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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में आचार्य रवीन्द्रसूरीश्वरजी का 67 वां जन्मोत्सव मनाया,आचार्यश्री क्षमा की मूर्ति थे: आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी




 राजगढ़ (धार) म.प्र. 23 अगस्त 2020 । श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वाधान में व दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. मुनिमण्डल व साध्वीवृंद की पावनतम निश्रा में सप्तम पट्टधर अर्हत्ध्यान योगी गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्री रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का ऋषि पंचमी के पावन पुनित अवसर पर जन्मोत्सव मनाया गया ।
इस अवसर पर गच्छाधिपति आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि जिनशासन में क्षमा का बहुत महत्व है । गलती कर लेने के बाद तुरन्त क्षमा मांग लेना चाहिये साथ ही उस गलती को मेहसुस करना चाहिये । जीवन में मित्रता को धारण करना है तो ह्रदय में क्षमा के भावों को स्थान देना पड़ेगा । यह बात हमारे सप्तम पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य श्री रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के रगरग में बसी हुई थी । आचार्यश्री ने अपने जीवन काल में कभी भी किसी भी बात का कोई प्रतिकार नहीं किया । उनको कोई भी व्यक्ति कुछ भी भलाबूरा बोल देता उसे हंसकर टाल देते थे और क्षमा कर देते थे । ये मेरा व्यक्तिगत अनुभव है । कहने को तो हम दोनों भाई थे पर दोनों की विचार धारायें विपरीत थी । उन्हें मृत्यु का कोई भय नहीं था उन्होंने ‘‘अवधूत की डायरी‘‘ में कई कविताओं की रचना भी की । उनका जन्म 1954 में ऋषि पंचमी के दिन हुआ था वे 7 वर्ष की उम्र में जिनशासन की सेवा के लिये माता द्वारा गुरु भगवन्तांे को समर्पित कर दिये गये थे । वे साक्षत क्षमा की की मूर्ति के रुप में रहे व जिये थे । मैत्री भाव को धारण करना बहुत कठिन है मन में वैर के भाव रखने से व्यक्ति दूसरों की निन्दा करता है । कोई हमें कष्ट दे उसे भी क्षमा करों इसी को ही ’’क्षमा वीरस्य भूषणं’’ कहते है । वीरों का आभूषण ही क्षमा है । महावीर का भी यही संदेश रहा है । जहां जीव समता के भावों में रमण करें हमें ऐसी जीवन शैली जीना है ।
कार्यक्रम में तपस्वी मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा. ने गुणानुवाद सभा मेें अपने गुरु का गुणानुवाद किया । आचार्य रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के चित्र पर तीर्थ के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, ट्रस्टी मेघराज जैन, संजय सराफ आदि ने माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलित किया एवं आचार्यश्री के 67 वें जन्म दिवस के अवसर पर 67 दीपक श्री मेघराज जैन लोढ़ा परिवार द्वारा प्रज्जवलित किये गये । आचार्यश्री के समाधि मंदिर पर आरती श्री धनराज जी जैन बालोतरा परिवार द्वारा उतारी गयी । प्रातः 6 बजे जिन मंदिर एवं गुरु समाधि मंदिर का द्वारोघाटन श्री राहुल सुमेरमलजी रांका परिवार द्वारा किया गया ।

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