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अहमदाबाद की बेटी चाहत ठक्कर का हिंदी सिनेमा में बड़ा कदम, फ़िल्म ‘बेटी हैं तो सृष्टि हैं’ से करेंगी सशक्त शुरुआत

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अहमदाबाद की रचनात्मक धरती से निकलकर एक और युवा प्रतिभा अब हिंदी सिनेमा के राष्ट्रीय मंच पर कदम रखने जा रही है। शहर की होनहार कलाकार Chahat Thakkar जल्द ही अपनी पहली हिंदी फ़ीचर फ़िल्म Beti Hain Toh Srishti Hain के ज़रिये दर्शकों के सामने होंगी। यह फ़िल्म न केवल उनके करियर की शुरुआत है, बल्कि एक ऐसे सामाजिक विषय को भी उठाती है, जो आज के समय में व्यापक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

हिंदी सिनेमा में अहम भूमिका के साथ एंट्री

फ़िल्म बेटी हैं तो सृष्टि हैं में चाहत ठक्कर एक किशोर उम्र की लड़की का मुख्य किरदार निभाती नज़र आएंगी। यह भूमिका कहानी के भावनात्मक और वैचारिक ढांचे की धुरी मानी जा रही है। किसी भी नए कलाकार के लिए डेब्यू फ़िल्म में लीड रोल मिलना एक बड़ी उपलब्धि होती है, खासकर तब जब फ़िल्म सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हो।

फ़िल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, चाहत का किरदार आज की उस युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है, जो सवाल भी पूछती है और बदलाव का रास्ता भी दिखाती है। यही कारण है कि यह भूमिका उनके अभिनय कौशल के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व को भी सामने लाने वाली मानी जा रही है।

मजबूत प्रोडक्शन और अनुभवी टीम

इस फ़िल्म का निर्माण Rajat Motion Film Production और Bluemoon Entertainment के बैनर तले किया जा रहा है। कहानी प्रसिद्ध लेखक S. M. Ahlaae द्वारा लिखी गई है, जिन्होंने सामाजिक विषयों पर आधारित कई चर्चित कहानियाँ लिखी हैं। निर्देशन की कमान अनुभवी फ़िल्मकार Raj Shri Ji ने संभाली है।

फ़िल्म में बॉलीवुड के कई वरिष्ठ और जाने-माने कलाकार भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। हालांकि अभी पूरी स्टारकास्ट का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी से फ़िल्म को एक संतुलित और भरोसेमंद प्रस्तुति मिलने की उम्मीद की जा रही है।

बेटियों के महत्व पर आधारित संवेदनशील कहानी

बेटी हैं तो सृष्टि हैं का मूल संदेश समाज में बेटियों की भूमिका, उनके अधिकार और उनके महत्व को केंद्र में रखता है। फ़िल्म यह दिखाने का प्रयास करती है कि बेटियाँ केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की नींव हैं। कहानी भावनात्मक होने के साथ-साथ प्रेरणादायक भी है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।

फ़िल्म की टीम का दावा है कि कहानी को उपदेशात्मक बनाए बिना, रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े पात्रों और घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, ताकि दर्शक खुद को इससे जोड़ सकें।

मुंबई में पोस्टर लॉन्च से बनेगा माहौल

फ़िल्म का आधिकारिक पोस्टर जल्द ही मुंबई में लॉन्च किया जाएगा। इस मौके पर बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकारों की मौजूदगी रहने की संभावना है। पोस्टर लॉन्च इवेंट को लेकर पहले से ही फ़िल्म इंडस्ट्री में चर्चा शुरू हो चुकी है, क्योंकि इसी के साथ फ़िल्म की मार्केटिंग औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

चाहत ठक्कर के लिए यह इवेंट खास माना जा रहा है, क्योंकि यही वह मंच होगा जहां उनका औपचारिक परिचय हिंदी फ़िल्म जगत से होगा।

शूटिंग शेड्यूल और रिलीज़ प्लान

फ़िल्म के निर्माता Dr. Vijay के अनुसार, फ़िल्म की शूटिंग 25 अप्रैल से शुरू होगी। शूटिंग को कई चरणों में पूरा किया जाएगा और इसे साल के अंत तक रिलीज़ करने की योजना है। फ़िल्म को दिसंबर के अंत में देश के कई प्रमुख शहरों में एक साथ रिलीज़ किया जाएगा।

शूटिंग के लिए राजस्थान, मुंबई और कश्मीर के साथ-साथ मलेशिया और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय लोकेशन्स चुने गए हैं। इन विविध स्थानों से फ़िल्म को एक भव्य और वैश्विक स्तर का दृश्य स्वरूप मिलने की उम्मीद है।

अभिनय, नृत्य और मॉडलिंग से फ़िल्म तक का सफर

अहमदाबाद की रहने वाली चाहत ठक्कर इससे पहले भी अभिनय, डांस और मॉडलिंग के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। कम उम्र में ही उन्होंने कई मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है और स्थानीय स्तर पर पहचान बनाई है। उनके प्रशिक्षकों के अनुसार, उनमें सीखने की ललक और अनुशासन शुरू से ही रहा है।

इस फ़िल्म तक चाहत की प्रतिभा को पहुंचाने का श्रेय Beena Vyas, Ajay Sir और SST Dance Studio को जाता है। वहीं, उनके अभिनय गुरु Abhilash Sir ने उनके अभिनय को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अहमदाबाद के लिए गर्व का क्षण

चाहत ठक्कर की यह उपलब्धि अहमदाबाद के सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए भी खास मानी जा रही है। हाल के वर्षों में शहर से कई कलाकार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं और अब चाहत का नाम भी इसी सूची में जुड़ता दिखाई दे रहा है।

जैसे-जैसे बेटी हैं तो सृष्टि हैं की शूटिंग और प्रचार आगे बढ़ेगा, दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सामाजिक फ़िल्म बॉक्स ऑफिस और दर्शकों के दिलों पर कितना असर डाल पाती है। फिलहाल, इतना तय है कि चाहत ठक्कर की यह शुरुआत नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती।


इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद परिषद अलर्ट: अध्यक्ष सवेरा जायसवाल और CMO ने दिए सख्त निर्देश

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 रेलिया डैम फिल्टर प्लांट का औचक निरीक्षण,सीएमओ बोलीं- "पानी की गुणवत्ता में लापरवाही हुई तो खैर नहीं"


  राजगढ़/धार। हाल ही में इंदौर में दूषित पानी के कारण सामने आई दुखद घटनाओं और वहां फैली जनहानि के बाद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इंदौर की उस त्रासदी से सबक लेते हुए,जहाँ गंदे पानी की आपूर्ति से नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हुआ,इसको लेकर राजगढ़ नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती सवेरा जायसवाल और सीएमओ ज्योति सुनारिया ने शहर की जल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। गुरुवार को नगर परिषद के सभा कक्ष में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में इंदौर के घटनाक्रम का विशेष रूप से उल्लेख किया गया और अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि ऐसी किसी भी स्थिति की पुनरावृत्ति यहाँ नहीं होनी चाहिए।

  बैठक के दौरान सीएमओ ज्योति सुनारिया ने जल विभाग के समस्त कर्मचारियों को स्पष्ट कर दिया कि पेयजल की शुद्धता में किसी भी प्रकार की कोताही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जल प्रभारी को निर्देशित किया कि अब प्रतिदिन फिल्टर प्लांट का निरीक्षण करना अनिवार्य होगा और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच लैब के माध्यम से कराई जाएगी ताकि जल मानकों के अनुरूप रहे। इंदौर की घटना के बाद शासन के सख्त रुख को देखते हुए सीएमओ ने साफ कहा कि तकनीकी या स्वच्छता संबंधी किसी भी कमी को तत्काल दूर किया जाए, वरना कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित है।

   इसी क्रम में शुक्रवार को सीएमओ सुनारिया स्वयं अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ रेलिया डैम स्थित फिल्टर प्लांट और इंटेकवेल का निरीक्षण करने पहुंचीं। वहां उन्होंने जल शोधन प्रक्रिया और प्लांट की सफाई व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उपयंत्री आराधना डामोर और अन्य अधिकारी मौजूद रहे। सीएमओ ने मौके पर तैनात कर्मचारियों को सख्त हिदायत दी कि फिल्टर प्लांट की नियमित सफाई निर्धारित समय सीमा में की जाए और जल शोधन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर चूक न हो।

  अंत में सीएमओ ने नागरिकों से भी अपील की कि इंदौर जैसे हालात न बनें, इसके लिए जनसहभागिता जरूरी है। यदि किसी भी क्षेत्र में गंदे या मटमैले पानी की शिकायत आती है,तो नागरिक तुरंत नगर परिषद को सूचित करें। समय पर सूचना मिलने से किसी भी बड़े स्वास्थ्य जोखिम को टाला जा सकेगा। परिषद का मुख्य उद्देश्य है कि प्रत्येक नागरिक तक शुद्ध और सुरक्षित जल पहुंचे ताकि जनस्वास्थ्य के साथ कोई समझौता न हो।

Happy New Year 2026: दुनिया में हर जगह 1 जनवरी को नहीं मनता नया साल

1 जनवरी नहीं, इन देशों में अलग तारीखों पर मनता है नया साल

नई दिल्ली, 31 दिसंबर 2025 — जब पूरी दुनिया 1 जनवरी को नए साल 2026 का स्वागत करती है, तब कई देशों में यह दिन सामान्य रहता है। दरअसल, ग्रेगोरियन कैलेंडर के अलावा दुनिया में कई प्राचीन कैलेंडर प्रचलन में हैं, जिनके अनुसार नया साल अलग-अलग समय पर मनाया जाता है।

चीन में नया साल ‘लूनर न्यू ईयर’ के रूप में जनवरी–फरवरी के बीच मनाया जाता है, जहां ड्रैगन डांस और लाल रंग का विशेष महत्व है। थाईलैंड में अप्रैल में ‘सोंगक्रान’ के दौरान पानी से नए साल का स्वागत किया जाता है। इथियोपिया में 11 सितंबर को ‘एनकुटाटाश’ मनाया जाता है और यहां 13 महीनों का कैलेंडर चलता है।

भारत और नेपाल में पारंपरिक नववर्ष मार्च–अप्रैल में आता है। भारत में गुड़ी पड़वा, उगादी और बैसाखी, जबकि नेपाल में विक्रम संवत के अनुसार नया साल मनाया जाता है। तिब्बत और श्रीलंका में भी नया साल फसल और आस्था से जुड़ा उत्सव है।

Our Thoughts:
नया साल सिर्फ तारीख बदलने का नाम नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपराओं का उत्सव है। अलग-अलग देशों के नववर्ष यह याद दिलाते हैं कि हर सभ्यता प्रकृति और समय को अपने तरीके से समझती है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आधी आबादी से सीधा संवाद : मातृ सत्तात्मक संस्कृति से मिले हैं नारी सम्मान के संस्कार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भाई के घर (मुख्यमंत्री निवास) आई बहनों को मिला सम्मान
भाई के साथ बहनें मनायेंगी आगामी त्योहार
जमीन से आसमान तक सफलतापूर्वक बहनें हैं नंबर वन
भाई का वादा, बहनों को मिलेगा और भी ज्यादा
सरगम के सुरों ने बांधा समां, मुख्यमंत्री ने दिये 51 हजार रूपये
 राज्य सरकार की प्राथमिकता मातृ शक्ति का सशक्तिकरण
मुख्यमंत्री ने प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं और ड्रोन दीदीयों से की आत्मीय चर्चा
बहनों ने मुख्यमंत्री से साझा किये अपने अनुभव और विचार
मुख्यमंत्री निवास पर हुआ "सशक्त और समर्थ नारी" संवाद कार्यक्रम


  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश की सभी माताओं-बहनों के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है। केंद्र सरकार ने देश की संसद में आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। प्रदेश के नगरीय निकायों और शासकीय सेवाओं में भी 35 प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में बहनें आज भारतीय सेनाओं में भी शीर्ष पद प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश की बहनें आर्थिक-सामाजिक रूप से संपन्न और आत्मविश्वास से भरी हों, इस उद्देश्य से हमारी सरकार ने अनेक कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं को उद्योग स्थापित करने के लिए सब्सिडी दी जाती है। साथ ही अधिक से अधिक बहनें संपत्ति की मालिक बनें, इसके लिए रजिस्ट्री में अतिरिक्त 2 प्रतिशत छूट का लाभ प्रदान किया जा रहा है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 'सशक्त नारी-समर्थ नारी' संवाद कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्यमंत्री निवास पधारी प्रबुद्ध महिलाओं, आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं तथा ड्रोन दीदीयों से आत्मीय चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों के साथ समूह चित्र भी खिंचवाया। बालिका सरगम कुशवाह ने मधुर देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया, मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेटी सरगम को 51 हजार रूपए की राशि सम्मान और प्रोत्साहन स्वरूप देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बहन-बेटियों से इस प्रकार संवाद का क्रम आगामी माहों में भी जारी रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज महिलाएँ नहीं बहने मेरे घर आयी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की आत्मीयता ने बहनों को भाव विभोर कर दिया।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी सफलता के लिये बड़ी बहन श्रीमती कलावती यादव को श्रेय देते हुए कहा कि बड़ी बहन ने ही उन्हें राजनीति में आने के लिए प्रेरित करने के साथ आवश्यक सहयोग व प्रोत्साहन प्रदान किया। मां और बहन के संस्कार, प्रेम और उनके द्वारा दी गई हिम्मत ही उनके आगे बढ़ने का आधार बनी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे परिवार में बहू भी बेटी समान है, और दोनों ही दुलार, स्नेह और सम्मान की बराबर की हकदार हैं। सनातन संस्कृति मातृ सत्ता पर आधारित संस्कृति है। मां ही हम सभी के जीवन मे पहली गुरु होती है। विश्व में भारत ही ऐसा राष्ट्र है, जहां देश को माता के भाव से जोड़ा जाता है। जैसे मां के आंचल में सुख और सुरक्षा का भाव आता है, वैसे ही देश की सत्ता से भी आम आदमी को सुख और सुरक्षा का एहसास हो, यही हमारा उद्देश्य है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में विकास के साथ विरासत को संरक्षण प्रदान करते हुए गतिविधियां संचालित की जा रही है। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ चिकित्सा सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मोड) पर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने के लिए लीज पर 25 एकड़ भूमि तक उपलब्ध कराई जा रही है। मध्यप्रदेश देश में यह नवाचार करने वाला पहला राज्य है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।। राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों की एमबीबीएस की 70 से 80 लाख रुपए तक फीस भर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में देहदान और अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए गार्ड ऑफ ऑनर देने की परंपरा शुरू की गई है। इसका सकारात्मक प्रभाव हुआ है। हमारी सरकार ने ऐलोपैथी के साथ-साथ आयुर्वेदिक एवं पैरामेडिकल क्षेत्र में शिक्षा एवं रोजगार के अवसरों को बढ़ाया है।   

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में महिला उद्यमियों के स्टार्ट-अप में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश वह राज्य है, जो औद्योगिक विकास में सबसे तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश स्टार्ट-अप्स शुरू करने में अग्रणी हैं। राज्य सरकार ने बीते 2 वर्षों से लगातार स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित कर रही है। इनमें अधिकांश का नेतृत्व प्रदेश की महिला उद्यमी कर रही हैं। राज्य सरकार सूक्ष्म उद्योग, लघु एवं कुटीर उद्योग से लेकर हैवी इंडस्ट्री तक महिलाओं को हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है। प्रदेश में लागू की गईं 18 नई नीतियों में महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। गुजरात मॉडल पर औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भोपाल में पहली बार जीआईएस का आयोजित की गई। उससे पहले संभाग स्तर पर रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव की गईं। इन सभी प्रयासों से राज्य को मिले बंपर निवेश और औद्योगिक विकास की संभावनाओं का लाभ महिलाओं को भी मिल रहा है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विगत 2 वर्षों में राज्य सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक कार्य किए हैं। इसका प्रभाव सभी क्षेत्रों में दिख रहा है। लाड़ली बहना योजना से घरों के वातावरण में बदलाव आया है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनका आत्मविश्वास और आत्मसम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) का दायित्व महिलाएं निभा रही हैं। जीवन के लगभग सभी क्षेत्रों में महिलाएं पूर्ण दायित्व के साथ चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन कर रही हैं। शिक्षण संस्थाओं में भी बालिकाएं ही मेरिट लिस्ट में अग्रणी दिखाई देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा ‍कि राज्य सरकार महिलाओं की प्रगति में हर कदम पर उनके साथ है। राज्य में सप्ताह में 5 दिन कार्यालय लगने से नौकरीपेशा  महिलाओं को सुविधाएं हुई हैं।  

अनूठा आयोजन - सीधा संवाद

  प्रदेश की विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही बहनों से मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सीधा संवाद किया। इस अनूठे आयोजन में स्वास्थ्य, शिक्षा, टेक्सटाइल, व्यापार और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय बहनों ने अपने अनुभव, चुनौतियां और नवाचार साझा किए।

  संवाद की शुरुआत में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह केवल संवाद नहीं, बल्कि समाज की उस जीवंत परंपरा का विस्तार है जिसमें बहनें जमीन से आसमान तक हर कदम आगे बढ़ते हुए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज नारी शक्ति केवल भागीदार नहीं, बल्कि नेतृत्व की सक्रिय भूमिका में है।

माँ के दिये संस्कार हैं हमारी धरोहर

  मुख्यमंत्री डॉ.  यादव ने बहनों से संवाद करते हुए कहा कि माँ द्वारा दिए गए संस्कार हमारी धरोहर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपनी माँ का पुण्य स्मरण करते हुए कहा कि उनकी माँ उनमें और उनके मित्रों में कोई भेद नहीं करती थीं। सबको समान रूप से प्रेम और स्नेह मिलता था। उनका प्रयास है कि माँ के दिये संस्कारों के अनुरूप वे भी कार्य कर सके।

मुख्यमंत्री ने सरगम के सुर को किया सम्मानित, 51 हजार रुपए का दिया नगद पुरस्कार

  कार्यक्रम के दौरान बालिका सरगम कुशवाह ने राष्ट्र भक्ति गीत गाया। उसकी सुरमई और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकृष्ट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सरगम की प्रतिभा की सराहना करते हुए उसे कंठ कोकिला कहकर संबोधित किया और 51 हजार रुपए का पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया। सरगम के सुरों से निकले 51 हजार रुपए नन्ही प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के प्रति मुख्यमंत्री की संवेदनशील सोच को दर्शाते हैं।

हमने प्रशासन की ज़िम्मेदारी दी है नारी शक्ति के हाथ

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संवाद करते हुए कहा कि आज प्रदेश के 17 जिलों में महिलाएं कलेक्टर हैं। इसके साथ ही प्रदेश के 16 में से 9 नगरीय निकायों में महिलाएं महापौर हैं। इनमें 7321 पार्षदों में 4154 महिलाएं पार्षद हैं। इसी प्रकार 875 जिला पंचायत सदस्यों में 519 महिलाएं और 6771 जनपद पंचायत सदस्यों में 4068 महिलाएं सदस्य हैं। प्रदेश की 22923 ग्राम पंचायतों में 12319 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच हैं। यह मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्रदर्शित करता है। इसके अतिरिक्त कई जिलों में एसपी, नगर निगम अध्यक्ष, नगर पालिका अध्यक्ष और जिला पंचायत अध्यक्ष जैसे दायित्व को बहनें बखूबी संभाल रही हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि आधी आबादी से सीधा संवाद अब नीतियों और प्रशासन में भी दिखने लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नारी शक्ति की यह भूमिका समाज को संतुलित, संवेदनशील और मजबूत बनाने में अहम है।

साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी कैंसर मरीजों की कर रही है सेवा

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में नवाचार करते हुए नये-नये कीर्तिमान रच रही है। उन्होंने जबलपुर की साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी की चर्चा करते हुए बताया कि वे आध्यात्मिक आश्रम के साथ ही कैंसर मरीजों की सेवा भी कर रही है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा स्थापित चिकित्सा संस्थान "विराज हास्पिस" में ऐसे कैंसर मरीज आते हैं जो कि अंतिम समय तक आश्रम में ही रहते हैं। ज्ञानेश्वरी दीदी ऐसे मरीजों का उनके अंतिम समय तक उपचार भी कराती है।  

महिला सशक्तिकरण की मिसाल है रतलाम

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल रतलाम जिले ने भी कायम की है। जिले में अधिकांश प्रमुख पदों को महिलाएं सुशोभित कर रही हैं। यहाँ कलेक्टर मीसा सिंह, सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन, अपर कलेक्टर डॉ. सारणी श्रीवास्तव, उप संचालक कृषि श्रीमती नीलम चौहान, उप संचालक जनसम्पर्क श्रीमती अनुराधा गहरवाल, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती रंजना सिंह, मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. संध्या बेलसेरे, डीन मेडिकल कॉलेज डॉ. अनिता मुथा, उप संचालक सामाजिक न्याय श्रीमती संध्या शर्मा, डिस्ट्रीक कमांडेंड होमगार्ड रोशनी बिलवाल, एसडीएम रतलाम शहर श्रीमती आर्ची और एसडीएम आलोट श्रीमती रचना शर्मा है।

भारतीय वस्त्रों को आधुनिक पहचान दे रहीं दीपाली शर्मा

  टेक्सटाइल क्षेत्र से जुड़ी दीपाली शर्मा ने संवाद में बताया कि वे और उनकी बहन मिलकर पिछले 12–13 वर्षों से हैंडलूम आधारित परिधान ब्रांड चला रही हैं। बाग प्रिंट, चंदेरी फैब्रिक, हैंडलूम खादी और पारंपरिक भारतीय वस्त्रों को आधुनिक सिलुएट और कस्टमाइजेशन के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना उनका लक्ष्य है। उन्होंने बताया कि उनका कार्य केवल फैशन तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे कारीगरों से जुड़कर हैंडलूम को सशक्त करना है। उनके संस्थान में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बहनों को रोजगार मिल रहा है। भारतीय पारंपरिक परिधानों की वैश्विक मांग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके उत्पाद देश-विदेश में पसंद किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही वे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू कर और अधिक महिलाओं को मंच उपलब्ध कराएंगी।

परंपरा से आधुनिकता तक - श्रीमती रेनू नायक

   भोपाल की उद्यमी सुश्री रेनू नायक ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सोच स्पष्ट हो और दृष्टि नवाचारी, तो परंपरा और आधुनिकता का सुंदर संगम संभव है। रेनू नायक “सिग्नेचर बुटीक” का संचालन करती हैं, जहाँ वे आने वाली पीढ़ी को ध्यान में रखते हुए नए और समकालीन डिज़ाइन के परिधान तैयार करती हैं। उनकी विशेषता यह है कि वे प्राचीन महेश्वरी और बाग बटिक जैसे पारंपरिक प्रिंट्स को आधुनिक वेस्टर्न परिधानों के साथ सशक्त रूप से प्रस्तुत कर रही हैं। रेनू नायक का मानना है कि भारतीय और पारंपरिक वस्त्र केवल विरासत नहीं, बल्कि आज की फैशन इंडस्ट्री की सशक्त पहचान भी बन सकते हैं। इसी सोच के साथ वे शासकीय एम्पोरियम मृगनयनी जैसे प्रतिष्ठित मंचों के साथ भी कार्य कर रही हैं, जिससे स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक कला को व्यापक पहचान मिल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का आभार मानते हुए कहा कि क्षेत्रीय कॉन्क्लेव, एमएसएमई संवाद और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसी पहलें नवोदित उद्यमियों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक हैं। मुख्यमंत्री का सकारात्मक संवाद और उद्यमियों के प्रति सहयोगात्मक दृष्टिकोण प्रदेश में नए व्यवसायों को आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देता है।

स्वास्थ्य सेवा में जन-आंदोलन बना ‘मुक्त’ अभियान :  डॉ. पूजा त्रिपाठी

  संवाद में शामिल (प्रो.) डॉ. पूजा त्रिपाठी, सुपर स्पेशलिस्ट डेंटिस्ट एवं संस्थापिका ग्लोबल वेलफेयर स्माइल फाउंडेशन, ने मुख कैंसर के खिलाफ अपने 15 वर्षों के अभियान की जानकारी साझा की। वर्ष 2011 से वे तंबाकू मुक्त समाज के लक्ष्य के साथ निरंतर कार्य कर रही हैं। डॉ. पूजा त्रिपाठी ने बताया कि उनका ‘मुक्त’ अभियान आज एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। वर्ष 2017 में हजारों लोगों को तंबाकू छोड़ने की शपथ दिलाकर उन्होंने विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। वहीं वर्ष 2025 में एक ही दिन, एक ही समय पर लगभग डेढ़ लाख लोगों को तंबाकू छोड़ने की शपथ दिलाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। उनकी संस्था स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और औद्योगिक इकाइयों में जाकर जागरूकता कार्यक्रम चलाती है, तंबाकू मुक्त क्षेत्र विकसित करती है और एमओयू के माध्यम से निरंतर अभियान संचालित करती है।

शिक्षा, संवेदना और सशक्तिकरण का संगम : डॉ. अंजली चौधरी

  डॉ अंजली चौधरी, शिक्षा के साथ-साथ उद्यमिता और सामाजिक दायित्व की सशक्त मिसाल हैं। वे एलएनसीटी शैक्षणिक संस्थान में जैव प्रौद्योगिकी विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष होने के साथ-साथ बाग मुगालिया में स्वयं की हरि लाइफ सांइसेस का सफल संचालन भी कर रही हैं। उनका मानना है कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और जीवन को दिशा देने का माध्यम भी है। एक संवेदनशील उद्यमी के रूप में डॉ. अंजली चौधरी विद्यार्थियों को व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक परामर्श प्रदान करती हैं। इसके साथ ही वे पारिवारिक परामर्श के माध्यम से अनेक परिवारों को मार्गदर्शन और समाधान उपलब्ध करा रही हैं। उनका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी सशक्त बनाना है, ताकि वे जीवन के हर क्षेत्र में संतुलित निर्णय ले सकें।

 प्रेरणा और मिसाल: सुश्री सरगम कुशवाह

 जहाँ चाह होती है, वहाँ राह होती है—इस कथन को साकार करती हैं सुश्री सरगम कुशवाह। सशक्त नारी–समर्थ नारी संवाद कार्यक्रम में उपस्थित सुश्री सरगम कुशवाह के मधुर सुरों ने समां बाँध दिया और उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

 दृष्टिबाधित होते हुए भी सरगम ने अपने हुनर के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की है। बचपन से ही गायन में गहरी रुचि रखने वाली सरगम ने निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए रियलिटी शोज़ में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनका मानना है कि संगीत केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मबल और संकल्प का स्वर है।

दीदी सुधाना पशु आहार से बढ़ा दुग्ध उत्पादन

  बहन श्रीमती संगीता मालवीय ने बताया कि मैं आत्मनिर्भर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड, इच्छावर की बोर्ड सदस्य हूँ। हमारी कंपनी का गठन 31 जनवरी 2021 को एफपीओ योजना के अंतर्गत हुआ। आज कंपनी से 2,000 किसान शेयर धारक जुड़े हैं। हम उच्च गुणवत्ता के बीज, खाद, दवाइयाँ, प्रोम खाद और वर्मी कम्पोस्ट उपलब्ध कराते हैं। दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए हमारा “दीदी सुधाना” पशु आहार तैयार किया गया है, जिसकी जांच में 96% तक पोषण क्षमता पाई गई है। इससे दुग्ध उत्पादन बढ़ा है। अब तक कंपनी ने 6.03 करोड़ रूपये का कारोबार और 4.5 लाख रूपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। श्रीमती मालवीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का धन्यवाद देती हैं, जिन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर के साथ प्रोत्साहन दिया।

गर्व होता है कि हम मध्यप्रदेश की बेटियाँ हैं

  बहन पिंकी तिवारी ने बताया कि मैं पिछले 18 वर्षों से ब्रॉडकास्ट इंडस्ट्री से जुड़ी हूँ। कम्युनिटी रेडियो सेट-अप से लेकर डॉक्यूमेंट्री, कॉर्पोरेट फिल्म मेकिंग, सरकारी कार्यक्रमों की होस्टिंग और वर्तमान में ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन व मार्केटिंग के क्षेत्र में कार्य कर रही हूँ। मध्यप्रदेश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लागू योजनाओं से हमें निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन मिलता है। बाहर जाने पर गर्व से कहा जा सकता है कि हम मध्यप्रदेश की बेटियाँ हैं। उन्होंने कहा कि वे चाहती है कि मीडिया, ब्रॉडकास्टिंग और मार्केटिंग क्षेत्र में आगे बढ़ने वाली महिलाओं को ऐसा ही सहयोग मिलता रहे, ताकि वे प्रदेश का नाम रोशन करें।

नमो ड्रोन योजना से बदली श्रीमती वंदना केवट की ज़िंदगी

  रायसेन जिले की सिलवानी जनपद के ग्राम भानपुर निवासी श्रीमती वंदना केवट स्व-सहायता समूह तथा नमो ड्रोन योजना की मदद से आर्थिक उन्नति कर प्रधानमंत्री श्री मोदी के सपनों को साकार कर रहीं हैं। वंदना केवट अब अपने क्षेत्र में ड्रोन वाली दीदी के नाम से जानी जाती है। श्रीमती वंदना केवट बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़कर उनके जीवन में बदलाव आया है। वह आर्थिक रूप से सक्षम हुईं हैं तथा समाज में भी मान-सम्मान बढ़ा है।

  पूर्व मिसेज इंडिया श्रीमती अपेक्षा डबराल श्रीवास्तव बड़ी खुशी के साथ कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला सशक्तिकरण की जो मुहिम शुरू की है, उसके अंतर्गत बचपन से लेकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने तक के लिए अनेक योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। गृहिणी महिलाओं के साथ-साथ उद्यमी महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी मध्यप्रदेश सरकार निरंतर और प्रभावी रूप से कार्य कर रही है।

निरंतर संवाद से सशक्त होती नारी शक्ति

  यह पहला अवसर नहीं है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से सीधा संवाद किया हो। वे नियमित रूप से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही बहनों को अपने निवास पर आमंत्रित कर संवाद करते हैं। इन संवादों के माध्यम से वे उनके कार्यों, चुनौतियों और शासन-प्रशासन से जुड़ी अपेक्षाओं को समझते हैं और नीतिगत सुझावों को गंभीरता से लेते हैं। ऐसे संवाद बहनों को नई ऊर्जा और आत्मविश्वास से लबरेज करते हैं।


विशेष लेख : सुशासन,संवेदना और महिला सशक्तिकरण : मध्यप्रदेश में ‘मोहन मॉडल’ का सजीव अनुभव · श्रीमती संपतिया उइके

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   जब आज से दो वर्ष पूर्व डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के 19वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी, तभी यह आभास होने लगा था कि उनका नेतृत्व केवल प्रशासनिक स्थिरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वह शासन को एक 'नैतिक, सामाजिक और मानवीय दिशा' देने का प्रयास करेगा। सत्ता की बागडोर संभालने के कुछ ही दिनों के भीतर यह स्पष्ट संकेत मिलने लगे थे कि वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विश्वासपात्र मुख्यमंत्रियों की सूची में शीघ्र ही अपना विशिष्ट स्थान सुनिश्चित करेंगे। इसका कारण केवल राजनीतिक सामंजस्य नहीं, बल्कि नीति, नीयत और क्रियान्वयन का संतुलन था।

  मैं स्वयं एक साधारण श्रमिक पृष्ठभूमि से आती हूँ। जीवन में संघर्ष, अभाव और श्रम का अनुभव मेरे व्यक्तित्व का हिस्सा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा मुझे मंत्रीमंडल का हिस्सा बनाना केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह उस समावेशी सोच का प्रमाण था, जिसमें पृष्ठभूमि नहीं, प्रतिबद्धता और कार्यक्षमता को महत्व दिया जाता है। मंत्रीमंडल में उन्होंने सभी साथियों के साथ समभाव और समानता का व्यवहार रखा और व्यवहार में उस लोककथन को चरितार्थ किया।

“मुखिया मुख सो चाहिए, खान-पान सब एक”

  यह केवल कहावत नहीं, बल्कि उनके शासन का स्वभाव बन चुका है।आज डॉ. मोहन यादव की पहचान केवल एक मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि “सबके भैया” के रूप में बन चुकी है। मेरे मंडला जिले में आयोजित एक सामूहिक कार्यक्रम के दौरान मैंने सहज भाव से कहा था “हमारे भैया आज सब बहनों के भाई बन गए हैं।”

  आज जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूँ, तो गर्व होता है कि वह नारा प्रदेश की लाखों बहनों की भावना बन गया। यह पहचान किसी प्रचार अभियान से नहीं बनी, बल्कि उनके व्यवहार, संवाद और संवेदना से निर्मित हुई है।

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यकाल के आरंभ में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि महिला सशक्तिकरण उनकी सरकार के लिए केवल एक योजनागत प्राथमिकता नहीं, बल्कि नैतिक प्रतिबद्धता है। यही कारण है कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा प्रारंभ की गई योजनाओं को न केवल निरंतरता दी गई, बल्कि उन्हें और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और व्यापक स्वरूप प्रदान किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विशेष आग्रह पर कई नई योजनाओं की शुरुआत की गई, जिनका उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक स्तरों पर सशक्त बनाना था।

  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा लिखे गए ब्लॉग में यह दृष्टि स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए यह भरोसा दिलाया कि सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और गरिमा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका यह कथन अत्यंत महत्वपूर्ण है कि जब महिलाएँ आर्थिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त होंगी, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र मजबूत होंगे।

   लाड़ली बहना योजना आज मध्यप्रदेश सरकार की पहचान बन चुकी है। लगभग 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500 रुपये की राशि का नियमित अंतरण न केवल आर्थिक सहायता है, बल्कि राज्य और नागरिक के बीच विश्वास का सेतु भी है। इस राशि को चरणबद्ध रूप से 3 हजार रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार इस योजना को अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक निवेश के रूप में देख रही है।

  इस योजना की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इससे महिलाएँ डिजिटल लेन-देन से जुड़ रही हैं और वित्तीय निर्णयों में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हाल ही में योजना की 31वीं किश्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री का यह कहना कि “बहनों का आशीर्वाद हमारी सबसे बड़ी ताकत है”, उनके नेतृत्व की भावनात्मक गहराई को दर्शाता है।

   महिला सशक्तिकरण को केवल प्रत्यक्ष सहायता तक सीमित न रखते हुए सरकार ने महिलाओं को उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करने पर विशेष ध्यान दिया है। लखपति दीदी योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रति वर्ष एक लाख रुपये की आय का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री उद्यम शक्ति योजना महिलाओं को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

  आज यह तथ्य अत्यंत उत्साहवर्धक है कि प्रदेश में 47 प्रतिशत स्टार्टअप्स महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट उद्योग में कार्यरत महिलाओं को 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देना और “एक बगिया माँ के नाम” योजना के अंतर्गत फलदार पौधरोपण- ये सभी पहल इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक भागीदार बनाना चाहती है।

  महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सुरक्षा और अवसर भी उतने ही आवश्यक हैं। इसी सोच के तहत राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत किया गया है। संपत्ति पंजीयन शुल्क में एक प्रतिशत की छूट और कामकाजी महिलाओं के लिए 'सखी निवास' के रूप में सुरक्षित आवास सुविधाओं का विस्तार, ये सभी निर्णय महिला हितों के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाते हैं।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा अपने पुत्र का विवाह सार्वजनिक सामूहिक विवाह समारोह में संपन्न कराना आज के समय में एक विरल उदाहरण है। जब विवाह सामाजिक प्रदर्शन का माध्यम बनते जा रहे हों, तब यह कदम उन परिवारों के लिए आशा का संदेश है, जो सीमित साधनों में बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं। यह उदाहरण सिद्ध करता है कि मुख्यमंत्री की कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं है।

  मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो कार्य हुए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। फिर भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव कहते हैं कि उन्हें प्रशंसा नहीं केवल बहनों का आशीर्वाद चाहिए। यही आशीर्वाद उन्हें निष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देता है।

  एक मंत्री, एक महिला और एक जनप्रतिनिधि के रूप में मुझे गर्व है कि मैं इस परिवर्तनकारी यात्रा की सहभागी हूँ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश आज सुशासन, संवेदना और समावेशी विकास की दिशा में एक सशक्त उदाहरण बनकर उभर रहा है।


 (लेखिका मध्यप्रदेश शासन की लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री है)

आईडीएफसी प्राइवेट बैंकिंग ग्राहकों के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का इनविटेशन-ओनली मेटल कार्ड 'गज:' लॉन्च




 

  दिल्ली+एनसीआर : आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने अपना नया प्रीमियम क्रेडिट कार्ड 'गज:' लॉन्च कर दिया है। यह कार्ड खास तौर पर बैंक के हाई-नेट-वर्थ कस्टमर्स (एचएनआई) के लिए बनाया गया है और यह सिर्फ इनविटेशन पर ही मिलता है। गज: क्रेडिट कार्ड बैंक की प्रीमियम मेटल कार्ड सीरीज़, अश्व-मयूर-गज: ट्रिलॉजी का सबसे खास हिस्सा है।
    हमारा विचार: संस्कृत में 'गज:' का अर्थ हाथी होता है, जो कि शक्ति, बुद्धिमानी, स्थिरता और रियासत का प्रतीक है। पुराने भारतीय विचारों में हाथी ही राजसी शान और साम्राज्य की रक्षा करने वाला माना जाता था। हाथी कभी-भी आवेगपूर्ण या अतिशय नहीं होता। राजा की महानता को अक्सर उसके ताज से नहीं, बल्कि जिस हाथी पर वह सवार होता है, उससे आँका जाता था।
   हमारा डिज़ाइन: गज: क्रेडिट कार्ड आम ग्लोबल डिज़ाइन्स से अलग है। इसे 'मेटल पर तैयार किया गया' है और इसका सिग्नेचर ट्विन-हाथी डिज़ाइन भारतीय कला और शान का बेमिसाल उदाहरण है, जो दुनिया में भारत की उत्कृष्टता का संदेश देता है।
   उपलब्धता: गज: क्रेडिट कार्ड सिर्फ इनविटेशन के जरिए ही मिलता है और यह चुनिंदा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्राइवेट बैंकिंग कस्टमर्स के लिए है, जिनका बैंक के साथ मजबूत संबंध है। इस कार्ड की जॉइनिंग और वार्षिक फीस 12,500 रुपए + जीएसटी है। इस कार्ड के साथ 12,500 इनविटेशन रिवॉर्ड पॉइंट्स (1आरपी=1 रुपए) मिलते हैं, जिन्हें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ऐप पर ट्रैवल बुकिंग में इस्तेमाल करके जॉइनिंग फीस को रिडीम किया जा सकता है। यदि आप सालाना 10 लाख रुपए खर्च करते हैं, तो वार्षिक फीस भी माफ हो जाती है। इसके अलावा, गज: कार्ड में प्रेरणादायक मेटल डिज़ाइन, जीरो फॉरेन एक्सचेंज चार्ज, आसान 1:1 रिवॉर्ड स्ट्रक्चर और प्रीमियम ट्रैवल व लाइफस्टाइल सुविधाएँ भी शामिल हैं, जो कार्ड की पहले से ही मजबूत पेशकश को और बढ़ाती हैं।

 गज: मानदंड
  1:1 रिवॉर्ड स्टैंडर्ड: 1 रिवॉर्ड पॉइंट = 1 रुपए, फ्लाइट और होटल बुकिंग में सीधे फायदा। सुपर-प्रीमियम कैटेगरी में सबसे आसान और सीधे तरीके से मूल्य वापसी।
  ग्लोबल ट्रैवलर का कोर: 0% फॉरेक्स चार्ज और इंटरनेशनल एटीएम कैश तक निःशुल्क पहुँच। अब विदेशी नोट्स या अलग ट्रैवल कार्ड ले जाने की जरूरत नहीं।
  फुल ट्रैवल प्रोटेक्शन: 50,000 रुपए का ट्रिप कैंसलेशन कवर। यह कार्ड 'ग्लोबल इंडियन' के लिए बनाया गया है, जो बिना किसी समझौते के ट्रैवल अनुभव चाहते हैं।
  हाइपर-एक्सेलेरेटेड रिवॉर्ड्स: आईडीएफसी फर्स्ट ऐप के जरिए होटलों पर 50 गुना और फ्लाइट्स पर 25 गुना रिवॉर्ड्स। इससे कुल मूल्य वापसी 33.33% तक।
   सीमलेस ट्रांजिट: इंटरनेशनल और डोमेस्टिक लाउंज में मुफ्त एंट्री, एक गेस्ट के लिए भी।
  अधिक फीचर्स: पूरी जानकारी के लिए संलग्न बेनिफिट्स टेबल देखें।
   शिरीष भंडारी, हेड- क्रेडिट कार्ड्स, फास्टैग और लॉयल्टी, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, ने कहा , "गज: क्रेडिट कार्ड भारत की विरासत और उसके दिग्गजों के प्रति हमारे गहरे सम्मान को दर्शाता है। कई सुविधाओं और प्रेरक भारतीय डिज़ाइन को शामिल करके हमने इसे हर तरह से परिपूर्ण बनाने का प्रयास किया है। यह कार्ड हमारी अश्व-मयूर-गज: ट्रिलॉजी का सबसे बड़ा हिस्सा है और आधुनिक भारतीयों की समझदारी और ताकत को उजागर करता है।"

डेहरी ऑन सोन की बेटी स्वाति सिंह की काव्य पुस्तक “गूंज” ने साहित्य जगत में बनाई खास पहचान

 

शिक्षिका से कवयित्री तक का सफ़र, जहाँ जीवन के अनुभव बन गए शब्द और भावनाएँ बनीं कविता

बिहार की मिट्टी सदा से साहित्य, संवेदना और सशक्त भावनाओं की जननी रही है। इसी मिट्टी से उपजीं स्वाति सिंह, जो डेहरी ऑन सोन, जिला रोहतास, बिहार की निवासी हैं, आज अपनी काव्य पुस्तक “गूंज: एहसासों की अनकही पुकार” के माध्यम से हिंदी साहित्य में एक संवेदनशील और सशक्त स्वर के रूप में उभरकर सामने आई हैं। “गूंज” उसी साहित्यिक परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है, जहाँ शब्द केवल लिखे नहीं जाते, बल्कि जिए जाते हैं। बिहार की संस्कृति में भावनाओं को गहराई से महसूस करने की परंपरा रही है लोकगीतों की पीड़ा, मैथिली-भोजपुरी की मिठास और जीवन के संघर्षों से उपजी सच्चाई इन सभी का प्रभाव इस काव्य-संग्रह में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

स्वाति सिंह वर्तमान में विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए भी उन्होंने लेखन को केवल शौक नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों को अभिव्यक्त करने का माध्यम बनाया। उनकी शैक्षणिक योग्यता एम.कॉम. और बी.एड. है, जिसने उनके विचारों को गहराई और लेखनी को परिपक्वता प्रदान की।

लेखन की शुरुआत के बारे में बात करें तो स्वाति सिंह का साहित्य से जुड़ाव जीवन के वास्तविक मूल्यों को समझने और उन्हें महसूस करने की प्रक्रिया से ही शुरू हुआ। विद्यार्थियों को पढ़ाते हुए, समाज को नज़दीक से देखते हुए और जीवन के सुख-दुख को आत्मसात करते हुए उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्दों में ढालना शुरू किया। यही अनुभव धीरे-धीरे उनकी कविताओं की आत्मा बन गए। “गूंज” की कविताएँ प्यार, दर्द, यादों, टूटन और उम्मीद के उन रंगों को उकेरती हैं, जो बिहार के आम जीवन से कहीं न कहीं जुड़े प्रतीत होते हैं। यहाँ संवेदनाएँ बनावटी नहीं, बल्कि वास्तविक अनुभवों से उपजी हुई हैं ठीक वैसे ही जैसे बिहार का जीवन, सादा लेकिन बेहद गहरा।

स्वाति सिंह की लेखनी में बिहार की सहजता, संघर्षशीलता और भावनात्मक सच्चाई साफ झलकती है। यह पुस्तक उन पाठकों के लिए है जो शोर में नहीं, खामोशी में भी अर्थ ढूँढते हैं; जो जीवन को केवल देखते नहीं, बल्कि गहराई से महसूस करते हैं। “गूंज: एहसासों की अनकही पुकार” केवल एक काव्य-संग्रह नहीं, बल्कि डेहरी ऑन सोन की मिट्टी से निकली वह आवाज़ है, जो आज हर संवेदनशील दिल में अपनी गूंज छोड़ रही है।

हर रंग में मैं – स्वाति सिंह की कविता

हर रंग में मैं

ज़िंदगी सिर्फ़ सफ़ेद या काली नहीं होती, वो हज़ारों रंगों से बनी एक पेंटिंग है। कुछ रंग चमकदार, कुछ फीके, पर हर रंग का अपना मतलब है। कभी हँसी के रंग चेहरे पर छा जाते हैं, कभी आँसुओं के रंग दिल में गहराई छोड़ जाते हैं। कभी अकेलेपन का रंग डर दिखाता है, कभी दोस्ती का रंग आशा जगाता है। इस सफ़र में रुकना मना है, क्योंकि हर रंग अपने साथ कुछ सिखा कर जाता है। और जो रंग हम खुद चुनते हैं, वो हमारी कहानी बनाते हैं। तो डरो मत किसी काले रंग से, या किसी फीके पन्ने से। हर रंग की अपनी खूबसूरती है, और हर रंग से बनती है… तेरी रंगीन ज़िंदगी।
~ स्वाति सिंह