राजगढ़ (धार)। मोहनखेड़ा महातीर्थ में चातुर्मास के दौरान सेवा और समर्पण की प्रेरणादायी मिसाल देखने को मिली। गुरु भक्त परिवार की ओर से चातुर्मास आराधकों,मंदिरों के पुजारियों और तीर्थ स्टाफ की सुविधा के लिए 1008 छतरियों का वितरण किया गया। श्रद्धा और सेवा भावना से जुड़े इस आयोजन को तीर्थ पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने सराहनीय पहल बताया।
यह सेवा कार्य दादा गुरुदेव राजेंद्रसूरीश्वरजी महाराज की पाट परंपरा के अष्टम पट्टधर आचार्य ऋषभचंद्रसूरीजी महाराज के शिष्य एवं वर्तमान आचार्य हितेशचंद्रसूरीजी महाराज के आज्ञानुवर्ती जीतचंद विजयजी की प्रेरणा से संपन्न हुआ। आयोजन के पीछे मातुश्री स्वर्गीय राजुलदेवी तेजराज जैन, बिरामी (पुणे) की प्रेरणा और आशीर्वाद को भी भावपूर्वक स्मरण किया गया।
वितरण अभियान के तहत मोहनखेड़ा महातीर्थ,भोपावर और राजगढ़ स्थित राजेंद्र भवन के स्टाफ के साथ-साथ विभिन्न मंदिरों में सेवा देने वाले पुजारियों को छतरियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर कुसुम-सुरेश जैन,निकिता-विपुल जैन,आशीष कुमार,दीवित जैन,हैशा जैन,नरेंद्र मार्केटिंग परिवार,घुसीबाई-आशालाल गिरिया मेहता परिवार तथा अमित-मनोज सहित परिवारजनों ने वितरण में सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के दौरान गुरु भक्तों ने कहा कि गुरु चरणों में समर्पित सेवा ही जीवन की वास्तविक सार्थकता है। चातुर्मास के दौरान साधु-साध्वी भगवंतों, आराधकों और तीर्थ सेवा से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए किया गया यह सेवा कार्य समाज में सेवा, श्रद्धा और गुरु भक्ति का प्रेरक संदेश देता है।

