राजगढ़। स्थानीय सोसायटी ग्राउंड के वातानुकूलित पंडाल में आयोजित संगीतमय श्री राम कथा के पांचवें दिन ज्योतिषाचार्य परम पूज्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। व्यासपीठ से प्रवचन देते हुए उन्होंने मनुष्य के जीवन में नम्रता और आचरण की शुद्धता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रार्थना और स्तुति में आनंद तभी संभव है जब हमारे शब्दों की नम्रता हमारे चेहरे और देह से भी प्रकट हो। केवल मुख से ईश्वर का नाम लेना और भीतर अहंकार पालना भक्ति की श्रेणी में नहीं आता।
श्री भारद्वाज ने प्रकृति का उदाहरण देते हुए समझाया कि धरती माँ वही फसल देती है जिसका बीज बोया जाता है, वह कभी अपना फैसला नहीं बदलती। इसके विपरीत, आज का मनुष्य शब्दों में कुछ और तथा व्यवहार में कुछ और होता है। उन्होंने रावण और श्री राम के चरित्र की तुलना करते हुए बताया कि रावण धर्म की व्याख्या करने में तो निपुण था, लेकिन आचरण में विफल रहा, जबकि भगवान श्री राम ने अपने सरल, शील और सुंदर स्वभाव से समस्त अयोध्या को जीत लिया था। उन्होंने श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि धर्म को केवल व्याख्याओं तक सीमित न रखें, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारें। यदि हमारे शब्द और व्यवहार एक समान होंगे, तभी जीवन में राम नाम का बीज फलदायी होगा।
8 मई शनिवार से मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम नाम जप महा यज्ञ भी आरंभ हो गया जो 12 मई तक चलेगा। सर्व समाज सामूहिक विवाह सम्मेलन व नगर चौरासी 13 मई बुधवार को आयोजन होगा


