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Kuno National Park: 57 चीतों के साथ Project Cheetah की बड़ी सफलता,भारत बना ग्लोबल ब्रीडिंग हब

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 भोपाल: कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ चीतों का आश्रय स्थल नहीं,बल्कि दुनिया के उभरते Cheetah Breeding Center के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। प्रोजेक्ट चीता के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीते यहां की जलवायु में पूरी तरह ढल चुके हैं और लगातार नई पीढ़ी को जन्म दे रहे हैं।

57 चीतों के साथ नई ऊंचाई पर कूनो

  कूनो में चीतों की कुल संख्या अप्रैल 2026 तक बढ़कर 57 हो चुकी है। इनमें से 27 से ज्यादा शावक भारत में जन्मे हैं, जो इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। हाल ही में मादा चीता गामिनी ने 3 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया, जबकि इससे पहले ज्वाला, निर्वा और आशा भी शावकों को जन्म दे चुकी हैं।

चुनौती से सफलता तक का सफर

  शुरुआती दौर में इस परियोजना को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लेकिन कूनो का प्राकृतिक वातावरण, पर्याप्त शिकार और विशेषज्ञों की निगरानी ने इन चुनौतियों को पार कर लिया। अब मादा चीतों का लगातार प्रजनन इस बात का संकेत है कि वे यहां सुरक्षित और सहज महसूस कर रही हैं।

 इस महत्वाकांक्षी योजना को नरेंद्र मोदी के विजन और मोहन यादव के नेतृत्व में आगे बढ़ाया गया, जिससे वन्यजीव संरक्षण में एक नया इतिहास बन रहा है।

वाइल्डलाइफ टूरिज्म और रोजगार में बढ़ोतरी

 कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या का सीधा असर पर्यटन (Wildlife Tourism) पर पड़ा है। श्योपुर और आसपास के इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है, जिससे:

  • स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है

  • होटल, गाइड और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ग्रोथ हो रही है

  • क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है

प्रोजेक्ट चीता: अब तक की टाइमलाइन

2022: ऐतिहासिक शुरुआत

17 सितंबर 2022 को नामीबिया से 8 चीतों को कूनो में छोड़ा गया। यह दुनिया का पहला अंतरमहाद्वीपीय बड़े शिकारी का ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट था।

2023: पहली बड़ी सफलता

दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते आए।
मार्च 2023 में ज्वाला ने 70 साल बाद भारत में पहले शावकों को जन्म दिया।

2024: प्रजनन में तेजी

गामिनी ने 5 शावकों को जन्म देकर रिकॉर्ड बनाया। चीतों को खुले जंगल में छोड़कर उनके प्राकृतिक व्यवहार को पुनर्स्थापित किया गया।

2025–26: विस्तार और नई पीढ़ी

  भारत में जन्मी मादा मुखी ने भी शावकों को जन्म दिया, जो जेनेटिक ब्रीडिंग की बड़ी उपलब्धि मानी गई।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नए चीते लाए गए।

वैज्ञानिक ट्रैकिंग और नई पहचान प्रणाली

 अब वन विभाग चीतों की पहचान नाम के बजाय कोड सिस्टम (जैसे KP-1, KP-2) से कर रहा है। इससे उनकी वंशावली (Genetic Lineage) को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा।

गांधी सागर बनेगा दूसरा घर

 कूनो पर बढ़ते दबाव को देखते हुए अब गांधी सागर अभयारण्य को चीतों के दूसरे आवास के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे प्रोजेक्ट को और विस्तार मिलेगा और चीतों की स्थायी वापसी सुनिश्चित होगी। 

 कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बढ़ती संख्या और लगातार हो रहा प्रजनन साफ दिखाता है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ अब जमीन पर सफल होता नजर आ रहा है। जिन चीतों को कभी भारत से पूरी तरह खत्म माना गया था, वही अब यहां नई पीढ़ी के साथ बसते दिखाई दे रहे हैं। अगर इसी तरह व्यवस्थाएं मजबूत रहीं, तो आने वाले समय में कूनो देश ही नहीं, दुनिया के लिए एक उदाहरण बन सकता है।

 

 


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