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डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास की जीवनी (Biography of Dr. Janardan Acharya)

डॉ जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास






 


  भारतीय संस्कृति,अध्यात्म (Spirituality) और वैदिक ज्ञान (Vedic Knowledge) के क्षेत्र में डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास एक प्रतिष्ठित नाम हैं। उनका संपूर्ण जीवन सनातन धर्म की सेवा और समाज के नैतिक उत्थान के लिए समर्पित है। वर्तमान में वे जयपुर (Jaipur,Rajasthan) से अपनी आध्यात्मिक सेवाएं (Spiritual Services) प्रदान कर रहे हैं, जबकि उनका पैतृक स्थान बिसाऊ (Bissau) है।

शिक्षा और शैक्षणिक योग्यता (Education and Qualifications)

  डॉ. जनार्दनाचार्य की शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत प्रभावशाली है। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) के राजघाट परिसर से साढे तीन वर्ष का प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद और योग (Naturopathy, Ayurveda, and Yoga) में Graduate + NDDY डिप्लोमा प्राप्त किया है। उनके अगाध ज्ञान और गीता-पुराण (Gita Puran) के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें हॉकिन्स यूनिवर्सिटी,टेक्सास (USA) और सेंट यूनिवर्सिटी, नोएडा द्वारा मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि से सम्मानित किया गया है। इसके अतिरिक्त, दिल्ली में उन्हें 'साहित्य सेवा रत्न' (Sahitya Seva Ratna) की प्रतिष्ठित उपाधि से भी नवाजा गया है।

आध्यात्मिक मिशन और सेवा प्रकल्प (Spiritual Mission and Services)

   ​डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति (Ancient Indian Education System) को पुनर्जीवित करना है। इसी पावन संकल्प की सिद्धि के लिए वे गुरुकुल (Gurukul) और गौशाला (Gaushala) का निस्वार्थ भाव से संचालन कर रहे हैं। समाज को संस्कारों और धर्म से जोड़ने के लिए वे विभिन्न पौराणिक कथाओं जैसे श्रीमद्भागवत (Shrimad Bhagwat), शिव पुराण (Shiv Puran), श्रीदेवी भागवत (Shri Devi Bhagwat) और गणेश पुराण (Ganesh Puran) के माध्यम से ज्ञान की गंगा प्रवाहित करते हैं।
​   उनकी नि:शुल्क सेवाओं (Free Services) का दायरा अत्यंत व्यापक है। वे गौ-सेवा हेतु समर्पित गोकथा (Gokatha), श्री हरिवंश पुराण (Shri Harivansh Puran), नानी बाई रो मायरो (Nani Bai Ro Mayro), भक्तमाल (Bhaktamal), हनुमत कथा (Hanumat Katha) और नियमित गीता क्लास (Gita Class) के माध्यम से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना जगा रहे हैं। इसके साथ ही, समाज के कल्याण हेतु ज्योतिष मार्गदर्शन (Astrology Guidance) और समस्त वैदिक विधि-विधान (Vedic Rituals) भी उनके द्वारा पूर्णतः नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background)

  डॉ. जनार्दनाचार्य का परिवार विद्या और संस्कारों का संगम है। उनके पिता पं. विश्वनाथ बालासरिया एक जाने-माने संगीतज्ञ और कथा वाचक (Storyteller) हैं, जबकि माता श्रीमती विमला देवी के संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को संवारा है। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रक्षा देवी शिक्षा के क्षेत्र में अत्यंत निपुण हैं, जिन्होंने हिंदी में एमए (MA Hindi) और संस्कृत में शास्त्री, आचार्य (Acharya) एवं शिक्षा शास्त्री की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उनके बच्चे भी उच्च शिक्षा (Medical and Arts) के माध्यम से उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हैं।

संपर्क और सोशल मीडिया (Contact and Social Media)

  धर्म और अध्यात्म से जुड़ने के लिए डॉ. जनार्दनाचार्य अपने यूट्यूब चैनल (YouTube Channel: Sanatan Seva Janardan Acharya) के माध्यम से भी सक्रिय हैं। भविष्य की पीढ़ियों को संस्कारों से जोड़ने के लिए उनका यह मिशन निरंतर जारी है।

FAQ

डॉ. जनार्दनाचार्य श्रीनिवास रामानुजदास कौन हैं?

वे भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वैदिक ज्ञान के प्रचारक एवं आध्यात्मिक गुरु हैं।

वे वर्तमान में कहां से सेवाएं दे रहे हैं?

वे वर्तमान में जयपुर, राजस्थान से अपनी आध्यात्मिक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

उनकी प्रमुख सेवाएं क्या हैं?

गीता प्रवचन, सुंदरकांड, रामायण गान, वैदिक अनुष्ठान, ज्योतिष मार्गदर्शन और आध्यात्मिक परामर्श।

उन्हें कौन-कौन से सम्मान प्राप्त हुए हैं?

उन्हें मानद डॉक्टरेट और साहित्य सेवा रत्न सम्मान प्राप्त हो चुका है।

उनका उद्देश्य क्या है?

प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति, सनातन संस्कृति और वैदिक ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना।

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