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जल संरक्षण में MP देश में नंबर 1,CM मोहन यादव का गंगा दशहरा पर बड़ा आह्वान

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मध्यप्रदेश जल संरक्षण में देश में अव्वल: सीएम डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने इसे प्रदेशवासियों की जागरूकता और जनभागीदारी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि पानी बचाना सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि भविष्य को सुरक्षित करने की जिम्मेदारी है।

गंगा दशहरा पर जल स्रोतों की सफाई का आह्वान

मुख्यमंत्री ने 25 मई को आने वाले Ganga Dussehra के अवसर पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि इस दिन नदी, तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोतों की सफाई, श्रमदान और पौधरोपण जैसे कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।

उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में जल स्रोतों की साफ-सफाई को पुण्य कार्य माना जाता है और इसे सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभाना चाहिए।

जल संरक्षण ही सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल ही जीवन है” और इसके संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi के मार्गदर्शन में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।

जनभागीदारी से बना राष्ट्रीय रिकॉर्ड

राज्य में जनसहभागिता आधारित जल संचय अभियान के तहत अब तक:

  • 5.64 लाख से अधिक कार्य पूरे

  • 2.43 लाख से अधिक कार्यों को स्वीकृति

  • 45,000+ खेत तालाब निर्माण

  • 77,000+ डगवेल रिचार्ज कार्य

  • 3000+ रेन वॉटर हार्वेस्टिंग यूनिट स्थापित

जिला स्तर पर डिंडोरी और खंडवा ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है।

गांव से शहर तक चल रहा अभियान

ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। पंचायतों से लेकर नगर निकाय तक तालाबों, कुओं और बावड़ियों को अतिक्रमण मुक्त करने और उनकी साफ-सफाई का अभियान जारी है।

साथ ही स्कूल, कॉलेज और सामाजिक संस्थाएं भी लोगों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

हर व्यक्ति की जिम्मेदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण सिर्फ सरकार का काम नहीं है। परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर भी पानी बचाने के प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने पंचायतों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और व्यापारिक समूहों से इस अभियान में जुड़ने की अपील की।

मध्यप्रदेश का जल संरक्षण मॉडल अब देश के लिए उदाहरण बनता जा रहा है। यदि जनसामान्य इसी तरह सक्रिय भागीदारी निभाता रहा, तो प्रदेश आने वाले समय में जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित हो सकता है।



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