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मोहनखेड़ा में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ: बागेश्वर सरकार की मौजूदगी में होगा भव्य आध्यात्मिक समागम

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दिग्गज संतों और नामचीन गायकों के संगम में 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी' परिवार करा रहा दिव्य आयोजन; अभेद्य सुरक्षा के बीच जुटेगा संभावित 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं का सैलाब

   राजगढ़ (धार)। मालवा की पावन धरा पर स्थित सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा कल एक ऐसे आध्यात्मिक महासंगम का गवाह बनने जा रहा है, जिसकी गूँज पूरे देश में सुनाई देगी। 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी' परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य समागम में आस्था, भक्ति और सुरों का ऐसा त्रिवेणी संगम होगा, जो श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय रहेगा। आयोजन की गरिमा का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ सनातन संस्कृति के प्रखर प्रवक्ता पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) के साथ-साथ देशभर के प्रख्यात संत एक ही मंच पर नज़र आएंगे।

प्रातः 10 बजे से प्रारंभ होगा भक्ति का सिलसिला

  आयोजन की विशालता और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कार्यक्रम की शुरुआत कल 2 फरवरी, सोमवार प्रातः 10 बजे से हो जाएगी। इस दिव्य आयोजन को लेकर जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही हैं, राजगढ़ और आसपास के पूरे अंचल में उत्साह का माहौल चरम पर पहुँच गया है।

संतों का महासमागम और भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां

   इस आयोजन की भव्यता का मुख्य केंद्र यहाँ होने वाला संतों का समागम है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी अयोध्या के पूज्य महंत श्री राजू दासजी महाराज, मलूक पीठ बागेश्वरधाम वृंदावन के आचार्य रोहित रिछारिया, राजेश्वरम परिवार पचोखराधाम के पूज्य महंत गुरुप्रसाद जी महाराज और पूज्य अंकित कृष्ण भटुक जी सहित देशभर से कई गणमान्य संत पधार रहे हैं। यह दिव्य आयोजन श्री घमंडीराम गोवाणी एवं श्रीमती अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी की पुण्य स्मृति में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में सुरों की दुनिया की दिग्गज गायिका अनुराधा पौडवाल की मखमली आवाज़ और प्रसिद्ध गायक बृजेश शांडिल्य के भजनों पर कल भक्त झूमते नज़र आएंगे। और साथ ही भजन गायक अमित धुर्वे भी अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे।

सुरक्षा का अभेद्य घेरा और प्रशासनिक मुस्तैदी

  आयोजन की विशालता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 1500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई है, जबकि चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से पैनी नज़र रखी जा रही है। व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस बल के साथ-साथ निजी सुरक्षा कंपनी के वालंटियर्स भी तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं के बैठने से लेकर भोजन तक की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं।

हाईटेक सुविधाएं और सुगम यातायात

   श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए इंदौर, झाबुआ, राणापुर और बदनावर मार्ग पर चार अलग-अलग पार्किंग जोन बनाए गए हैं। आयोजन स्थल के समीप हजारों स्क्वायर फीट में विशाल वॉटरप्रूफ पंडाल और मुख्य मंच तैयार किया गया है। पूरे परिसर में कई विशाल एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं, ताकि अंतिम पंक्ति में बैठा श्रद्धालु भी स्पष्ट दर्शन कर सके। कल सुबह से ही मोहनखेड़ा की ओर जाने वाले रास्ते भक्ति के हाईवे में तब्दील हो जाएंगे।


मोहनखेड़ा तीर्थ पर सजेगा बागेश्वर सरकार का दिव्य दरबार: सुर और भक्ति के संगम के साथ तैयारियाँ अंतिम चरण में

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जैन तीर्थ में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ,दिग्गज संतों और प्रसिद्ध गायकों की मौजूदगी में जैन तीर्थ में उमड़ेगा आस्था का महाकुंभ,दिग्गज संतों और प्रसिद्ध गायकों की मौजूदगी में कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी द्वारा भव्य आयोजन

  

  राजगढ़ (धार): मालवा के सुप्रसिद्ध जैन तीर्थ मोहनखेड़ा में आगामी 2 फरवरी को एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक संगम होने जा रहा है। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम सरकार) की विशाल कथा और आगमन को लेकर पूरे मालवा अंचल में उत्साह चरम पर है। शनिवार सुबह से ही राजगढ़ में सरगर्मी तेज हो गई है और आसपास के थानों सहित अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचना शुरू हो चुका है। यह भव्य आयोजन प्रातः 11 बजे से प्रारंभ होकर देर रात तक चलेगा, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और सनातन संस्कृति का अद्भुत समन्वय देखने को मिलेगा।

देशभर के प्रतिष्ठित संतों का होगा महासमागम

इस आयोजन की भव्यता का मुख्य केंद्र यहाँ होने वाला संतों का समागम है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी अयोध्या के पूज्य महंत श्री राजू दासजी महाराज, मलूक पीठ बागेश्वरधाम वृंदावन के आचार्य रोहित रिछारिया, राजेश्वरम परिवार पचोखराधाम के पूज्य महंत गुरुप्रसाद जी महाराज और पूज्य अंकित कृष्ण भटुक जी सहित देशभर से कई गणमान्य संत पधार रहे हैं। यह दिव्य आयोजन मुंबई निवासी रमेश गोवाणी द्वारा अपने माता-पिता स्वर्गीय घमंडीराम व अंकीबाई की पुण्य स्मृति में 'कमला अंकीबाई घमंडीराम गोवाणी ट्रस्ट' के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आकर्षण

आयोजन में प्रवचनों के साथ-साथ सुरीली प्रस्तुतियों का भी विशेष समावेश किया गया है। सुप्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल अपनी मधुर आवाज से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध करेंगी, वहीं 'बन्नो तेरा स्वैगर' फेम प्रसिद्ध गायक बृजेश शांडिल्य और भजन गायक अमित धुर्वे भी अपनी विशेष प्रस्तुतियां देंगे। यह सांस्कृतिक संगम आयोजन को और भी गरिमामयी बनाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त भक्ति रस का आनंद लेंगे।

प्रशासनिक सतर्कता और चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

आयोजन की विशालता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। शनिवार को एसपी मयंक अवस्थी और अपर कलेक्टर संजीव केशव पांडेय ने स्वयं कथा स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। कलेक्टर पांडेय ने श्रद्धालुओं के बैठने और भोजन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया, वहीं एसपी अवस्थी ने हेलिपैड से लेकर पार्किंग और सुरक्षा घेरे को लेकर सूक्ष्म जानकारी ली। सुरक्षा के लिहाज से आयोजन स्थल पर 1500 से अधिक पुलिस जवानों की तैनाती की गई है। साथ ही, निजी सुरक्षा कंपनी के वालंटियर भी व्यवस्था संभालने में सहयोग करेंगे।

सुगम यातायात और हाईटेक सुविधाएं

श्रद्धालुओं को आवागमन में असुविधा न हो, इसके लिए पार्किंग को चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। झाबुआ, राणापुर, पेटलावद, इंदौर और बदनावर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए पृथक-पृथक पार्किंग सुनिश्चित की गई है। आयोजन स्थल यानी 108 धर्मशाला के समीप हजारों स्क्वायर फीट में विशाल पांडाल का निर्माण अंतिम चरण में है, जबकि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के लिए 2400 स्क्वायर फीट का मुख्य मंच तैयार किया गया है। पूरे परिसर में 8 विशाल एलईडी स्क्रीन लगाई गई हैं ताकि अंतिम पंक्ति में बैठा श्रद्धालु भी स्पष्ट दर्शन कर सके। सुरक्षा के लिए चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर परिषद राजगढ़ को सौंपी गई है।

निरीक्षण के दौरान एएसपी पारुल बेलापुरकर, एसडीएम सलोनी अग्रवाल, एसडीओपी विश्वदीप सिंह परिहार, तहसीलदार मुकेश बामनिया, राजगढ़ टीआई समीर पाटीदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और मोहनखेड़ा तीर्थ के मैनेजिंग सुजानमल जैन उपस्थित रहे।


Science of Coconut: नारियल के वाटरप्रूफ खोल के अंदर आखिर कहाँ से आता है पानी? जानें इसके पीछे की असली Reality

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  स्पेशल स्टोरी :   नारियल पानी को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर पेड़ के सबसे ऊपर लगे इस फल के मजबूत कवर के अंदर पानी भरता कैसे है? सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह की बातें होती हैं, लेकिन इसकी असलियत पूरी तरह वैज्ञानिक है। यह कोई बाहरी पानी नहीं है जो बारिश या नमी के जरिए अंदर घुसता हो, क्योंकि नारियल का बाहरी खोल पूरी तरह वाटरप्रूफ होता है।

   इसकी असली प्रक्रिया पेड़ के संवहन तंत्र यानी Vascular System से जुड़ी है। दरअसल, नारियल का पेड़ अपनी जड़ों के जरिए जमीन से पानी और जरूरी मिनरल्स सोखता है। यह पानी ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के जरिए पेड़ के तने से होता हुआ ऊपर फल तक पहुँचता है। नारियल के अंदर जो तरल हमें मिलता है, उसे वैज्ञानिक भाषा में लिक्विड एंडोस्पर्म (Liquid Endosperm) यानी तरल भ्रूणपोष कहा जाता है। यह एक तरह का रिजर्व फूड होता है जो फल के विकास और उसके भ्रूण को पोषण देने के लिए इकट्ठा होता है।

  शुरुआती दौर में यह एंडोस्पर्म पूरी तरह लिक्विड फॉर्म में होता है, जो प्राकृतिक रूप से स्टेराइल और शुद्ध होता है। जैसे-जैसे नारियल पकने लगता है, यही तरल धीरे-धीरे ठोस होने लगता है और किनारे की दीवारों पर जमने लगता है, जिसे हम नारियल की गरी या गूदा कहते हैं। यहाँ यह समझना भी जरूरी है कि नारियल पानी और नारियल का दूध दो अलग-अलग चीजें हैं। नारियल पानी कुदरती तौर पर फल के अंदर मौजूद होता है, जबकि नारियल दूध पके हुए गूदे को पीसकर निकाला जाता है।

  कुल मिलाकर, नारियल के अंदर का पानी असल में पेड़ द्वारा इकट्ठा किया गया वह पोषण है जो फल को बड़ा करने के लिए जरूरी है। यह इलेक्ट्रोलाइट्स और पोटैशियम का सबसे शुद्ध भंडार इसीलिए होता है क्योंकि यह पेड़ की जड़ों से लेकर फल तक एक लंबी और जटिल फिल्टर प्रक्रिया से होकर गुजरता है।

राजगढ़ में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर भव्य स्वच्छता जागरूकता रैली का आयोजन




 
  राजगढ़। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट और नगर परिषद राजगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य स्वच्छता जागरूकता रैली निकाली गई। यह आयोजन स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ भारत अभियान को मजबूती देने के उद्देश्य से किया गया, जिसमें स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।

 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भरी हुंकार

  इस सामाजिक पहल में नगर के विभिन्न विद्यालयों के 300 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रैली का मुख्य लक्ष्य समुदाय को गंदगी से मुक्त रहने और स्वच्छ आदतें अपनाने की प्रेरणा देना था। कार्यक्रम का आयोजन इंदौर संभाग अध्यक्ष महेश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन एवं धार जिला अध्यक्ष योगेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में संपन्न हुआ।

 केसरिया दूध के साथ हुआ शुभारंभ

  रैली का शुभारंभ आमंत्रित विद्यार्थियों और अतिथियों को केसरिया दूध पिलाकर किया गया। पालिका निधि कॉम्प्लेक्स, नगर परिषद राजगढ़ से प्रारंभ हुई इस रैली को वरिष्ठ चिकित्सक एवं धार जिला चिकित्सा प्रभारी डॉ. एम.एल. जैन ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

 प्रमुख मार्गो से निकली रैली

  नगर के मुख्य मार्गों से भ्रमण करते हुए यह रैली नए बस स्टैंड पहुंची। इस दौरान नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक जैन, राष्ट्रीय संयोजक प्रेम कुमार वैद्य, प्रदेश चिकित्सा प्रभारी डॉ. आशीष वैद्य, संभाग संयोजक बी.जे. उपाध्याय, संभाग मंत्री डॉ. बलबहादुरसिंह राठौड़, निलेश सोनी और राहुल जैन सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

गांधी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और संकल्प

  नया बस स्टैंड पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, नगर परिषद के सदस्यों और शिक्षकों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर गांधी जी के आदर्शों पर चलने का आह्वान करते हुए 'स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत' का संदेश दिया गया। उद्बोधन के साथ ही आम सभा का समापन हुआ।

 कार्यक्रम में इनकी रही उपस्थिति

  आयोजन में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के पदाधिकारी संदीप ठाकुर, कैलाश चंद्र बघेल, राजेन्द्र दुबे, जिला विधि प्रभारी प्रवीण कुमार शर्मा, सीता शर्मा, साधना उपाध्याय, बुद्धेसिंह पांडर, शैतान सिंह चौहान, रामसिंह देवड़ा, भारत सिंह खराड़ी, झाबुआ जिला अध्यक्ष प्रदीप शर्मा, सरलेश बैरागी, दिनेश पालीवाल, कुलदीप सक्सेना, सत्यनारायण भाटोद्रा (कुक्षी), सुनील फरबदा और मुन्ना लाल यादव विशेष रूप से उपस्थित थे।

'Savaj' किताब आपको गिर जंगल की अनकही कहानियों के ज़रिए एक रोमांचक सफ़र पर ले जाती है - Alfez Bhatti




 

    पश्चिमी भारत के सूखे पर्णपाती जंगलों में, जहाँ पथरीली पहाड़ियाँ सागौन और बबूल के जंगलों से मिलती हैं, दुनिया की सबसे शानदार संरक्षण कहानियों में से एक ज़िंदा है—गिर का एशियाई शेर। हालाँकि यह इलाका लंबे समय से वैज्ञानिकों और वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित करता रहा है, लेकिन इसकी ज़्यादातर गहरी, कम जानी-पहचानी कहानी बिना दस्तावेज़ों के रही है। गुजरात से आई एक नई किताब "SAVAJ" इसे बदलने की कोशिश करती है।

       गिर फॉरेस्ट के गेटवे जूनागढ़ में लॉन्च हुई "SAVAJ" वाइल्डलाइफ कहानियों का एक खास कलेक्शन है जो भारत के एकमात्र शेर के ठिकाने के इकोलॉजिकल, व्यवहारिक और मानवीय पहलुओं को एक्सप्लोर करता है। भक्तकवि नरसिंह मेहता यूनिवर्सिटी, जूनागढ़ द्वारा पब्लिश और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वाइल्डलाइफ एंड कंजर्वेशन स्टडीज द्वारा प्रोड्यूस की गई इस किताब को सीनियर पत्रकार और लेखक Dhiru Purohit ने संपादित किया है, जिनका करियर इस क्षेत्र से रिपोर्टिंग करने में बीता है।

    सावज की लॉन्चिंग के साथ ही एक दिन की एकेडमिक मीटिंग भी हुई, जिसमें पूरे गुजरात से वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट, रिसर्चर और स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस इवेंट में चर्चा का फोकस मॉडर्न मैनेजमेंट और कंजर्वेशन में भारतीय ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर था - यह एक ऐसा विचार है जो यह किताब खुद फील्ड ऑब्जर्वेशन, साइंटिफिक समझ और कहानी कहने के तरीके को मिलाकर दिखाती है।

     यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, प्रो. डॉ. प्रतापसिंह चौहान के अनुसार, गिर को डॉक्यूमेंट करने के लिए सिर्फ़ ऊपरी जानकारी से ज़्यादा की ज़रूरत होती है। उन्होंने लॉन्च के दौरान कहा, "जब कोई पत्रकार दिखाई देने वाली और जानी-पहचानी चीज़ों से परे वाइल्डलाइफ़ के साथ जुड़ने का फ़ैसला करता है, खासकर गिर जैसे जटिल लैंडस्केप में, तो नतीजा एक दुर्लभ और सार्थक रिकॉर्ड होता है।"

    SAVAJ BOOK की खासियत यह है कि इसे कई लोगों ने मिलकर लिखा है। इस किताब में सात से आठ अनुभवी वाइल्डलाइफ रिसर्चर्स, कंजर्वेटर और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स का योगदान है, जिनमें से हर किसी ने फील्ड में सालों के अनुभव से अपना अलग नज़रिया पेश किया है। ये सभी आवाज़ें मिलकर गिर की एक मल्टीडाइमेंशनल तस्वीर बनाती हैं – जो सिर्फ़ शेर की मशहूर इमेज से आगे बढ़कर पक्षियों, सरीसृपों, जंगल की गतिविधियों और कंजर्वेशन के काम की रोज़मर्रा की सच्चाइयों को भी शामिल करती है।

   किताब के चैप्टर्स में एशियाई शेरों के सामाजिक व्यवहार और टेरिटोरियल पैटर्न की जांच की गई है, जो एक ऐसी प्रजाति है जिसे कभी विलुप्त होने की कगार पर धकेल दिया गया था और अब सावधानी से ठीक हो रही है। दूसरे सेक्शन जंगल के समृद्ध पक्षी जीवन का पता लगाते हैं, उन प्रजातियों पर प्रकाश डालते हैं जिन्हें अक्सर शेर-केंद्रित कहानी के बीच नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। सरीसृप जीवन - जो गिर के इकोसिस्टम का एक ज़रूरी लेकिन कम प्रतिनिधित्व वाला हिस्सा है - को भी किताब के पन्नों में जगह मिली है।

   Gujarat Forest Department के काम पर दिया गया ध्यान भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जिसके लंबे समय के संरक्षण प्रयासों ने गिर की आज की मज़बूती को आकार दिया है। संरक्षण को एक अमूर्त आदर्श के रूप में दिखाने के बजाय, "सावज" इसे एक लगातार, ज़मीनी प्रक्रिया के रूप में दिखाता है जिसमें निगरानी, संघर्ष प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के साथ सह-अस्तित्व शामिल है।

    वाइल्डलाइफ़ फ़ोटोग्राफ़र और कंट्रीब्यूटर Alfez Bhatti, जिनकी तस्वीरें इस किताब में प्रमुखता से दिखाई गई हैं, सावज किताब को तमाशे के बजाय धैर्य का नतीजा बताते हैं। "इस तरह के प्रोजेक्ट्स में सालों लग जाते हैं," वे समझाते हैं। "कैद किए गए कई पल - चाहे वे व्यवहार में बदलाव हों या दुर्लभ नज़ारे - प्लान नहीं किए जा सकते। वे कभी-कभी ही होते हैं। उन्हें एक किताब में सहेजने से ये पल भर की सच्चाईयाँ जंगल से बहुत दूर लोगों तक पहुँच पाती हैं।"

   अल्फेज़ भट्टी की वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी "सावज" के कवर और बैक कवर पेज दोनों पर दिखाई देती है, जो एक ऐसा विज़ुअल टोन सेट करती है जो किताब की कहानी की गहराई को पूरा करता है। उनके लिखे हुए लेख इमेज और इनसाइट के बीच के गैप को और कम करते हैं, जिससे पाठकों को गिर के इलाके में होने का एहसास होता है।

  ऐसे समय में जब वाइल्डलाइफ कंटेंट अक्सर नाटकीय तस्वीरों या आसान कहानियों तक सीमित रह जाता है, किताब सावज खुद को अलग तरह से पेश करती है। यह पाठकों को धीमा होने, पलों के बजाय पैटर्न को देखने और कंजर्वेशन को एक जटिल और लगातार चलने वाली कहानी के रूप में समझने के लिए आमंत्रित करता है। वाइल्डलाइफ बायोलॉजी के छात्रों, कंजर्वेशन प्रोफेशनल्स और एशिया के सबसे महत्वपूर्ण इकोसिस्टम में से एक की प्रामाणिक जानकारी चाहने वाले पाठकों के लिए, किताब "सावज" ज्ञान और दृष्टिकोण दोनों प्रदान करती है।

  यह किताब जल्द ही पूरे भारत के बड़े बुकस्टोर्स पर और बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी, जो गिर के जंगली दिल की कहानियों को दुनिया भर के लोगों तक पहुंचाएगी।

आरएसएस की शताब्दी पर फिल्म 'शतक: संघ के 100 वर्ष' का टीज़र लॉन्च





   मुंबई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर बनी फिल्म 'शतक: संघ के 100 वर्ष' का टीज़र हाल ही में जारी किया गया। यह फिल्म संघ की सौ वर्षों की यात्रा, उसके विचार और सामाजिक योगदान को केंद्र में रखकर बनाई गई है।

  साल 2025 में आरएसएस ने अपने 100 वर्ष पूरे किए। इसी ऐतिहासिक पड़ाव को आधार बनाकर यह फिल्म तैयार की गई है। 'शतक' उस लंबे सफर की कहानी प्रस्तुत करती है, जिसने देश के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। हाल ही में आरएसएस के दिल्ली स्थित कार्यालय केशव कुंज से इस फिल्म के गीत 'भगवा है अपनी पहचान' का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत द्वारा किया गया। इस गीत को प्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह ने अपनी आवाज़ दी है। देशभक्ति से ओत-प्रोत यह गीत फिल्म की भावना और उसके मूल विचार को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।





  टीज़र से यह संकेत मिलता है कि फिल्म संघ से जुड़े कई वर्षों पुराने भ्रम और गलतफहमियों पर भी प्रकाश डालती है। फिल्म का उद्देश्य सिर्फ चर्चाओं या विवादों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि इतिहास, विचार और संगठन के विकास को सही संदर्भ के साथ सामने रखना है। इसमें स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस के योगदान, विभिन्न समय पर लगे प्रतिबंध और आपातकाल जैसे महत्वपूर्ण विषयों की झलक भी दिखाई देती है।
   फिल्म के निर्देशक आशीष मॉल ने कहा, "यह फिल्म मेरे लिए एक व्यक्तिगत यात्रा जैसी है। शोध के दौरान मुझे संघ से जुड़े कई ऐसे पहलू समझने को मिले, जिन पर सामान्यतः चर्चा नहीं होती है। इस फिल्म के जरिए समाज में फैली गलतफहमियों को ईमानदारी से सामने लाना ही हमारी प्राथमिकता रही है।"
   फिल्म के निर्माता वीर कपूर ने बताया, "यह फिल्म पुस्तकों, दस्तावेजों और उपलब्ध साहित्य के आधार पर तैयार की गई है। हमारा प्रयास रहा कि संघ की वैचारिक परंपरा को एक सूत्र में पिरोकर सिनेमाई भाषा में प्रस्तुत किया जाए। 1875 से 1950 के बीच प्रारंभ हुए अनेक आंदोलनों में से सिर्फ संघ ही ऐसा संगठन रहा, जो बिना टूटे निरंतर आगे बढ़ता रहा। यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। फिल्म की टैगलाइन 'ना रुके, ना थके, ना झुके' इसी भाव को दर्शाती है।"
  फिल्म के सह-निर्माता आशीष तिवारी हैं और इसे एडीए 360 डिग्री एलएलपी द्वारा प्रस्तुत किया गया है। अनिल डी अग्रवाल की परिकल्पना पर आधारित और आशीष मॉल द्वारा निर्देशित यह फिल्म 19 फरवरी, 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है।

राजगढ़: पूज्य आचार्य जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा का 43वाँ पाटोत्सव एवं साध्वी कल्पलताश्रीजी का संयम वर्ष प्रवेश उत्साहपूर्वक संपन्न





 


  राजगढ़/धार। श्री सौधर्म बृहदतपोगच्छीय त्रिस्तुतिक पाट परंपरा के देदीप्यमान दिवाकर और संघ एकता के शिल्पी, परम पूज्य आचार्य श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के 43वें पावन पाटोत्सव के शुभ अवसर पर राजगढ़ में विशेष धर्मोत्सव मनाया गया। इसी पावन उपलक्ष्य में पुण्यसम्राट के पट्टधर गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य देवेश श्रीमद् विजय जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी, साध्वी श्री स्वयंप्रभा श्रीजी म.सा. की शिष्या सरल स्वभावी साध्वी श्री कल्पलताश्रीजी म.सा. के संयम जीवन के 62वें वर्ष में प्रवेश का उत्सव भी हर्षोल्लास के साथ आयोजित हुआ।







  शुक्रवार, 30 जनवरी 2026, माघ सुदी बारस को श्रीसंघ राजगढ़ एवं अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक, महिला, तरुण और बहु परिषद परिवार द्वारा न्यू बस स्टैंड स्थित परिषद भवन में प्रातः 9 बजे गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान पुण्य सम्राट के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन, धूप और पूजा कर गुरुवंदन किया गया, जिसके पश्चात उपस्थित जनसमूह में मिठाई का वितरण हुआ। सेवा और जीवदया के संकल्प के साथ इस अवसर पर गौशाला में विशेष योगदान दिया गया। दोपहर में जयंतसेन अष्टप्रकारी पूजा एवं सामूहिक सामायिक का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सम्मिलित होकर धर्म लाभ लिया।