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धार : शीत लहर के कारण 7 जनवरी को कक्षा नर्सरी से 8 वीं तक अवकाश,8 जनवरी से प्रातः 10 बजे के बाद लगेंगी कक्षाएं

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     धार। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के आदेशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी धार द्वारा तापमान में निरंतर गिरावट एवं शीत लहर के प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए जिले के शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव की संभावना को ध्यान में रखते हुए आदेश जारी किए गए हैं।

      जारी आदेश के अनुसार धार जिलान्तर्गत संचालित समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदानप्राप्त, मान्यता प्राप्त, सी.बी.एस.ई. एवं अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए दिनांक 07 जनवरी 2026 को अवकाश घोषित किया गया है।

        साथ ही जिले के समस्त शासकीय, अशासकीय, अनुदानप्राप्त, मान्यता प्राप्त, सी.बी.एस.ई. एवं अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालयों में दिनांक 08 जनवरी 2026 से कक्षा नर्सरी से कक्षा 12वीं तक की कक्षाएं प्रातः 10.00 बजे से पूर्व संचालित नहीं की जाएंगी।

  उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

गुरु गोविंद सिंह बस्ती में 'हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया,जात-पात छोड़कर जब हम सनातनी बनेंगे,तभी भारत पुनः विश्व गुरु बनेगा: कैलाश अमलियार

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  राजगढ़/धार। नगर की गुरु गोविंद सिंह बस्ती में 'हिंदू सम्मेलन' का भव्य आयोजन चबूतरा चौक पर किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जनजाति कार्य प्रमुख (मालवा प्रांत) कैलाश अमलियार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य अतिथि कथावाचक श्री सुभाष जी शर्मा ने की। मातृशक्ति के रूप में श्रीमती उर्मिला कुशवाह एवं सुजाता दीदी ठाकुर मंचासीन रहीं।

  मुख्य वक्ता कैलाश अमलियार ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता पर बल देते हुए कहा कि जब तक हम जात-पात के बंधनों में बंधे रहेंगे, असामाजिक तत्व हमें आपस में लड़वाते रहेंगे। उन्होंने कहा, "स्वतंत्रता के बाद से ही कई षड्यंत्रों के माध्यम से हिंदुओं को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि भारत को विश्व गुरु बनने से रोका जा सके। हमें इन मंसूबों को नाकाम करना होगा।" उन्होंने नारा दिया— "जात पात की करो विदाई, हिंदू-हिंदू भाई-भाई" और सभी से गर्व के साथ स्वयं को सनातनी हिंदू कहने का आह्वान किया। मातृशक्ति की ओर से विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए पारिवारिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाना अनिवार्य है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शताब्दी वर्ष में दिए गए 'पंच परिवर्तन' के संकल्पों को दोहराया गया है। पंच परिवर्तन और सुदृढ़ नागरिकता मातृशक्ति की ओर से विचार रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए पारिवारिक प्रणाली को सुदृढ़ बनाना अनिवार्य है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा शताब्दी वर्ष में दिए गए पंच परिवर्तन (सामाजिक समरसता, कुटुंब व्यवस्था, पर्यावरण, स्वाधारित जीवन शैली एवं नागरिक अनुशासन) का पालन करते हुए हम अच्छे नागरिक बनेंगे, तो हमारे देश को विश्व गुरु बनने से कोई नहीं रोक सकता।

  मंचीय कार्यक्रम के पश्चात बस्ती के समस्त रहवासियों के लिए ओसवाल समाज धर्मशाला में सपरिवार सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और गणमान्य जन उपस्थित रहे।

एक ओर प्रकृति की अद्भुत सुंदरता, तो दूसरी ओर गंदगी का अंबार जमशेदपुर के पास स्थित चांडिल डैम और पहाड़ भांगा की तस्वीरें बढ़ा रही हैं चिंता

 

पिकनिक मनाने आते हैं लोग, जिम्मेदारी छोड़ जाते हैं वहीं

झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में शामिल चांडिल डैम और पहाड़ भांगा अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं। ये स्थान जमशेदपुर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और हर मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। पहाड़ों के बीच फैला जलाशय, हरियाली, खुला आसमान और शांत वातावरण यहाँ आने वालों को प्रकृति के बेहद करीब ले जाता है। पहाड़ भांगा एक लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है, जहाँ पहाड़ों के बीच प्रकृति का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। ऊँचे-नीचे पहाड़, ठंडी हवा और प्राकृतिक सन्नाटा लोगों को सुकून का अनुभव कराता है। यही वजह है कि जमशेदपुर और आसपास के इलाकों से लोग परिवार और दोस्तों के साथ यहाँ पिकनिक मनाने आते हैं।

लेकिन इस खूबसूरती के बीच एक गंभीर समस्या भी सामने आ रही है। यहाँ फैला कूड़ा-कचरा कहीं बाहर से नहीं आता, बल्कि जो भी लोग पिकनिक या घूमने आते हैं, वही अपने साथ लाए खाने-पीने के सामान का कचरा, प्लास्टिक बोतलें, चिप्स-बिस्कुट के पैकेट, डिस्पोज़ेबल प्लेट और गिलास यहीं फेंक कर चले जाते हैं। यही लापरवाही धीरे-धीरे इन प्राकृतिक स्थलों की सुंदरता को नुकसान पहुँचा रही है। चांडिल डैम का वातावरण और पहाड़ भांगा का प्राकृतिक नज़ारा जहाँ मन को सुकून देता है, वहीं उसी जगह पर फैली गंदगी मन को आहत भी करती है। एक ही स्थान पर प्रकृति की सुंदरता और इंसानी लापरवाही का यह विरोधाभास साफ दिखाई देता है। यह न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है, बल्कि आने वाले पर्यटकों पर भी गलत प्रभाव डालता है।

इस स्थिति के लिए केवल प्रशासन को दोष देना उचित नहीं है। असल जिम्मेदारी हम सभी की है। जो लोग यहाँ घूमने आते हैं, उनका नैतिक दायित्व है कि वे अपने साथ लाए गए सामान का कचरा खुद संभालें, डस्टबिन में डालें या अपने साथ वापस ले जाएँ। स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत हर व्यक्ति से होती है।

अगर समय रहते लोगों में जागरूकता नहीं आई, तो चांडिल डैम और पहाड़ भांगा जैसे सुंदर पर्यटन स्थल अपनी प्राकृतिक पहचान खो सकते हैं। जरूरत है कि हम जिम्मेदार पर्यटक बनें, दूसरों को भी सफाई के लिए प्रेरित करें और प्रकृति के इस अनमोल उपहार को साफ, सुरक्षित और सुंदर बनाए रखें।

शिक्षा बोर्ड की तलाश कर रहे हैं? भारत के सभी रेगुलर और ओपन बोर्ड की सूची



नई दिल्ली: भारत में हर वर्ष लाखों छात्र और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि भारत में कौन-कौन से शिक्षा बोर्ड मान्य हैं, कौन-सा बोर्ड रेगुलर स्कूल शिक्षा के लिए उपयुक्त है और कौन-सा ओपन स्कूल बोर्ड लचीली शिक्षा प्रदान करता है बदलते समय और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लागू होने के बाद यह विषय और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है

CBOSE: ओपन स्कूल शिक्षा में उभरता राष्ट्रीय बोर्ड

केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड Central Board of Open Schooling and Examination (CBOSE) (CBOSE) भारत में ओपन स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में एक सशक्त एवं उभरता हुआ नाम है CBOSE का उद्देश्य उन विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, जो पारंपरिक प्रणाली से बाहर रह गए हैं

CBOSE की प्रमुख विशेषताएँ

  • माध्यमिक (कक्षा 10) एवं उच्च माध्यमिक (कक्षा 12) स्तर की मुक्त शिक्षा
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षणिक ढांचा
  • पारदर्शी परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली
  • डिजिटल एवं आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था
  • शिक्षा के साथ कौशल विकास को प्रोत्साहन

Central Board of Open Schooling and Examination (CBOSE) यह सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है कि ओपन स्कूल शिक्षा को समाज में समान सम्मान और अवसर प्राप्त हो

भारत के प्रमुख रेगुलर शिक्षा बोर्ड (Regular School Boards in India)

भारत में निम्नलिखित प्रमुख नियमित शिक्षा बोर्ड कार्यरत हैं

  • केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड
  • विभिन्न राज्य माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ü  उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद

ü  महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ü  राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ü  बिहार विद्यालय परीक्षा समिति

ü  मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल

ü  पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ü  तमिलनाडु राज्य बोर्ड

ü  कर्नाटक माध्यमिक शिक्षा परीक्षा बोर्ड

ü  गुजरात माध्यमिक शिक्षा बोर्ड

ü  हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड

ü  पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड

ये बोर्ड मुख्यतः विद्यालय आधारित नियमित शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा का संचालन करते हैं

भारत के प्रमुख ओपन स्कूल शिक्षा बोर्ड (Open School Boards in India)

ओपन स्कूल बोर्ड उन विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करते हैं जो किसी कारणवश नियमित विद्यालय नहीं जा सके या पुनः शिक्षा से जुड़ना चाहते हैं

भारत के प्रमुख मुक्त विद्यालयी शिक्षा बोर्ड

  • राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS)
  • केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE)
  • विभिन्न राज्य मुक्त विद्यालयी बोर्ड

ü  बिहार राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा बोर्ड

ü  मध्य प्रदेश राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा बोर्ड

ü  राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा बोर्ड

ü  पश्चिम बंगाल राज्य मुक्त विद्यालयी शिक्षा परिषद

निष्कर्ष: यदि आप शिक्षा बोर्ड की तलाश कर रहे हैं, तो भारत के सभी रेगुलर और ओपन स्कूल बोर्डों की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है आज ओपन स्कूल शिक्षा केवल वैकल्पिक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुकी है

केन्द्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा एवं परीक्षा बोर्ड (CBOSE) भारत में मुक्त विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा देते हुए शिक्षा के अधिकार, समान अवसर और आजीवन सीखने की अवधारणा को सशक्त बना रहा है