राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पंडाल में प्रवाहित हो रही संगीतमय श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। व्यासपीठ से सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने 'श्री राम चंद्र कृपालु भजमन' और 'भजलो जी हनुमां' जैसे भजनों की स्वर लहरियों के बीच श्रद्धालुओं को भक्ति के मर्म से अवगत कराया। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा कि यह संसार एक अथाह समुद्र है जहाँ दुखों के तूफान आते रहते हैं, किंतु जो प्रभु की शरण में रहते हैं, उन्हें स्वयं भगवान बचाते हैं। उन्होंने राजगढ़ को 'संस्कारों की नगरी' की संज्ञा देते हुए कहा कि भाद्रपद मास में यहाँ के 13 विभिन्न स्थानों पर होती आ रही भागवत और वर्तमान में श्रीराम कथा के आयोजन इस नगर को साक्षात 'मिनी वृंदावन' बना देते हैं। कथा के दौरान सामाजिक एकता और व्यक्तिगत संस्कारों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सुबह की शुरुआत 'बासी मुंह' चाय से नहीं, बल्कि प्रभु के दर्शन और नित्य कर्मों की शुद्धि के साथ होनी चाहिए। जिस प्रकार माता यशोदा बालकृष्ण का श्रृंगार करती हैं, वैसे ही आज की माताओं को भी अपने बच्चों को भक्ति के आभूषणों से सुसज्जित करना चाहिए ताकि समाज में प्रेम और संगठन की शक्ति बनी रहे।
भक्ति के इस उल्लास के बीच,आगामी कार्यक्रमों की घोषणा करते हुए आयोजकों ने बताया कि कल 8 मई से पंडाल में 'श्रीराम नाम जाप महायज्ञ' का शुभारंभ होगा। यह महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8:30 से 11:30 बजे तक चलेगा, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले रामभक्त भी अपनी आहुति देंगे। इस विशेष अनुष्ठान में देश के विभिन्न हिस्सों से दिव्य संतों के सम्मिलित होने की संभावना है।
आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि 12 मई को श्रीराम कथा को विश्राम दिया जाएगा, जिसके अगले दिन 13 मई को एक पुनीत सेवा कार्य संपन्न होगा। इस दिन सर्व समाज के लिए नि:शुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के कई वर-वधू दांपत्य सूत्र में बंधेंगे। इस त्रिआयामी महोत्सव (कथा, जाप और विवाह) का समापन 'नगर चौरासी' के विशाल भंडारे के साथ होगा। वर्तमान में संपूर्ण राजगढ़ नगर इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है।


