैक्षणिक मूल्यांकन विषयों में प्रोस्ट गैजुएशन डिप्लोमा भी शुरू किए जाएँगे। इस साल सार्वजनिक स्वास्थ्य, शिक्षा और विकास से जुड़े कई अल्प-कालिक सर्टिफिकेट प्रोग्रैम भी शुरु होंगे।
 
अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के व्यापक उद्देश्यों को बताते हुए ज़ुल्फ़िकार हैदर ने कहा, “अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन के मार्गदर्शक मूल्यों के आधार पर सामाजिक भलाई के लिए अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। शिक्षा, पढ़ाई-लिखाई, रिसर्च और ज़मीनी स्तर पर काम करते हुए हम न्यायपूर्ण, समानता पर आधारित, मानवीय और बेहतर-से-बेहतर स्वावलंबी समाज बनाने में अपना योगदान देना चाहते हैं। हमारा राँची कैंपस झारखण्ड और देश के पूर्वी हिस्से में नॉलेज क्रिएशन, समाज के हितों से जुड़े विचारों को बढ़ावा देने, यहाँ के लोगों के कौशल व क्षमताओं को बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा।”
 

अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय के बारे में

अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलूरु की स्थापना कर्नाटक सरकार के ‘अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी एक्ट 2010’ द्वारा की गई है। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, भोपाल की स्थापना ‘मध्य प्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) द्वितीय संशोधन अधिनियम, 2022’ तहत की गई है। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, राँची की स्थापना झारखण्ड सरकार द्वारा अधिनियमित अज़ीम प्रेमजी विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2022 के तहत की जा रही है।
 
अज़ीम प्रेमजी फ़ाउण्डेशन इन तीनों विश्वविद्यालयों की प्रायोजक संस्‍था है। फ़ाउण्डेशन सामाजिक हित और न्यायपूर्ण, समानता, मानवता और सस्टेनेबल समाज बनाने के मकसद से विश्वविद्यालयों की स्थापना कर रहा है।

Chandra Infra Ltd का रियल एस्टेट सेक्टर में भव्य आगमन, वैष्णोदेवी सर्किल के पास लग्ज़री प्रोजेक्ट का ब्रॉशर 8 फरवरी को होगा लॉन्च


अहमदाबाद के रियल एस्टेट सेक्टर में एक नया और अहम बदलाव देखने को मिल रहा है। तेजी से विकसित हो रहे इस शहर में अब Chandra Infra Ltd अपने पहले रियल एस्टेट प्रोजेक्ट के साथ आधिकारिक रूप से एंट्री करने जा रही है। कंपनी अपने इस बहुप्रतीक्षित लग्ज़री रेज़िडेंशियल प्रोजेक्ट का ब्रॉशर लॉन्च 8 फरवरी को Hotel Hillock में आयोजित करेगी।

यह लॉन्च इवेंट केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि अहमदाबाद के प्रीमियम हाउसिंग मार्केट के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। उद्योग जगत की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि Chandra Infra Ltd किस तरह अपने पहले प्रोजेक्ट के ज़रिए बाज़ार में अपनी पहचान बनाती है।

अहमदाबाद रियल एस्टेट में उभरता हुआ नया नाम

पिछले कुछ वर्षों में अहमदाबाद ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोड नेटवर्क और अर्बन डेवलपमेंट के क्षेत्र में तेज़ रफ्तार पकड़ी है। एसजी हाईवे, मेट्रो प्रोजेक्ट्स और नए कमर्शियल ज़ोन के चलते शहर अब प्रीमियम रियल एस्टेट के लिए एक आकर्षक डेस्टिनेशन बन चुका है। ऐसे माहौल में Chandra Infra Ltd का प्रवेश एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

कंपनी का मानना है कि बदलती जीवनशैली और क्वालिटी हाउसिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए यह सही समय है जब एक सोच-समझकर तैयार किया गया लग्ज़री रेज़िडेंशियल प्रोजेक्ट पेश किया जाए।

वैष्णोदेवी सर्किल के पास प्राइम लोकेशन का चयन

Chandra Infra Ltd का यह पहला प्रोजेक्ट अहमदाबाद के तेजी से विकसित होते क्षेत्र Vaishnodevi Circle के पास स्थित है। यह इलाका एसजी हाईवे से सीधी कनेक्टिविटी, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और शॉपिंग डेस्टिनेशन्स की नज़दीकी के लिए जाना जाता है।

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, वैष्णोदेवी सर्किल आने वाले वर्षों में निवेश के लिहाज़ से और भी मजबूत लोकेशन बन सकता है। इसी कारण इस प्रोजेक्ट को लेकर होमबायर्स और इन्वेस्टर्स दोनों के बीच उत्सुकता देखी जा रही है।

2 BHK, 3 BHK और एक्सक्लूसिव पेंटहाउस की पेशकश

इस प्रीमियम रेज़िडेंशियल प्रोजेक्ट में 2 BHK और 3 BHK के आधुनिक अपार्टमेंट्स के साथ-साथ सीमित संख्या में एक्सक्लूसिव पेंटहाउस शामिल किए गए हैं। हर यूनिट को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि स्पेस का अधिकतम उपयोग हो, साथ ही प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन बना रहे।

कंपनी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट उन परिवारों और प्रोफेशनल्स को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है जो शहर के भीतर रहते हुए एक शांत, सुरक्षित और प्रीमियम जीवनशैली की तलाश में हैं।

आधुनिक आर्किटेक्चर और लाइफस्टाइल पर फोकस

परियोजना में आधुनिक आर्किटेक्चर, प्रीमियम कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और सुव्यवस्थित प्लानिंग पर खास ध्यान दिया गया है। हरियाली से भरपूर ओपन स्पेसेज़, वॉकिंग एरिया, बच्चों के लिए प्ले ज़ोन और चुनिंदा लाइफस्टाइल सुविधाओं को शामिल कर इसे केवल एक रेज़िडेंशियल कॉम्प्लेक्स नहीं, बल्कि एक कम्प्लीट लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

सुरक्षा और प्राइवेसी को भी प्रोजेक्ट की प्राथमिकताओं में रखा गया है, जो आज के होमबायर्स के लिए एक अहम पहलू माना जाता है।

ब्रॉशर लॉन्च इवेंट को लेकर खास तैयारियां

8 फरवरी को होने वाले ब्रॉशर लॉन्च कार्यक्रम को लेकर खास तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में देश और विदेश से जुड़ी जानी-मानी हस्तियों, वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कुछ नामों की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। इससे यह साफ है कि कंपनी अपने पहले ही प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर पेश करने की योजना बना रही है।

Chandra Infra Ltd की डायरेक्टर टीम

इस प्रोजेक्ट के पीछे Chandra Infra Ltd की एक अनुभवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की डायरेक्टर टीम काम कर रही है। कंपनी के डायरेक्टर्स में Dr. Vijay Jain, Ms. Jenifer (UAE), Mr. Hanif Sayed (UAE), Mr. Bhupesh Shah (मुंबई के वरिष्ठ आर्किटेक्ट), Ms. Ranu (UAE) और Mr. Subhash Shah (बेल्जियम) शामिल हैं।

कंपनी से जुड़े जानकारों के अनुसार, यह टीम रियल एस्टेट, आर्किटेक्चर और इंटरनेशनल बिज़नेस का व्यापक अनुभव रखती है, जिसका सीधा लाभ इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग और एग्जीक्यूशन में देखने को मिलेगा।

Infiniverse Group की Luxury Fashion Week की भी होगी घोषणा

इसी कार्यक्रम से जुड़ी एक और बड़ी खबर यह है कि Infiniverse Group द्वारा प्रस्तुत Luxury Fashion Week को लेकर भी इसी मंच से औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह फैशन वीक लग्ज़री, डिज़ाइन और इंटरनेशनल फैशन ट्रेंड्स को एक साथ लाने का प्रयास होगा, जिससे अहमदाबाद के लाइफस्टाइल इकोसिस्टम को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

निवेशकों और होमबायर्स की उम्मीदों पर 100% खरा उतरने का भरोसा

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह से लोकेशन, डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन क्वालिटी और अनुभवी डायरेक्टर टीम सामने आ रही है, उसे देखते हुए यह प्रोजेक्ट निवेशकों और होमबायर्स की उम्मीदों पर 100 प्रतिशत खरा उतरेगा

Chandra Infra Ltd का यह कदम साफ संकेत देता है कि कंपनी केवल एक प्रोजेक्ट तक सीमित रहने के बजाय, अहमदाबाद के प्रीमियम रियल एस्टेट सेगमेंट में एक भरोसेमंद और मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह प्रोजेक्ट किस तरह शहर के रियल एस्टेट परिदृश्य को नई दिशा देता है।

एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग,नीति आयोग के EPI-2024 में म.प्र. टॉप 10 में,‘चैलेंजर’ श्रेणी में शीर्ष पर पहुंचा प्रदेश




  नीति आयोग द्वारा जारी निर्यात तत्परता सूचकांक (Export Preparedness Index – EPI) 2024 में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के 17 बड़े राज्यों में 9वां स्थान प्राप्त किया है। 57 अंकों के साथ प्रदेश न केवल ‘चैलेंजर’ श्रेणी में शामिल हुआ है, बल्कि इस श्रेणी के सभी राज्यों में शीर्ष स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि राज्य की निर्यात-संवर्धन नीतियों, बेहतर व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों का प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता प्रदेश की निर्यात-अनुकूल नीतियों, व्यापार सुगमता सुधारों और उद्यम प्रोत्साहन पहलों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निर्यात को आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन मानते हुए निरंतर प्रयासरत है और आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को ‘लीडर’ श्रेणी में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

चैलेंजर श्रेणी में मध्यप्रदेश अव्वल

  नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार ‘चैलेंजर’ श्रेणी में शामिल मध्यप्रदेश, हरियाणा, केरल और पश्चिम बंगाल में मध्यप्रदेश ने पहला स्थान प्राप्त किया है। प्रदेश ने हरियाणा (55.01 अंक), केरल (53.76 अंक) और पश्चिम बंगाल (53.03 अंक) जैसे स्थापित औद्योगिक एवं निर्यातक राज्यों को पीछे छोड़ते हुए अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

70 संकेतकों पर हुआ समग्र मूल्यांकन

   EPI-2024 में निर्यात अवसंरचना, व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र, नीति एवं शासन तथा निर्यात प्रदर्शन, चार प्रमुख स्तंभों के अंतर्गत 70 संकेतकों के आधार पर राज्यों का आकलन किया गया। इन सभी क्षेत्रों में मध्यप्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति करते हुए अपनी निर्यात क्षमता को मजबूती प्रदान की है।

निर्यात में सतत वृद्धि

  मध्यप्रदेश ने हाल के वर्षों में निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जहां प्रदेश का निर्यात 47,959 करोड़ रुपये था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 66,218 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह वृद्धि राज्य सरकार की निर्यात-संवर्धन रणनीतियों और उद्योग-अनुकूल वातावरण का परिणाम है।

 एक जिला-एक उत्पाद और निर्यात का सशक्त एकीकरण

  राज्य सरकार ‘एक जिला–एक उत्पाद (ODOP)’ को निर्यात से जोड़ने के लिए व्यापक रणनीति पर कार्य कर रही है। निर्यात-ODOP कार्यशालाओं के माध्यम से किसानों, कारीगरों और उद्यमियों को वैश्विक बाजारों से जोड़ा जा रहा है। एक्सपोर्ट एवं ODOP एक्सेलरेटर कार्यक्रम के तहत नए उत्पादों और उद्यमियों को तकनीकी, विपणन और नीतिगत सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

अप्रत्यक्ष निर्यात को प्रत्यक्ष अवसर में बदलने की पहल

 प्रदेश सरकार अन्य राज्यों के माध्यम से होने वाले अप्रत्यक्ष निर्यात की पहचान कर संबंधित इकाइयों को स्वतंत्र निर्यातक के रूप में विकसित करने के लिए हैंडहोल्डिंग और समर्थन उपलब्ध कराएगी। इससे राज्य के कुल वस्तु निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

निर्यात हेल्पलाइन बनी सहारा

  राज्य शासन द्वारा संचालित निर्यात हेल्पलाइन (0755-257-7145) निर्यातकों, उद्यमियों और किसानों के लिए मार्गदर्शन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। यह हेल्पलाइन तकनीकी सहायता, बाजार जानकारी और नीतिगत मार्गदर्शन प्रदान कर निर्यात प्रक्रिया को सरल और सुलभ बना रही है।

भविष्य की दिशा

   प्रदेश सरकार लॉजिस्टिक्स अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, MSME निर्यात एकीकरण, जिला स्तरीय निर्यात संवर्धन और ओडीओपी कार्यक्रम के विस्तार पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक निर्यात मानचित्र पर और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

 

प्रधानमंत्री श्री मोदी से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में की सौजन्य भेंट




 गाडरवारा के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के क्षमता विस्तार के भूमि-पूजन के लिये किया आमंत्रित
प्रदेश की उपलब्धियों और नवाचारों की दी जानकारी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से नई दिल्ली में गुरुवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट कर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के विस्तार की परियोजना के भूमि-पूजन के लिये अनुरोध किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट के आयोजन, प्रदेश में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाये जाने, नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड-साँची सहकारिता अनुबंध की प्रगति रिपोर्ट के साथ प्रदेश में एनटी नक्सल अभियान की प्रगति से अवगत कराया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में एनटीपीसी  लिमिटेड का सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन स्थित है। ऊर्जा मंत्रालयभारत सरकार द्वारा 1600 मेगावॉट (स्टेज II, 2×800 MW) क्षमता के विस्तार की अनुमति प्रदान की गई है। इसकी कुल लागत 20 हजार 446 करोड़ रूपये है। परियोजना को वर्ष 2029-30 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। यह परियोजना अत्याधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल टेक्नोलॉजी पर आधारित है और इसमें एयर कूल्ड कंडेंसर टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया गया हैजो पारंपरिक वॉटर कूल्ड कंडेंसर (कूलिंग टॉवरों के साथ) की तुलना में पानी की खपत को 1/3 कम करता है।

वर्ष 2026 कृषक कल्याण वर्ष

प्रधानमंत्री श्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष-2026 में "समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश" के लक्ष्य को साकार करने के लिए 'कृषक कल्याण वर्षके रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को मध्यप्रदेश में 'उद्योग एवं रोजगार वर्षके रूप में मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि कृषक कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन के लिये जनवरी, 2026 से नवम्बर 2026 तक विभिन्न कार्यक्रमों एवं गतिविधियों का विस्तृत कैलेंडर तैयार किया गया है। सभी गतिविधियां 3 साल का लक्ष्य निर्धारित कर संचालित की जाएंगी। इसमें 16 से अधिक विभागों की सहभागिता रहेगी। कृषक कल्याण वर्ष-2026 में सरकार के 10 संकल्प प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देनाशीघ्रनाशी फसलों वाले स्थानों पर फूड पार्क और फूड प्रोसेसिंग यूनिट बनाये जानाकृषि उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिये सब्सिडी उपलब्ध करानाकृषि उद्योगों में किसानों की भागीदारी को बढ़ाना के लिये कार्य करेगी। प्रदेश सरकार अगले 3 साल में 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप की स्थापना के लक्ष्य प्राप्ति के लिये कार्य करेगी।

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट

प्रधानमंत्री श्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अवगत कराया कि 25 दिसम्बर, 2025 को ग्वालियर में भारत रत्न से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के विशेष अवसर पर "अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट" का आयोजन किया गया। समिट का शुभारंभ केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने किया। इस अवसर पर 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक की लागत से औद्योगिक/निर्माण इकाइयों का सामूहिक भूमि-पूजन एवं 5,810 करोड़ रुपए लागत से औद्योगिक विकास परियोजनाओं एवं सड़क विकास कार्यों का लोकार्पण किया गया। इसके अतिरिक्त प्रदेश की 860 वृहद औद्योगिक इकाइयों को 725 करोड़ रुपए की निवेश प्रोत्साहन सहायता राशि भी सिंगल क्लिक से वितरित की गई।

प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड एवं सांची के मध्य सहकार्यता अनुबंध के पश्चात दुग्ध संघो द्वारा दूध खरीद मूल्यों में  2.50रुपये से 8.50 रुपयेप्रति लीटर तक की वृद्धि की गई है। प्रदेश में 1394 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन तथा 661 निष्क्रिय दुग्ध समितियों को क्रियाशील बनाया गया है। इसमें लगभग 150 बहुउद्देशीय सहकारी समितियों का गठन भी सम्मिलित है। उन्होंने बताया कि 22 दिसम्बर, 2025 को दुग्ध संघों द्वारा 12 लाख कि.ग्रा. प्रतिदिन दुग्ध संकलन का स्तर प्राप्त किया गयाजो कि गत वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। हमारा लक्ष्य 50 लाख कि.ग्रा. प्रतिदिन दुग्ध संकलन का स्तर प्राप्त करना तथा प्रदेश के 26 हजार ग्रामों को दुग्ध सहकारी समितियों के कार्य क्षेत्र में लाना हैजिसके लिए हम दृढ़ संकल्पित होकर कार्यरत हैं।

नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश

प्रधानमंत्री श्री मोदी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आपके द्वारा मार्च 2026 तक नक्सल समस्या के खात्मे के निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण करते हुए प्रदेश ने 'नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश' का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। अब न सिर्फ मध्यप्रदेश में बल्कि मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन में भी कोई भी सशस्त्र और सक्रिय नक्सली नहीं बचा है। वर्ष 2025 में मध्यप्रदेश में 10 सशस्त्र नक्सलियों को धराशायी किया हैजिन पर 1.46 करोड़ रुपए का ईनाम थाऔर 13 नक्सलियों ने हथियारों सहित आत्म-समर्पण किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि आत्म-समर्पित नक्सलियों से सघन पूछताछ कर समर्थक व्यक्तियोंसंगठनों व वित्त पोषण के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। उनके द्वारा जंगल में छुपाई गई नगद राशिहथियारों आदि को बरामद किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे पुनः नक्सली विचारधारा की तरफ न लौट पायें। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में त्वरित विकास के लिए चिन्हित 100 अत्यंत नक्सल प्रभावित गाँवों का माइक्रो डेवलपमेंट प्लान तैयार किया गया है। इसमें गाँवों के सर्वांगीण विकासआजीविका वृद्धिमूलभूत सुविधाओं में सुधार आदि को शामिल किया गया है। नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'बस्तर ओलम्पिक' की तरह बालाघाट में वृहद स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जा रहा है।



डॉ. थेजो कुमारी अमुदाला को मिला United States Global Merit Record सम्मान, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन

भारतीय उद्यमिता और सामाजिक सेवा जगत की जानी-मानी हस्ती Dr. Thejo Kumari Amudala को अमेरिका स्थित United States Global Merit Record द्वारा सम्मानित किया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उनके वर्षों से चले आ रहे वैश्विक शांति, मानवाधिकार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के कार्यों को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया है। आधिकारिक प्रमाण पत्र के माध्यम से यह मान्यता संयुक्त राज्य अमेरिका में दर्ज की गई है, जो उनके कार्यों की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाती है।

यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उस निरंतर प्रयास का प्रमाण है, जिसके जरिए डॉ. थेजो कुमारी अमुदाला ने राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर सामाजिक प्रभाव स्थापित किया है। प्रमाण पत्र में उन्हें Global Peace and World Human Rights Ambassador के रूप में उल्लेखित किया गया है और उनके नेतृत्व, प्रतिबद्धता तथा मानवीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया है।

United States Global Merit Record क्या है

United States Global Merit Record एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो समाज, मानवता, शिक्षा, नेतृत्व और सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को दर्ज और सम्मानित करता है। यह मंच अल्पकालिक उपलब्धियों की बजाय दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव को महत्व देता है।

डॉ. Thejo Kumari Amudala को दिया गया यह सम्मान उनके वर्षों के कार्य, नीति-स्तरीय भागीदारी और जमीनी स्तर पर किए गए प्रयासों को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया है। यह प्रमाण पत्र अमेरिका के Wyoming राज्य में आधिकारिक रूप से पंजीकृत है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय वैधता और भी मजबूत होती है।

तिरुपति से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक का सफर

27 सितंबर 1980 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में जन्मी डॉ. थेजो कुमारी अमुदाला का जीवन शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों से आकार लिया है। उनके पिता अमुदाला मुनिवेंकटेश्वरलु और माता किन्नेरा प्रमिला देवी ने बचपन से ही उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील और जागरूक बनाया।

उन्होंने भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों से शिक्षा ग्रहण की और आगे चलकर अमेरिका की Texas Global University से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इस अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभव ने उनके दृष्टिकोण को वैश्विक बनाया, जिसका प्रभाव उनके पेशेवर और सामाजिक कार्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

उद्यमिता और सामाजिक सोच का अनोखा मेल

साल 2002 में डॉ. Thejo Kumari Amudala ने Thejas Groups की स्थापना के साथ अपने उद्यमशील सफर की शुरुआत की। इसके अंतर्गत Theja Business Solutions Pvt. Ltd. और Anzellic IT Solutions Pvt. Ltd. जैसी कंपनियां शुरू की गईं, जो आईटी और डिजिटल सॉल्यूशंस के क्षेत्र में सक्रिय हैं।

हालांकि उनका व्यवसायिक करियर सफल रहा, लेकिन उन्होंने इसे केवल लाभ तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने संसाधनों और नेटवर्क का उपयोग सामाजिक कार्यों में किया। यही कारण है कि उनका नाम एक ऐसी उद्यमी के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने व्यापार और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित किया।

मानवाधिकार और वैश्विक शांति के लिए कार्य

डॉ. थेजो कुमारी अमुदाला का योगदान मानवाधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में व्यापक रहा है। उन्होंने भारत और विदेशों में कई मंचों के माध्यम से शांति और अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर काम किया है।

कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने जरूरतमंदों के लिए भोजन वितरण, चिकित्सा सहायता और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए मुफ्त आईटी प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों में भी उनका योगदान रहा है।

उनकी भूमिका केवल सामाजिक अभियानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे नीति और सलाहकार स्तर पर भी सक्रिय रही हैं। British Learning UK के लिए International Advisory Council Member के रूप में उनकी नियुक्ति इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सम्मानों की लंबी सूची में नया अध्याय

United States Global Merit Record से मिला यह सम्मान डॉ. Thejo Kumari Amudala की पहले से मौजूद उपलब्धियों की सूची में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। इससे पहले उन्हें Taj Mrs. Universe 2022, Nelson Mandela Nobel Peace Award, Dadasaheb Phalke Icon Award, APJ Abdul Kalam Award, Gandhi Peace Award और United Nation Woman of the Year Award जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

इसके अलावा भारत में भी उन्हें दिल्ली विधानसभा, गोवा सरकार और विभिन्न राष्ट्रीय मंचों से सम्मान प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025 में उन्हें Ministry of Corporate Affairs द्वारा Bharat Ratna Sammaan प्रदान किया गया, जिसने उनके राष्ट्रीय योगदान को औपचारिक मान्यता दी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान

यह सम्मान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की वैश्विक सामाजिक भागीदारी का भी प्रतीक है। Dr. Thejo Kumari Amudala जैसे व्यक्तित्व यह दिखाते हैं कि भारतीय सामाजिक नेतृत्व अब वैश्विक विमर्श का हिस्सा बन चुका है।

आज के समय में जब वैश्विक चुनौतियां साझा समाधान मांगती हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति और मान्यता का महत्व और भी बढ़ जाता है।

आगे की राह

वर्तमान में भी डॉ. थेजो कुमारी अमुदाला सामाजिक कार्य, उद्यमिता और शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे लेखन और विचार नेतृत्व के माध्यम से मानवाधिकार, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर संवाद जारी रखे हुए हैं।

उनका यह सम्मान एक पड़ाव है, न कि मंज़िल। उनके कार्य यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भी वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेंगी।


इंदौर की पहचान उसकी संघर्षशील जनता,अदम्य हौसलों और विकासशील सोच से है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेयजल व्यवस्था सुदृढ़ करने इंदौर को दी 800 करोड़ से अधिक की सौगात
स्वच्छ जल अभियान अमृत 2.0 योजना की ऐतिहासिक परियोजना का किया भूमि-पूजन

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर निरंतर प्रगति, विकास और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आज इंदौर देश का सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला शहर बन चुका है। विकास, स्वच्छता, उद्योग, व्यापार और सुशासन के क्षेत्र में इंदौर ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, जिस पर पूरे मध्यप्रदेश को गर्व है। इंदौर की पहचान उसकी संघर्षशील जनता, अदम्य हौसलों और विकासशील सोच से है। आज प्रदेश का हर जिला इंदौर जैसा बनना चाहता है। उन्होंने कहा कि कठिन समय में सरकार, नगर निगम और प्रशासन ने पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों के साथ खड़े रहकर हरसंभव प्रयास किए।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को इंदौर शहर की पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़, आधुनिक एवं दीर्घकालिक समाधान प्रदान करने की दिशा में स्वच्छ जल अभियान अंतर्गत अमृत 2.0 इंदौर जलप्रदाय योजना (पैकेज–1) के तहत 800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित जल प्रदाय परियोजना का विधिवत भूमि-पूजन किया।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मकर संक्रांति पर आयोजित कार्यक्रम में सभी को मंगलकानाएँ दीं। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा क्षेत्र में घटित जल-जनित घटना ने सभी को पीड़ा पहुँचाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस घटना में दिवंगत हुए नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मकर संक्रांति केवल पर्व नहीं, बल्कि तिल-तिल करके आगे बढ़ने का संकल्प है। जैसे इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है और प्रकाश बढ़ता है, वैसे ही इंदौर निरंतर प्रगति, विकास और नवाचार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आपदा के समय राजनीति करना इंदौर स्वीकार नहीं करेगा। सकारात्मक और रचनात्मक विपक्ष लोकतंत्र की शक्ति है, लेकिन पीड़ा पर राजनीति करना सर्वथा अनुचित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मालवा और निमाड़ क्षेत्र को नर्मदा जल से जोड़ने के लिए वर्षों संघर्ष करना पड़ा। सरदार सरोवर बांध को पूर्ण कर देश को जल सुरक्षा देने का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जाता है। इसके माध्यम से सिंचाई क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। मध्यप्रदेश में आज 56 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई संभव हो सकी है। उन्होंने नदी जोड़ो परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्वती–कालीसिंध–चंबल (पीकेसी) परियोजना राजस्थान और मध्यप्रदेश के लिए वरदान सिद्ध होगी। केन–बेतवा नदी जोड़ो अभियान पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था, जिसे आज प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के माध्यम से प्रत्येक गांव और प्रत्येक शहर तक शुद्ध पेयजल पहुँचाना सरकार का संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन और राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग से इंदौर आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इंदौर आगे बढ़ेगा, सरकार पूरी मजबूती से इंदौर के साथ खड़ी है।

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम के पहले जीवन दायिनी मां नर्मदा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने सभागृह परिसर में संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर और स्वर कोकिला लता मंगेशकर की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन भी अर्पित किए।

  नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में नर्मदा के जल आंदोलन तथा नर्मदा के जल लाने की संघर्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इंदौर का ऐतिहासिक जन-आंदोलन था। नर्मदा जल परियोजना केवल एक योजना नहीं, बल्कि इंदौर की जनशक्ति और संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि यदि नर्मदा जल नहीं आता, तो इंदौर आज जिस रूप में है, वह कभी नहीं बन पाता। उन्होंने इंदौर की स्वच्छता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यहां की पहचान केवल विकास से नहीं, बल्कि नागरिकों की सहभागिता से बनी है। देर रात तक शहर की सफाई में जुटने वाले सफाई कर्मी इंदौर की असली ताकत हैं। इंदौर की स्वच्छता पर हम सबको गर्व है। उन्होंने कहा कि सुबह-सुबह घरों से कचरा गाड़ियों में स्वयं नागरिकों द्वारा कचरा डालना इंदौर की जनभागीदारी का जीवंत उदाहरण है। मंत्री श्री विजयवर्गीय ने कहा कि इंदौर नंबर वन था, इंदौर नंबर वन है और नंबर वन रहेगा। नर्मदा, स्वच्छता और जनता के स्वाभिमान से बनी इंदौर की आन-बान-शान को कोई आंच नहीं आने दी जाएगी।

  जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने विकसित भारत का जो संकल्प लिया है, उसी संकल्प को मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में साकार रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेज गति से संचालित हो रहे हैं और शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह विकास केवल अधोसंरचना तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, जल संसाधन और रोजगार के क्षेत्रों में भी नए आयाम स्थापित कर रहा है।

   महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि उन्होंने इंदौर के भविष्य की जल-आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1100 करोड़ रुपये की योजना को दूरदृष्टि के साथ 2400 करोड़ रुपये तक विस्तार दिया। यह निर्णय आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। आज जिस परियोजना का भूमि-पूजन किया गया है, यह केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत 10 वर्षों का संचालन एवं संधारण (O&M) भी शामिल है। इससे शहर को लंबे समय तक सुचारु, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी। परियोजना पूर्ण होने पर इंदौर की वर्तमान एवं भविष्य की पेयजल आवश्यकताओं की प्रभावी पूर्ति संभव होगी। यह परियोजना इंदौर को स्वच्छ, पर्याप्त और भरोसेमंद पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ जलूद एवं ग्राम भकलाय क्षेत्र में 1650 एम.एल.डी. क्षमता का नवीन इन्टेक वेल, 2235 एम.एम. व्यास की रॉ-वॉटर एवं क्लीयर-वॉटर पम्पिंग मेन का निर्माण, निर्बाध विद्युत आपूर्ति हेतु 11 के.व्ही., 33 के.व्ही. एवं 132 के.व्ही. विद्युत सब-स्टेशन, उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 400 एम.एल.डी. क्षमता का आधुनिक जलशोधन संयंत्र तथा जल-दबाव संतुलन हेतु 12 एम.एल.डी. क्षमता का ब्रेक प्रेशर टैंक का निर्माण किया जाना है। उन्होंने कहा कि इंदौर ने संघर्ष, अनुशासन और जनभागीदारी से अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि इंदौर जनता के सहयोग से शहर निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहेगा। कार्यक्रम को विधायक श्री मधु वर्मा ने भी संबोधित किया।

   सांसद श्री शंकर लालवानी, विधायक श्री रमेश मेंदोला, श्री गोलू शुक्ला, श्रीमती मालिनी लक्ष्मण सिंह गौड़, श्री मधु वर्मा, श्री महेन्द्र हार्डिया और श्री मनोज पटेल के साथ श्री सुमित मिश्रा, श्री श्रवण चावड़ा, संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त श्री संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर श्री शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल, पूर्व महापार श्री कृष्ण मुरारी मोघे, श्री प्रताप करोसिया, परिषद के सदस्य जनप्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।