80वें स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी का बड़ा संदेश,2047 के विकसित भारत के लिए गिनाईं 7 बड़ी शक्तियां

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  नई दिल्ली। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आज हर घर और हर मन तिरंगे की भावना से जुड़ा हुआ है तथा देश नए संकल्पों और नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहा है।

  प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त के अवसर पर लाल किले से वंदे मातरम की गूंज सुनाई दे रही है। उन्होंने कहा कि देश इस वर्ष वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी मना रहा है, इसलिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।

बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के साथ देश

  प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार और पूरा देश उनके साथ खड़ा है तथा मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

बड़े सपनों के साथ विकसित भारत का लक्ष्य

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता उसके सपनों, संकल्पों और सामर्थ्य से तय होती है। अब भारत को छोटे सपनों तक सीमित नहीं रहना है। देश को बड़े लक्ष्य निर्धारित करने होंगे, क्योंकि बड़े सपने सोच का दायरा बढ़ाते हैं और मजबूत संकल्प कठिन परिस्थितियों से रास्ता निकालने की क्षमता देते हैं।

 उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित भारत बनने का संकल्प लिया है। आजादी के 100 वर्ष पूरे होने पर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य 140 करोड़ देशवासियों के सामूहिक पुरुषार्थ से पूरा किया जाएगा।

गरीबी से बाहर निकले 25 करोड़ लोग

 प्रधानमंत्री ने पिछले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि करोड़ों नागरिकों के प्रयासों का परिणाम है कि करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि एक समय भारत को वैश्विक स्तर पर कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के समूह में गिना जाता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश ने तेज आर्थिक विकास की दिशा में बड़ी प्रगति की है।

विभिन्न क्षेत्रों में तेज विकास

  प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की उत्पादन क्षमता और बुनियादी सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

 उन्होंने बताया कि रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ा है। खादी और ग्रामोद्योग का उत्पादन करीब पांच गुना हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है। आधुनिक रेलवे कोच निर्माण 21 गुना बढ़ा है और मोबाइल फोन उत्पादन करीब 35 गुना बढ़ा है।

 इसी तरह इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। पेटेंट मिलने की संख्या करीब चार गुना बढ़ी है और डिजिटल लेनदेन में लगभग 100 गुना वृद्धि हुई है।

 प्रधानमंत्री ने कहा कि पाइप से जल कनेक्शन, गैस कनेक्शन, गरीबों के लिए घर और शौचालय निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी काम की गति कई गुना बढ़ी है। सरकार ने हजारों अनुपालनों को समाप्त किया और सैकड़ों पुराने कानूनों को हटाया है।

आत्मनिर्भर भारत पर जोर

  प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के लिए आत्मविश्वास, आत्मगौरव और आत्मनिर्भरता जरूरी है। भारत को दूसरे देशों पर अनावश्यक निर्भरता कम करनी होगी और अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा।

 उन्होंने मेक इन इंडिया, स्वदेशी और वोकल फॉर लोकल को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

सेमीकंडक्टर उत्पादन में भारत की नई शुरुआत

 प्रधानमंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मेडिकल उपकरणों, परिवहन और आधुनिक तकनीक में चिप की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है।

 उन्होंने कहा कि भारत में तीन सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और इनसे उत्पादन तथा निर्यात की शुरुआत हो रही है। आने वाले वर्षों में कई और सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

क्रिटिकल मिनरल्स पर भारत का ध्यान

 प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक और उद्योगों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारत ने राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू किया है और बजट में क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर की घोषणा की गई है। कई देशों के साथ इस क्षेत्र में समझौते भी किए जा रहे हैं।

2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य

 ऊर्जा सुरक्षा को भविष्य के भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि चिप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डाटा सेंटर जैसी तकनीकों के विस्तार के साथ बिजली की मांग भी बढ़ेगी।

 उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य रखा है। इसी दशक में पांच नए परमाणु रिएक्टर शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

समुद्र के भीतर ऊर्जा संसाधनों की खोज

 प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए समुद्री क्षेत्रों में भी नए संसाधनों की खोज करनी होगी। उन्होंने बताया कि पहले समुद्री क्षेत्र के बड़े हिस्से को नो-गो एरिया माना जाता था, लेकिन अब ऐसे क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन को बढ़ावा दिया जा रहा है।

 उन्होंने समुद्र मंथन पहल और इस दिशा में 85 हजार करोड़ रुपये के आवंटन का उल्लेख किया।

पाइप गैस और सौर ऊर्जा में विस्तार

 प्रधानमंत्री के अनुसार 2014 से पहले देश के करीब 70 शहरों में पाइप से गैस वितरण की सुविधा थी, जिसे अब लगभग 700 शहरों तक पहुंचाया गया है।

 पाइप गैस कनेक्शन भी लगभग 20 से 22 लाख घरों से बढ़कर करीब पौने दो करोड़ घरों तक पहुंच चुके हैं।

 उन्होंने बताया कि 2014 के आसपास भारत की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावॉट थी, जो अब लगभग 160 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है।

पीएम सूर्यघर योजना से लाखों घरों को लाभ

  प्रधानमंत्री ने पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि 50 लाख से अधिक घरों में सौर ऊर्जा से जुड़े कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इससे अनेक परिवारों का बिजली बिल कम या शून्य हुआ है और कुछ परिवार अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी प्राप्त कर रहे हैं।

रेलवे के विद्युतीकरण में तेजी

 प्रधानमंत्री ने रेलवे विद्युतीकरण की गति का उदाहरण देते हुए कहा कि 1925 में शुरू हुए रेलवे विद्युतीकरण के लगभग 90 वर्षों में करीब 30 प्रतिशत रेल नेटवर्क ही विद्युतीकृत हुआ था। पिछले एक दशक में लगभग 70 प्रतिशत अतिरिक्त विद्युतीकरण का काम पूरा किया गया और रेलवे के विद्युतीकरण को शत-प्रतिशत पूरा करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई।

हाइड्रोजन ट्रेन से नई शुरुआत

 प्रधानमंत्री ने भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक परिवहन के क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

वैश्विक संकटों के बीच आत्मनिर्भरता का महत्व

 प्रधानमंत्री ने कोरोना महामारी और विभिन्न देशों के बीच जारी संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संकटों ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित किया। ऐसे समय में भारत की पहले से की गई तैयारियां उपयोगी साबित हुईं।

 उन्होंने कहा कि उर्वरक की वैश्विक कीमतों में वृद्धि के बावजूद भारतीय किसानों पर पूरा बोझ नहीं डाला गया। यूरिया और डीएपी को किसानों तक अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने आर्थिक भार उठाया।

भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका

 प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज विश्व में एक स्थिर, सम्मानित और भरोसेमंद देश के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। उन्होंने स्थिर सरकार, लोकतंत्र, संविधान और न्याय व्यवस्था को भारत की ताकत बताया।

 उन्होंने कहा कि 2014 के बाद करीब 40 देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं। इससे भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में नए अवसर पैदा हुए हैं।

MSME और निर्यात के लिए बड़ा अवसर

 प्रधानमंत्री ने देश के MSME क्षेत्र से वैश्विक बाजार का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को गुणवत्ता, कीमत और वैश्विक मानकों के मामले में प्रतिस्पर्धी बनाना होगा।

 उन्होंने टेक्सटाइल, मशीनरी, दवाइयों, समुद्री उत्पादों और झींगा निर्यात जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए बढ़ते अवसरों का उल्लेख किया।

2047 के लिए अगले 5 से 7 वर्ष महत्वपूर्ण

 प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के अगले चरण में भारत के लिए आने वाले 5 से 7 वर्ष बेहद महत्वपूर्ण हैं। जो काम कई दशकों में नहीं हो सके, उन्हें आने वाले वर्षों में तेज गति से पूरा करने की आवश्यकता है।

 उन्होंने कहा कि भारत को अपनी कार्य संस्कृति, सोच और काम करने की गति में बदलाव करना होगा। सुधारों को मजबूरी नहीं बल्कि विश्वास के साथ आगे बढ़ाना होगा।

विकसित भारत के लिए सप्तधारा का आह्वान

 प्रधानमंत्री ने लाल किले से विकसित भारत के निर्माण के लिए सात प्रमुख शक्तियों या सप्तधारा का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन सात क्षेत्रों में तेजी से काम करके भारत नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है।

पहली शक्ति: मैन्युफैक्चरिंग

 प्रधानमंत्री ने मैन्युफैक्चरिंग को सप्तधारा की पहली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि भारत को छोटे कंपोनेंट से लेकर बड़े उत्पाद तक पूरी वैल्यू चेन में मजबूत होना होगा।

 डिजाइन से लेकर उत्पादन तक भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का भरोसेमंद केंद्र बनाने पर जोर दिया गया। उन्होंने लागत, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उत्पादन को महत्वपूर्ण बताया।

दूसरी शक्ति: कृषि और फूड प्रोडक्शन

 दूसरी शक्ति कृषि और खाद्य उत्पादन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय किसानों के लिए वैश्विक बाजार खुल रहे हैं। मिलेट्स, मसाले, फल, फूल और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को विश्व बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है।

 उन्होंने प्राकृतिक और रसायन-मुक्त खेती तथा वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही।

तीसरी शक्ति: टेक्नोलॉजी और इनोवेशन

 तीसरी शक्ति तकनीक और नवाचार है। प्रधानमंत्री ने AI, क्वांटम टेक्नोलॉजी, स्पेस, रोबोटिक्स और डाटा सेंटर जैसे क्षेत्रों को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

 उन्होंने कहा कि भारत को केवल तकनीक का बाजार नहीं बनना है बल्कि दुनिया के लिए इनोवेशन हब बनना है। मेड इन इंडिया 6G को आगे बढ़ाने और डिजिटल पब्लिक टेक्नोलॉजी को दुनिया तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

चौथी शक्ति: गति शक्ति

 चौथी शक्ति गति शक्ति है। इसके तहत तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने की बात कही गई।

 हाई स्पीड रेल, आधुनिक हाईवे, इनलैंड वाटरवे, एयरपोर्ट और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स के विस्तार को आवश्यक बताया गया। बंदरगाहों को केवल माल चढ़ाने-उतारने की जगह न रखकर पोर्ट आधारित विकास का केंद्र बनाने की बात भी कही गई।

पांचवीं शक्ति: रक्षा शक्ति

 पांचवीं शक्ति रक्षा क्षेत्र है। प्रधानमंत्री ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।

 उन्होंने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में भारत को नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

 साइबर सुरक्षा को भी आधुनिक रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

छठी शक्ति: ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी

 छठी शक्ति ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी है। ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन मोबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग में भारत को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की बात कही गई।

 भारत की लंबी समुद्री सीमा को ब्लू इकोनॉमी का बड़ा आधार बताते हुए फिशरीज, तटीय पर्यटन और ओशन टेक्नोलॉजी में नए अवसर तलाशने की बात कही गई।

सातवीं शक्ति: भारत का सॉफ्ट पावर

 सप्तधारा की सातवीं शक्ति भारत का सॉफ्ट पावर है। प्रधानमंत्री ने योग, आयुर्वेद, संस्कृति, हस्तशिल्प, फिल्म, एनीमेशन, VFX, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को भारत की वैश्विक ताकत बताया।

 उन्होंने WAVES Summit के माध्यम से भारत के क्रिएटिव सेक्टर और मनोरंजन उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की बात कही।

पर्यटन और कॉन्सर्ट इकोनॉमी पर जोर

 प्रधानमंत्री ने भारत के वन्यजीव, राष्ट्रीय उद्यान, संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए भारत को अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से दुनिया के सामने रखना होगा।

 उन्होंने खेल आयोजनों और कॉन्सर्ट इकोनॉमी को भी रोजगार और पर्यटन बढ़ाने वाला क्षेत्र बताया।

भारत की कंपनियों को वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ने का आह्वान

 प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत की बड़ी कंपनियों को वैश्विक रैंकिंग में ऊपर आना चाहिए। उन्होंने लक्ष्य रखा कि आने वाले एक दशक में Fortune 500 में भारत की 50 कंपनियां क्यों नहीं हो सकतीं।

 उन्होंने बैंकिंग, फार्मा, टेक्नोलॉजी, कंसल्टिंग, अकाउंटिंग और अन्य क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को वैश्विक नेतृत्व हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

युवा शक्ति को विकसित भारत का सबसे बड़ा आधार बताया

 प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की यात्रा का सबसे बड़ा लाभ युवाओं को मिलेगा और इस लक्ष्य को युवाओं के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना जरूरी है।

 उन्होंने स्टार्टअप इंडिया का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में ढाई लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्टअप हो चुके हैं। युवाओं को नए अवसर देने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के इनोवेशन फंड का भी उल्लेख किया गया।

AI स्किल के लिए एक करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण

  लाल किले से प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आने वाले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI स्किल की ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नेतृत्व करने योग्य बनाना है।

बायोइकोनॉमी में तेज वृद्धि

 प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की थी, जो अब लगभग 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।

  इलेक्ट्रिक वाहनों में भी तेजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि 2009-10 में लगभग डेढ़ लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या करीब 25 लाख तक पहुंच गई।

एविएशन और ड्रोन सेक्टर में रोजगार

 प्रधानमंत्री ने एविएशन सेक्टर में नए एयरपोर्ट, नए रूट और रोजगार के अवसर बढ़ने की बात कही। उन्होंने विमान रखरखाव और ओवरहॉलिंग के क्षेत्र में भी भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख किया।

 मेड इन इंडिया C295 डिफेंस ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की उड़ान को भी देश की उपलब्धि बताया गया।

स्वामित्व योजना से संपत्ति का उपयोग

 प्रधानमंत्री ने स्वामित्व योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों को इसका लाभ मिला है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण संपत्तियों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है, जिससे लोगों के लिए बैंक ऋण और कारोबार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग

  प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर कोचिंग का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इसे कम करने के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों और उपलब्ध संसाधनों को जोड़कर विभिन्न परीक्षाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।

खेलों में भारत को नई ऊंचाई देने का लक्ष्य

 प्रधानमंत्री ने खेलों में भारत की बढ़ती उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने खेलो इंडिया, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स, बीच गेम्स, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग, स्पोर्ट्स मेडिसिन और न्यूट्रिशन जैसे क्षेत्रों में विस्तार की बात कही।

 भारत 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी का भी उल्लेख किया।

5 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए टैलेंट हंट

 प्रधानमंत्री ने कहा कि ओलंपिक की कई स्पर्धाओं में भारत की मौजूदगी अभी सीमित है। इसे बदलने के लिए 5 से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में खेल प्रतिभा खोजने के लिए गांव, शहर और स्कूल स्तर पर टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही गई।

 चुने गए प्रतिभाशाली बच्चों को विशेष प्रशिक्षण देकर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।

नशा मुक्त भारत का आह्वान

 प्रधानमंत्री ने नशे को देश के युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान को परिवार, सामाजिक संगठनों, NGOs और युवाओं की सामूहिक जिम्मेदारी बताया।

 उन्होंने 100 सप्ताह तक चलने वाले अभियान से हर परिवार और युवा को जुड़ने का आह्वान किया।

नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का उल्लेख

  प्रधानमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद और माओवाद ने लंबे समय तक देश के कई हिस्सों को प्रभावित किया और बड़ी संख्या में युवाओं तथा सुरक्षा बलों की जान गई।

 उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और विश्वास का माहौल तैयार हुआ है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसक नक्सलवाद के बाद वैचारिक रूप से समाज को प्रभावित करने वाली ताकतों से भी सावधान रहना होगा।

सुरक्षित भारत और आधुनिक सिविल डिफेंस

 प्रधानमंत्री ने कहा कि आधुनिक समय में युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। खतरा केवल सीमा पर नहीं बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग सिस्टम, डाटा सेंटर और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी हो सकता है।

 उन्होंने मिशन सुदर्शन चक्र का उल्लेख करते हुए रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने की बात कही। साथ ही आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए सिविल डिफेंस का एक मजबूत और आधुनिक वॉलंटरी नेटवर्क विकसित करने की घोषणा की।

महिला शक्ति को आगे बढ़ाने पर जोर

  प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बेटियां लड़ाकू विमान, सिविल एविएशन, खेल, STEM शिक्षा और सेना सहित विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं।

 उन्होंने लखपति दीदी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पार हो चुका है और अब छह करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

महिला आरक्षण लागू करने की अपील

  प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।

 उन्होंने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ने से वे देश की नीति निर्माण प्रक्रिया में और प्रभावी योगदान दे सकेंगी।

सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

  प्रधानमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में सामाजिक सुरक्षा का दायरा पिछले वर्षों में काफी बढ़ा है।

 आयुष्मान भारत योजना के तहत 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के बुजुर्गों को भी स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिलने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के स्वास्थ्य खर्च में बड़ी मदद मिली है।

जनगणना में युवाओं से भागीदारी की अपील

  प्रधानमंत्री ने देश में चल रहे जनगणना कार्य का उल्लेख करते हुए युवाओं से सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि सही और सटीक आंकड़े देश की योजनाओं और भविष्य की नीतियों के लिए बेहद जरूरी हैं।

 उन्होंने परिवारों से अपनी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और उपलब्ध डिजिटल व्यवस्था का उपयोग करने का आग्रह किया।

पंचप्रण और राष्ट्रहित का संकल्प

  प्रधानमंत्री ने लाल किले से पहले बताए गए पंचप्रण को याद करते हुए कहा कि देश को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त होकर आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ना होगा।

 उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, भगवान बिरसा मुंडा और ज्योतिबा फुले सहित देश के अनेक महान व्यक्तित्वों के सपनों से प्रेरणा लेने की बात कही।

 प्रधानमंत्री ने देशवासियों से राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हित से ऊपर रखने और कर्तव्य को जीवन की पहचान बनाने का आह्वान किया।

 उन्होंने कहा कि समय भारत का है, अवसर भारत का है और संकल्प भी भारत का है। सपनों को संकल्प में, संकल्प को सामर्थ्य में और सामर्थ्य को सफलता में बदलने के लिए सभी देशवासियों को मिलकर काम करना होगा।

 अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से विकसित भारत के निर्माण के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।