ओंकारेश्वर। मध्यप्रदेश की तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में विकसित किया जा रहा एकात्म धाम भारत की सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को एकात्म धाम में बनने वाले भव्य पंचायतन मंदिर का शिलान्यास किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संत मंडल, संन्यास परंपरा से जुड़े संतों और अन्य अतिथियों के साथ 45 पवित्र शिलाओं का पूजन कर मंदिर निर्माण की शुरुआत की। वैदिक परंपरा के अनुसार आचार्यों द्वारा विशेष अनुष्ठान भी संपन्न कराया गया।
पंचायतन मंदिर भारतीय एकात्म दृष्टि का प्रतीक
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एकात्म धाम को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, आध्यात्मिक चिंतन और सांस्कृतिक एकात्मता के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अलग-अलग उपासना पद्धतियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाया था।
उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद से मनुष्य के जीवन में परमात्मा के नाम और उसकी अनुभूति का महत्व उजागर होता है। ओंकारेश्वर में विकसित हो रहा यह धाम आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता, संस्कार और चरित्र निर्माण की प्रेरणा देगा।
प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में धार्मिक स्थलों का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की संस्कृति और सामर्थ्य को दुनिया में नई पहचान मिल रही है। मध्यप्रदेश सरकार भी धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ने तथा उनका विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में शुरू हुए एकात्म धाम और मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों को वर्तमान सरकार आगे बढ़ा रही है।
मांधाता पर्वत पर आकार ले रहा दिव्य एकात्म धाम
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मांधाता पर्वत पर विकसित हो रहा एकात्म धाम आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा। यह स्थान आध्यात्मिक शांति, आंतरिक चेतना और भारतीय संस्कृति की समझ को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एकात्म धाम में बनने वाली आध्यात्मिक संरचनाएं समाज में समरसता, सद्भाव, संस्कार और चरित्र निर्माण की भावना को मजबूत करने में योगदान देंगी।
सिंहस्थ-2028 से पहले निकलेगी एकात्म यात्रा
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंहस्थ-2028 से पहले भव्य एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा का समापन सिंहस्थ के दौरान होगा। यात्रा के माध्यम से देश और दुनिया तक भारतीय ज्ञान परंपरा, संत परंपरा और एकात्म दर्शन का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार ओंकारेश्वर और उज्जैन को आध्यात्मिक चेतना के प्रमुख केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। दोनों तीर्थस्थल आने वाले समय में देश के साथ-साथ दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं।
पंचायतन मंदिर में पंचदेवों की होगी उपासना
पंचायतन मंदिर का निर्माण प्राचीन पंचायतन स्थापत्य परंपरा के आधार पर किया जा रहा है। मंदिर के मध्य मुख्य देवालय में भगवान शिव की स्थापना होगी। मंदिर के चारों कोनों पर भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और भगवती शक्ति के उप-देवालय बनाए जाएंगे।
मुख्य मंदिर का शिखर ‘सोमतिलक’ शैली पर आधारित होगा, जबकि गर्भगृह का निर्माण सर्वतोभद्र शैली में किया जाएगा। मंदिर में चारों दिशाओं से प्रवेश की व्यवस्था प्रस्तावित है।
मंदिर परिसर में 100 कलात्मक नक्काशीदार स्तंभ और 8 लघु संरचनाएं बनाई जाएंगी। मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का कलात्मक गुंबद होगा। मंदिर 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान यानी ‘जगति’ पर निर्मित किया जाएगा।
पूरे मंदिर को 121 कलशों से सजाया जाएगा। इसके निर्माण में लगभग 80 हजार घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया जा रहा है।
नागर स्थापत्य शैली में तैयार होगा मंदिर
पंचायतन मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर स्थापत्य शैली में किया जा रहा है। मंदिर के बाहरी वास्तु विन्यास में भद्र, कर्ण, प्रतिरथ, देवकोष्ठ और सजावटी पट्टिकाओं का उपयोग किया जाएगा। भव्य तोरण द्वार मंदिर की स्थापत्य सुंदरता को और बढ़ाएंगे।
पंचायतन परंपरा का मूल भाव विभिन्न देव स्वरूपों में एक ही परम तत्व की उपासना से जुड़ा है। इसी एकात्म दृष्टि को मंदिर के माध्यम से सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी पत्नी सीमा यादव के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

