धार के राजगढ़ में 1987 से चली आ रही अनूठी परंपरा, 13 मंदिरों में एक साथ होती है भागवत कथा; 2026 के आयोजन के बाद Amazing World Records ने जारी किया आधिकारिक पुष्टि पत्र
राजगढ़ (धार, मध्य प्रदेश)। एक नगर, 13 मंदिर और 13 कथावाचक। मध्य प्रदेश के धार जिले के राजगढ़ नगर में धार्मिक आस्था से जुड़ी एक ऐसी परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है, जिसमें नगर के 13 अलग-अलग मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है। करीब 39 वर्षों से जारी इस परंपरा को अब Amazing World Records में दर्ज किया गया है।
राजगढ़ में 20 से 26 सितंबर 2026 तक 13 सनातन मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में अलग-अलग मंदिरों में कथावाचकों ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का श्रवण कराया। आयोजन की विशेषता यह रही कि सभी 13 मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी एक साथ मनाया गया।
कथा के समापन पर निकली धर्मयात्रा में 13ों कथावाचक एक ही रथ पर सवार होकर नगर में निकले। इस दौरान सर्वसमाज के लोगों ने सहभागिता की और कथावाचकों का जगह-जगह स्वागत किया।
1987 में 10 कथाओं से शुरू हुई थी परंपरा
राजगढ़ में 13 मंदिरों में होने वाली श्रीमद्भागवत कथा की परंपरा अचानक शुरू नहीं हुई। स्थानीय जानकारी के अनुसार इसकी शुरुआत वर्ष 1987 में हुई थी। उस समय नगर में 10 कथाओं का आयोजन किया गया था।
समय के साथ इस धार्मिक आयोजन का विस्तार हुआ और वर्ष 2008 से लगातार 13 मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा आयोजित की जा रही है। इस तरह यह परंपरा वर्ष 2026 में अपने 39वें वर्ष तक पहुंच गई है।
लगभग चार दशक से जारी यह आयोजन राजगढ़ के धार्मिक कैलेंडर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। हर वर्ष कथा के दौरान नगर के अलग-अलग मंदिरों में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रहती है और समापन पर सामूहिक धर्मयात्रा निकाली जाती है।
13 मंदिरों में एक साथ गूंजती है भागवत कथा
राजगढ़ की इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता इसका सामूहिक स्वरूप है। एक ही नगर में 13 अलग-अलग मंदिरों में समान अवधि के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है।
हर मंदिर में अलग कथावाचक कथा का वाचन करते हैं। इसके कारण सात दिनों तक नगर के अलग-अलग हिस्सों में धार्मिक वातावरण बना रहता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय मंदिर के आयोजन के अनुसार कथा में शामिल होते हैं।
यह आयोजन सनातन समाज और श्री चारभुजा युवा मंच के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी 13 मंदिरों में एक साथ
भागवत कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहता है। राजगढ़ की इस परंपरा में सभी 13 मंदिरों में जन्मोत्सव एक साथ मनाया जाता है।
मंदिरों में श्रद्धालुओं की मौजूदगी, धार्मिक अनुष्ठान और भगवान श्रीकृष्ण के जन्म प्रसंग के साथ पूरे नगर में उत्सव का माहौल बनता है।
एक ही समय पर 13 मंदिरों में होने वाला यह आयोजन राजगढ़ की इस परंपरा को अन्य सामान्य भागवत आयोजनों से अलग पहचान देता है।
समापन पर 13 कथावाचक एक ही रथ पर निकले
26 सितंबर को कथा के समापन अवसर पर राजगढ़ नगर में धर्मयात्रा निकाली गई। धर्मयात्रा में सर्वसमाज के लोगों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान सभी 13 कथावाचक एक ही रथ पर सवार होकर धर्मयात्रा में शामिल हुए। नगरवासियों ने उनका स्वागत किया। 13 कथावाचकों का एक साथ एक रथ पर निकलना इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा।
धर्मयात्रा के माध्यम से सात दिनों तक अलग-अलग मंदिरों में चलने वाली कथाओं का सामूहिक समापन हुआ।
39 साल पुरानी परंपरा को मिला वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाण
राजगढ़ की इस अनूठी परंपरा को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में सामाजिक कार्यकर्ता अक्षय भंडारी ने पहल की। उन्होंने आयोजन की पुरानी परंपरा से जुड़े दस्तावेज और उपलब्ध तथ्य एकत्र किए तथा उन्हें रिकॉर्ड संस्था के समक्ष प्रस्तुत किया।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दस्तावेजों और तथ्यों के मूल्यांकन एवं सत्यापन के बाद Amazing World Records की ओर से 26 सितंबर 2026 को आधिकारिक पुष्टि पत्र जारी किया गया।
इससे राजगढ़ में 13 मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा की वर्षों पुरानी परंपरा को रिकॉर्ड के रूप में औपचारिक पहचान मिली है।
अक्षय भंडारी ने जुटाए पुराने दस्तावेज और तथ्य
राजगढ़ की इस परंपरा को रिकॉर्ड के लिए प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में अक्षय भंडारी ने आयोजन से संबंधित ऐतिहासिक जानकारी और दस्तावेज जुटाए।
इसमें आयोजन की शुरुआत, वर्षों से चली आ रही परंपरा, 13 मंदिरों में कथा आयोजन तथा वर्तमान आयोजन से संबंधित जानकारी को संकलित किया गया।
रिकॉर्ड के लिए दस्तावेजीकरण का उद्देश्य राजगढ़ की स्थानीय धार्मिक परंपरा को केवल स्थानीय आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि एक विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा के रूप में सामने लाना था।
अमर कमेडिया: राजगढ़ एक धर्मनगरी है
राजगढ़ निवासी श्रद्धालु अमर कमेडिया ने कहा कि राजगढ़ एक धर्मनगरी है। यहां 13 मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन होता है और इसमें सर्वसमाज के लोग एकजुट होकर भाग लेते हैं।
उन्होंने कहा कि कथा के अंतिम दिन निकलने वाली धर्मयात्रा भी आयोजन की खास पहचान है। इसमें नगर के लोग मिलकर सहभागिता करते हैं।
पंडित प्रकाश मोहनलाल शर्मा: 39 वर्षों से चल रहा आयोजन
कथावाचक पंडित प्रकाश मोहनलाल शर्मा ने कहा कि राजगढ़ के सभी 13 मंदिरों में पिछले 39 वर्षों से यह आयोजन अनवरत चल रहा है। अलग-अलग मंदिरों में कथा होती है और भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव भी एक साथ मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और श्री चारभुजा युवा मंच के प्रयास से पूरा समाज एक माला के मोतियों की तरह संगठित होकर कार्य करता है।
धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक एकता का संदेश
राजगढ़ की श्रीमद्भागवत कथा परंपरा की खास बात इसका सामूहिक स्वरूप है। अलग-अलग मंदिरों में कथा होने के बावजूद आयोजन की भावना एक रहती है।
13 मंदिरों में कथा, एक साथ कृष्ण जन्मोत्सव, 13 कथावाचकों की संयुक्त धर्मयात्रा और सर्वसमाज की सहभागिता इस आयोजन को राजगढ़ की सामूहिक धार्मिक परंपरा के रूप में स्थापित करती है।
करीब चार दशक से पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता और नगर की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है।
राजगढ़ की पहचान अब रिकॉर्ड के दस्तावेज में
वर्ष 1987 में शुरू हुई परंपरा ने 2026 तक लंबा सफर तय किया है। शुरुआती 10 कथाओं से शुरू हुआ आयोजन अब 13 मंदिरों में लगातार आयोजित हो रहा है।
अब Amazing World Records की ओर से आधिकारिक पुष्टि पत्र जारी होने के बाद राजगढ़ की इस परंपरा को एक नया दस्तावेजी मंच मिला है।
13 मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा, 13 कथावाचक, एक साथ कृष्ण जन्मोत्सव और समापन पर एक ही रथ में निकली धर्मयात्रा राजगढ़ की उस धार्मिक परंपरा की पहचान बन गई है, जो पिछले 39 वर्षों से लगातार आगे बढ़ रही है।



