भोपाल । केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स राष्ट्र केवल आर्थिक और राजनीतिक साझेदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साझा संस्कृति, विश्व शांति, पारस्परिक सम्मान और समावेशी विकास की भावना से भी एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं, इतिहास और कलात्मक परंपराओं के बावजूद संगीत और कला ऐसी सार्वभौमिक भाषाएं हैं, जो विभिन्न सभ्यताओं को मित्रता, शांति और आशा के सूत्र में जोड़ने का कार्य करती हैं।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शुक्रवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में ब्रिक्स संस्कृति मंत्री समूह की तीसरी बैठक के अवसर पर आयोजित ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान भारत सहित ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने संगीत, नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से विश्व शांति, सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया।
मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रदेश सदियों से विभिन्न सभ्यताओं, विचारों, आस्थाओं और कलात्मक परंपराओं का संगम रहा है। उन्होंने भीमबेटका के प्रागैतिहासिक शैलचित्रों, सांची की शांति, खजुराहो के भव्य मंदिरों और मध्यप्रदेश के जनजातीय समुदायों की समृद्ध परंपराओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश भारत की हजारों वर्षों की सभ्यतागत यात्रा और सांस्कृतिक विविधता को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है। भारतीय जीवन दर्शन के वसुधैव कुटुंबकम् यानी पूरा विश्व एक परिवार है और अतिथि देवो भव जैसे मूल्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में आतिथ्य केवल सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण सभ्यतागत मूल्य है।
सर्वे भवन्तु सुखिनः से हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव में लगभग 32 मिनट के विशेष संगीत कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः मंगलाचरण से हुई। इसके बाद भारतीय संगीत के रंग कार्यक्रम में हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत की समृद्ध परंपराओं का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया गया।
महोत्सव का प्रमुख आकर्षण ब्रिक्स पीस सॉन्ग रहा। इसमें ब्रिक्स देशों के कलाकारों ने अपनी-अपनी सांगीतिक परंपराओं के माध्यम से शांति, मित्रता और वैश्विक सद्भाव का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन पीस टू ऑल, हार्मनी टू ऑल और क्रेसेंडो ऑफ यूनिटी की सामूहिक प्रस्तुतियों के साथ हुआ।
ब्रिक्स देशों की सांगीतिक परंपराओं का अनूठा संगम
ब्रिक्स पीस सॉन्ग के दौरान बेलारूस, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात सहित सहभागी देशों की सांगीतिक परंपराओं का आकर्षक संगम देखने को मिला।
प्रत्येक देश की प्रस्तुति के साथ भारतीय गान-वृंद ने संबंधित देश की भाषा में सर्वे भवन्तु सुखिनः का गायन किया। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक संवाद, आपसी सम्मान और वैश्विक एकता की भावना को प्रभावी अभिव्यक्ति मिली।
अमृतस्य मध्यप्रदेश में दिखी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव में मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग की ओर से अमृतस्य मध्यप्रदेश शीर्षक से लगभग 35 मिनट की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति भी दी गई। इस प्रस्तुति में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विरासत को मंच पर जीवंत किया गया।
प्रस्तुति में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के साथ भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, राजा भोज, भोपाल, मां नर्मदा और सिंहस्थ-2028 की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत को प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
125 से अधिक कलाकारों ने प्रस्तुत कीं 12 नृत्य विधाएं
अमृतस्य मध्यप्रदेश की प्रस्तुति में 125 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया। इसमें कथक, भरतनाट्यम, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी और समकालीन नृत्य के साथ मार्शल आर्ट तथा मध्यप्रदेश की पारंपरिक लोक नृत्य विधाओं को शामिल किया गया।
गोंड, बैगा, गुदुमबाजा, मटकी, बधाई और बरेदी सहित कुल 12 नृत्य विधाओं का समन्वय प्रस्तुति में देखने को मिला। कार्यक्रम का निर्देशन सुप्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी ने किया, जबकि प्रकाश संयोजन अनूप ‘बंटी’ जोशी ने किया।
मध्यप्रदेश के पारंपरिक वस्त्रों की भी प्रस्तुति
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव में मध्यप्रदेश के पारंपरिक वस्त्रों और प्रिंट्स पर आधारित विशेष फैशन प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। चदरिया झीनी रे झीनी की संगीतमय प्रस्तुति के दौरान लगभग 150 फीट लंबे विशेष लहंगे का प्रदर्शन किया गया।
इस प्रस्तुति का निर्देशन मुमताज खान ने किया। इसके माध्यम से मध्यप्रदेश की समृद्ध वस्त्र परंपरा, पारंपरिक डिजाइन और स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया गया।
वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव-2026 ने संगीत, नृत्य और कला के माध्यम से विश्व शांति, सांस्कृतिक संवाद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वसुधैव कुटुंबकम् की भावना को प्रभावी अभिव्यक्ति दी। कार्यक्रम में विविधता में एकता और आपसी सम्मान का भारतीय संदेश भी प्रमुखता से सामने आया।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भोपाल में आयोजित यह सांस्कृतिक आयोजन ब्रिक्स परिवार के देशों के बीच आपसी समझ और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने ब्रिक्स देशों से आए सभी कलाकारों और अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजन भविष्य में सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक सहयोग को नई दिशा देंगे।
ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 में भारत सहित विभिन्न देशों की कला और सांस्कृतिक परंपराओं का संगम देखने को मिला। संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों के जरिए दिए गए शांति और सद्भाव के संदेश ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बना दिया।



