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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में गुरु सप्तमी महामहोत्सव पर 2020 वर्ष की प्रथम महामांगलिक में उमड़ा गुरु भक्तों का जन सैलाब,प्रबल पूण्य होगा तभी सबकुछ मिलेगा,अपना आत्म विष्वास बढ़ाओं :आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी




राजगढ़ (धार) । श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के विकास प्रेरक, पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने पौष सुदी 6 की महामांगलिक से पूर्व गुरु भक्तों को प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि दादा गुरुदेव ने अपना अंतिम समय जानकर पौष सुदी पंचमी को देह त्याग के उद्देश्य से अन्न जल का त्याग कर संलेखना का संकल्प कर लिया था तभी से दादा गुरुदेव की महाप्रयाण यात्रा प्रारम्भ हुई थी पौष सुदी 6 को दादा गुरुदेव ने त्रिस्तुतिक जैन समाज के साधु साध्वीयों एवं समाज के लिये अपनी अंतिम हित शिक्षा देते हुये गुरुदेव ने कहा था कि संसार में जो भी दिखता है वह उत्पत्ति के साथ व्यय लीला से युक्त है । जीवन के साथ मृत्यु का अविभाज्य सम्बन्ध है । ज्ञानीयों ने मृत्यु को परिवर्तन मात्र समझा है अज्ञानी मृत्यु से बचने का प्रयास करता है पर मृत्यु आना है और वह अटल है । सब को अपने अपने आयुष्य समापन पर जाना ही पड़ेगा । इसमें किसी का कोई विधान, तर्क, मंत्र या औषधि सफल नहीं हो सकती है । क्रिर्योद्धार से पहले और बाद में दादा गुरुदेव ने शासन की सेवा की । शासन हित साधना में दादा गुरुदेव को कई बार अनुकुल प्रतिकुल परिस्थितियों का सामना भी करना पड़ा पर दादा गुरुदेव ने धैर्य, धीरज एवं सहिष्णुता बनाऐ रखी । दादा गुरुदेव ने गच्छ के साधुओं को कहा कि रत्नत्रय का विकास साधु के जीवन का प्रथम कर्तव्य है । इसमें कभी आलस्य ना करें और समभाव साधु का लक्ष्य है यह लक्ष्य प्रत्येक समय होना चाहिये । ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, कषायादि का फल कटु है यह चारित्र के जीवन में बिगाड़ करते है । इसका साहचर्य त्यागने योग्य है । जिन शासन की प्रभावना होवें ऐसे ही कार्य हमेशा करें । साधु के जीवन का मूल श्रृद्धा है । आचार्यश्री ने आगे कहा कि अपनी आत्मा को बलवान बनावों स्वयं का आत्म विश्वास बढ़ावों । अपने कर्म अपने साथ है यदि पूण्य प्रबल हुआ तो संसार में सबकुछ मिलेगा । यदि पूण्य कमजोर हुआ और संसार से कुछ भी मिलेगा और यदि मिल भी गया तो पूण्य की कमजोरी के चलते दुख का कारण बन जायेगा । दादा गुरुदेव ने 57 वर्षो तक संयम का पालन किया ।








    दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक प.पू. वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री किरणप्रभाश्री जी म.सा., साध्वी श्री सद्गुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्री जी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा व श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वावधान में गुरु सप्तमी महामहोत्सव के अवसर पर पहली बार आचार्यश्री के मुखारविंद से 2020 की प्रथम महामांगलिक का एतिहासिक आयोजन श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में हुआ ।
    तीर्थ के उपाध्यक्ष पृथ्वीराज सेठ, महामंत्री फतेहलाल कोठारी, कोषाध्यक्ष हुक्मीचंद वागरेचा, मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, ट्रस्टी- शांतिलाल सांकरिया, मांगीलाल पावेचा, चम्पालाल वर्धन, जयंतिलाल बाफना, बाबुलाल खिमेसरा, बाबुलाल वर्धन, संजय सराफ, सुखराज कबदी, मांगीलाल रामाणी, कमलेश पांचसौवोरा, आनन्दीलाल अम्बोर, गौतम बालगोता एवं समाजसेवी भेरुलाल गादिया, जयंतिलाल कंकुचोपड़ा, मोहनलाल बागरा, भरत शाह, अशोक जैन, चिमनलाल जैन, अशोक कापडि़या, प्रकाश सेजलमणी, संतोष पुराणी, सेवन्तीलाल मोदी, राजेन्द्र खजांची, नरेन्द्र भण्डारी पार्षद, दिलीप भण्डारी, तीर्थ महाप्रबंधक अर्जुनप्रसाद मेहता, सहप्रबंधक प्रीतेश जैन व सलाहकार मंत्रणा बोर्ड समिति के सदस्यगण आदि की उपस्थिति में महामांगलिक का दीप प्रज्जवलन के साथ भव्य शुभारम्भ हुआ ।
    मंगलवार रात्रि में देवेश जैन एण्ड पार्टी मोहनखेड़ा ने भक्ति संध्या में भक्ति का खुब रंग जमाया । आरती के पश्चात् अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन रात्रि 10 बजे से प्रारम्भ हुआ जो नववर्ष 2020 के प्रवेश के साथ देर रात तक चला । नववर्ष के प्रवेश पर आचार्यश्री ने सभी गुरुभक्तों को मांगलिक का श्रवण करवाकर सुख समृद्धि और निरोगी रहने का आशीर्वाद प्रदान किया । कवि सम्मेलन में देश के ख्यातनाम कवि विनीत चौहान अलवर वीररस, डॉ. प्रवीण शुक्ल नईदिल्ली हास्य व्यंग्य, सुदीप भोला जबलपुर हास्य गीत, सुश्री मुमताज नसीम अलीगढ़ गीत गजल, जानी बैरागी राजोद हास्य व्यंग्य, अर्जुन अल्हड़ कोटा हास्य काव्य पाठ किया व मंच संचालन कवि शंशिकांत यादव देवास ने किया ।
    गुरुवार गुरुसप्तमी महामहोत्सव के मुख्य दिवस पर प्रातः 5 बजे द्वारोद्घाटन के साथ दादा गुरुदेव का 193 वां जन्मोत्सव पालना झुलाकर मनाया जावेगा । इसके पश्चात् वासक्षेप पूजा प्रारम्भ होगी तत्पश्चात् विभिन्न औषधि युक्त जल से शाही अभिषेक प्रातः 8 बजे से प्रारम्भ होगे । अभिषेक के पश्चात् प्रातः 10 बजे से केसर पूजा प्रारम्भ होगी । प्रातः 10 बजे से गुरु गुणानुवाद सभा ध्वजारोहण के पश्चात् प्रारम्भ होगी । दोपहर में गुरुपद महापूजन का आयोजन होगा । रात्रि में 8 बजे दादा गुरुदेव की महाआरती उतारी जावेगी । गुरु गुणानुवाद सभा में कई राजनैतिक एवं समाजिक हस्तियां हिस्सा लेगी । इस दौरान श्रीसंघों व समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वरिष्ठ समाज सेवियों को अलंकरण प्रदान किये जावेगा ।
    तीर्थ के महामंत्री फतेहलाल कोठारी एवं मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने आग्रह करते हुये कहा है कि इन आयोजनों में अधिक से अधिक संख्या में पधारकर जिनशासन एवं गुरुगच्छ की शोभा में अभिवृद्धि करें ।

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