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बेहतर होता कि नेता प्रतिपक्ष भार्गव,विधायकों को पत्र लिखने की बजाय,अपने विधायकों,सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र प्रधानमंत्री को लिखकर,उनसे प्रदेश के किसानों के लिए मदद की गुहार करते : शोभा ओझा




 भोपाल: मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव द्वारा भाजपा विधायकों के नाम लिखे पत्र को झूठ का पुलिंदा बताते हुए, आज एक वक्तव्य जारी कर बताया कि उक्त पत्र में कमलनाथ सरकार के कार्यों, सुशासन और फसलों की मुआवजा राशि को लेकर, जनता के बीच जो भ्रामक कुप्रचार करने की अपील, विधायकों से की गई है, वह विस्मयकारी और निंदनीय है क्योंकि पिछले ग्यारह महीनों में प्रदेश सरकार ने, जनता को राहत पहुुंचाने के लिए जो अभूतपूर्व कदम उठाये हैं, उनके परिणाम अब दिखने लगे हैं, लेकिन इसके ठीक विपरीत भाजपा के ही, मंत्री, सांसद और विधायक आज कठघरे में खड़े हैं, जिनकी सरकार केन्द्र में होने के बावजूद, उससे मध्यप्रदेश को अब तक कोई मदद नहीं मिली है।

  आज जारी अपने वक्तव्य में भाजपा की केन्द्र सरकार और उसके प्रादेशिक नेताओं को कठघरे में खड़ा करते हुए, श्रीमती ओझा ने कहा कि जब मध्यप्रदेश के किसान अतिवृष्टि से प्रभावित होकर केन्द्र सरकार की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे थे, तब प्रदेश में भाजपा सांसदों, उसके केन्द्रीय मंत्रियों, विधायकों और अन्य नेताओं ने केन्द्र सरकार पर राहत राशि देने के लिए कोई दबाव नहीं बनाया बल्कि आश्चर्यजनक रूप से वे निष्ठुर होकर मूकदर्शक बने रहे। 

 अपने बयान में श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि जब पूरी भाजपा बेशर्म खामोशी ओढे़ प्रदेश के अन्नदाताओं की बर्बादी का तमाशा देख रही थी, तब मुख्यमंत्री कमलनाथ जी ने, प्रदेश सरकार के पास उपलब्ध सीमित संसाधनों के बावजूद तत्काल 200 सौ करोड़ रूपये की राशि उन प्रभावित किसान परिवारों को वितरित की, जिनके जान-माल की हानि हुई थी और इसी के साथ तत्काल ही 270 करोड़ रूपये की राशि उन जिलों में भी वितरित की, जहां किसानों की फसले सर्वाधिक प्रभावित हुई थीं। स्पष्ट है कि प्रदेश के अन्नदाता कमलनाथ सरकार के लिए राजनीति का विषय नहीं बल्कि उसकी प्राथमिकता सूची के शीर्ष पर हैं। 

  श्रीमती ओझा ने अपने बयान के अंत में कहा कि बेहतर होता कि प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव अपने विधायकों को पत्र भेजने की बजाय, उन विधायकों, सांसदों और केन्द्रीय मंत्रियों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र प्रधानमंत्री के नाम भेजते, जिसमें अतिवृष्टि से प्रभावित प्रदेश के अन्नदाताओं को राहत पहुंचाने के लिए कोई गुहार की गई होती।


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