राजगढ़ के चारभुजा नाथ मंदिर में चल रही शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन पं. सुभाष शर्मा ने पुण्य,भक्ति,महाकाल, गंगा और नर्मदा की महिमा पर प्रेरणादायक संदेश दिया....
राजगढ़ (धार)। राजगढ़ के चारभुजा नाथ मंदिर में आयोजित सप्त दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या उमड़ी। कथा वाचक पं. सुभाषचंद्र शर्मा ने अपने प्रवचन में पुण्य,भक्ति,महाकाल,गंगा और नर्मदा की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा आनंद धन-दौलत से नहीं,बल्कि भगवान के नाम और भक्ति से मिलता है।
श्रावण में कथा सुनना सबसे बड़ा सौभाग्य
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि श्रावण मास में भगवान के समीप बैठकर शिव महापुराण सुनना हर किसी के भाग्य में नहीं होता। यह अवसर पुण्य के संचय से मिलता है। उन्होंने कहा कि धन तो अनेक लोगों के पास होता है, लेकिन अच्छा मन और श्रेष्ठ भाव केवल पुण्य से प्राप्त होते हैं।
उन्होंने रावण,कंस और हिरण्यकश्यप का उदाहरण देते हुए कहा कि अहंकार अंततः विनाश का कारण बनता है और वास्तविक कर्ता परमात्मा ही हैं।
माता-पिता बच्चों को भक्ति का संस्कार दें
प्रवचन में उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों के लिए हर सुविधा जुटाते हैं, लेकिन सबसे जरूरी भगवान से जुड़ने का संस्कार देना अक्सर भूल जाते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक आनंद महंगी गाड़ियों, बंगलों और संपत्ति में नहीं, बल्कि ईश्वर के नाम में है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि परिवार के साथ समय निकालकर साल में कुछ दिन तीर्थ स्थलों पर कथा और सत्संग में अवश्य शामिल होना चाहिए।
भोलेनाथ सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देव
कथा में भगीरथ की तपस्या का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भोलेनाथ भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उन्होंने गंगा के धरती पर अवतरण और शिव की जटाओं में उनके वेग को नियंत्रित करने की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगाजल केवल जल नहीं,बल्कि श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है।
मीरा बाई की भक्ति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सच्ची भक्ति के लिए बाहरी आडंबर नहीं,बल्कि भगवान से सीधा संबंध जरूरी है।
महाकाल की महिमा का किया वर्णन
प्रवचन के दौरान मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की स्थापना,उज्जैन के राजा वृषभ सेन और एक बालक की निष्कपट भक्ति से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। उन्होंने बताया कि भगवान महाकाल भक्त की सरल भावना से प्रसन्न होकर स्वयं प्रकट होते हैं।
इसके साथ ही भगवान शिव और बालक कृष्ण की मनोहारी लीला का भी वर्णन किया गया,जिसमें भोलेनाथ के वात्सल्य भाव को श्रद्धालुओं ने भावुक होकर सुना।
नर्मदा को बताया कलयुग की गंगा
कथा के अंतिम चरण में उन्होंने नर्मदा नदी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि नर्मदा के दर्शन मात्र से महान पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने संत सियाराम बाबा के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए बताया कि उनकी तपस्या और रामभक्ति आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा केवल यात्रा नहीं,बल्कि आत्मिक साधना का मार्ग है,जहां संतों का सान्निध्य और ईश्वर की अनुभूति प्राप्त होती है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के जयघोष के साथ आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया और प्रवचन के प्रत्येक प्रसंग को श्रद्धा से सुना।

