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भक्ति का महासंगम: पुरुषोत्तम मास में पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर पर उमड़ेगी श्रीकृष्ण प्रेम की अविरल धारा







 


  जानें क्यों इस समय कथा श्रवण है अनिवार्य – ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज से।



  राजगढ़ (धार)। अध्यात्म और आस्था के संगम 'पुरुषोत्तम मास' के दुर्लभ अवसर पर मालवा की धरा श्रीकृष्ण भक्ति के रंग में सबरोर होने जा रही है। श्री माताजी मंदिर के पवित्र प्रांगण में आगामी 16 मई से 22 मई तक श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। परम पूज्य गुरुदेव ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज जी महाराज के मुखारविंद से निशृत होने वाली यह कथा श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और पुण्य अर्जन का एक अनूठा द्वार खोलेगी।

सौभाग्य का द्वार है पुरुषोत्तम मास: क्यों अनिवार्य है कथा श्रवण?

   ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज जी महाराज के अनुसार, अध्यात्म की दृष्टि से 'अधिक मास' का समय कोई साधारण कालखंड नहीं, बल्कि स्वयं श्रीहरि विष्णु का आशीर्वाद है। जब सूर्य की संक्रांति नहीं होती, तब वह समय 'मलमास' कहलाता था, जिसे स्वयं भगवान ने अपना नाम देकर 'पुरुषोत्तम मास' के रूप में प्रतिष्ठित किया। यही कारण है कि इस विशेष माह में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुना अधिक फलदायी माना गया है।

  यह समय हमें अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से निकलकर आत्म-चिंतन और ईश्वर से जुड़ने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। महाराज श्री बताते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस मास को अपनी समस्त शक्तियाँ प्रदान की हैं, अतः इस अवधि में किया गया कथा श्रवण सीधे श्रीहरि के चरणों तक पहुँचता है। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धर्म, भक्ति और वैराग्य के माध्यम से मानव जीवन को श्रीकृष्णमय बनाने का एक दिव्य प्रयास है।

आयोजन की मुख्य कड़ियाँ:

  राजगढ़ के श्री माताजी मंदिर में आयोजित इस आध्यात्मिक उत्सव में प्रतिदिन शाम 6 से 10 तक अमृत वर्षा होगी। विशेष आकर्षण के रूप में प्रतिदिन अधिक मास की दुर्लभ कथाओं के साथ भव्य भजन-कीर्तन, दिव्य आरती और प्रसाद वितरण का लाभ भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। इस पावन अवसर पर समस्त धर्मप्रेमी जनता को सपरिवार पधारकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ लेने हेतु सादर आमंत्रित किया गया है।
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