सरदारपुर/राजगढ़। धार जिले के सरदारपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक नगर राजगढ़ की शनि गली स्थित अति प्राचीन श्री शनि शीतला माता मंदिर में शनिवार को शनि जयंती का महापर्व अत्यंत हर्षोल्लास और श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर अलौकिक सिंदूरी विग्रह के दर्शन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। पूरे दिन मंदिर परिसर 'जय शनिदेव' के जयकारों से गुंजायमान रहा।
श्री शनि शीतला माता मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित इस एक दिवसीय धार्मिक महोत्सव की शुरुआत सुबह विशेष अभिषेक और पूजन के साथ हुई। दोपहर ठीक 12 बजे भगवान शनिदेव के जन्मोत्सव की मुख्य महाआरती उतारी गई, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय एवं क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ कमाया। इसके पश्चात शाम 4 बजे भगवान को भोग अर्पित कर भोग आरती संपन्न की गई, जिसके तुरंत बाद भव्य भोग प्रसादी (भंडारे) का वितरण शुरू हुआ, जो रात लगभग 9 बजे तक चलता रहा। इस महाप्रसादी के सफल आयोजन में समिति द्वारा शेयर भक्त बने श्रद्धालुओं का विशेष सहयोग रहा। उत्सव का समापन आयोजित हुई भव्य महाआरती के साथ हुआ।
विश्व की एकमात्र 'प्राकृतिक' सिंदूरी प्रतिमा है मुख्य आकर्षण
मंदिर के इतिहास और भूगर्भीय साक्ष्यों के अनुसार,अमूमन पूरे विश्व में शनिदेव की प्रतिमाएं पारंपरिक काले पाषाण रूप में ही पूजी जाती हैं, परंतु राजगढ़ का यह विग्रह अपनी उत्पत्ति से ही अद्वितीय है। सदियों पूर्व यहाँ स्थित एक विशालकाय और प्राचीन वटवृक्ष (बरगद) की कोख और जटाओं को चीरकर यह पाषाण रूप स्वतः भूगर्भ से प्रकट हुआ था। सबसे दुर्लभ बात यह है कि यह स्वयंभू विग्रह अपने प्राकट्य काल से ही प्राकृतिक रूप से सिंदूरी आभा लिए हुए अवतरित हुआ था, जिसे पूरे विश्व की पहली प्राकृतिक सिंदूर प्रतिमा माना जाता है।
वर्तमान में मंदिर समिति द्वारा गर्भगृह में मूल पाषाण स्वरूप के ऊपर चांदी का भव्य मुकुट,छत्र और राजसी चोला चढ़ाकर अत्यंत सौम्य और मनभावन श्रृंगार किया जा रहा है। शनि जयंती के इस पावन पर्व पर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा पुख्ता सुरक्षा और दर्शन व्यवस्थाएं की गई थीं, जिससे हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सुगमता से भगवान के दर्शन किए।।



