BREAKING NEWS
latest



 

News
News

राज्य

राज्य/block-5

आपके शहर की खबर

आपके शहर की खबर/block-3

राजनीति

राजनीति/block-6

मनोरंजन

मनोरंजन/block-6

धर्म

धर्म/block-3

"खेल"

खेल/block-3

"लेख"

लेख/block-3

ख़बरें जरा हटके

ख़बरें जरा हटके/block-10

स्टोरी

स्टोरी/block-7

आपकी बायोग्राफी

आपकी बायोग्राफी/block-11

बिज़नेस

बिज़नेस/block-10

Latest Articles

 

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की तर्ज पर भारत के पहले एआई फेस्ट की मेजबानी

चंडीगढ़, भारत
  • इंडिया एआई मिशन को मजबूती देने के लिए सीयू एआई मिशन लॉन्च करने वाली देश की पहली यूनिवर्सिटी बनी चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी
  • ‘एआई आपकी नौकरियां नहीं लेगा, इसे कोई ऐसा इंसान लेगा जो एआई का इस्तेमाल आपसे बेहतर कर सकेगा: वेबवेदा के फाउंडर और सोशल इन्फ्लुएंसर अंकूर वारिकू
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने इंडिया एआई एम्पैक्ट समिट 2026 की तर्ज पर भारत के पहले तीन दिवसीय एआई फैस्ट-2026 की शुरुआत की। यह एआई फैस्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को न इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप और इनक्लूसिव नेशनल डेवलपमेंट के प्रमुख आधार के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जो भारत को इस क्षेत्र में मजबूत बनाएगा। इस फैस्ट का मुख्य मकसद युवा इनोवेटर्स, एआई स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को मजबूत करना, बोल्ड और स्केलेबल आइडियाज को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सॉल्यूशन में बदलकर विकसित भारत का विजन को साकार करना है।

एमपी सतनाम सिंह संधू, एडुटेक एंटरप्रेन्योर रोनी स्क्रूवाला और सोशल इन्फ्लुएंसर अंकुर वारिकू के साथ चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में भारत के पहले एआई फेस्ट का उद्घाटन करते हुए

इस बड़ी पहल ने ग्लोबल एंटरप्रेन्योर्स, पॉलिसीमेकर्स, एआई लीडर्स, कॉर्पोरेट्स, एकेडेमिया, रिसर्चर्स, स्टार्टअप्स और स्टूडेंट इनोवेटर्स को टेक्नोलॉजी, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेटिव आइडियाज के एक पावरफुल मेल में एक साथ लाया। चर्चाओं में चार बड़े थीम शामिल थे। इसमें इवॉल्विंग एआई विद इवॉल्विंग ह्यूमन्स, एआई इंजीनियर्ड रियलिटी, एआई पॉलिसी गवर्नेंस एंड स्ट्रक्चरिंग, और टेक्निकल फ्रंटियर्स, जो एआई-ड्रिवन इनोवेशन और इनक्लूसिव इकोनॉमिक ग्रोथ को एक्सप्लोर करने के लिए एक डायनामिक प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं।
 
फैस्ट की शुरुआत वेबवेदा, इंडियाजिनियसचैलेंज के फाउंडर अंकुर वारिकू और अपग्रैड के चेयरपर्सन और एजुकेशन-टेक पायनियर रोनी स्क्रूवाला के साथ-साथ एमपी और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू और जाने-माने ग्लोबल एआई लीडर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स की मौजूदगी में हुई।
 
इंडिया एआई मिशन के साथ मिलकर चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी देश की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है, जिसने सीयू एआई मिशन लॉन्च किया है। यह एक बड़ा इंस्टीट्यूशनल रोडमैप है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कें रिसर्च और डेवलपमेंट को आगे बढ़ाने, एआई पर आधारित एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और सभी एकेडमिक डिसिप्लिन में एआई लिटरेसी देने पर फोकस करता है। इस मिशन का मकसद 1.5 लाख युवाओं को ट्रेनिंग देकर उन में एआई नॉलेज को बढ़ाना है, जिससे इंडिया का डेमोग्राफिक डिविडेंड एक ग्लोबली कॉम्पिटिटिव एआई-र्स्ट वर्कफोर्स में बदल जाएगा।
 
एआई से चलने वाले स्टार्टअप और एंटरप्रेन्यर टैलेंट के लिए एक नेशनल लॉन्चपैड के तौर पर सोचे गए। एआई फैस्ट 2026 में तीन खास प्लेटफॉर्म हैं। इसमें पहला सीयू इनोवफैस्ट 2026, कैंपस टैंक और सैंडबॉक्स हैं। इन्हें आइडिया जेनरेशन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मार्केट-रेडी सॉल्यूशंस के बीच के गैप को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है। इस फेस्ट में अलग-अलग एआई और नई टेक्नोलॉजी के डोमेन में 35 से ज्यादा कॉम्पिटिशन करवाए जा रहे हैं, जिसमें 1,000 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल टीमें हिस्सा ले रही हैं। इसमें 200 से ज्यादा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के 10000 से ज्यादा स्टूडेंट हिस्सा ले रहे हैं और अपनी क्रिएटिविटी, टेक्निकल एक्सपर्टीज और प्रॉब्लम-सॉल्विंग कैपेबिलिटी दिखा रहे हैं। 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्राइज पूल के साथ, जीतने वाली टीमों को कैश अवॉर्ड और एक्सीलेंस के सर्टिफिकेट मिलेंगे। पार्टिसिपेंट्स को ग्लोबल एनालिटिक्स लीडर एसएएस इंस्टीट्यूट से दुनिया भर में जाने-माने सर्टिफिकेशन भी मिलेंगे, जिनके सर्टिफिकेशन बेनिफिट्स 1 करोड़ रुपये से ज्यादा के हैं।
 
इस मौके संबोधित करते हुए, वेबवेदा इंडियाजीनियसचैलेंज के फाउंडर, अंकुर वारिकू ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि एआई ऐसी चीज़ नहीं है जिससे डरना चाहिए। आपकी नौकरी एआई नहीं छीनेगा, यह कोई ऐसा व्यक्ति छीनेगा जो एआई का इस्तेमाल आपसे बेहतर जानता हो। भविष्य उनका है जो टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं, लगातार सीखते हैं और बदलाव से भागने के बजाय उसके हिसाब से ढल जाते हैं।

मुझे खुशी है कि चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी जैसे इंस्टीट्यूशन ऐसे प्लेटफॉर्म बना रहे हैं जहाँ एआई के बारे में बातचीत ज़मीनी स्तर पर हो रही है। स्टूडेंट्स के तौर पर, आपको बस सुनना है, जिज्ञासु बने रहना है और ज़िंदगी भर सीखने वाले बने रहना है, क्योंकि जब आप ज़िंदगी भर के लिए स्टूडेंट बन जाते हैं, तो आप कभी भी आगे बढ़ना बंद नहीं करते। आज, टेक्नोलॉजी ने न सीखने के सभी बहाने खत्म कर दिए हैं। एआई टूल्स से, कोई भी कम्युनिकेशन स्किल्स को बेहतर बना सकता है, नई भाषाएँ सीख सकता है, आइडिया बना सकता है और बेहतर फैसले ले सकता है।

वारिकू ने कहा कि मैं हमेशा स्टूडेंट्स को कॉलेज के दौरान ही कुछ शुरू करने की सलाह देता हूँ। काम करने से आपको फेलियर, हिम्मत और क्लैरिटी के बारे में पता चलता है। लोग क्या कहेंगे, इस डर से अपने रास्ते पर चलने से न रुकें। लोगों की हमेशा अपनी राय होगी, लेकिन आपकी ज़िंदगी आपके अपने मकसद और दिशा से चलनी चाहिए। सफलता का मतलब सब कुछ जल्दी हासिल करना नहीं है, यह लगातार सही दिशा में आगे बढ़ना है। जब आप एआई का इस्तेमाल करें, तो इसका इस्तेमाल सिर्फ़ जवाब पाने के लिए न करें। इसका इस्तेमाल अपनी सोच को बेहतर बनाने के लिए करें।
 
इस मौके संबोधित करते हुए सांसद (राज्यसभा) और चांसलर सतनाम सिंह संधू ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारत का अगला ट्रिलियन-डॉलर ग्रोथ इंजन बनकर उभरेगा। भारत के पहले सीयू एआई मिशन और एआई फेस्ट के लॉन्च के साथ, हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एआई को विकसित भारत का एक बड़ा आधार बनाने के विज़न को पूरा करने के अपने कमिटमेंट को फिर से पक्का करते हैं।
 
सीयू एआई मिशन के लॉन्च के साथ, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की पहली यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने इंडिया एआई मिशन के साथ एक डेडिकेटेड एआई मिशन शुरू किया है और भारत में एआई बनाने और भारत के लिए एआई को काम करने के विज़न से प्रेरित होकर हमने एक फ्यूचर-रेडी इनोवेशन इकोसिस्टम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है, जो कटिंग-एज रिसर्च को आगे बढ़ाने, एआई -ड्रिवन एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने और सभी सब्जेक्ट्स में एआई लिटरेसी को मजबूत करने पर फोकस है ताकि भारत को एक ग्लोबल एआई लीडर के रूप में स्थापित करने में मदद मिल सके। मेरा मानना ​​है कि यूनिवर्सिटीज़ को रिसर्च-ड्रिवन लर्निंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और मजबूत ग्लोबल कोलेबोरेशन को बढ़ावा देकर नेशनल इनोवेशन और टैलेंट हब के रूप में विकसित होना चाहिए। इनोवेटर्स और युवा चेंजमेकर्स को बढ़ावा देकर जो भारत के एआई-ड्रिवन भविष्य को आकार देंगे, हम एक पावरफुल इकोसिस्टम बना रहे हैं जो टेक से होने वाली इकोनॉमिक ग्रोथ को तेज़ करेगा, स्वदेशी इनोवेशन को बढ़ावा देगा।
 
अपग्रेड के चेयरपर्सन और एजुकेशन-टेक पायनियर रॉनी स्क्रूवाला ने कहा कि "हम ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ टेक्नोलॉजी, खासकर एआई हमारे सीखने, काम करने और करियर बनाने के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। लेकिन मैं चाहता हूँ कि युवा लोग एक बात साफ तौर पर समझें कि एआई आपकी जगह लेने के लिए नहीं है, यह आपको बेहतर बनाने के लिए है। असली फर्क हमेशा वे लोग लाएंगे जो टेक्नोलॉजी का क्रिएटिव और ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल करना जानते हैं। एआई एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह क्यूरियोसिटी, इमैजिनेशन, एंपैथी या रेजिलिएंस की जगह नहीं ले सकता। ये इंसानी क्वालिटीज़ ही सच्ची सफलता को तय करती रहेंगी।
 
मेरा मानना ​​है कि एआई का इस्तेमाल सिर्फ़ जवाब या शॉर्टकट पाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसे अपनी ताकत समझने, नए आइडिया खोजने और अपनी सोच को बेहतर बनाने के लिए खुद को जानने के एक टूल के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। भविष्य उनका नहीं होगा जो सिर्फ़ तय करियर के रास्ते या पुरानी सोच को फॉलो करते हैं। यह उनका होगा जो फुर्तीले, ढलने वाले और लगातार सीखने के लिए तैयार हैं। आज की पीढ़ी के पास एक साथ कई करियर बनाने, एंटरप्रेन्योरशिप के साथ एक्सपेरिमेंट करने, कंटेंट बनाने, इन्वेस्ट करने और इनोवेशन करने का मौका है। अगर समझदारी से इस्तेमाल किया जाए तो यह फ्लेक्सिबिलिटी बहुत बड़ा फायदा है।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने क्वांटम रिसर्च, ट्रेनिंग और स्टार्टअप इनक्यूबेशन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल क्वांटम मिशन के तहत क्यूपीएआई, क्यूकऋषि और सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के साथ बोस-आइंस्टीन क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस लॉन्च किया। इसके साथ, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन गई है जिसने क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस बनाया है, जो एजुकेशन, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप में लीडरशिप के लिए नेशनल क्वांटम क्रायोजेनिक टेस्टिंग फैसिलिटी के तौर पर काम करेगा।

स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट फैसिलिटी के लॉन्च पर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के सीनियर मैनेजिंग डायरेक्टर, दीप इंदर सिंह संधू ने कहा कि कटिंग-एज क्वांटम रिसर्च को आगे बढ़ाने, स्पेशल ट्रेनिंग को मज़बूत करने और उभरती टेक्नोलॉजी में स्टार्टअप इनक्यूबेशन में तेज़ी लाने के लिए, बोस-आइंस्टीन क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस को चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने क्वांटम स्टार्टअप क्यूपीएआई ( क्यूपीड फ़ोर्स) और क्यूऋषि के साथ-साथ सीएसआईआर-एनपीएल (नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी) के साथ मिलकर लॉन्च किया है। यह नेशनल क्वांटम मिशन के तहत स्टूडेंट्स और नए एंटरप्रेन्योर्स के लिए सर्टिफिकेट कोर्स के साथ स्टार्टअप्स की ट्रेनिंग, रिसर्च और इनक्यूबेशन के लिए है। डेडिकेटेड सर्टिफिकेट प्रोग्राम, एडवांस्ड रिसर्च इनिशिएटिव और स्टूडेंट्स और नए एंटरप्रेन्योर्स के लिए इनक्यूबेशन सपोर्ट के साथ, सेंटर का मकसद एक मज़बूत क्वांटम इनोवेशन इकोसिस्टम बनाना और यूनिवर्सिटी को क्वांटम एजुकेशन, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप में एक नेशनल लीडर के तौर पर स्थापित करना है, जिससे यह भारत की पहली प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन जाएगी जिसने एक कॉम्प्रिहेंसिव क्वांटम सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किया है।

टेक्निकल फ्रंटियर्स पर 'इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़' थीम के तहत एक हाई-लेवल पैनल ने इंडस्ट्री और इनोवेशन के भविष्य को बनाने में क्वांटम कंप्यूटिंग, एडवांस्ड रिसर्च और नेक्स्ट-जेनरेशन टेक्नोलॉजीज़ की बदलाव लाने वाली भूमिका पर चर्चा की। पैनल में भारत सरकार के सीएसआईआर-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के डायरेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) वेणु गोपाल अचंता शामिल थे, जिन्होंने क्वांटम साइंस और प्रिसिजन टेक्नोलॉजीज़ में भारत की बढ़ती क्षमताओं पर बात की और आईबीएम क्वांटम इंडिया लीड और आईबीएम में मास्टर इन्वेंटर एल वेकाटा सुब्रमण्यम ने बढ़ते क्वांटम इकोसिस्टम, एंटरप्राइज एडॉप्शन और क्वांटम कंप्यूटिंग के भविष्य के असर पर अपनी राय शेयर की। फ्यूचर एंड एआई के फाउंडर निवेदन राठी द्वारा मॉडरेट की गई इस चर्चा में भारत को उभरती टेक्नोलॉजीज़ में सबसे आगे रखने के लिए एकेडेमिया-इंडस्ट्री कोलेबोरेशन, रिसर्च-ड्रिवन इनोवेशन और डीप-टेक टैलेंट डेवलपमेंट के महत्व पर ज़ोर दिया गया।
 
कैंपस टैंक, भारत का पहला यूनिवर्सिटी-लेड स्टार्ट-अप लॉन्चपैड है जिसे अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। इसका ग्रैंड फिनाले 21 फरवरी को होगा।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर का सैंडबॉक्स प्लेटफॉर्म, स्टूडेंट्स, स्टार्टअप्स, प्रोफेशनल्स और इंडिपेंडेंट इनोवेटर्स को डीप-टेक और एआई-ड्रिवन प्रोडक्ट्स दिखाने के लिए एक ओपन इनोवेशन इकोसिस्टम दे रहा है। सैंडबॉक्स फाइनल 20 फरवरी को होगा और टॉप 10 टीमों को एक स्पेशलाइज्ड डीप-टेक और एआई ग्रुप में शामिल किया जाएगा।
 
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने नारी शक्ति के साथ मिलकर ’नारी’ स्कीम (नर्चिंग एआई रेजोल्यूशन फाॅर इंक्लयूजन-वुमेन इन टेक) भी लाॅन्च की, जिसे पीएम नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत के चार पिलर्स में से एक माना है। इस पहल का मकसद एआई और टेक्नोलाॅजी अपस्किलिंग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन और एंटरप्रेन्योरियल सपोर्ट, हेल्थ और वेलनेस आउटरीच और सभी सेक्टर्स में लीडरशिप डेवलपमेंट के जरिए महिलाओं को मजबूत बनाना है।
 
एआई एथिक्स, ट्रस्ट और गवर्नेंस पर एक हाई-इम्पैक्ट पैनल ने ’नारी’-नर्चिंग एआई रेवोल्यूशन फाॅर इंकल्यूजनः वुमैन लिडिंग फ्रंट्स’ थीम के तहत एक जिम्मेदार, सबको साथ लेकर चलने वाले और भरोसेमंद एआई इकोसिस्टम बनाने पर बातचीत की। इस सेशन में विमेनलिफ्ट हेल्थ की आयशा चौधरी, वरिजा लाइफस्टाइल्स की एंटरप्रेन्योर वरिजा बजाज और वाणी प्रकाशन ग्रुप की पब्लिशिंग लीडर अदिति माहेश्वरी ने अपने विचार रखे। इसे गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर नव्या शर्मा ने मॉडरेट किया। इस चर्चा में एथिकल एआई फ्रेमवर्क, जिम्मेदार गवर्नेंस मॉडल, एआई लीडरशिप में डायवर्सिटी और उभरती टेक्नोलॉजी तक सबके लिए बराबर पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर बात हुई। पैनल ने ह्यूमन-सेंट्रिक एआई इनोवेशन को आकार देने में महिलाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया और एआई से होने वाली तरक्की से समाज के सभी वर्गों को फायदा हो, यह पक्का करने के लिए मजबूत पॉलिसी सपोर्ट, सबको साथ लेकर चलने वाले स्किलिंग और मिलकर काम करने वाले इकोसिस्टम की मांग की।
 
About Chandigarh University
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एक NAAC A+ ग्रेड और क्यूएस वर्ल्ड (QS World) रैंक धारक यूनिवर्सिटी है। यूजीसी द्वारा मान्य यह स्वायत्त शैक्षणिक संस्थान पंजाब राज्य में चंडीगढ़ के पास स्थित है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी भारत की सबसे यंगेस्ट तथा पंजाब की एकमात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी है, जिसे NAAC (राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद) द्वारा A+ ग्रेड से सम्मानित किया गया है। यूनिवर्सिटी विभिन्न क्षेत्रों में 109 से अधिक अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम प्रदान करती है, जिनमें इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ, आर्किटेक्चर, जर्नालिज्म, एनीमेशन, होटल मैनेजमेंट, और कॉमर्स शामिल हैं। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने सर्वश्रेष्ठ प्लेसमेंट रिकॉर्ड बना कर वर्ल्ड कंसल्टिंग एंड रिसर्च कारपोरेशन (डब्ल्यूसीआरसी) द्वारा पुरस्कारित ''यूनिवर्सिटी विद बेस्ट प्लेसमेंट'' अवार्ड को भी अपने नाम किया है।
 
Website: www.cuchd.in.

क्या ‘द वार्डरोब में दिव्या अग्रवाल निभा रही हैं भूत का किरदार? फर्स्ट लुक से बढ़ी अटकलें






 

  मनोरजंन। राज गवली प्रोडक्शन ने अपनी आगामी सुपरनैचुरल थ्रिलर The Wardrobe का दिलचस्प फर्स्ट-लुक पोस्टर जारी कर दिया है, और फैंस अब यह सवाल पूछ रहे हैं — क्या Divya Agarwal इस फिल्म में भूत का किरदार निभा रही हैं?

  सौरभ चौबे के निर्देशन में बनी इस हॉरर थ्रिलर में Rajniesh Duggall भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। पोस्टर में एक रहस्यमयी महिला को पुराने, आधे खुले लकड़ी के वार्डरोब से बाहर निकलते हुए दिखाया गया है, जिस पर लताएं लिपटी हुई हैं। खून से सने सफेद गाउन में और धुएं व अंधेरे से घिरे माहौल के बीच दिव्या का डरावना अंदाज़ उनके किरदार को लेकर कई सवाल खड़े करता है।

   वार्डरोब के भीतर से आती लाल रोशनी फिल्म के सुपरनैचुरल टोन को और गहरा करती है, जिससे दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। हालांकि मेकर्स ने कहानी के अहम पहलुओं को अभी गोपनीय रखा है, लेकिन पोस्टर ने इस बात की अटकलों को हवा दे दी है कि दिव्या किसी बेचैन आत्मा की भूमिका में हो सकती हैं।

  Bigg Boss OTT और MTV Ace of Space की विनर रह चुकी दिव्या अग्रवाल इस फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही हैं। फिल्म का निर्माण ज्योति राज गवली ने किया है और सह-निर्माता राज गवली हैं।

  24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही The Wardrobe सस्पेंस, साइकोलॉजिकल ट्विस्ट और सुपरनैचुरल रोमांच से भरपूर होने का वादा करती है। लेकिन बड़ा सवाल अब भी कायम है — क्या दिव्या अग्रवाल सच में भूत का किरदार निभा रही हैं, या कहानी में कोई और गहरा रहस्य छिपा है?

समृद्ध,सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश के सपने को पूरा करेगा बजट 2026-27 : मुख्यमंत्री डॉ. यादव




 


मध्यप्रदेश बना रोलिंग बजट प्रस्तुत करने वाला देश का पहला राज्य 

अमृतकाल 2047 के लिए विकास का पैमाना है राज्य सरकार का यह बजट

विधानसभा में प्रस्तुत किया गया 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए का बजट

वर्ष 2026-27 में राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद 10.69 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ अनुमानित

 बजट में गत वर्ष की तरह इस बार भी प्रदेश की जनता पर नहीं पड़ेगा नए टैक्स का भार

प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के वर्ष 2026-27 के बजट पर किया मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद

   भोपाल : मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ज्ञान आधारित विकास के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति के कल्याण के ज्ञान (GYAN) के संकल्प में हमारी सरकार ने अब इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर के आई (I) को भी शामिल किया है। वर्ष 2026-27 के लिए प्रदेश का यह बजट ज्ञानी (G Y A N I I) के मार्गदर्शी सिद्धान्त पर तैयार किया गया है। जिसमें गरीब कल्याण, युवा शक्ति के कौशल विकास एवं रोज़गारोन्मुखी प्रशिक्षण, अन्नदाता की आय में वृद्धि, नारी सशक्तिकरण, आधारभूत सुविधाओं का विकास एवं प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करने का संकल्प है। वर्ष 2026-27 के 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट में विकास के लिए पर्याप्त धन राशि रखी गई है, यह विकास और जनकल्याण के संकल्प की पूर्ति का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बजट ''समृद्ध मध्‍यप्रदेश, सम्‍पन्‍न मध्‍यप्रदेश, सुखद मध्‍यप्रदेश, सांस्‍कृतिक मध्‍यप्रदेश'' के सपने को साकार करने वाला है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी प्रदेश की जनता पर किसी नए कर बोझ नहीं डाला गया है। सुशासन और सुप्रबंधन के लिए निरंतर नवाचार और विकास के सभी पैमानों को पूरा करता यह बजट अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत होने के बाद मीडिया के प्रतिनिधियों को विधानसभा परिसर में संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।


बजट में विकास के लिए पर्याप्त धन राशि

   वर्ष 2026-27 के 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के बजट में विकास के लिए पर्याप्त धन राशि रखी गई है, यह विकास और जनकल्याण के संकल्प की पूर्ति का परिचायक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बजट ''समृद्ध मध्‍यप्रदेश, सम्‍पन्‍न मध्‍यप्रदेश, सुखद मध्‍यप्रदेश, सांस्‍कृतिक मध्‍यप्रदेश'' के सपने को साकार करने वाला है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी प्रदेश की जनता पर किसी नए कर बोझ नहीं डाला गया है। सुशासन और सुप्रबंधन के लिए निरंतर नवाचार और विकास के सभी पैमानों को पूरा करता यह बजट अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत होने के बाद मीडिया के प्रतिनिधियों को विधानसभा परिसर में संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए।

प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 2025-26 में 9 प्रतिशत की वृद्धि

    इस बजट से अगले तीन वर्ष के विकास का खाका खीचा जाएगा और यह बजट विकास के लिए सतत् रूप से पर्याप्त धन राशि उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगा। यह बजट अमृतकाल 2047 के लिए विकास का पैमाना सिद्ध होगा। वर्ष 2026-27 में राज्य का सकल घरेलु उत्पाद 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ रुपए अनुमानित है, जो वर्ष 2025-26 के अनुमान में 10.69 प्रतिशत अधिक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 2024-25 की तुलना में वर्ष 2025-26 में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

कृषि वर्ष में किसान कल्याण का बजट

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता वृद्धि के लिए 28 हजार 158 करोड़ रूपए, आदान व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए 64 हजार 995 करोड़ रूपए, उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए 8 हजार 91 करोड़ रूपए, सुरक्षा चक्र के लिए 13 हजार 769 करोड़ रूपए सहित कृषि कल्याण के लिए कुल 1 लाख 15 हजार 13 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है, जो किसान कल्याण वर्ष के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि बहुआयामी गरीबी सूचकांक आधारित बजट व्यवस्था राज्य की एक अभिनव और दूरदर्शी पहल है।

अधोसंरचना विकास के लिए एक लाख करोड़ रूपए से अधिक का प्रावधान

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार अधोसंरचना विकास में बजट अनुमान 2026-27 का पूंजीगत परिव्यय रुपये 1 लाख करोड़ से अधिक है। राज्य सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के समुचित प्रावधान किए हैं। प्रदेश के गठन के बाद पहली बार इतनी बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्‍यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना के लिए 21 हजार 630 करोड़ की स्‍वीकृति के बाद वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के लिए रूपये 800 करोड़ का प्रावधान है। राज्य में क्षतिग्रस्त पुलों का पुर्ननिर्माण योजना'' में 4 हजार 572 करोड़ की स्‍वीकृति के बाद वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के लिए रूपये 900 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

शहरों में अधोसंरचना विकास के लिए 'द्वारका योजना'

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्‍थ महापर्व से संबंधित 13 हजार 851 करोड़ के कार्य स्‍वीकृत किए गए हैं। जिसके अंतर्गत वर्ष 2026-27 के लिए 3 हजार 60 करोड़ रूपये का प्रावधान है। शहरों में अधोसंरचना विकास के लिए ''द्धारका योजना'' में आगामी तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रूपये का निवेश संभावित है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में आबादी भूमि पर मालिकाना अधिकार की योजना है, जिसमें मुद्रांक एवं पंजीयन का समस्‍त शुल्‍क राज्‍य शासन वहन करेगा। यह देश में अपने तरह का पहला नवाचार है। इसके लिए 3 हजार 800 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है।

  बच्चों को बेहतर पोषण के लिए यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना में 700 करोड़ रूपए का प्रावधान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बच्चों को बेहतर पोषण मिले, इसके लिए यशोदा दुग्‍ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रूपये का प्रावधान है। इस योजनातंर्गत आगामी पांच वर्षों में 6 हजार 600 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के लिए 23 हजार 883 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकसित भारत-गांरटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए 10 हजार 428 करोड़ रुपये का प्रावधान है।

युवा कल्याण के लिए बजट में विशेष प्रावधान

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के सबसे युवा तीन प्रदेशों में से एक है। युवा कल्याण के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रदेश में सांदीपनि विद्यालय, पीएम श्री महाविद्यालय, चिकित्सा महाविद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य में औद्योगिक विकास के साथ हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए जोर दिया जा रहा है। पर्यटकों के लिए प्रदेश में पहली बार पीएमश्री हेली सर्विस शुरू की गई है, जिसमें पर्यटकों से सामान्य किराये का मात्र 1/10वां हिस्सा ही लिया जा रहा है। शेष खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। गरीब एवं जरूरतमंदों को एयर एम्बुलेंस की मदद से समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य में हवाई सेवाओं के विकास के लिए बजट में उचित प्रावधान किए गए हैं। मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 13.5 करोड़ पर्यटक आए हैं, धार्मिक पर्यटकों के आगमन का भी रिकार्ड बना है। इनमें डेढ़ लाख विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। राज्य में पर्यटकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए टेंट सिटी, होम-स्टे जैसे नवाचारों को बढ़ाया जा रहा है।

  वित्तीय संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से बढ़ रही है बजट की राशि

      मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश वन संपदा एवं वन्यजीवों से समृद्ध है। प्रदेश की धरती पर चीतों का पुनर्स्थापन किया गया है। श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में नए शावकों के आगमन से स्वदेशी चीतों की संख्या में वृद्धि हो रही है। यहां चीतों की संख्या अब 38 पहुंच गई है। इसी माह 8 व्यस्क चीते बोत्सवाना से लाए जाएंगे। असम से जंगली भेंसा मध्यप्रदेश के वनों में जल्द लाए जाएंगे।

"संघ के सौ वर्षों में छवि और हकीकत के बीच अंतर का होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण": नितिन गडकरी




 
   मुंबई : केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को राष्ट्र निर्माण और मूल्यों पर आधारित विकास पर अपने विशेष ध्यान के लिए जाना जाता है। हाल ही में जारी एक वीडियो के जरिए उन्होंने फिल्म 'शतक: संघ के 100 वर्ष' देखने की अपील की है। उनके अनुसार इस फिल्म को देखकर लोग संघ को सही तरीके से समझ पाएँगे।
   नितिन गडकरी जी ने कहा, "एक स्वयंसेवक के रूप में मुझे कई बार लगता है कि संघ की छवि और हकीकत के बीच अंतर रहा है। लोगों की धारणा और जमीन की सच्चाई अलग रही है। मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे संघ की विचारधारा को समझें एवं उसके त्याग, समर्पण और देशभक्ति की भावना को जानें। आदिवासी क्षेत्रों में सेवा, सहकारी संस्थाओं और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों में संघ ने बड़ा काम किया है। लाखों स्वयंसेवकों का योगदान बहुत महत्वपूर्ण रहा है।"
   उन्होंने आगे कहा, "देश के विकास में संघ का बड़ा योगदान है। हमें देश के इतिहास के इस महत्वपूर्ण 'शतक' के सफर को मिलकर मनाना चाहिए, संघ को समझना चाहिए और उसकी विचारधारा को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। मैं सभी से निवेदन करता हूँ कि यह फिल्म जरूर देखें।"
  संघ के बारे में बात करते हुए गडकरी जी ने कहा, "पिछले 100 वर्षों में आरएसएस ने लाखों युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्र निर्माण की भावना जगाई है। मुझे गर्व है कि मैं भी उन स्वयंसेवकों में से एक हूँ, जिन्हें यह प्रेरणा मिली है। अभी बहुत काम बाकी है और हमारा लक्ष्य भारत को दुनिया में अग्रणी बनाना है। सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक हर क्षेत्र में देश को आगे बढ़ाना है।"
  गडकरी ने यह भी कहा, "हम दलितों, वंचितों और गरीबों के उत्थान के लिए काम कर रहे हैं। हिंदुत्व न तो जातिवादी है और न ही सांप्रदायिक। यह किसी एक धर्म से जुड़ा नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है। सभी धर्मों के लोग भारतीय हो सकते हैं। भारतीय पहचान हमारी संस्कृति, इतिहास और परंपरा से जुड़ी है। यही प्रेरणा हमें संघ से मिली है।"
  'शतक' फिल्म संघ की विचारधारा, उससे जुड़ी गलतफहमियों, उसके सामाजिक कार्यों और पिछले 100 वर्षों की यात्रा को दर्शाती है। हाल ही में जारी किए गए इसके ट्रेलर को लेकर लोगों के बीच काफी चर्चा है। यह फिल्म 20 फरवरी, 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने के लिए तैयार है।

दिव्या अग्रवाल और रजनीश दुग्गल स्टारर सुपरनैचुरल थ्रिलर ‘द वार्डरोब’ का फर्स्ट लुक पोस्टर जारी





 
  मनोरंजन। राज गवाली प्रोडक्शन ने अपनी आगामी बॉलीवुड सुपरनैचुरल थ्रिलर द वार्डरोब का फर्स्ट लुक पोस्टर जारी कर दिया है, जो दर्शकों को एक डार्क और रहस्यमयी सिनेमाई अनुभव की झलक देता है। सौरभ चौबे द्वारा निर्देशित इस हॉरर-आधारित फिल्म में दिव्या अग्रवाल और रजनीश दुग्गल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म का निर्माण ज्योति राज गवाली ने किया है, जबकि सह-निर्माता राज गवाली हैं।


  जारी किए गए पोस्टर में एक डरावना दृश्य दिखाया गया है—एक पुरानी, आधी खुली लकड़ी की अलमारी, जिस पर बेलें लिपटी हुई हैं, और उसके अंदर से एक रहस्यमयी महिला बाहर आती हुई नजर आती है। अलमारी के भीतर से आती लाल रोशनी और खून से सनी सफेद पोशाक पहने वह आकृति भय और सस्पेंस का माहौल बनाती है। धुंधला और छायादार बैकग्राउंड पोस्टर के सुपरनैचुरल टोन को और गहरा करता है, जो अलमारी के पीछे छिपे रहस्यों की ओर इशारा करता है।

  अभिनेत्री दिव्या अग्रवाल इस फिल्म के साथ बॉलीवुड में डेब्यू करने जा रही हैं। वह Bigg Boss OTT और MTV Ace of Space की विजेता रह चुकी हैं। दिव्या ने कहा, “यह फिल्म मेरे लिए एक अभिनेता के रूप में चुनौतीपूर्ण रही। इसकी कहानी बेहद रोमांचक और रहस्यमयी है, और मैं चाहती हूं कि दर्शक इसे बड़े पर्दे पर अनुभव करें।”

 पोस्टर में फिल्म का शीर्षक द वार्डरोब गहरे लाल रंग में उभरकर सामने आता है, जो इसकी हॉरर थीम को और मजबूत बनाता है। साथ ही पोस्टर में फिल्म की रिलीज डेट 24 अप्रैल, 2026 की घोषणा भी की गई है।

  अभिनेता रजनीश दुग्गल ने कहा, “जैसे ही मैंने स्क्रिप्ट सुनी, मुझे लगा इसमें कुछ अलग है। यह फिल्म सस्पेंस और मनोवैज्ञानिक तत्वों का अनोखा मेल है, और पोस्टर सिर्फ इसकी एक झलक भर है।”

  निर्माता ज्योति राज गवाली के अनुसार, “द वार्डरोब केवल डर की कहानी नहीं है, बल्कि उन रहस्यों की कहानी है जो जिंदगी बदल सकते हैं। हम चाहते थे कि फर्स्ट लुक में ही इसकी तीव्रता और रहस्य झलकें।”

  फिल्म 24 अप्रैल, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। निर्माताओं के अनुसार, जल्द ही फिल्म से जुड़ी और जानकारियां साझा की जाएंगी।

TraceX Guard लॉन्च: भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए AI आधारित मोबाइल सुरक्षा प्लेटफॉर्म

हाल के वर्षों में स्मार्टफोन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। बैंकिंग, UPI भुगतान, सरकारी सेवाओं और संचार से लेकर व्यक्तिगत जानकारी तक, मोबाइल उपकरण अब लोगों के जीवन के सबसे संवेदनशील डेटा को संग्रहीत करते हैं। हालांकि डिजिटल अपनाने की इस तेज़ रफ्तार ने साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप देशभर में मोबाइल आधारित धोखाधड़ी और मैलवेयर हमलों में तेज़ वृद्धि हुई है। इसी बढ़ते खतरे को ध्यान में रखते हुए TraceX Labs ने TraceX Guard नामक एक AI-संचालित, ऑल-इन-वन मोबाइल सुरक्षा समाधान लॉन्च किया है, जिसे विशेष रूप से भारतीय उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।


भारत में बढ़ता मोबाइल साइबर अपराध संकट

भारत वर्तमान में मोबाइल-आधारित साइबर अपराधों की गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है। अब अधिकांश डिजिटल धोखाधड़ी के मामले स्मार्टफोन के माध्यम से हो रहे हैं, क्योंकि हमलावर पारंपरिक डेस्कटॉप मैलवेयर से हटकर मोबाइल उपयोगकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं। हालिया साइबर सुरक्षा रिपोर्ट्स के अनुसार, साइबर अपराध मामलों में तेज़ वृद्धि दर्ज की गई है और डिजिटल धोखाधड़ी के कारण भारी आर्थिक नुकसान सामने आया है।

यह स्थिति इस बात को स्पष्ट करती है कि पारंपरिक एंटीवायरस समाधान आधुनिक हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। साइबर अपराधी अब सोशल इंजीनियरिंग, भरोसेमंद मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और नकली एप्लिकेशन का उपयोग करके सुरक्षा प्रणालियों और उपयोगकर्ताओं की सतर्कता को दरकिनार कर रहे हैं।

ट्रोजन APK हमलों का बढ़ता खतरा

TraceX Labs के अनुसार, ट्रोजनाइज्ड APK फाइलों का प्रसार सबसे खतरनाक रुझानों में से एक बनकर उभरा है। हमलावर अब फिशिंग संदेशों के बजाय WhatsApp और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से नकली एप्लिकेशन भेज रहे हैं, जो दिखने में असली सेवाओं जैसे लगते हैं। इनमें फर्जी ट्रैफिक चालान ऐप, शादी के निमंत्रण ऐप, वीडियो कॉल एप्लिकेशन या सरकारी और वित्तीय सेवाओं की क्लोन ऐप्स शामिल हो सकती हैं।

ये एप्लिकेशन वास्तविक दिखने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और इंस्टॉल होने के बाद चुपचाप डिवाइस की अनुमतियों तक पहुंच प्राप्त कर लेते हैं। चूंकि लिंक अक्सर किसी परिचित व्यक्ति से आता है, इसलिए उपयोगकर्ता आसानी से उस पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है।

Remote Access Trojans और डिवाइस पर पूरा नियंत्रण

इन हमलों के केंद्र में अक्सर Remote Access Trojans (RATs) होते हैं, जो हमलावरों को संक्रमित डिवाइस पर लगभग पूर्ण नियंत्रण प्रदान करते हैं। यह मैलवेयर SMS और OTP इंटरसेप्ट कर सकता है, बैंकिंग ऐप्स को प्रभावित कर सकता है, फाइलों और फोटो तक पहुंच सकता है और यहां तक कि माइक्रोफोन और कैमरा भी दूर से सक्रिय कर सकता है।

इस प्रकार की पहुंच साइबर अपराधियों को वित्तीय धोखाधड़ी, पहचान चोरी और निगरानी जैसी गतिविधियों को अंजाम देने में सक्षम बनाती है। कई मामलों में, उपयोगकर्ता को नुकसान का पता चलने से पहले ही आर्थिक हानि हो जाती है।

TraceX Guard: आधुनिक खतरों के लिए आधुनिक सुरक्षा

TraceX Guard को भारत के बदलते साइबर खतरे परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। पारंपरिक एंटीवायरस की तरह केवल सिग्नेचर-आधारित पहचान पर निर्भर रहने के बजाय, यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, थ्रेट इंटेलिजेंस और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का उपयोग करके संदिग्ध गतिविधियों को पहले ही पहचानने और रोकने का प्रयास करता है।

यह Android आधारित क्लाइंट-साइड सुरक्षा समाधान है, जो डिवाइस का पूर्ण सुरक्षा ऑडिट कर सकता है, ऐप परमिशन का विश्लेषण करता है, इंस्टॉलेशन स्रोत की जांच करता है और उपयोगकर्ता को सरल भाषा में जोखिम की जानकारी देता है।

मुख्य सुरक्षा फीचर्स

TraceX Guard में कई सुरक्षा मॉड्यूल शामिल हैं, जैसे ऐप सुरक्षा स्कैनिंग, APK इंस्टॉलेशन की रियल-टाइम निगरानी, QR और URL स्कैनिंग, WiFi सुरक्षा विश्लेषण, OTP और SIM सुरक्षा, डेटा ब्रीच जांच, रैनसमवेयर सुरक्षा और APK/XAPK फाइल स्कैनिंग। इसके अलावा, मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट इसे उन उपयोगकर्ताओं के लिए भी उपयोगी बनाता है जो अंग्रेज़ी में सहज नहीं हैं।

भारत-केंद्रित थ्रेट इंटेलिजेंस और सामाजिक प्रभाव

TraceX Guard की एक प्रमुख विशेषता इसका भारत-केंद्रित थ्रेट इंटेलिजेंस है। जहां कई वैश्विक सुरक्षा समाधान अंतरराष्ट्रीय खतरों पर केंद्रित होते हैं, वहीं यह प्लेटफॉर्म भारत में प्रचलित स्कैम, लोन ऐप धोखाधड़ी और फिशिंग अभियानों पर विशेष ध्यान देता है।

यह समाधान UPI, आधार-लिंक्ड सेवाओं और डिजिटल बैंकिंग उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल विश्वास को मजबूत करने में भी मदद करता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों और नए इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित डिजिटल वातावरण मिल सकता है।

मोबाइल उपयोगकर्ता अब भी क्यों हैं असुरक्षित

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश साइबर हमले तकनीकी कमजोरी के कारण नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी के कारण सफल होते हैं। कई उपयोगकर्ता ऐप परमिशन के जोखिम नहीं समझते और परिचित स्रोत से प्राप्त फाइलों को सुरक्षित मान लेते हैं। TraceX Guard इस समस्या को स्पष्ट जोखिम जानकारी और सुझाव देकर दूर करने का प्रयास करता है।

सुरक्षित डिजिटल भविष्य की ओर एक कदम

जैसे-जैसे भारत पूरी तरह डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, मोबाइल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बनती जा रही है। तेजी से विकसित हो रहे साइबर हमलों से निपटने के लिए नई पीढ़ी के सुरक्षा समाधानों की आवश्यकता है। AI आधारित पहचान, रियल-टाइम सुरक्षा और उपयोगकर्ता-केंद्रित डिज़ाइन के साथ TraceX Guard का उद्देश्य भारतीय उपयोगकर्ताओं को उभरते साइबर खतरों से सुरक्षित रखना है और देश के मोबाइल साइबर सुरक्षा पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाना है।

दंत उपचारों के लिए स्वतंत्र बीमा पॉलिसी की दिशा में बड़ा कदम, डॉ. आदित्य पतकराव के प्रयासों को केंद्र स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया



नई दिल्ली, दिनांक 16 फरवरी 2026:
भारत में दंत चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र और समर्पित बीमा पॉलिसी लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य तथा केंद्र सरकार की विभिन्न सलाहकार समितियों में कार्य कर चुके डॉ. आदित्य पतकराव के निरंतर प्रयासों को संज्ञान में लेते हुए Dental Council of India (DCI) ने Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है।

दंत उपचारों पर बढ़ता खर्च, आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ तथा दंत स्वास्थ्य के लिए सीमित बीमा कवरेज की पृष्ठभूमि में डॉ. पतकराव ने वर्ष 2024 में ओम  बिरला से मुलाकात कर इस विषय की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया था। इसके बाद इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर गति मिली और संबंधित मंत्रालयों तथा नियामक संस्थाओं के साथ अनुवर्ती कार्रवाई प्रारंभ हुई।

दिनांक 15 सितंबर 2025 को डॉ. आदित्य पतकराव ने भारत सरकार के समक्ष दंत बीमा संबंधी औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात 10 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने यह मामला डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को आगे की कार्रवाई हेतु प्रेषित किया। 8 जनवरी 2026 को DCI की ‘अधिनियम एवं विनियमन उपसमिति’ ने प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा कर सकारात्मक अनुशंसा की। तत्पश्चात 21 जनवरी 2026 को DCI की कार्यकारी समिति ने इस अनुशंसा को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की।

इन सभी प्रक्रियाओं के बाद 16 फरवरी 2026 को जावक क्रमांक No. DCI/ARPM/Regulation/Gen/Gen/130/2025-26/2026/10208 के अंतर्गत डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव डॉ. अभिषेक सिंह ने IRDAI के अध्यक्ष श्री अजय सेठ को आधिकारिक पत्र भेजकर दंत उपचारों के लिए स्वतंत्र बीमा पॉलिसी विकसित करने हेतु सकारात्मक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। इससे अब बीमा कंपनियों के लिए दंत उपचारों हेतु विशेष स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. आदित्य पतकराव ने कहा,
“2024 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिर्ला जी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ यह प्रयास आज एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंचा है। रूट कैनाल, इम्प्लांट्स तथा अन्य महंगे दंत उपचारों के लिए आम नागरिकों को बीमा संरक्षण मिलना समय की आवश्यकता है।

डेंटल कैरीज (दांतों में कीड़ा लगना) को विश्व का सबसे सामान्य रोग माना जाता है। इसलिए मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। समय पर उपचार न कराने पर दांतों में कीड़ा बढ़ सकता है, दर्द हो सकता है और आगे चलकर गंभीर संक्रमण भी हो सकता है। हाल के शोध से यह भी सिद्ध हुआ है कि मुंह में होने वाले जीवाणु संक्रमण, दंत कैरीज तथा मसूड़ों के बैक्टीरिया केवल दांतों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। मसूड़ों के रोग और मौखिक संक्रमण का संबंध हृदय रोग, मधुमेह, श्वसन संबंधी बीमारियों तथा गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं से भी पाया गया है। इसलिए नियमित ब्रश करना, फ्लॉस का उपयोग, समय-समय पर दंत जांच और मौखिक स्वच्छता बनाए रखना समग्र शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘स्वस्थ मुंह, स्वस्थ शरीर’ की अवधारणा आज और अधिक स्पष्ट हो रही है।

दंत बीमा संरक्षण के इस निर्णय से दंत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी।”

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्वतंत्र दंत बीमा पॉलिसी लागू होती है तो महंगे उपचार मध्यम वर्ग के लिए सुलभ हो सकेंगे। बीमा कवरेज के कारण मरीज समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे देश के समग्र दंत स्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही दंत चिकित्सकों को भी उपचार के दायरे का विस्तार करने तथा आधुनिक तकनीकों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में प्रोत्साहन मिलेगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेषकर दंत चिकित्सा क्षेत्र में, यह निर्णय नीतिगत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भविष्य में अधिक समावेशी और व्यापक स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।