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बर्ड वाचिंग के 25 वर्षों में पहली बार दिखा रेड-नैप्ड आइबिस; पर्यावरण के लिए शुभ संकेत









 



  सरदारपुर (धार) : इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग-47 पर फुलगांवड़ी से चिंचोड़िया मार्ग के बीच स्थित खेतों में 'रेड-नैप्ड आइबिस' (Pseudibis papillosa) पक्षी देखा गया है। पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन, जो पिछले 25 वर्षों से इस क्षेत्र में बर्ड वाचिंग (पक्षी अवलोकन) कर रहे हैं, ने इस पक्षी के दिखाई देने की पुष्टि की है।

पक्षी की विशेषताएं और पारिस्थितिकी

  रेड-नैप्ड आइबिस, जिसे 'इंडियन ब्लैक आइबिस' भी कहा जाता है, भारतीय उपमहाद्वीप का एक स्थानीय (resident) पक्षी है। यह मुख्य रूप से खुले मैदानों, कृषि क्षेत्रों और जलस्रोतों के आसपास पाया जाता है। काले-धूसर रंग के इस पक्षी की पहचान इसके कंधों पर मौजूद विशिष्ट सफेद पैच (white shoulder patch) और सिर पर मौजूद लाल रंग की त्वचा (red warty skin) से की जाती है। इसकी लंबी, नीचे की ओर झुकी हुई चोंच इसे खेतों में कीड़े-मकोड़े और छोटे जीवों को खोजने में मदद करती है।

जैव-विविधता का सकारात्मक संकेत

  पर्यावरणविद सुशील कुमार जैन ने बताया कि इस क्षेत्र में सामान्यतः ब्लैक हेडेड आइबिस देखे जाते हैं, लेकिन रेड-नैप्ड आइबिस का इस विशेष मार्ग पर दिखना स्थानीय जैव-विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड है। पास ही स्थित आनंदखेड़ी तालाब के कारण यह क्षेत्र पक्षियों के लिए भोजन का एक अच्छा स्रोत बना हुआ है। इस पक्षी का यहाँ विचरण करना पर्यावरण के संतुलित और स्वस्थ होने का एक सकारात्मक संकेत है।
 
 
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