BREAKING NEWS
latest
TIMES OF MALWA
DIGITAL SERVICES
PR • MEDIA PROMOTION • SEO • NEWS COVERAGE • CGI ADS • SOCIAL MEDIA
TIMES OF MALWA
PR • SEO • CGI ADS • NEWS PROMOTION
VISIT NOW

श्री राजेन्द्रसूरि गुरुपद आराधना द्वितीय दिन,धार्मिक शिक्षा व्यक्ति के लोक और परलोक सुधारने में सक्षम: मुनि पीयूषचन्द्रविजय

 


राजगढ़ (धार) । श्री राजेन्द्रसूरि गुरुपद आराधना का आज द्वितीय दिन है ओर हम दादा गुरुदेव के जीवन वृतांत का श्रवण कर रहेे है । दादा गुरुदेव का चारित्र पवित्र था । कल पारख गौत्र का इतिहास जाना था । दादा गुरुदेव का जन्म पौष सुदी सप्तमी 03 दिसम्बर 1827 को हुआ था । बाल्यकाल में माता-पिता ने उनका नाम रत्नराज रखा । धर्मनिष्ठ माता-पिता वो होते है जो अपनी संतान को दृष्टिवाद की शिक्षा प्रदान करवाने की भावना रखते है । दादा गुरुदेव को जैन और जैनेत्तर सभी मानते है और सभी पुजते है । स्कूली शिक्षा केवल भौतिक साधन दिलवा सकती है पर धार्मिक शिक्षा का ज्ञान व्यक्ति के लोक और परलोक सुधारने में सक्षम होता है । गौत्र का अपना इतिहास होता है । व्यवहारिक क्षेत्र में हर व्यक्ति को अपने-अपने कुल देवता, कुलदेवी व खेतलाजी की जानकारी होना चाहिये । शास्त्रों में देवी-देवताओं की पूजा को निषेध माना गया है पर व्यवहारिक जीवन में हर श्रावक-श्राविका अपने-अपने कुलदेवता व कुलदेवी की घर में स्थापना करके उनकी पूजा अर्चना करते है । उक्त बात गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने राजेन्द्र भवन में कही । आपने बतलाया कि जीवन में शारीरिक तैयारी से ज्यादा मानसिक तैयारी होना चाहिये । पांच से छः वर्ष की उम्र जीवन की आधारशिला रखने की होती है । दीक्षा लिये बिना दृष्टिवाद की पढ़ाई नहीं हो सकती है । इस विद्या को सीखने के लिये संत बनना पड़ता है । माता केसर देवी से आशीर्वाद और आज्ञा लेकर अपने बड़े भ्राता श्री माणकचंदजी एवं भाभी श्रीमती लीलादेवी के साथ धुलेवा नगर में श्री केसरियानाथ दादा के दर्शन हेतु यात्रा के लिये दादा गुरुदेव निकले । रास्ते में उस यात्रा में अमरपूर के श्रेष्ठिवर्य श्री सौभाग्यमलजी उनकी पुत्र रमा भी उनके साथ यात्रा में जुडे । अचानक रमा प्रेतात्मा के चपेट में आयी और विकराल रुप धारण कर लिया । प्रेतात्मा को रमा से दूर करने के सारे प्रयास निरर्थक साबित हुये तब श्री रत्नराज ने अपनी बाल्यावस्था में अपने बड़े भाई से आज्ञा लेकर रमा को नवकार मंत्र के प्रभाव से प्रभावी जल का छिडकाव कर प्रेत बाधा से मुक्त किया ।

प्रवचन माला में मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा. भी उपस्थित रहे । 

आज मंगलवार को त्रिदिवसीय आराधना के द्वितीय दिन दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की आराधना एकासने के लाभार्थी श्रीमती मोहनबेन भेरुलालजी फरबदा परिवार राजगढ़ की ओर से श्री राजेश फरबदा का बहुमान राजगढ़ श्रीसंघ की और से पुखराजजी मेहता परिवार द्वारा किया गया ।

« PREV
NEXT »