आत्मा और मन के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय: ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज
राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पांडाल में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के छठवें दिन ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान के मार्ग से परिचित कराया। कथा के प्रारंभ में यजमानों द्वारा मंच पूजन किया गया, जिसके बाद मधुर भजनों की प्रस्तुति पर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर नृत्य करने लगे।
व्यासपीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्री भारद्वाज ने कहा कि मनुष्य का स्वभाव उसकी संगत पर निर्भर करता है। उन्होंने संसार की तुलना एक गंदे नाले से और कथा की तुलना मां गंगा से करते हुए कहा कि जिस प्रकार गंगा का सान्निध्य पतित को भी पावन कर देता है, उसी प्रकार कथा और सत्संग हमारे दूषित विचारों को शुद्ध कर देते हैं। उन्होंने जीवन में 'प्रतिस्पर्धा' (कंपटीशन) के बढ़ते चलन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भौतिक वस्तुओं की होड़ हमें दुख देती है, जबकि भक्ति के मार्ग में की गई प्रतिस्पर्धा आनंद प्रदान करती है।
ज्योतिषाचार्य जी ने परिवार और संस्कारों पर जोर देते हुए कहा कि बेटा अगर अहंकार का रूप है, तो बेटी प्रेम और दया का स्वरूप है। उन्होंने वर्तमान समय में मोबाइल के बढ़ते प्रभाव के बीच गृहणियों को एक अनोखा मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि रसोई में भोजन बनाते समय चकला-बेलन चलाने के साथ-साथ भगवान का नाम लेना चाहिए। जिस प्रकार झूला आगे-पीछे होने पर आनंद आता है, उसी प्रकार बेलन की गति के साथ 'हरे राम-हरे कृष्ण' का जाप करने से भोजन भी प्रसाद बन जाता है।कथा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि शरीर के रोगों के लिए अस्पताल जाना जरूरी है,लेकिन आत्मा, मन और बुद्धि के उपचार के लिए कथा पांडाल ही सबसे बड़ा चिकित्सालय है। यहाँ मिलने वाली 'राम नाम' की टेबलेट मनुष्य के जीवन को तनावमुक्त और निर्मल बनाती है। कथा के अंत में भगवान की महाआरती की गई और प्रसाद वितरण हुआ।
स्थानीय सोसायटी ग्राउंड में भक्ति की बयार के बीच शनिवार से 'मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम नाम जप महायज्ञ' का भव्य शुभारंभ हुआ, जो 12 मई तक अनवरत चलेगा। श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास ट्रस्ट मंडल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस महोत्सव में प्रतिदिन श्रद्धालुओं द्वारा सामूहिक राम नाम जप किया जा रहा है, जिससे पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया है।
आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने बताया कि 12 मई को कथा के समापन के पश्चात, 13 मई बुधवार को विशाल 'नगर चौरासी' और सर्व समाज के 'निःशुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन' का ऐतिहासिक आयोजन होगा। इस सम्मेलन में 108 जोड़ों के विवाह का पावन लक्ष्य रखा गया है, जिसकी तैयारियाँ युद्ध स्तर पर जारी हैं। दोपहर 12:30 से शाम 4 बजे तक चलने वाली इस कथा में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु वातानुकूलित पांडाल में महाप्रसादी का लाभ ले रहे हैं।


