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जैन समुदाय ने जताया प्रधानमंत्री का आभार,केंद्र सरकार द्वारा प्राकृत भाषा शास्त्रीय भाषा घोषित

 






  जयपुर (राजस्थान) l प्राकृत भाषा भारत की एक प्राचीन भाषा है जिससे भारत की अन्यान्य भाषाओं और बोलियों का जन्म हुआ है । इस भाषा में हजारों की संख्या में जैन आगम लिखे गए जो लगभग 2000 वर्ष से भी ज्यादा प्राचीन हैं । प्राकृत भाषा के विद्वानों और राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् की पिछले कई वर्षों से मांग थी कि इसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा सरकार द्वारा दिया जाय ताकि इस भाषा का संरक्षण और संवर्धन किया जा सके । विद्वानों और राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अनुरोध को स्वीकारते हुए भारत सरकार ने प्राकृत भाषा को शास्त्रीय दर्जा प्रदान करने की घोषणा  कर अल्पसंख्यक वर्ग के जैन समुदाय को तोहफा प्रदान किया है । इसके साथ साथ उन्होंने पाली,असमिया,मराठी,बंगला भाषा को भी शास्त्रीय भाषा का दर्जा प्रदान किया है । 

  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की नेतृत्व वाली सरकार ने आरंभ से ही भारतीय भाषाओं के संरक्षण की मुहिम छेड़ रखी है । नई शिक्षा नीति में भी भारतीय भाषाओं को प्रमुखता प्रदान की गई है तथा अन्यान्य अनेक निर्णय इस पक्ष में लिए गए है ।

  प्राकृत भाषा में ही प्रकाशित होने वाली प्रथम पत्रिका पागद - भासा के संपादक प्रो अनेकांत कुमार जैन ने बताया कि प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से अनुरोध किया जा सकेगा कि वह केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शास्त्रीय भाषाओं के लिए व्यावसायिक पीठें बनाए और शास्त्रीय भाषाओं के प्राचीन ग्रंथों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के लिए रोजगार पैदा होगे l 

  इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया की प्राकृत भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने से कई फायदे होगे खास तौर पर अकादमिक और शोध के क्षेत्रों में रोजगार के कई अवसर पैदा होगे और शास्त्रीय भाषाओं के प्रतिष्ठित विद्वानों के लिए हर साल दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिए जाएंगे तथा शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे l 

  राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के पदाधिकारियों और प्रो अनेकांत कुमार जैन ने भारत सरकार द्वारा प्राकृत भाषा शास्त्रीय भाषा घोषित करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी,अल्पसंख्यक कैबिनेट मंत्री किरेन रिजिजू राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन,राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष इकबाल सिंह लालपुरा, उपाध्यक्ष एवं राजस्थान प्रभारी केरसी कैखुशरु देबू,सदस्य धन्य कुमार जिनप्पा गुंडे,रिनचेन लम्हो ,सैयद शहजादी का आभार प्रकट करते हुए उनका इस कार्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित है ।



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