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राजगढ़ में BJP कार्यकर्ताओं का जश्न: पश्चिम बंगाल,असम और पुडुचेरी जीत पर मनाई खुशी








 


   राजगढ़। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में पार्टी की जीत को लेकर राजगढ़ नगर में जोरदार जश्न मनाया। इस मौके पर कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।

   बस स्टैंड, मेन चौपाटी और पालिका निधि कॉम्प्लेक्स के बाहर भाजपा कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर आतिशबाजी की और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी का इजहार किया। कार्यकर्ताओं ने “भारत माता की जय” और “भाजपा जिंदाबाद” के नारों के साथ जीत का स्वागत किया।

जश्न के दौरान बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह जनता के विश्वास और पार्टी की नीतियों की जीत है।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि आने वाले समय में भाजपा और अधिक मजबूती के साथ जनता की सेवा करेगी। पूरे शहर में जश्न का माहौल देखने को मिला और लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी।

इंदौर में जैन प्रतिष्ठा महोत्सव: CM डॉ. मोहन यादव बोले—अहिंसा और संस्कार ही राष्ट्र की असली ताकत







 


 इंदौर। इंदौर के तिलक नगर स्थित श्री राजेंद्रसूरी आराधना भवन में आयोजित भव्य जैन प्रतिष्ठा महोत्सव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शामिल होकर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री के आगमन से कार्यक्रम का उत्साह और भव्यता कई गुना बढ़ गई।

 यह प्रतिष्ठा महोत्सव गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परंपरा में विराजमान आचार्य श्री हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. (मोहनखेड़ा) आदि ठाणा की मंगल निश्रा में संपन्न हुआ। उनके पावन सान्निध्य और आशीर्वचनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में जैन धर्म के मूल सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, तप, संयम और सेवा—की सराहना करते हुए कहा कि ये मूल्य व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।








 मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि उन्हें अल्प समय में ही आचार्य श्री हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का दूसरी बार आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर वे मोहनखेड़ा तीर्थ में दर्शन कर चुके हैं और अब इंदौर में पुनः उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ है। “मोहनखेड़ा” नाम से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव भी उन्होंने व्यक्त किया।

 उन्होंने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए आयोजक मंडल को बधाई दी। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

 इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मेघराज जैन, मैनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, संस्था अध्यक्ष प्रेमकमल बागरेचा, आयोजन समिति अध्यक्ष संजय मोदी, अनूप कटारिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चोपड़ा द्वारा किया गया।

 कार्यक्रम में प्रदेशभर से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और शाम को भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। जयपुर से आए भजन गायक राजीव विजयवर्गीय और इंदौर के देवेश जैन ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा में सराबोर नजर आया।

 समापन अवसर पर आयोजकों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों का सम्मान किया और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया।

कृषक कल्याण वर्ष 2026: किसानों को वैभव लौटाने का संकल्प








 भोपाल : मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को "कृषक कल्याण वर्ष" के रूप में मिशन मोड में लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस पूरे वर्ष किसानों को उनका वैभव लौटाने का संकल्प लिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना, कृषि लागत को कम करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। इसके लिए 16 विभाग समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। हाल ही में बड़वानी में आयोजित कृषि कैबिनेट में 27,746 करोड़ रुपये के बड़े पैकेज को मंजूरी दी गई है।

कृषक कल्याण वर्ष 2026 के 4 बड़े लक्ष्य

  सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह योजना केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूध, फल, सब्जी और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित होंगे। लागत कम करने के लिए जैविक और प्राकृतिक खेती को प्राथमिकता दी जाएगी और मिट्टी परीक्षण के जरिए संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

 तकनीक और विपणन को मजबूत करने के लिए अंकीय सेवाएं, कृषि प्रसंस्करण, ड्रोन सेवा और किसान उत्पादक संगठनों से किसानों को जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सिंचाई क्षमता विस्तार के तहत 65 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है।

16 विभागों की संयुक्त कार्ययोजना

 कृषि विभाग 3,502.48 करोड़ रुपये की 20 परियोजनाओं पर कार्य करेगा, जिसमें उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती और फसल प्रदर्शन शामिल हैं। मूंग के स्थान पर उड़द उत्पादन पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस मिलेगा और सरसों को भावांतर योजना में शामिल किया जाएगा। रोटावेटर आधी कीमत पर उपलब्ध कराया जाएगा।

 पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग 9,508 करोड़ रुपये की योजनाओं से दूध उत्पादन और संकलन को 25 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखता है। पशुओं के स्वास्थ्य के लिए 610.51 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

उद्यानिकी,मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा

 उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग 4,263.94 करोड़ रुपये की योजनाएं संचालित करेगा। राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन और पौधशालाओं के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता के बीज और पौधे उपलब्ध होंगे। सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के लिए 1,375 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

 मत्स्य विभाग 218.50 करोड़ रुपये की योजनाओं से तीन वर्षों में 3 हजार करोड़ का निवेश और 20 हजार रोजगार सृजन करेगा। एक लाख पिंजरे स्थापित किए जाएंगे और मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना लागू होगी।

सहकारिता,सिंचाई और ग्रामीण विकास

  सहकारिता विभाग 8,186 करोड़ रुपये की योजनाओं से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर 3 लाख रुपये तक फसल ऋण उपलब्ध कराएगा। जल संसाधन विभाग ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई पर 2400 करोड़ रुपये का अनुदान देगा।

 नर्मदा घाटी विकास विभाग की परियोजनाओं से हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 2010 करोड़ रुपये से समूह आधारित कृषि विकास को बढ़ावा देगा।

ऊर्जा,उद्योग और तकनीक में बड़ा विस्तार

 ऊर्जा विभाग अगले तीन वर्षों में 30 लाख किसानों को सौर ऊर्जा पंप देगा। उद्योग विभाग कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करेगा और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

 विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंकीय कृषि मिशन लागू करेगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग बढ़ाया जाएगा। बीज गुणवत्ता सुधार के लिए नई प्रयोगशालाएं स्थापित होंगी।

प्राकृतिक खेती और फसल विविधीकरण पर जोर

 ग्रामीण आजीविका मिशन 1010 करोड़ रुपये से राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को लागू करेगा। यह 15,000 ग्राम पंचायत समूहों और 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगा। बीज प्रमाणीकरण और मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए बोनस और प्रोत्साहन दिया जाएगा।

 फसल विविधीकरण कार्यक्रम के तहत पानी अधिक खपत वाली फसलों की जगह दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को बढ़ावा दिया जाएगा।

किसानों के लिए जागरूकता अभियान

 मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की 60 प्रतिशत आबादी इन योजनाओं से जुड़ी है। किसानों तक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कृषि सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिसके लिए 5 लाख रुपये प्रति क्षेत्र दिए जाएंगे।

सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि समृद्ध किसान ही विकसित भारत 2047 के निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।

राजगढ़ में उमड़ेगा आस्था का सैलाब : 1100 कलशों की भव्य यात्रा के साथ श्रीराम कथा का विराट शुभारंभ कल,संतों का महा-संगम और सामूहिक विवाह का ऐतिहासिक आयोजन








  राजगढ़। धर्मनगरी राजगढ़ एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के रंग में रंगने जा रही है। सोमवार, 4 मई से नगर में भव्य धार्मिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा, जिसमें श्रीराम कथा, संतों का सान्निध्य और सामाजिक समरसता के प्रतीक कई कार्यक्रम शामिल हैं। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट मोयाखेड़ा एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल राजगढ़ द्वारा सर्व समाज के सहयोग से आयोजित इस महाआयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। विशेष बात यह है कि आयोजन के दौरान निःशुल्क सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जो सामाजिक एकता का संदेश देगा।

भव्य कलश यात्रा से होगा शुभारंभ

 आयोजन की शुरुआत सोमवार सुबह 9 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगी। राजगढ़ के ‘पांच धाम एक मुकाम’ श्री माताजी मंदिर से निकलने वाली इस यात्रा में 1100 कलश शामिल होंगे और हजारों श्रद्धालु इसकी शोभा बढ़ाएंगे। बैंड-बाजों और भक्ति गीतों के साथ निकलने वाली यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मार्केटिंग सोसायटी ग्राउंड पहुंचेगी, जहां से आगे के धार्मिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे।

  इस पावन यात्रा में सिंगेश्वर धाम के काशीगिरी जी महाराज के परम शिष्य महंत श्री रामेश्वरगिरिजी महाराज, रामपालकी धाम के सर्वेश्वरदासजी महाराज के परम शिष्य प्रेमदासजी महाराज, श्री महावीर हनुमान गौशाला मोयाखेड़ा के प्रेरणास्रोत ब्रह्मलीन संत श्री रामशंकर दास जी महाराज के शिष्य एवं गौशाला संस्थापक महंत श्री रामप्रकाशदास जी महाराज, मोहनखेड़ा तीर्थ से दादा गुरुदेव राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के उपासक संत श्री जीतचंद्र विजय जी महाराज साहब सहित अनेक संत विशेष रूप से शामिल होंगे।

श्रीराम कथा के लिए तैयार विशाल वातानुकूलित पांडाल

   श्रीराम कथा के आयोजन के लिए मार्केटिंग सोसायटी ग्राउंड पर लगभग 1500 स्क्वेयर फीट का विशाल वातानुकूलित पांडाल तैयार किया गया है। यहां माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम जी भारद्वाज के मुखारविंद से 4 मई से 12 मई तक श्रीराम कथा का वाचन होगा। प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से शाम 4 बजे तक श्रद्धालु कथा का रसपान कर सकेंगे।

  भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए आयोजन समिति ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। कथा श्रवण के दौरान कूलर, ठंडा पानी और मौसम के अनुरूप अल्पाहार की सुविधा उपलब्ध रहेगी। साथ ही प्रतिदिन शाम को भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण करने का अवसर मिलेगा।

संत कमल किशोर नागर की उपस्थिति और विशेष आयोजन

  आयोजन समिति के सदस्य लक्ष्मण डामेचा के अनुसार, इस भव्य धार्मिक आयोजन की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। श्रीराम कथा के दौरान मालवा क्षेत्र के प्रसिद्ध संत कमल किशोर नागर जी एवं उनके पुत्र प्रभुजी नागर भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे, जिससे आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ेगी।

  इसके साथ ही 8 से 12 मई तक प्रतिदिन प्रातः 8:30 से 11:30 बजे तक श्रीराम नाम जप महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन का समापन 13 मई को सर्व समाज के निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन और भव्य नगर चौरासी के साथ होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आमजन भाग लेंगे।

सामाजिक समरसता और भक्ति का संगम

  यह आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता, सेवा और एकता का भी संदेश देता है। विभिन्न संतों की उपस्थिति और सर्व समाज की भागीदारी इसे एक विशाल जनआंदोलन का रूप दे रही है। आयोजन समिति ने क्षेत्र के सभी संतों को आमंत्रित किया है और धर्मप्रेमी जनता से इस आयोजन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।


इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: करोड़पति बने किसान,CM डॉ. मोहन यादव बोले—भाग्योदय का शंखनाद










 भोपाल/इंदौर । मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के नैनोद गांव में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। करीब 2360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाला यह Indore Pithampur Economic Corridor प्रदेश के विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को मजबूत करने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में इकोनॉमिक कॉरिडोर पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिससे इस परियोजना की व्यापकता और भविष्य की दिशा स्पष्ट हुई।

 कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत किया। जमीन का चार गुना मुआवजा मिलने से उत्साहित किसानों ने उन्हें हल भेंट किया और मुकुट पहनाया। इस मौके पर किसानों ने राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण का सहमति पत्र भी सौंपा। इस इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस दे रही है। इस निर्णय के बाद कई किसान करोड़ों रुपये के प्लॉट के मालिक बन गए हैं, जिससे Farmers Benefit MP 2026 के तहत यह मॉडल प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।











किसानों को विकास में भागीदार बनाने का मॉडल

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार कार्य कर रही है और उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश तेजी से प्रगति कर रहे हैं। इसी सोच के साथ किसानों को विकास का भागीदार बनाया जा रहा है।

 उन्होंने कहा कि जब सरकार किसी किसान से जमीन लेती है तो उसका पहला कर्तव्य होता है कि किसान के जीवन-यापन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर में 60 प्रतिशत विकसित भूमि लौटाने का निर्णय इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। वर्तमान स्थिति में किसानों को करीब 650 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट प्राप्त हुए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र बनेगा बड़ा औद्योगिक हब

 यह कॉरिडोर इंदौर और पीथमपुर के बीच विकसित किया जा रहा है, जो पहले से ही Pithampur Industrial Area के रूप में जाना जाता है। इस परियोजना से ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एग्री प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे प्रमुख सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। MP Industrial Development को नई दिशा देने के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

 करीब 20.28 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इसमें 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जाएगी। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 को जोड़ते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम और तेज बनाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलेगा, जिससे MP Economic Corridor News में यह प्रोजेक्ट लगातार प्रमुख बना हुआ है।

विकास के नए द्वार खोलने वाली परियोजना

 मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम जैसे क्षेत्र मिलकर एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह 8 लेन सुपर एक्सप्रेस वे भविष्य में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे Industrial Corridor India नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और उद्योगों को एक साथ गति मिलेगी।

किसानों के हित में सरकार की प्राथमिकता

 मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले किसानों को पर्याप्त बिजली और सिंचाई सुविधा नहीं मिलती थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस वर्ष 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य लेकर चल रही है और किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। साथ ही तीसरी फसल के रूप में उड़द लगाने पर 600 रुपये बोनस देने की भी घोषणा की गई है।

रोजगार, निवेश और उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

 इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। औद्योगिक इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना MP Govt Projects के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

देश की सर्वश्रेष्ठ योजना बनने की ओर

 कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि यह पहली योजना है, जिसमें किसान स्वयं अपनी जमीन देने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जीडीपी बढ़ाने वाला ग्रोथ सेंटर साबित होगी और लाखों युवाओं को रोजगार प्रदान करेगी। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी इसे विकास, प्रगति और विश्वास का प्रतीक बताया।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं और भविष्य की दिशा

 इस परियोजना के अंतर्गत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है। करीब 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास किया जाएगा, जिसकी कुल लागत 2360 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और दोनों ओर विकसित बफर जोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विस्तार योग्य बनाएंगे। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और 52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करेगा और औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम बनाएगा।

 इस पूरी परियोजना को मध्यप्रदेश के संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश को औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

राजगढ़ में भव्य श्रीराम कथा और निःशुल्क सामूहिक विवाह महोत्सव 2026: 4 मई से शुरुआत,जानिए पूरा कार्यक्रम





 





  मध्य प्रदेश के धार जिले की धर्ममयी नगरी राजगढ़ में एक बार फिर भक्ति और सामाजिक समरसता का अदभूत संगम देखने को मिलेगा। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट मोयाखाई और संत रविदास ट्रस्ट मंडल,राजगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में भव्य श्रीराम कथा एवं सर्व समाज निःशुल्क सामूहिक विवाह महोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा का भी बड़ा संदेश देता है।

4 मई को निकलेगी भव्य कलश यात्रा

  महोत्सव की शुरुआत 4 मई 2026, सोमवार को विशाल कलश यात्रा के साथ होगी। यह यात्रा सुबह 9 बजे माताजी मंदिर बावड़ी, राजगढ़ से संतों के सानिध्य में प्रारंभ होगी। धर्म ध्वज के साथ निकाली जाने वाली यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर कथा स्थल सोसाइटी ग्राउंड तक पहुंचेगी। इस कलश यात्रा में माता, बहनों और बालिकाओं की विशेष भागीदारी रहेगी। आयोजन समिति द्वारा कलश धारण करने वाली महिलाओं और बालिकाओं के लिए उपहार की व्यवस्था भी की गई है। सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे सुबह 8:30 बजे तक माताजी मंदिर पहुंचकर इस धार्मिक आयोजन की शोभा बढ़ाएं।

श्रीराम कथा का आयोजन

  4 से 12  तक प्रतिदिन दोपहर 12:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। कथा वाचन परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम जी भारद्वाज द्वारा किया जाएगा। उनके प्रवचन सरल, प्रेरणादायक और जीवन मूल्यों से परिपूर्ण होते हैं, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक रूप से जोड़ते हैं।

प्रभु श्रीराम नाम जाप महायज्ञ

   8 मई से 12 मई 2026 तक प्रतिदिन सुबह 8:30 बजे से 11:30 बजे तक प्रभु श्रीराम नाम जाप महायज्ञ का आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर सामूहिक जाप के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करेंगे।

निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन 2026

  महोत्सव का प्रमुख आकर्षण 13 मई 2026, बुधवार को आयोजित होने वाला सर्व समाज निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन रहेगा। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस आयोजन में जरूरतमंद परिवारों के जोड़ों का विवाह समाज के सहयोग से संपन्न कराया जाएगा, जिससे सामाजिक समरसता और सहयोग की भावना को बल मिलेगा।

आयोजन स्थल और व्यवस्थाएं

  पूरे महोत्सव का आयोजन सोसाइटी ग्राउंड, राजगढ़ (धार), मध्य प्रदेश में किया जाएगा। आयोजन की सभी व्यवस्थाएं श्री महावीर हनुमान गौशाला एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के साथ-साथ सर्व समाज के सहयोग से की जा रही हैं।

आयोजन समिति की अपील

  आयोजन समिति ने सभी धर्म प्रेमी नागरिकों से अपील की है कि वे इस महोत्सव को अपना महोत्सव मानते हुए अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों। विशेष रूप से माता, बहनों और बालिकाओं से आग्रह किया गया है कि वे कलश यात्रा में भाग लेकर सनातन संस्कृति की इस परंपरा को आगे बढ़ाएं।

   साथ ही,लोगों से यह भी निवेदन किया गया है कि वे इस आयोजन की जानकारी अपने मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं, ताकि यह आयोजन ऐतिहासिक और सफल बन सके।

   राजगढ़ में आयोजित होने वाला यह भव्य श्रीराम कथा और सामूहिक विवाह महोत्सव 2026 न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बनेगा, बल्कि समाज में एकता, सेवा और संस्कारों का संदेश भी देगा। यह आयोजन निश्चित रूप से पूरे क्षेत्र के लिए एक यादगार और प्रेरणादायक महोत्सव साबित होगा।



#RajgarhNews #RamKatha2026 #SamuhikVivah

जल संरक्षण में MP देश में नंबर 1,CM मोहन यादव का गंगा दशहरा पर बड़ा आह्वान

madhya pradesh water conservation campaign cm mohan yadav speech






 

मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में अव्वल: सीएम डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसे प्रदेशवासियों की जागरूकता और जनभागीदारी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पानी बचाना सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी है।

गंगा दशहरा पर जल स्रोतों की सफाई का आह्वान

मुख्यमंत्री ने 25 मई को आने वाले Ganga Dussehra के अवसर पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि इस दिन नदी, तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोतों की सफाई, श्रमदान और पौधरोपण जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में जल स्रोतों की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना जाता है और इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभाना चाहिए।

जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल ही जीवन है” और इसके संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।

जनभागीदारी से बना राष्ट्रीय रिकॉर्ड

राज्य में जनसहभागिता आधारित जल संचय अभियान के तहत अब तक:

  • 5.64 लाख से अधिक कार्य पूरे

  • 2.43 लाख से अधिक कार्यों को स्वीकृति

  • 45,000+ खेत तालाब निर्माण

  • 77,000+ डगवेल रिचार्ज कार्य

  • 3000+ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग यूनिट स्थापित

जिला स्तर पर डिंडोरी और खंडवा ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है।

गांव से शहर तक चल रहा अभियान

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। पंचायतों से लेकर नगर निकाय तक तालाबों, कुओं और बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनकी साफ-सफाई का अभियान जारी है।

साथ ही स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हर व्यक्ति की जिम्मेदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण सिर्फ सरकार का काम नहीं है। परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर भी पानी बचाने के प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पंचायतों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापारिक समूहों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।

मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल अब देश के लिए उदाहरण बनता जा रहा है। यदि जनसामान्य इसी तरह सक्रिय भागीदारी निभाता रहा, तो प्रदेश आने वाले समय में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो सकता है।