सरदारपुर (धार): आज देशभर के गौ भक्तों और सनातन धर्मावलंबियों ने एकजुट होकर एक स्वर में गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए हुंकार भरी। 'गौ सम्मान आह्वान अभियान' के तहत मध्यप्रदेश के सरदारपुर सहित देश की लगभग 5400 तहसीलों में एक साथ प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग की गई।
विशाल रैली और 'जय गौमाता' का उदघोष
सरदारपुर के खेर परिसर मैदान से प्रारंभ हुई यह विशाल रैली नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील कार्यालय पहुंची। रैली में हजारों की संख्या में गौ भक्त, साधु-संत, महिलाएं और युवा शामिल हुए। हाथों में भगवा ध्वज लिए भक्तों ने 'जय गौमाता, जय गोपाल' के नारों से पूरे आकाश को गुंजायमान कर दिया।
राष्ट्रपति के नाम सौंपा 5 सूत्रीय ज्ञापन
तहसील मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
संवैधानिक दर्जा: गौमाता को तत्काल 'राष्ट्रमाता' के रूप में संवैधानिक मान्यता दी जाए।
पृथक गौ मंत्रालय: केंद्र और राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र 'गौ मंत्रालय' बनाया जाए, जो केवल गौवंश की सेवा और विकास पर केंद्रित हो।
गौ-वध पर पूर्ण प्रतिबंध: देशभर में गौ-वध की घटनाओं को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
नंदी महाराज का संरक्षण: सड़कों पर बेसहारा घूम रहे नंदी और गौवंश के लिए सुरक्षित स्थान और चारे की व्यवस्था की जाए।
"आस्था का सैलाब,न कि राजनीतिक प्रदर्शन"
मीडिया से चर्चा करते हुए गौ सेवकों ने कहा कि यह कोई राजनीतिक रैली नहीं बल्कि सनातन धर्म की आस्था का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1967 से चली आ रही इस मांग को लेकर अब पूरा हिंदू समाज जागरूक हो चुका है। "गौमाता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का आधार हैं। जब तक उन्हें राष्ट्रमाता का सम्मान नहीं मिल जाता और गौ-हत्या पूरी तरह बंद नहीं होती, यह वैचारिक और सामाजिक संघर्ष जारी रहेगा।" — स्थानीय गौ सेवक
मातृशक्ति और युवाओं का अभूतपूर्व समर्थन
आंदोलन में महिलाओं (मातृशक्ति) ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। ग्रामीण अंचलों से आए युवाओं ने भी गौ सेवा का संकल्प लिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए इसे उचित माध्यम से शासन तक पहुँचाने का आश्वासन दिया है।



