राजगढ़ में गूंजी श्रीराम कथा: भगवान ने धनुष नहीं,बल्कि राजाओं के अहंकार को तोड़ा है - ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज

Jyotishacharya Purshottam Bhardwaj Shri Ram Katha Rajgarh Dhar Madhya Pradesh





 
 राजगढ़ (धार) : नगर के सोसाइटी ग्राउंड पर आयोजित भव्य संगीतमय श्रीराम कथा के सातवें दिन रविवार को श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज के मुखारविंद से बह रही श्रीराम कथा की अमृत धारा में हर कोई सराबोर नजर आया। व्यासपीठ से कथा का वाचन करते हुए श्री भारद्वाज जी ने शिव धनुष भंग और परशुराम-लक्ष्मण संवाद के प्रसंग को बड़ी ही गहनता और रोचकता के साथ समझाया।
  
  अहंकार और नम्रता का संदेश देते हुए कथावाचक ने कहा कि जनकपुरी की सभा में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने केवल शिव धनुष को ही नहीं तोड़ा, बल्कि वहां उपस्थित अभिमानी राजाओं के अहंकार और घमंड को भी चकनाचूर किया। उन्होंने शेर और हाथी का प्रेरक उदाहरण देते हुए बताया कि जिस प्रकार जंगल का राजा शेर अपने किसी अभिषेक या वोट से नहीं, बल्कि अपनी सामर्थ्य, साहस और व्यक्तिगत बल से राजा कहलाता है, उसी प्रकार ईश्वर भी समर्थ हैं। भगवान राम की महानता यह थी कि इतना बड़ा कार्य करने के बाद भी उनमें लेशमात्र भी घमंड नहीं था और वे माता सीता के समक्ष विनम्र भाव से मस्तक झुकाए खड़े रहे। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि सामर्थ्य प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि जनकल्याण और सेवा के लिए होती है।

   कथा के अगले चरण में परशुराम जी के आगमन और लक्ष्मण जी के साथ हुए उनके ओजस्वी संवाद का सजीव चित्रण किया गया। श्री भारद्वाज जी ने बताया कि जब परशुराम जी शिव धनुष टूटने पर क्रोधित हुए, तो लक्ष्मण जी ने अपनी तार्किक बातों से उन्हें प्रत्युत्तर दिया। लक्ष्मण जी ने स्पष्ट किया कि रघुकुल की यह परंपरा रही है कि ब्राह्मण, देवता, भगवान के भक्त और गौ माता पर कभी शस्त्र नहीं उठाया जाता। जहां लक्ष्मण जी का क्रोध अग्नि के समान प्रज्वलित था, वहीं भगवान राम की वाणी शीतल जल के समान थी, जिसने अंततः परशुराम जी के क्रोध को शांत किया। ज्योतिषाचार्य जी ने जोर देकर कहा कि जीवन में असंभव दिखने वाले कार्यों को भी विनम्रता और मधुर स्वभाव से सिद्ध किया जा सकता है।
   
  नगर में पड़ रही भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। आयोजन समिति ने भक्तों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। पूरे कथा पंडाल को आधुनिक तकनीक से वातानुकूलित बनाया गया है, जिससे श्रद्धालु भीषण ताप में भी सुकून और शांति के साथ बैठकर प्रभु भक्ति का आनंद ले रहे हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थल पर शीतल पेयजल की सुचारू व्यवस्था की गई है। कथा के साथ-साथ परिसर में राम-नाम महायज्ञ भी अनवरत जारी है, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालु बड़ी संख्या में आहुतियां देकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
   
  कथा की पूर्णाहुति को लेकर लक्ष्मण डामेचा ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस भव्य श्रीराम कथा का समापन 12 मई को होगा। इसके पश्चात, 13 मई को सोसाइटी ग्राउंड पर एक विशाल और ऐतिहासिक आयोजन होगा, जिसमें निःशुल्क सामूहिक विवाह संपन्न कराए जाएंगे। इस विशेष अवसर पर 'नगर चौरासी' के रूप में भव्य महाप्रसादी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें पूरे क्षेत्र का जनमानस एक साथ भोजन ग्रहण करेगा। आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त नागरिकों से इस धार्मिक अनुष्ठान में सहभागी बनने की भावपूर्ण अपील की है।