राजगढ़ (धार, मध्यप्रदेश)। 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की...' के जयघोष, भक्ति गीतों की गूंज और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच धार जिले की ऐतिहासिक नगरी राजगढ़ शनिवार को पूरी तरह कृष्णमयी नजर आई। 13 सनातन धर्म मंदिरों में एकसाथ आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की 39 वर्षों पुरानी परंपरा के भव्य समापन अवसर पर निकली धर्मयात्रा ने पूरे शहर को आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता के रंग में रंग दिया।
श्री चारभुजा युवा मंच के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष धर्मयात्रा में नगर के 13 मंदिरों और समाजों की सहभागिता रही। करीब पांच घंटे तक चली यात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, भव्य धार्मिक झांकियां, भजनों की स्वर-लहरियां और श्रद्धालुओं का उत्साह मुख्य आकर्षण रहे।
13 मंदिरों से निकली भक्ति की एक धारा
राजगढ़ में 39 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा की खासियत यह है कि नगर के 13 सनातन धर्म मंदिरों में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी अलग-अलग मंदिरों में कथा के आयोजन के बाद इसके समापन अवसर पर सामूहिक धर्मयात्रा निकाली गई।
दोपहर करीब 2 बजे श्री माताजी मंदिर से श्री लड्डू गोपालजी की भव्य पालकी के साथ धर्मयात्रा का शुभारंभ हुआ। पालकी के साथ नगर के 13 समाजों और मंदिरों से जुड़े श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए।
धर्मयात्रा जैसे-जैसे नगर के प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ी, सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती चली गई। जगह-जगह भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
अभिनेत्री नेहा मेहता बनीं धर्मयात्रा का खास आकर्षण
धर्मयात्रा में टीवी जगत की चर्चित अभिनेत्री नेहा मेहता की मौजूदगी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' से लोकप्रिय हुईं नेहा मेहता को देखने के लिए नगर के प्रमुख मार्गों पर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए।
बच्चों से लेकर युवाओं और बुजुर्गों तक में अभिनेत्री की एक झलक पाने को लेकर उत्साह दिखाई दिया। कई लोग मोबाइल फोन से उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए।
नेहा मेहता के धर्मयात्रा में शामिल होने से आयोजन का आकर्षण और बढ़ गया। उन्होंने भी राजगढ़ की जनता और आयोजन समिति के प्रति अपनी आत्मीयता व्यक्त की।
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| अभिनेत्री नेहा मेहता ने अपनी बात साझा की |
मीडिया से बोलीं नेहा मेहता : "ईश्वर की ऊर्जा एक है, यह आयोजन इतिहास रचेगा"
धर्मयात्रा के दौरान मीडिया से खास बातचीत करते हुए अभिनेत्री नेहा मेहता ने राजगढ़ की पावन माटी और यहां के जनमानस को नमन किया। उन्होंने इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का हिस्सा बनने को अपने लिए विशेष अनुभव बताते हुए कहा कि राजगढ़ के इस पावन प्रांगण में आज उनका आना कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि एक अलौकिक संजोग है। नेहा मेहता ने कहा कि चारभुजा युवा मंच ने भक्ति की जो ज्योति जलाई है, वह केवल 39 साल तक सीमित रहने वाली नहीं है, बल्कि 100 साल से भी आगे तक नया इतिहास रचेगी। उन्होंने आयोजन की भव्यता, श्रद्धालुओं की सहभागिता और पूरे नगर में दिखाई दे रही सकारात्मक ऊर्जा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां की ऊर्जा, झांकियां और पवित्र माहौल युवाओं को जाति, धर्म और वर्ण के बंधनों से ऊपर उठाकर देशप्रेम और प्रभु की सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ रहा है। इस आयोजन में दिखाई दे रही एकजुटता और आध्यात्मिक वातावरण को उन्होंने विशेष बताया। अभिनेत्री नेहा मेहता ने कहा, "ईश्वर की ऊर्जा तो एक ही है। इस महान ऊर्जा को जन-जन में बांटने का यह प्रयास अद्भुत है।" उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समाज को जोड़ने,युवाओं को सकारात्मक दिशा देने और लोगों के बीच आपसी प्रेम व सद्भाव की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं। बातचीत के अंत में नेहा मेहता ने श्री चारभुजा युवा मंच, आयोजन समिति, श्रद्धालुओं और राजगढ़वासियों का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया।
मलखंभ से कत्थकली और घूमर तक,दिखी भारत की सांस्कृतिक विविधता
धर्मयात्रा में धार्मिक आस्था के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता की भी झलक देखने को मिली।
देश के अलग-अलग हिस्सों से आए कलाकारों ने कई प्रकार की प्रस्तुतियां दीं। इनमें मलखंभ के रोमांचक करतब, झांझ पार्टी, केरल की कत्थकली, राजस्थान की घूमर और छत्तीसगढ़ के लोकनृत्य ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
विशेष रूप से आई अफ्रीकन आदिवासी नृत्य टोली की प्रस्तुति भी धर्मयात्रा के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रही। कलाकारों की प्रस्तुतियों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्साह के साथ मौजूद रहे।
भजनों पर देर शाम तक झूमते रहे श्रद्धालु
धर्मयात्रा के दौरान भक्ति संगीत ने माहौल को और जीवंत बना दिया। गायक जीतू धोरा और सोनाली ठाकरे के भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु देर शाम तक झूमते रहे।
धर्मयात्रा में सनातन संस्कृति पर आधारित विभिन्न झांकियां भी शामिल थीं। इन झांकियों के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश प्रस्तुत किए गए।
इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला वॉटरमैन रथ भी लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। धार्मिक आयोजन के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की इस पहल ने धर्मयात्रा को सामाजिक सरोकारों से भी जोड़ा।
50 से अधिक स्वागत मंचों से हुई पुष्पवर्षा
करीब पांच घंटे तक नगर भ्रमण करने वाली धर्मयात्रा का शहरभर में जगह-जगह स्वागत किया गया।
नगर के 50 से अधिक सामाजिक, धार्मिक और व्यापारी संगठनों ने स्वागत मंच बनाए। विभिन्न स्थानों पर धर्मयात्रा का स्वागत करते हुए श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की गई।
धर्मयात्रा के मार्ग में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। कई स्थानों पर परिवारों के साथ लोग यात्रा के स्वागत के लिए खड़े दिखाई दिए।
शाम 7 बजे श्री माताजी मंदिर पहुंची धर्मयात्रा
करीब पांच घंटे तक नगर भ्रमण के बाद धर्मयात्रा शाम 7 बजे पुनः श्री माताजी मंदिर परिसर पहुंची।
यहां श्री चारभुजा युवा मंच की ओर से आयोजन में सहयोग देने वाले कथावाचकों, धर्माचार्यों तथा पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों का नागरिक अभिनंदन किया गया।
इसके साथ ही 13 सनातन धर्म मंदिरों में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की इस वर्ष की श्रृंखला और धर्मयात्रा का भव्य समापन हुआ।
39 वर्षों की परंपरा ने बनाया अलग पहचान
राजगढ़ की यह परंपरा पिछले 39 वर्षों से लगातार धार्मिक और सामाजिक सहभागिता का केंद्र बनी हुई है। 13 मंदिरों में श्रीमद्भागवत कथा और उसके बाद सामूहिक धर्मयात्रा इस आयोजन की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।
इस आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ नगर के अलग-अलग समाजों और संगठनों की सहभागिता दिखाई देती है। यही वजह रही कि समापन अवसर पर निकली धर्मयात्रा में राजगढ़ का पूरा शहर एक साझा धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा नजर आया।
आयोजन में इनकी रही सक्रिय भूमिका
आयोजन को सफल बनाने में मंच संरक्षक मांगीलाल राठौड़, कैलाश बजाज, गणेशलाल शर्मा, दारासिंह चौहान, अध्यक्ष कृष्णा बारोड़, नवीन बानिया, मुकेश बजाज, मनोज माहेश्वरी, विजय व्यास, ओमप्रकाश परमार, घनश्याम सोलंकी, दुर्गाप्रसाद सोलंकी, राजेश शर्मा, पवन जोशी, हरिओम सोनी, गिरिराज राठौर, गोपाल माहेश्वरी, गोविंद मोरी, सौरभ गर्ग, सुजीत ठाकुर, महेश राठौड़, राकेश सोलंकी, भरत मोरी, दीपक पटेल, नारायण वैष्णव, पूनमचंद कौशल, धर्मेन्द्र कमेडिया, मनीष मकवाना, राजेंद्र पड़ियार, रवि पंवार, अजय भावसार, कृष्णा कौशल, नयन बलसारा, जयेश वैष्णव, मनोज माली, राहुल व्यास, पंकज बारोड़, निलेश परमार सहित मंच के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों का योगदान रहा।
आयोजन संबंधी जानकारी मंच के मीडिया प्रभारी प्रभुसिंह राजपूत द्वारा दी गई।










