सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या फेमिनिज्म या आधुनिकता के नाम पर इस तरह का कंटेंट सही ठहराया जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि आजकल कुछ कलाकार और कंटेंट क्रिएटर लोकप्रियता और व्यूज़ पाने के लिए सीमाएं लांघते नजर आते हैं। केवल फिल्मों तक ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी कई ऐसे वीडियो और रील्स देखने को मिलते हैं जिनमें अश्लीलता और गैर-जिम्मेदाराना कंटेंट खुले तौर पर फैलाया जा रहा है। इससे समाज, खासकर युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
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कई लोगों का मानना है कि मनोरंजन के नाम पर समाज को गलत दिशा में ले जाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि कलाकारों और निर्माताओं को यह समझना चाहिए कि उनका प्रभाव लाखों लोगों पर पड़ता है, इसलिए उन्हें अपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से मांग की है कि इस तरह के कंटेंट पर सख्त नियम बनाए जाएं और अगर कहीं मर्यादा का उल्लंघन होता है तो उस पर कार्रवाई भी होनी चाहिए। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो मनोरंजन की आड़ में समाज में फूहड़ता और अश्लीलता का चलन और तेजी से बढ़ सकता है।



