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युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह : श्रमण डॉ पुष्पेंद्र




 


  आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के अनेक क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष, आतंकवाद, सामरिक प्रतिस्पर्धा और आंतरिक कलह यह संकेत देते हैं कि भौतिक प्रगति के बावजूद मनुष्य अभी भी मानसिक और नैतिक रूप से अस्थिर है।
   ऐसे समय में जब राष्ट्र अपनी शक्ति का प्रदर्शन हथियारों और युद्ध के माध्यम से कर रहे हैं, मानव जीवन का मूल्य कहीं पीछे छूटता जा रहा है। युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज, परिवार और व्यक्ति के मनोविज्ञान को भी प्रभावित करता है। हिंसा का यह वातावरण भय, असुरक्षा और अविश्वास को जन्म देता है, जिससे शांति और सह-अस्तित्व की संभावनाएं क्षीण हो जाती हैं।
   वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह स्पष्ट दिखाई देता है कि हिंसा कभी भी स्थायी समाधान नहीं दे सकती। युद्ध भले ही किसी समस्या का तात्कालिक समाधान प्रतीत हो, लेकिन वह दीर्घकाल में और अधिक संघर्षों को जन्म देता है। आज आवश्यकता है एक ऐसे दृष्टिकोण की, जो केवल शक्ति और प्रभुत्व पर नहीं, बल्कि संवेदना, सह-अस्तित्व और नैतिकता पर आधारित हो।
   यहीं पर तीर्थंकर भगवान महावीर के अहिंसा के सिद्धांत की प्रासंगिकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। भगवान महावीर ने अहिंसा को केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे विचार, वचन और कर्म—तीनों स्तरों पर लागू किया। उनके अनुसार किसी भी प्राणी को पीड़ा पहुंचाना हिंसा है, चाहे वह प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष।
   प्रभु महावीर का अहिंसा का सिद्धांत आज के युद्धग्रस्त विश्व के लिए एक नैतिक दिशा प्रदान करता है। यदि हम उनके विचारों को गहराई से समझें, तो यह स्पष्ट होता है कि युद्ध की जड़ें बाहरी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर उत्पन्न होने वाले राग, द्वेष, अहंकार और लालच में निहित हैं। जब तक इन मानसिक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण नहीं किया जाएगा, तब तक बाहरी शांति स्थापित नहीं हो सकती।
   आज के समय में हिंसा केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। यह हमारे दैनिक जीवन में भी विभिन्न रूपों में उपस्थित है—विचारों की कट्टरता, शब्दों की कठोरता, सामाजिक विभाजन और डिजिटल माध्यमों पर फैलती नफरत के रूप में। महावीर का संदेश हमें यह सिखाता है कि वास्तविक अहिंसा का पालन तभी संभव है, जब हम अपने भीतर की नकारात्मकता को पहचानकर उसे नियंत्रित करें।
विशेष रूप से वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में, जहां राष्ट्रों के बीच अविश्वास और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है, ऐसे वक्त पर तीर्थंकर महावीर का “जियो और जीने दो” का सिद्धांत अत्यंत प्रासंगिक है। यह सिद्धांत केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक नीतियों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है। यदि राष्ट्र एक-दूसरे के अस्तित्व, संप्रभुता और हितों का सम्मान करें, तो संघर्ष की संभावनाएं स्वतः कम हो सकती हैं।
  इसके साथ ही,महावीर का अपरिग्रह का सिद्धांत भी वर्तमान युद्ध और हिंसा के मूल कारणों को समझने में सहायक है। संसाधनों की अंधाधुंध होड़, विस्तारवादी नीतियां और आर्थिक लालसा ही कई संघर्षों का आधार हैं। यदि सीमित इच्छाओं और संतुलित उपभोग को अपनाया जाए, तो न केवल सामाजिक असमानताएं कम होंगी, बल्कि युद्ध के कारण भी कमजोर पड़ेंगे।
महावीर द्वारा प्रतिपादित रत्नत्रय—सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र—आज के समय में एक समग्र समाधान प्रस्तुत करता है। सम्यक दर्शन हमें पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर वस्तुस्थिति को समझने की प्रेरणा देता है। सम्यक ज्ञान हमें सत्य और असत्य में भेद करने की क्षमता प्रदान करता है, जिससे हम गलत सूचनाओं और भ्रामक विचारों से बच सकते हैं। और सम्यक चरित्र इन दोनों का व्यावहारिक रूप है, जो हमारे आचरण को नैतिक और संतुलित बनाता है।
  अतः यह स्पष्ट है कि वर्तमान समय में जब विश्व हिंसा और युद्ध की आग में झुलस रहा है, भगवान महावीर का अहिंसा का सिद्धांत केवल एक आध्यात्मिक आदर्श नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक आवश्यकता बन चुका है। यदि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र इस सिद्धांत को अपने जीवन और नीतियों में स्थान दें, तो न केवल संघर्षों को कम किया जा सकता है, बल्कि एक स्थायी और समरस विश्व की स्थापना भी संभव है।
  अंततः, शांति किसी बाहरी व्यवस्था का परिणाम नहीं, बल्कि आंतरिक चेतना का प्रतिबिंब है। जब मनुष्य अपने भीतर अहिंसा, करुणा और संतुलन को विकसित करेगा, तभी वह बाहरी दुनिया में भी शांति स्थापित कर सकेगा। यही तीर्थंकर महावीर का संदेश है—और यही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता। 

स्व.राजा सेठ की स्मृति में सुपुत्रों ने भेंट किया वाटर कूलर





 



 राजगढ़/धार। नगर के सरल स्वभावी और अद्भुत व्यक्तित्व के धनी स्वर्गीय राजेश जैन (राजा सेठ) की पावन पुण्य स्मृति में उनके सुपुत्रों,लाभांश जैन एवं दीपांश जैन द्वारा जनसेवा की मिसाल पेश की गई है। जैन परिवार की ओर से राजगढ़ नगर एवं वार्ड क्रमांक 08 की जनता की सुविधा हेतु शीतल जल के लिए एक वाटर कूलर सप्रेम भेंट किया गया है।
  इस पुनीत कार्य पर वार्ड क्रमांक 08 के भाजपा पार्षद नितिन जैन (चिंटू चौहान) एवं स्थानीय नागरिकों ने लाभांश और दीपांश जैन का आभार व्यक्त किया है। पार्षद चिंटू चौहान ने कहा कि स्वर्गीय राजा सेठ हमेशा सर्वधर्म सहयोग के लिए तत्पर रहते थे और उनके सुपुत्र भी उसी सेवाभावी परंपरा को आगे बढ़ाकर परिवार का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं। वार्डवासियों ने इस सेवा कार्य हेतु जैन परिवार को धन्यवाद ज्ञापित किया है।

हाइसेंस ने भारत में लॉन्च किए नई पीढ़ी के इन्वर्टर और स्मार्ट कनेक्टिविटी वाले एयर कंडीशनर


नोएडा, उत्तर प्रदेश, भारत

वैश्विक उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज कंपनी हाइसेंस ने भारत में अपने प्रीमियम रूम एयर कंडीशनर पोर्टफोलियो का विस्तार करते हुए इंटेली कूल प्रो सीरीज एयर कंडीशनर्स लॉन्च किए हैं। यह नई प्रो रेंज तेज इन्वर्टर परफॉर्मेंस, स्मार्ट कूलिंग और बिल्ट-इन वाई-फाई वॉइस कंट्रोल जैसी उन्नत सुविधाओं के साथ आती है। हाइसेंस की नौ पीढ़ियों की इन्वर्टर तकनीक पर आधारित यह सिस्टम सटीक तापमान नियंत्रण, कम पावर फ्लक्चुएशन और लंबे समय तक भरोसेमंद प्रदर्शन सुनिश्चित करता है।


इंटेली कूल प्रो सीरीज के केंद्र में क्यूएसडी रैपिड इन्वर्टर टेक्नोलॉजी दी गई है, जो कंप्रेसर को तेज़ी से कूलिंग शुरू करने में सक्षम बनाती है। इससे एसी चालू होते ही कमरे का तापमान तेजी से कम होता है, तुरंत आराम मिलता है और प्रदर्शन बेहतर रहता है। इसमें मौजूद एआई स्मार्ट मोड  कमरे की परिस्थितियों और उपयोगकर्ता की पसंद के अनुसार कूलिंग आउटपुट को स्वतः समायोजित करता है, जिससे लगातार आराम के साथ ऊर्जा की खपत भी कम होती है। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन की गई इंटेली कूल प्रो सीरीज़ में 4-इन-1 हेल्दी फिल्टर दिया गया है, जो सूक्ष्म कणों (फाइन पार्टिकुलेट मैटर) को पकड़ने में मदद करता है और घर के अंदर की हवा को अधिक स्वच्छ और स्वास्थ्यकर बनाता है। इसमें सेल्फ क्लीन फ़ंक्शन भी मौजूद है, जो यूनिट के अंदर बेहतर स्वच्छता सुनिश्चित करता है और परिवारों के लिए बेहतर एयर क्वालिटी बनाए रखने में मदद करता है, जो विशेष रूप से शहरी वातावरण में बेहद महत्वपूर्ण है।
 

प्रो रेंज की एक खासियत यह भी है कि इसमें हाइसेंस कनेक्ट लाइफ के जरिए बिल्ट-इन वाई-फाई कनेक्टिविटी मिलती है, जिससे उपयोगकर्ता अपने स्मार्ट डिवाइस से कहीं से भी एसी को कंट्रोल और मॉनिटर कर सकते हैं। इसमें हिंदी और अंग्रेज़ी में वॉइस कंट्रोल सपोर्ट, पर्सनलाइज्ड शेड्यूलिंग और तापमान कस्टमाइजेशन जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं, जिससे इसे दूर से आसानी से ऑपरेट किया जा सकता है।
 

इंटेली कूल प्रो सीरीज में R32 रेफ्रिजरेंट का उपयोग किया गया है, जिसका ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल (GWP) R410A की तुलना में लगभग 65% कम है। इससे यह एयर कंडीशनर पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल होने के साथ-साथ बेहतर और ऊर्जा-कुशल प्रदर्शन भी प्रदान करता है। इस फीचर के साथ हाइसेंस ने वैश्विक पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप सतत नवाचार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
 

यह प्रो रेंज विभिन्न आकार के कमरों के लिए शक्तिशाली और समान एयरफ्लो प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है।
 

मुख्य परफॉर्मेंस फीचर्स में शामिल हैं:

क्विक चिल टेक्नोलॉजी के साथ 3D कूल एयर फ्लो डिज़ाइन

समान हवा वितरण के लिए 4-वे ऑटो स्विंग

बड़े कमरों के लिए लॉन्ग डिस्टेंस एयरफ्लो

रात में आराम के लिए मल्टीपल स्लीप मोड्स

शांत संचालन के लिए सुपर-क्वाइट ऑपरेशन और क्वाइट मोड

आसान रखरखाव के लिए सेल्फ क्लीन और सेल्फ डायग्नोज़ फंक्शन

100% इन-ग्रूव्ड कॉपर के साथ एंटी-कोरोशन ट्रीटमेंट

स्टेबलाइज़र-फ्री ऑपरेशन

 लॉन्च के अवसर पर हाइसेंस इंडिया के सीईओ पंकज राणा ने कहा, “हाइसेंस में हमारा मानना है कि आज एयर कंडीशनिंग केवल सामान्य कूलिंग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उपभोक्ता अब बुद्धिमान प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता और अधिक स्वास्थ्यकर रहने के वातावरण की तलाश में हैं। इंटेली कूल प्रो सीरीज़ भारतीय घरों के लिए वैश्विक स्तर पर सिद्ध इन्वर्टर विशेषज्ञता, एआई-आधारित अनुकूलन क्षमता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार तकनीक लाने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। क्यूएसडी रैपिड इन्वर्टर टेक्नोलॉजी, R32 रेफ्रिजरेंट, स्मार्ट वाई-फाई कनेक्टिविटी और 4-इन-1 फिल्ट्रेशन के साथ हम एक ऐसा समाधान पेश कर रहे हैं जो अधिक तेज़, स्मार्ट, पर्यावरण-अनुकूल है और आधुनिक भारत की बदलती जीवनशैली की जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है।”
 
नई लॉन्च की गई इंटेली कूल प्रो सीरीज़ के साथ-साथ, हाइसेंस भारत में इंटेली कूल सीरीज़ और इको कूल सीरीज़ भी पेश कर रहा है, जो अब देशभर में उपलब्ध हैं।
 

कीमत और उपलब्धता

इंटेली पर्ला प्रो सीरीज फिलहाल 3-स्टार 1.5 टन वेरिएंट में उपलब्ध है। इसे प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट के साथ-साथ रिलायंस, सत्या, नंदीलथ, ग्रेट ईस्टर्न, पात्रा इलेक्ट्रॉनिक्स और देशभर के अधिकृत डीलरों के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
 
प्रारंभिक कीमत: Rs. 28,990, 5 साल की व्यापक वारंटी के साथ।

केंद्रीय राज्यमंत्री सावित्री ठाकुर ने मोहनखेड़ा महातीर्थ में किए गुरु दर्शन,मुनिराज पीयूषचन्द्र विजयजी से लिया आशीर्वाद






 




 राजगढ़ (धार)। केंद्रीय राज्यमंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद श्रीमती सावित्री ठाकुर ने प्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा महातीर्थ पहुंचकर भगवान आदिनाथ के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने जैन श्वेतांबर समाज के महान संत और 'अभिधान राजेंद्र कोष' के रचयिता श्रीमद विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहेब की समाधि स्थल पर मत्था टेककर वंदन किया। इस अवसर पर श्री आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेतांबर पेढ़ी ट्रस्ट मंडल द्वारा केंद्रीय मंत्री का भव्य बहुमान किया गया।

    श्रीमती ठाकुर ने मोहनखेड़ा महातीर्थ के विकास प्रेरक आचार्य प्रवर श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य और राजगढ़ नंदन मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी महाराज साहेब से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुनि श्री वर्तमान में सप्तम वर्षीतप की कठिन साधना में लीन हैं। भेंट के दौरान मुनि श्री ने केंद्रीय मंत्री को आगामी धार्मिक कार्यक्रमों की जानकारी दी और धर्म चर्चा की।

 इस गरिमामयी अवसर पर मैनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ,अशोक भंडारी,राकेश राजावत, अजय राजावत,नवीन बानिया और अक्षय भंडारी सहित बड़ी संख्या में गुरुभक्त और समाजजन उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय मंच पर अलीगढ़ का गौरव: गीतकार डॉ. अवनीश राही को मिलेगा "अटल बिहारी वाजपेयी कवि रत्न सम्मान–2026 "





 

23 मार्च 26 दिल्ली/अलीगढ़ हिंदी साहित्य और गीत-सृजन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुके अलीगढ़ के प्रख्यात गीतकार डॉ. अवनीश राही को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “अटल बिहारी वाजपेयी कवि रत्न सम्मान” प्रदान किया जाएगा।

यह सम्मान आगामी 2 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी राष्ट्रीय समारोह में प्रदान किया जाएगा, जिसका आयोजन इंडिया ए आई न्यूज समूह द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री श्री रामदास अठावले तथा केंद्रीय राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे के करकमलों द्वारा डॉ. राही को सम्मानित किया जाएगा।



इंडिया ए आई न्यूज समूह के चेयरमैन श्री विनय सिंह द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, इस सम्मान समारोह में देशभर से साहित्यकार, शिक्षाविद, समाजसेवी एवं उद्यमी भी शिरकत करेंगे।

डॉ. अवनीश राही पिछले चार दशकों से हिंदी साहित्य, गीत-लेखन और सामाजिक चेतना से जुड़े सृजन के माध्यम से अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। उनके लेखन में समाज के वंचित वर्ग, मानवीय संवेदनाएँ और समकालीन यथार्थ की प्रभावी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व भी डॉ. राही को विद्या-वाचस्पति (मानद डॉक्टरेट), दिल्ली विधानसभा में “भारत विभूषण” सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

उनकी रचनाएँ साहित्यिक मंचों से लेकर राष्ट्रीय आयोजनों तक व्यापक रूप से सराही गई हैं और वे साहित्य को सामाजिक जागरूकता एवं परिवर्तन का सशक्त माध्यम मानते हैं।

यह सम्मान उनके निरंतर सृजन, साहित्यिक प्रतिबद्धता और समाज के प्रति उनकी संवेदनशील दृष्टि का एक और राष्ट्रीय स्वीकार है।

इस उपलब्धि से अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत में हर्ष की लहर है। विभिन्न साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों एवं शुभचिंतकों द्वारा उन्हें अग्रिम बधाइयाँ दी जा रही हैं।

श्रीराम और तीर्थंकर महावीर के बीच वंश परंपरा का मधुर संबंध - श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ।





 

 




  चैत्र महीने का सीधा संबंध महापुरुषों के जन्मों के साथ जुड़ा हुआ है। चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जन्मोत्सव आता है तो जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक (जन्म जयंती) भी चैत्र महीने में ही शुक्ल की त्रयोदशी को मनाया जाता है।
  
   इन दो महान व्यक्तित्वों का जन्म चैत्र माह में ही सिर्फ 4 तिथियों के अंतर पर हुआ। हालांकि दोनों के जन्म में हजारों वर्षों का अंतर है। फिर भी दोनों के बीच एक मधुर, गहरा और अद्भुत संबंध है।

  भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर हैं। इस महान परंपरा की तीर्थंकर परंपरा के प्रथमेश असि, मसि कृषि व अंक शब्दों के जनक प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) से हुआ, जो कि पहले तीर्थंकर थे। भगवान आदिनाथ अयोध्या के राजा नाभि के पुत्र के रूप में जन्मे। यानी अयोध्या न केवल श्रीराम की जन्मभूमि रही है, बल्कि जैन परंपरा में भी अत्यंत पवित्र स्थान है, क्योंकि यहां चार अन्य तीर्थंकरों का जन्म भी हुआ अजितनाथ (दूसरे), अभिनंदननाथ (चौथे), सुमतिनाथ (पांचवें) और अनंतनाथ (14वें)।

  संयोग से,भगवान आदिनाथ का जन्म भी चैत्र मास में ही हुआ था। हालांकि वह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। उन्होंने सूर्यवंश की इक्ष्वाकु परंपरा की स्थापना की, वही वंश जिसमें कई पीढ़ियों बाद भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। इस सदी के चौबीस तीर्थंकरो में से तीन तीर्थंकरों, वासु पूज्य स्वामी, मुनि सुव्रतनाथ व नेमिनाथ तीर्थंकर को छोड़कर बाक़ी इक्कीस तीर्थंकर इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न हुए। इस प्रकार, भगवान महावीर की जैन परंपरा और भगवान श्रीराम की वंशावली दोनों की जड़ें भगवान आदिनाथ से जुड़ती हैं।
   त्रिशष्टिशलाका पुरुषचरियं, पउम चरियं, पद्मपुराण साहित्यक ग्रंथों में मर्यादा पुरुषोत्तम राम का उल्लेख सम्मिलित है। चौथे आरे के बीसवें तीर्थंकर मुनि सुव्रत स्वामी के समय में श्रीराम का उल्लेख मिलता है। जैन साहित्य अनुसार श्रीराम को बलदेव माना गया है जो कि 63श्लाघ्य पुरुष में आते हैं, तो एक दार्शनिक परंपरा है, दूसरी जैविक। यह संबंध केवल भूगोल, वंश और नामों तक सीमित नहीं है। यह गहराई तक विचार और मूल्य व्यवस्था में रचा-बसा है। चाहे तीर्थंकर हों या श्रीराम, सभी ने धर्म की भावना को जीवन का मूल बनाया। इक्ष्वाकु वंश का नाम ही 'इक्षु' अर्थात गन्ने से लिया गया है। सरयू नदी के तट पर बसे अयोध्यावासी गन्ने की खेती करते थे थे और उसका रस निकालना जानते थे। यह बात तब और स्पष्ट हो जाती है जब हम पाते हैं कि भगवान ऋषभदेव ने अपने पौत्र श्रेयांस कुमार के हाथों हस्तिनापुर शहर में अपने 400 दिवसीय उपवास को अक्षय तृतीया के दिन गन्ने के रस को स्वीकर कर उस कठिन तपस्या का पारणा संपन्न किया।

   विस्तृत गहराई से अगर अध्ययन किया जाए तो दोनों महापुरुषों ने सत्य, धर्म व सात्विक जीवन शैली तथा पर पीड़ा नहीं पहुँचाने का प्रयास ही नहीं किया अपितु जनमानस को संदेश भी दिया।
  अनेक प्रकार से देखा और समझा जा सकता है कि मूलतः धर्म की आत्मा हमें यह सिखाती है कि मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा है। चाहे वो तीर्थंकर हों या मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम। धर्म वह स्वभाव है जो हर मानव के भीतर प्राकृतिक रूप से निहित है।

  तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर ने वर्तमान समय में व्यथित व कुंठित जनमानस को संदेश देते हुए कहा कि सर्व प्रथम मन पर नियंत्रण बनाना होगा। मन हमेशा दुख देता है। मन की इच्छाएँ अनंत हैं, वह कभी भी पूर्ण नहीं होता है। अगर एक इच्छा पूरी होगी तो उसके साथ सौ नई इच्छाएँ शुरू हो जाएँगी। ऐसे में सभी इच्छाएँ पूरी होंगी, इसकी कल्पना भी संभव नहीं है। जैसे ही इच्छा अपूर्ण हुई, मन विचलित होगा और दुख देगा। यही दुख और दूसरी इच्छाओं के अपूर्ण होने पर बढ़ता जाएगा। एक समय यह आएगा कि अनंत इच्छाओं की अपूर्णता लिए मन दुखों का अंबार उडेल देगा और पूरा जीवन दुखों के भंवर में उलझ जाएगा। बेहतर यही है कि मन पर नियंत्रण बनाओ और उसके साथ जीवन की इच्छाओं पर भी। अगर हम यह करने में सफल रहे तो गृहस्थ में रहकर भी मुक्ति का मार्ग पकड़ लेंगे। हम अनंत इच्छाओं के समुद्र में रहकर भी शांत और सुखी रहेंगे। सुख कोई वस्तु नहीं है, यह केवल मन की अवस्था है। दुख कोई वस्तु नहीं है, यह भी अवस्था है। अगर मन पर नियंत्रण होगा तो सुख और दुख की अवस्था पर भी नियंत्रण होगा। अगर मन नियंत्रित होगा तो इच्छाओं पर नियंत्रण होगा और जब इच्छाएँ नियंत्रण में आ जाएँगी, जीवन प्रसन्नता से भर जाएगा और जीव आनंद की अनुभूति करेगा। जीवन में मुक्ति क्या है... आनंद ही तो है। जब आनंद की अवस्था मिल गई तो समझ लो जीवन से मुक्ति मिल गई। उस अवस्था को पाने का प्रयास ही मुक्ति का मार्ग है।
  यही मुक्ति का मार्ग तीर्थंकर वर्द्धमान ने व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने स्वीकार किया तभी वर्षों उपंरात भी उनके कथन सदैव जीवन में नया संदेश देते है।

राजगढ़ में मुनि श्री पीयूषचन्द्र विजयजी का भव्य मंगल प्रवेश: गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं,अहिंसा ही धर्म का सच्चा मार्ग







 




  राजगढ़ (धार)। मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्य प्रवर श्रीमद्विजय ऋषभचन्द सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, राजगढ़ नंदन और सप्तम वर्षीतप के तपस्वी मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी महाराज साहेब का राजगढ़ नगर में अत्यंत भव्य और मंगलमय प्रवेश संपन्न हुआ। मुनि श्री की अगवानी प्रातः काल हेमकमल धाम मंदिर (पुराना बस स्टैंड) से की गई, जहाँ समाज के प्रबुद्धजनों अशोक भंडारी, संदीप खजांची, राजेंद्र बाफना, संजय पुराणी, सुनील चत्तर, राजेश फरबदा, नीलेश पुराणी, दिलीप मेहता, सुनील फरबदा, सुरेश मालवी, सुनील छजलानी, पप्पू गादिया ,महेंद्र मोदी और राजेंद्र भंडारी, शैलेष जैन,नीलेश सराफ,संदीप जैन पारस गादिया आदि ने उपस्थित होकर मुनि श्री का आत्मीय स्वागत और वंदन किया।
    
  नगर प्रवेश के पश्चात राजेंद्र भवन में मुनि श्री की महिला मंडल ने आगवानी कर गहुली की जिसके पश्चात धर्मसभा जिसमें मुनि श्री पीयूषचन्द्र विजयजी ने सारगर्भित उद्बोधन देते हुए कहा कि जीवन में संत और गुरु का होना अनिवार्य है क्योंकि गुरु ही हमें सही बोध कराते हैं। उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज लोग सांप से तो डरते हैं, लेकिन पाप करने से नहीं डरते, जबकि पाप का भय ही मनुष्य को सन्मार्ग पर रखता है। जैन धर्म की मूल भावना अहिंसा और शांति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने संवाद के महत्व को समझाया और कहा कि जीवन में संवाद आवश्यक है, अन्यथा विवादों में वृद्धि होती है। इस पावन अवसर पर मुनि श्री के वर्षीतप के उपलक्ष्य में राजेंद्र भवन में चौबीसी का भव्य आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्म लाभ लिया। मुनि श्री पीयूष चंद्र विजयजी मसा का बुधवार को मोहनखेड़ा तीर्थ सुबह विहार करेंगे ।