धार/इंदौर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर एक अत्यंत प्रभावशाली और स्पष्ट निर्णय सुनाया है। अदालत ने अपने फैसले में इस विवादित परिसर को कानूनी और ऐतिहासिक रूप से 'देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर' स्वीकार किया है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि राजा भोज द्वारा निर्मित यह स्थल मूलतः एक प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षण केंद्र था, जिसे वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पहचाना गया है।
अदालत ने इस परिसर की व्यवस्था को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसका संपूर्ण प्रशासनिक और प्रबंधकीय नियंत्रण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सौंपने का आदेश दिया है। अब परिसर के भीतर होने वाली तमाम धार्मिक गतिविधियों और पूजा-अर्चना का नियमन एएसआई द्वारा ही सुनिश्चित किया जाएगा। इसके साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देशित किया है कि वह लंदन के संग्रहालय में सुरक्षित वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए आवश्यक राजनयिक कदम उठाए। फैसले में सामाजिक सद्भाव का ध्यान रखते हुए यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि मुस्लिम समुदाय आवेदन करता है, तो राज्य सरकार जिले में किसी अन्य स्थान पर मस्जिद के लिए भूमि आवंटन की संभावनाओं पर विचार कर सकती है। यह पूरा निर्णय पुरातात्विक विज्ञान और ऐतिहासिक तथ्यों की मजबूती पर टिका है।


