जूनागढ़। जंगल की खामोशी, वन्यजीवों की गतिविधियां,पक्षियों की उड़ान और प्रकृति के बीच जीवन के अनदेखे क्षणों को कैमरे में कैद करने वाले जूनागढ़ के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर अल्फेज भट्टी ने अपनी पांच साल की फोटोग्राफी यात्रा को ‘इको ऑफ द वाइल्ड’ के जरिए दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। सरदार गेट गैलरी में आयोजित तीन दिवसीय सोलो वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी प्रदर्शनी में वन्यजीव और प्रकृति से जुड़ी चुनिंदा तस्वीरों ने प्रकृतिप्रेमियों और कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया।
सवाणी हेरिटेज कंजर्वेशन प्रा. लि. द्वारा संचालित सरदार गेट गैलरी में आयोजित इस विशेष प्रदर्शनी में अल्फेज भट्टी द्वारा पिछले पांच वर्षों के दौरान अलग-अलग प्राकृतिक क्षेत्रों में खींची गई तस्वीरों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी का आयोजन गुजरात राज्य ललित कला अकादमी के आर्थिक सहयोग तथा वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर किया गया।
‘इको ऑफ द वाइल्ड’ में पांच साल का फोटोग्राफी सफर
2 से 4 अक्टूबर तक चली इस प्रदर्शनी में वन्यजीवों के साथ विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों, सरीसृपों और अन्य जीव-जंतुओं की तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। तस्वीरों में केवल वन्यजीवों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि उनके प्राकृतिक व्यवहार, जीवनशैली और आसपास के पर्यावरण को भी कैमरे के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया गया।
अल्फेज भट्टी पिछले पांच वर्षों से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियों, पक्षियों के व्यवहार और जंगल में घटने वाले विभिन्न प्राकृतिक क्षणों को कैमरे में कैद किया। इन्हीं वर्षों के दौरान तैयार किए गए हजारों फोटोग्राफ्स में से चुनिंदा तस्वीरों को ‘इको ऑफ द वाइल्ड’ के लिए चुना गया।
आठ राष्ट्रीय स्तर के ग्रुप प्रदर्शनियों में हो चुकी है भागीदारी
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर Alfez Bhatti इससे पहले करीब आठ राष्ट्रीय स्तर की ग्रुप फोटोग्राफी प्रदर्शनियों में अपनी तस्वीरें प्रदर्शित कर चुके हैं। हालांकि, ‘इको ऑफ द वाइल्ड’ उनके फोटोग्राफी करियर की पहली सोलो वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी प्रदर्शनी रही।
इस प्रदर्शनी के माध्यम से उन्होंने अपने पांच वर्षों के अनुभव और फोटोग्राफी यात्रा के दौरान तैयार किए गए चुनिंदा कार्यों को एक ही मंच पर प्रस्तुत किया। यही वजह रही कि प्रदर्शनी में आने वाले दर्शकों को वन्यजीव फोटोग्राफी के अलग-अलग पहलुओं को एक साथ देखने का अवसर मिला।
गांधी जयंती पर हुआ प्रदर्शनी का उद्घाटन
‘इको ऑफ द वाइल्ड’ प्रदर्शनी का उद्घाटन 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर किया गया। भक्ति कवि नरसिंह मेहता यूनिवर्सिटी, जूनागढ़ के कुलपति डॉ. प्रतापसिंह चौहान सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया।
उद्घाटन अवसर पर सवाणी हेरिटेज के मैनेजर ऑपरेशंस रोहित शुक्ला, रमेशगिरी गोसाई और आर्यन सोलंकी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इसके अलावा सवाणी हेरिटेज के टूरिज्म हेड राजेश तोतलाणी, रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर पिंटू डी. गुजराती तथा गुलाब पी. सुहागिया सहित कई गणमान्य लोगों ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
तस्वीरों के साथ गिद्ध संरक्षण का संदेश
‘इको ऑफ द वाइल्ड’ केवल फोटोग्राफी प्रदर्शनी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके दौरान वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूकता का संदेश भी दिया गया।
प्रदर्शनी के दौरान वाइल्डलाइफ कंजर्वेशनिस्ट इरशाद भट्टी ने ‘सेव वल्चर कैंपेन’ के तहत गिद्ध संरक्षण के विषय पर उपस्थित लोगों को जानकारी दी। उन्होंने गिद्धों की प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका, उनके संरक्षण की आवश्यकता और पर्यावरणीय संतुलन में उनके महत्व को लेकर लोगों को जागरूक किया।
इस पहल ने प्रदर्शनी को केवल कला और फोटोग्राफी से जोड़ने के बजाय वन्यजीव संरक्षण के व्यापक संदेश से भी जोड़ा।
प्रकृतिप्रेमियों और विद्यार्थियों ने देखा वन्यजीवन का अनोखा संसार
तीन दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान प्रकृतिप्रेमियों, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स, कला प्रेमियों, विद्यार्थियों और वन्यजीवन में रुचि रखने वाले लोगों की अच्छी भागीदारी रही।
सरदार गेट गैलरी पहुंचने वाले दर्शकों ने वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार, उनकी जीवनशैली और जंगल में घटित होने वाले विभिन्न प्राकृतिक क्षणों को तस्वीरों के माध्यम से देखा। कई तस्वीरों में वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में जिस तरह कैद किया गया, उसे दर्शकों ने विशेष रूप से सराहा।
आयोजकों के अनुसार, तीनों दिनों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने प्रदर्शनी का दौरा किया और अल्फेज भट्टी के फोटोग्राफिक कार्य को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
फोटोग्राफी के साथ संरक्षण का संदेश
‘इको ऑफ द वाइल्ड’ के माध्यम से अल्फेज भट्टी ने अपनी पांच वर्ष की वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी यात्रा को दर्शकों के सामने रखने के साथ प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देने का प्रयास किया।
वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में कैमरे में कैद करने वाली ये तस्वीरें यह बताती हैं कि जंगल केवल वन्यजीवों का आवास नहीं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र है। इस तरह प्रदर्शनी ने कला, प्रकृति और संरक्षण को एक ही मंच पर जोड़ने का काम किया।
फोटो क्रेडिट: किशन उपाध्याय


