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प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन-"कुछ खास होगी 15 अगस्त की यह तारीख"


  वैसे तो 1947 से 15 अगस्त की तारीख हमारे लिए हमेशा ही खास महत्व की रही है, क्योंकि इसी दिन 1947 में भारत अंग्रेजी शासन से मुक्त हुआ और हम स्वाधीन हुए । लेकिन इस बार यह तारीख कुछ और वजहों से खास बनने की उम्मीद है। 

    इस 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सातवीं बार लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। वैसे तो प्रधनमंत्री हमेशा ही देश को महत्वपूर्ण उद्बोधन देते रहे हैं लेकिन इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के राष्ट्र के नाम इस संबोधन पर, कुछ विशेष कारणों से देश व दुनिया की विशेष निगाहें रहेंगी।

    समूची दुनिया के साथ भारत भी कोरोना संक्रमण की महामारी से जूझ रहा है और दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञानियों के साथ इस महामारी का कारगर इलाज ढूंढने के लिए प्रयासरत है। कई छोटे-बड़े देशों के बीच कोरोना इलाज की वैक्सीन शीघ्रातिशीघ्र व सबसे पहले दुनिया को उपलब्ध कराने की   प्रतिस्पर्धा-सी चल रही है तो भारत भी इस प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बन वैक्सीन टेस्ट और तैयार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को जब देश को संबोधित करेंगे तो सर्वाधिक उम्मीद इसी बात को लेकर है कि वे कोरोना की वैक्सीन संबंधित किसी सफलता या प्रगति को लेकर कोई घोषणा करें।

     कोरोना संक्रमण के कारण दुनिया के तमाम देशों की तरह ही भारत की अर्थव्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि प्रधानमंत्री ने दो बार आर्थिक पैकेज देकर देश की अर्थव्यवस्था को संबल देने का प्रयास किया है। अब तक के सबसे बड़े 20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज से उन्होंने अर्थव्यवस्था को संजीवनी देने की भी कोशिश की है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस पैकेज का असर परिलक्षित न होने की दशा में अब एक उम्मीद यह भी बन रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त के अपने संबोधन में देश की जनता को बड़ी आर्थिक राहत पहुँचाने की दिशा में महत्वपूर्ण घोषणा करें।

     यह पहला अवसर है जब भारत को कोरोना संक्रमण की महामारी से जूझने के साथ-साथ देश की सीमाओं को लेकर तीन पड़ोसी देशों से एक साथ मिलने वाली चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। चीन अपनी साम्राज्य विस्तारवादी नीति के चलते 1962 की जंग के बाद सीमा को लेकर पहली बार बड़ा संकट खड़ा करने की कोशिश में है। इसी के चलते पाँच दशक के बाद जून में पहली बार गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। हालांकि इस झड़प में हमारे 20 सैनिकों का बलिदान हुआ लेकिन चीन को हमसे कई गुना ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। 

 यही नही गलवान की हिंसक झड़प के बाद भारत सरकार ने उसे कूटनीतिक स्तर पर चौतरफा घेरने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान पहुँचाने वाले भी कई कदम उठाए हैं। लेकिन "चीन है कि मानता नही।" वह रह-रह कर उससे व पाकिस्तान से लगी सीमा के विभिन्न मोर्चों पर घुसपैठ करने का प्रयास कर हमारे लिए खतरा बनने की कोशिश कर रहा है।

    इधर चीन की गोद मे बैठा पाकिस्तान, कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त कर राज्य को दो हिस्सों में विभाजित किये जाने के बाद से अपनी बौखलाहट दिखा रहा है। कश्मीर की आजादी का विलाप कर बदले की भावना से वह कश्मीर में लगभग मृतप्रायः आतंकवाद को ऑक्सीजन देकर खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए वह सीजफायर उल्लंघन कर सीमा पार से बड़ी संख्या में आतंकवादी हमारी तरफ धकेलने के  भरपूर प्रयास में लगातार लगा है। भारत द्वारा सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक करने के बावजूद पाकिस्तान सबक सीखने को तैयार नही है और चीन के उकसावे पर हमें परमाणु युध्द तक की धमकी दे रहा है।

     चीन व पाकिस्तान के साथ अब सदैव हमारा घनिष्ठ मित्र व छोटे भाई जैसा देश नेपाल भी हमारे लिए नई चुनौती के रूप में सामने आया है। नेपाल की सत्ता पर कम्युनिस्ट पार्टी के काबिज होने के बाद चीन के इशारे पर वह नाच रहा है और हमारे क्षेत्रों को अपने नक्शे में प्रदर्शित कर उन पर हक जताने लगा है।

    प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूरदर्शितापूर्ण निर्णयों से अब तक देश को मिल रही चौतरफा चुनौतियों का सामना करते रहे हैं और अपनी वैश्विक पहचान बनाने में सफल रहे हैं। हो सकता है इस 15 अगस्त को जब वे देश को संबोधित करें तो सीमा पर मिल रही इन तीन तरफा चुनौतियों को लेकर देश की जनता में विश्वास व राष्ट्रवाद की भावना जगाने वाली कोई महत्वपूर्ण घोषणा करें। 

    पीओके व आक्साई चीन पर हमारे अधिकार को लेकर गृहमंत्री अमित शाह पहले ही संसद में सरकार व देश का मत स्पष्ट कर चुके हैं। हो सकता है इस संबंध में प्रधानमंत्री कुछ महत्वपूर्ण बोलें।

     देश के विभिन्न राज्यों में भारी बारिश व बाढ़ की विभीषिका के दृश्य देखने को मिल रहे हैं। इस आपदा से बड़े स्तर पर जान-माल का नुकसान हुआ है, बड़े स्तर पर फसल का नुकसान भी किसानों को उठाना पड़ रहा है। हो सकता है 15 अगस्त के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी इसे लेकर कोई बड़े राहत पैकेज की घोषणा करें।

    कोरोना संकट के चलते देश मे बेरोजगारी, बड़ी समस्या के रूप में सामने आई है। इसके लिए प्रधानमंत्री ने "आत्मनिर्भर भारत" का नारा दिया है। हो सकता है वे इस दिशा में आगे बढ़ते हुए 15 अगस्त के अपने उद्बोधन में रोजगार को लेकर सहायता-सहूलियत सम्बन्धी, विशेषकर "इन्टरप्रन्योर" के लिए महत्वपूर्ण घोषणा करें।

     इन तमाम बातों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त के इस ऐतिहासिक अवसर पर कोई अन्य चौंकाने वाली घोषणा भी कर सकते हैं, क्योंकि चौंकाने वाले निर्णय लेने, कार्रवाई करने व घोषणा करने की उनकी कार्यशैली उन्हें विशिष्ट पहचान देती है। अतः इस मायने में यह 15 अगस्त की तारीख कुछ खास बनने वाली है।

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