राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के विशाल वातानुकूलित पंडाल में आयोजित भव्य संगीतमय श्री राम कथा के चौथे दिन भक्ति और उल्लास का अद्भुत वातावरण निर्मित हो गया। ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज जी ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से जैसे ही भगवान श्री राम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाना शुरू किया, पूरा पंडाल जय श्री राम के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए आचार्य भारद्वाज ने अत्यंत सूक्ष्मता से राम जन्म के पावन मुहूर्त की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को जब मध्य दिवस में सूर्य अपने शिखर पर था, तब न अधिक ठंड थी और न अधिक गर्मी; ऐसे पावन काल में लोक का कल्याण करने के लिए भगवान विष्णु ने राम रूप में अवतार लिया। उन्होंने श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार की भौतिक वस्तुएँ मनुष्य को केवल क्षणिक सुख दे सकती हैं, और जिन चीजों को पाकर आज हम प्रसन्न होते हैं, कल वही हमारे दुख का कारण भी बन सकती हैं। किंतु राम नाम एक ऐसा शाश्वत सत्य है, जो मनुष्य को हर परिस्थिति में सुख और शांति प्रदान करता है।
कथा के मध्य जब भगवान श्री राम के बाल स्वरूप में सजे नन्हे बालक का आगमन हुआ,तो उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा। सुसज्जित धनुष-बाण और मंद मुस्कान लिए उस बालक के रूप में साक्षात प्रभु का प्रतिबिंब देख श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछा दिए और पूरा वातावरण 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान हो गया। कथा के दौरान जैसे ही भगवान के प्राकट्य का समय आया, पंडाल में उत्सव जैसा माहौल बन गया। "भये प्रगट कृपाला, दीनदयाला..." और "अवध में आनंद भयो, जय रघुवर लाल की..." जैसे भजनों पर श्रद्धालु स्वयं को थिरकने से नहीं रोक पाए और उत्साह के साथ जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं।
इस संगीतमय कथा का आनंद लेने के लिए राजगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। आयोजन समिति द्वारा पंडाल में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
आयोजन समिति के लक्ष्मण डामेचा ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि कल 8 मई से पंडाल में 'श्रीराम नाम जाप महायज्ञ' का शुभारंभ होगा। यह महायज्ञ प्रतिदिन सुबह 8:30 से 11:30 बजे तक चलेगा, जिसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले रामभक्त भी अपनी आहुति देंगे। इस विशेष अनुष्ठान में देश के विभिन्न हिस्सों से दिव्य संतों के सम्मिलित होने की संभावना है। 12 मई को श्रीराम कथा को विश्राम दिया जाएगा, जिसके अगले दिन 13 मई को एक पुनीत सेवा कार्य संपन्न होगा। इस दिन सर्व समाज के लिए नि:शुल्क सामूहिक विवाह सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें क्षेत्र के कई वर-वधू दांपत्य सूत्र में बंधेंगे। इस त्रिआयामी महोत्सव—कथा, जाप और विवाह—का विधिवत समापन 'नगर चौरासी' के विशाल भंडारे के साथ होगा। वर्तमान में संपूर्ण राजगढ़ नगर इस भव्य धार्मिक आयोजन को सफल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियों में जुटा हुआ है।
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