मध्यप्रदेश में बड़े फैसले : नर्मदा के लिए ‘नमन मिशन’ को मंजूरी,लाड़ली बहना समेत योजनाओं के लिए 1.46 लाख करोड़ रुपये स्वीकृत






 



  भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कृषि, विज्ञान एवं अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं के आगामी वर्षों में निरंतर संचालन के लिए लगभग 1 लाख 46 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

 बैठक का सबसे बड़ा फैसला जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण,पुनर्जीवन और दीर्घकालीन प्रबंधन के लिए ‘निर्मल एवं अविरल माँ नर्मदा मिशन’ यानी ‘नमन मिशन’ के गठन को मंजूरी देना रहा।

नर्मदा संरक्षण के लिए बनेगा ‘नमन मिशन’

  मंत्रि-परिषद ने नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण के लिए नमन मिशन को एकीकृत, वैज्ञानिक और बहु-विभागीय संस्थागत व्यवस्था के रूप में विकसित करने की स्वीकृति दी है। सरकार के अनुसार मध्यप्रदेश की करीब 33 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर निर्भर है।

  नमन मिशन को मध्यप्रदेश सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1973 के तहत स्वायत्त संस्था के रूप में पंजीकृत किया जाएगा। मिशन की सर्वोच्च साधारण सभा की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष होंगे, जबकि 19 सहभागी विभागों के मंत्री सदस्य रहेंगे। नदी विज्ञान, जल विज्ञान, पर्यावरण, जैव विविधता और सामुदायिक प्रबंधन के विशेषज्ञों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में होगी कार्यकारिणी समिति

  मिशन की प्रशासनिक कार्यकारिणी समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव उपाध्यक्ष तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। IISER, IIT, IRMA, NIH, IIFM, ICAR और NEERI जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को भी मिशन से जोड़ा जाएगा।

नर्मदा के लिए हर साल 100 करोड़ रुपये का राज्य अनुदान

  नर्मदा संरक्षण और विकास कार्यों के लिए ‘निर्मल एवं अविरल नर्मदा मिशन निधि’ के तहत राज्य अनुदान से प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके अलावा CAMPA निधि से भी प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये का उपयोग किया जाएगा। CSR, केंद्रीय सहायता और PPP मॉडल के जरिए भी संसाधन जुटाने की व्यवस्था की गई है।

AI और GIS से होगी नर्मदा की निगरानी

  नमन मिशन की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट आधुनिक तकनीक के माध्यम से नदी के स्वास्थ्य का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा एनालिटिक्स, GIS, रिमोट सेंसिंग, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और जलवायु परिवर्तन मॉडलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

लाड़ली बहना योजना के लिए 1,14,365 करोड़ रुपये

  मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 1 लाख 14 हजार 365 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। वर्तमान में योजना के तहत लगभग 1.27 करोड़ महिलाओं को प्रतिमाह 1500 रुपये की आर्थिक सहायता DBT के माध्यम से दी जा रही है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये

  मध्यप्रदेश लाड़ली लक्ष्मी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 16,326.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सरकार के अनुसार अब तक करीब 50.99 लाख बालिकाएं योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लिए 2,137.65 करोड़ रुपये

  प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 2,137 करोड़ 65 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का उद्देश्य पात्र गर्भवती महिलाओं को मजदूरी की आंशिक क्षतिपूर्ति के रूप में आर्थिक सहायता देना और द्वितीय प्रसव में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 11,835.35 करोड़ रुपये

  प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन और सुदृढ़ीकरण के लिए कुल 11,835.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें उप स्वास्थ्य केंद्र योजना, स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन, अस्पताल एवं औषधालय भवन निर्माण तथा आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि से संबंधित योजनाएं शामिल हैं।

अस्पतालों के भवन और स्वास्थ्य उपकरणों पर भी जोर

  अस्पताल एवं औषधालय भवन निर्माण योजना के लिए 3,219 करोड़ 22 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के उन्नयन एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 518 करोड़ 93 लाख रुपये की राशि मंजूर हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र योजना के लिए 4,742 करोड़ 45 लाख रुपये तथा आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिए 3,354 करोड़ 75 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

कृषि शिक्षा और अनुसंधान के लिए 870.16 करोड़ रुपये

  कृषि शिक्षा,अनुसंधान और कृषि विस्तार गतिविधियों के लिए 870 करोड़ 16 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय,जबलपुर की स्ववित्तीय पेंशन योजना के लिए 310 करोड़ 23 लाख रुपये तथा राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय, ग्वालियर की ब्लॉक ग्रांट योजना के लिए 469 करोड़ 93 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। कृषि अधोसंरचना विकास योजना के लिए 90 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।

विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र के लिए 734 करोड़ रुपये

  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अनुसंधान,नवाचार और वैज्ञानिक क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 734 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। सरकार के अनुसार पिछले 20 वर्षों में वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षमता निर्माण के लिए राज्य बजट में लगभग 150 गुना वृद्धि हुई है।

  इस राशि के तहत अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों, विज्ञान के प्रसार, प्रशासनिक व्यवस्था और मध्यप्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक विकास निगम की गतिविधियों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में विज्ञान जागरूकता कार्यक्रम, मोबाइल विज्ञान प्रयोगशालाएं, नवाचार कार्यशालाएं और विज्ञान मेलों जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

सड़क विकास निगम में 35 नए पदों को मंजूरी

  मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम की पद संरचना में 35 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही पहले से स्वीकृत 7 पदों की निरंतरता आगामी पांच वर्षों यानी 18 सितंबर 2031 तक रखी जाएगी। नए पदों के कारण करीब 4 करोड़ 12 लाख रुपये का वार्षिक वित्तीय भार संभावित है, जिसकी पूर्ति निगम अपने स्रोतों से करेगा।

  मंत्रि-परिषद के इन फैसलों से नर्मदा संरक्षण, महिला कल्याण, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि अनुसंधान, विज्ञान एवं तकनीकी विकास तथा सड़क अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में आगामी वर्षों के लिए सरकार की प्राथमिकताओं का संकेत मिलता है।