राजगढ़ (धार)। नगर के चारभुजा नाथ मंदिर में 16 अगस्त से प्रारंभ हुई सप्त दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन 17 अगस्त को श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की महिमा, कर्मफल और भक्ति के महत्व का श्रवण किया। परम पूज्य सुभाषचंद्र शर्मा के मुखारविंद से कथा का वाचन किया जा रहा है।
श्रावण मास,नाग पंचमी और सोमवार के पावन अवसर पर आयोजित कथा में रुद्राष्टकम पाठ के साथ भगवान शिव से जुड़ी विभिन्न कथाओं और आध्यात्मिक प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के दौरान सुभाषचंद्र शर्मा ने कहा कि मानव जीवन में अहंकार सबसे बड़ा दुश्मन है। मनुष्य को धन, वैभव, माया अथवा किसी उपलब्धि का अहंकार नहीं करना चाहिए, क्योंकि शरीर भी स्थायी रूप से उसका अपना नहीं है।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति मनुष्य को सरलता, सहजता और विनम्रता का मार्ग दिखाती है। हनुमान जी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि इतने बड़े कार्य करने के बाद भी हनुमान जी ने कभी उसका श्रेय स्वयं नहीं लिया, बल्कि भगवान राम की कृपा को ही सब कुछ माना।
कथा में कर्मफल के सिद्धांत को समझाते हुए गुणनिधि की कथा सुनाई गई। उन्होंने बताया कि भगवान के प्रति श्रद्धा और भक्ति से किया गया छोटा सा कार्य भी जीवन में बड़ा आध्यात्मिक फल प्रदान कर सकता है। इसी क्रम में भीष्म पितामह और अन्य प्रसंगों के माध्यम से कर्मों के परिणाम को समझाया गया।
सुभाषचंद्र शर्मा ने ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, पंचभूतों के पंचकरण तथा मनु-शतरूपा से मानव वंश के विस्तार का प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा की कथाएं केवल धार्मिक प्रसंग नहीं हैं, बल्कि जीवन जीने की दिशा और कर्मों के प्रति जागरूकता का संदेश भी देती हैं।
कथा के दौरान गुरु-शिष्य प्रसंग के माध्यम से सरलता और सहज भक्ति का महत्व बताया गया। उन्होंने कहा कि भगवान को पाने के लिए दिखावे से अधिक सरल हृदय आवश्यक है। वृंदावन की गोपियों और ग्वालों की सहज भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की भक्ति में सरलता और समर्पण का विशेष महत्व है।
सती और दक्ष के प्रसंग के माध्यम से अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं को दूसरों से बड़ा समझने लगता है, तभी उसके पतन की शुरुआत हो जाती है। दक्ष के अहंकार की कथा इसी बात का संदेश देती है कि सम्मान और प्रतिष्ठा मिलने पर भी मनुष्य को विनम्र बने रहना चाहिए।
उन्होंने भगवान शिव की भक्ति के महत्व को बताते हुए कहा कि यदि कोई भक्त भोलेनाथ से सांसारिक वस्तुओं के बजाय भगवान राम की भक्ति मांगता है,तो यह भक्ति की उच्च भावना है। मनुष्य का हृदय काम,क्रोध,लोभ,मोह,मत्सर और ईर्ष्या जैसी प्रवृत्तियों से भर जाता है, इसलिए उसमें भगवान के लिए स्थान बनाने के लिए इन विकारों को दूर करना आवश्यक है।
कथा में नारद जी और भगवान शिव से जुड़े प्रसंग के माध्यम से नाम स्मरण और भजन को जीवन का महत्वपूर्ण साधन बताया गया। उन्होंने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए भक्ति, नाम स्मरण और सत्संग का मार्ग अपनाना चाहिए।
सप्त दिवसीय शिव महापुराण कथा का आयोजन चारभुजा नाथ मंदिर राजगढ़ में किया जा रहा है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण कर रहे हैं।


