नई दिल्ली में आयोजित ‘विश्व नवकार महामंत्र दिवस’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah ने वैश्विक शांति, आध्यात्मिक जागरूकता और मानव कल्याण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष और अस्थिरता का माहौल है, ऐसे में नवकार मंत्र का सामूहिक जाप पूरे विश्व के लिए अत्यंत सार्थक और प्रासंगिक पहल है।
उन्होंने कहा कि भारत विविध धर्मों और संप्रदायों का देश है, जहां हर परंपरा में मंत्रों की आध्यात्मिक शक्ति और महत्व का विशेष स्थान है। नवकार मंत्र एक ऐसा सार्वभौमिक मंत्र है, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं है और यह सभी के लिए समान रूप से कल्याणकारी है। यह पूर्णतः निराकार और निरपेक्ष प्रार्थना है, जो मानवता को एकता और शांति का संदेश देती है।
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब लोग श्रद्धा के साथ एक ही मंत्र का सामूहिक जाप करते हैं, तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे समाज, देश और विश्व पर सकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि मंत्र मनुष्य के जीवन को सही दिशा देते हैं, चैतन्य को जागृत करते हैं और अच्छे संकल्पों को मजबूत बनाते हैं।
उन्होंने नवकार मंत्र के आध्यात्मिक अर्थ को समझाते हुए कहा कि ‘नमो’ शब्द पूर्ण समर्पण का प्रतीक है, जो व्यक्ति के भीतर के अहंकार को समाप्त करने की दिशा में पहला कदम होता है। जब व्यक्ति नमन करता है, तभी उसके अहंकार का क्षय शुरू होता है और आत्मशुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
Amit Shah ने कहा कि नवकार मंत्र में पांच परमेष्ठियों—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु—को नमन किया जाता है। अरिहंत वे होते हैं जो अपने आंतरिक शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर लेते हैं, जबकि सिद्ध वे आत्माएं होती हैं जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त कर चुकी हैं। आचार्य, उपाध्याय और साधु समाज को मार्गदर्शन देने वाले आध्यात्मिक गुरु होते हैं, जिनके गुणों का अनुसरण कर व्यक्ति आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यह मंत्र 108 गुणों की सामूहिक वंदना का प्रतीक है, जो इन पांचों परमेष्ठियों में निहित होते हैं। इन गुणों का स्मरण व्यक्ति को संयम, त्याग और साधना की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे इस मंत्र के गूढ़ अर्थ को समझने का प्रयास करें और नियमित अभ्यास के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।
गृह मंत्री ने कहा कि नवकार मंत्र की परंपरा हजारों वर्षों से चली आ रही है और इसमें जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह मंत्र पहले मौखिक रूप से आगे बढ़ा और बाद में शिलालेखों तथा ग्रंथों के माध्यम से संरक्षित किया गया। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा इसके प्रचार-प्रसार के प्रयासों की सराहना की।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि आज के समय में जब विश्व को शांति और सौहार्द की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब नवकार मंत्र का सामूहिक उच्चारण न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि मन के विकारों को भी शांत करता है। इससे आपसी समझ, संवेदनशीलता और भाईचारे की भावना को भी मजबूती मिलती है।



