नर्मदा-माही लिंक परियोजना से अमझेरा में आएगी खुशहाली की नई धारा,पहली बार बिना बारिश के तालाब से निकलेगी जलधारा






 

 विक्रम सिंह राठौर की रिपोर्ट 

 अमझेरा। धार जिले के अमझेरा क्षेत्र के लिए नर्मदा-माही लिंक परियोजना नई उम्मीद और विकास की संभावनाएं लेकर आ रही है। वर्षों से जल संकट और सिंचाई की समस्या का सामना कर रहे अमझेरा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को इस परियोजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित जल प्रवाह व्यवस्था के तहत मां नर्मदा का जल खारवाखाल से कुमारगड्ढे होते हुए अमझेरा तालाब तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद तालाब से पानी आगे प्रवाहित होकर बख्तावर जलाशय तक पहुंचेगा।

  इस परियोजना का सबसे खास पहलू यह होगा कि पर्याप्त जल उपलब्धता होने पर पहली बार अमझेरा तालाब से बिना बारिश के भी पानी की पुर निकलती दिखाई दे सकती है। इसके साथ ही क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थल माता अमका-झमका तीर्थ परिसर तक भी नर्मदा-माही संगम का जल पहुंचने की संभावना क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आस्था और उत्साह का विषय बनी हुई है।

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में जल उपलब्धता और सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में चल रहे प्रयासों के बीच इस परियोजना को अमझेरा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस कार्य को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने के लिए पूर्व जनपद सदस्य कमल यादव सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि लगातार प्रयासरत हैं।

जल संकट से राहत की उम्मीद,अमझेरा की बदल सकती है तस्वीर

  अमझेरा क्षेत्र के लोगों ने पानी की कमी के कठिन दौर को करीब से देखा है। एक समय ऐसा भी था, जब पेयजल के लिए महिलाओं और बच्चों को दूर-दूर तक भटकना पड़ता था। सिर पर पानी के घड़े लेकर लंबी दूरी तय करना और कई बार रातभर जागकर पानी भरने की मजबूरी आम जनजीवन का हिस्सा रही है।

  गर्मी के दिनों में जल संकट और भी गंभीर हो जाता था। अल्पवर्षा और अनियमित मानसून के कारण भविष्य में भी पानी की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं। ऐसे में नर्मदा-माही लिंक परियोजना से क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ने और पेयजल एवं सिंचाई संबंधी समस्याओं को कम करने की उम्मीद जगी है।

पहली बार बिना बारिश के अमझेरा तालाब से निकलेगी पानी की पुर

   इस परियोजना का सबसे आकर्षक दृश्य अमझेरा तालाब से निकलने वाली जलधारा हो सकती है। सामान्यतः बारिश के मौसम में ही तालाबों से अतिरिक्त पानी की पुर निकलती है, लेकिन नर्मदा का पानी तालाब तक पहुंचने और जलस्तर निर्धारित स्तर से ऊपर होने पर बिना बारिश के भी पानी आगे प्रवाहित हो सकेगा।

  प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार खारवाखाल से कुमारगड्ढे होते हुए नर्मदा का जल अमझेरा तालाब तक पहुंचेगा। इसके बाद जल प्रवाह बख्तावर जलाशय की दिशा में आगे बढ़ेगा। इससे क्षेत्र में जल संचयन और जल प्रबंधन की नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।

किसानों के लिए वरदान बन सकती है नर्मदा की जलधारा

  अमझेरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। यहां के किसान काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहते हैं। बारिश में देरी, अल्पवर्षा और अनियमित मौसम के कारण कई बार फसलों की सिंचाई प्रभावित होती है।

  ऐसे में बख्तावर जलाशय तक नर्मदा का पानी पहुंचने से किसानों को नई उम्मीद मिलेगी। जलाशय में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर सिंचाई सुविधाओं को मजबूती मिल सकती है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने,फसलों को समय पर पानी उपलब्ध कराने और किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

भूजल स्तर और पर्यावरण को भी मिल सकता है लाभ

  तालाबों और जलाशयों में पानी की उपलब्धता बढ़ने का सकारात्मक प्रभाव आसपास के पर्यावरण पर भी पड़ सकता है। जल स्रोतों में पानी रहने से भूजल पुनर्भरण को सहारा मिल सकता है। इसके साथ ही पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद मिलने की संभावना है।

  क्षेत्र में जल उपलब्धता बेहतर होने से ग्रामीण जीवन,पशुपालन और कृषि आधारित गतिविधियों को भी नई मजबूती मिल सकती है।

माता अमका-झमका तीर्थ तक पहुंचेगा मां नर्मदा के संगम का पवित्र जल

  अमझेरा का प्राचीन माता अमका-झमका तीर्थ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस तीर्थ परिसर तक नर्मदा-माही संगम का जल पहुंचने की संभावना श्रद्धालुओं के लिए विशेष उत्साह का विषय है।

  मां नर्मदा और माही माता की जलधारा का इस क्षेत्र से जुड़ना स्थानीय धार्मिक आस्था को भी नई पहचान दे सकता है। यदि प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार तीर्थ परिसर तक जल पहुंचता है, तो इससे धार्मिक गतिविधियों और तीर्थ क्षेत्र के विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

अमझेरा के विकास का नया अध्याय

  नर्मदा-माही लिंक परियोजना अमझेरा के लिए केवल पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं,बल्कि जल सुरक्षा,कृषि विकास और ग्रामीण खुशहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित जल प्रवाह सुनिश्चित होने पर क्षेत्र की तस्वीर में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।

  अब क्षेत्रवासियों को उस दिन का इंतजार है,जब मां नर्मदा का जल अमझेरा तालाब तक पहुंचेगा और पर्याप्त जल उपलब्धता के साथ वहां से निकलने वाली जलधारा बख्तावर जलाशय की ओर आगे बढ़ेगी। वर्षों तक पानी के लिए संघर्ष करने वाले अमझेरा क्षेत्र के लिए यह पल नई उम्मीदों और संभावनाओं का प्रतीक बन सकता है।

  मां नर्मदा की जलधारा से अमझेरा की धरती को नई जीवनधारा मिलने की उम्मीद है। यदि यह योजना निर्धारित रूप से सफल होती है, तो आने वाले समय में क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं के लिए खुशहाली का नया अध्याय लिख सकती है।