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इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: करोड़पति बने किसान,CM डॉ. मोहन यादव बोले—भाग्योदय का शंखनाद










 भोपाल/इंदौर । मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के नैनोद गांव में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के प्रथम चरण का भूमिपूजन किया। करीब 2360 करोड़ रुपये की लागत से विकसित होने वाला यह Indore Pithampur Economic Corridor प्रदेश के विकास, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को मजबूत करने वाला बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में इकोनॉमिक कॉरिडोर पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिससे इस परियोजना की व्यापकता और भविष्य की दिशा स्पष्ट हुई।

 कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री का पारंपरिक स्वागत किया। जमीन का चार गुना मुआवजा मिलने से उत्साहित किसानों ने उन्हें हल भेंट किया और मुकुट पहनाया। इस मौके पर किसानों ने राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण का सहमति पत्र भी सौंपा। इस इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि का 60 प्रतिशत विकसित भूखंड वापस दे रही है। इस निर्णय के बाद कई किसान करोड़ों रुपये के प्लॉट के मालिक बन गए हैं, जिससे Farmers Benefit MP 2026 के तहत यह मॉडल प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।











किसानों को विकास में भागीदार बनाने का मॉडल

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार कार्य कर रही है और उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश तेजी से प्रगति कर रहे हैं। इसी सोच के साथ किसानों को विकास का भागीदार बनाया जा रहा है।

 उन्होंने कहा कि जब सरकार किसी किसान से जमीन लेती है तो उसका पहला कर्तव्य होता है कि किसान के जीवन-यापन की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर में 60 प्रतिशत विकसित भूमि लौटाने का निर्णय इसी दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। वर्तमान स्थिति में किसानों को करीब 650 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट प्राप्त हुए हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र बनेगा बड़ा औद्योगिक हब

 यह कॉरिडोर इंदौर और पीथमपुर के बीच विकसित किया जा रहा है, जो पहले से ही Pithampur Industrial Area के रूप में जाना जाता है। इस परियोजना से ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, एग्री प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे प्रमुख सेक्टर को सीधा लाभ मिलेगा। MP Industrial Development को नई दिशा देने के साथ यह क्षेत्र निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

 करीब 20.28 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। इसमें 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और आधुनिक अधोसंरचना विकसित की जाएगी। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और राष्ट्रीय राजमार्ग-52 को जोड़ते हुए औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम और तेज बनाएगा। बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलेगा, जिससे MP Economic Corridor News में यह प्रोजेक्ट लगातार प्रमुख बना हुआ है।

विकास के नए द्वार खोलने वाली परियोजना

 मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर, उज्जैन, धार, देवास, शाजापुर और रतलाम जैसे क्षेत्र मिलकर एक बड़े मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहे हैं। यह 8 लेन सुपर एक्सप्रेस वे भविष्य में दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर से जुड़ेगा, जिससे Industrial Corridor India नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और उद्योगों को एक साथ गति मिलेगी।

किसानों के हित में सरकार की प्राथमिकता

 मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले किसानों को पर्याप्त बिजली और सिंचाई सुविधा नहीं मिलती थी, जबकि वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय सुधार किया है। उन्होंने बताया कि सरकार इस वर्ष 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य लेकर चल रही है और किसानों को 2625 रुपये प्रति क्विंटल का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। साथ ही तीसरी फसल के रूप में उड़द लगाने पर 600 रुपये बोनस देने की भी घोषणा की गई है।

रोजगार, निवेश और उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

 इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण से प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। औद्योगिक इकाइयों के स्थापित होने से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना MP Govt Projects के तहत प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

देश की सर्वश्रेष्ठ योजना बनने की ओर

 कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि यह पहली योजना है, जिसमें किसान स्वयं अपनी जमीन देने के लिए आगे आए हैं। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जीडीपी बढ़ाने वाला ग्रोथ सेंटर साबित होगी और लाखों युवाओं को रोजगार प्रदान करेगी। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी इसे विकास, प्रगति और विश्वास का प्रतीक बताया।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएं और भविष्य की दिशा

 इस परियोजना के अंतर्गत सुपर कॉरिडोर से पीथमपुर निवेश क्षेत्र तक लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है। करीब 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास किया जाएगा, जिसकी कुल लागत 2360 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। 75 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और दोनों ओर विकसित बफर जोन इस कॉरिडोर को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विस्तार योग्य बनाएंगे। यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और 52 के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी स्थापित करेगा और औद्योगिक परिवहन को अधिक सुगम बनाएगा।

 इस पूरी परियोजना को मध्यप्रदेश के संतुलित शहरीकरण और अधोसंरचना आधारित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रदेश को औद्योगिक, आर्थिक और सामाजिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा।

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