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वैदिक घड़ी की डिजिटल गूंज: 78 लाख+ लोगों तक पहुँची भारतीय कालगणना,काशी से दुनिया तक पहचान

काशी विश्वनाथ धाम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का दृश्य





 वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ ने भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक परंपरा को डिजिटल युग में नई पहचान दी है। इस अनूठी घड़ी ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 78 लाख 42 हजार 167 से अधिक लोगों तक अपनी पहुंच दर्ज कर एक नया कीर्तिमान बनाया है।

प्रधानमंत्री के अवलोकन से मिली वैश्विक पहचान

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल 2026 को काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन-पूजन के बाद इस वैदिक घड़ी का अवलोकन किया। उन्होंने इसे प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का अद्भुत संगम बताया।

 प्रधानमंत्री के इस दौरे के बाद सोशल मीडिया पर वैदिक घड़ी को लेकर जबरदस्त चर्चा शुरू हुई, जिससे यह पहल देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई।

सोशल मीडिया पर बना ट्रेंडिंग विषय

 माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर #विक्रमोत्सव_वाराणसी भारत में नंबर 1 ट्रेंड पर रहा। इसके साथ ही #Varanasi, #विक्रमादित्य_वैदिक_घड़ी और #VedicClock जैसे हैशटैग्स ने लाखों लोगों को आकर्षित किया।

 प्रधानमंत्री और अन्य आधिकारिक यूट्यूब चैनलों पर लाइव स्ट्रीम को हजारों दर्शकों ने देखा, जबकि राष्ट्रीय टीवी चैनलों के प्रसारण से करोड़ों लोगों तक इसकी जानकारी पहुँची।

क्या है विक्रमादित्य वैदिक घड़ी?

 यह विशेष घड़ी मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विकसित की गई है। इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेंट किया गया।

  4 अप्रैल 2026 को स्थापित यह घड़ी भारतीय पंचांग और खगोलीय गणनाओं को आसान तरीके से प्रस्तुत करती है।

वैदिक घड़ी की प्रमुख विशेषताएँ

  • भारतीय कालगणना पर आधारित समय प्रणाली

  • तिथि, नक्षत्र, योग, करण की सटीक जानकारी

  • ग्रहों की स्थिति का प्रदर्शन

  • सूर्योदय आधारित समय गणना

  • पारंपरिक और वैज्ञानिक ज्ञान का संगम

अब मोबाइल में भी उपलब्ध: Vedic Clock App

 ‘Vikramaditya Vedic Clock’ ऐप इस घड़ी का डिजिटल संस्करण है, जिसे Android और iOS पर डाउनलोड किया जा सकता है।

ऐप की मुख्य खूबियाँ

  • 30 मुहूर्त आधारित समय प्रणाली

  • 7000 वर्षों का पंचांग डेटा

  • 189+ भाषाओं में उपलब्ध

  • राहुकाल, शुभ मुहूर्त और चौघड़िया जानकारी

  • सूर्योदय-सूर्यास्त आधारित समय

  • वैदिक समय अनुसार अलार्म सुविधा

भविष्य की योजना: पूरे देश में विस्तार

  इस डिजिटल सफलता के बाद अब सरकार अयोध्या के श्री राम मंदिर सहित देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंग स्थलों पर वैदिक घड़ियाँ स्थापित करने की योजना बना रही है।

भारतीय संस्कृति का डिजिटल पुनर्जागरण

 विक्रमादित्य वैदिक घड़ी सिर्फ एक तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि भारतीय कालगणना और सनातन ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने का सशक्त माध्यम बन चुकी है।

 यह पहल साबित करती है कि आज की नई पीढ़ी अपनी जड़ों और परंपराओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से समझने के लिए उत्सुक है।






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