नई दिल्ली: भारत के विमानन क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए, ओमकम एविएशन प्राइवेट लिमिटेड (Omkam Aviations Pvt. Ltd.) ने रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC) के साथ मिलकर 50 उन्नत IL-114-300 विमानों के अधिग्रहण और देश में ही उनके विनिर्माण की एक भव्य योजना का खुलासा किया है। भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित 'इनोप्रम इंडिया' व्यापार मेले के पूर्ण सत्र में इस बात की घोषणा की गई। यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले दोनों देशों के बीच मजबूत औद्योगिक सहयोग का गवाह बना है।
इस रणनीतिक रोडमैप के अंतर्गत, पूर्ण प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) समझौते के जरिए भारत में ही इन विमानों के 100% घरेलू निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया गया है। ओमकम एविएशन के प्रबंध निदेशक श्री पीयूष कुमार अग्रवाल ने इस साझेदारी के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि UAC के साथ 50 विमानों के लिए एलओआई पर हस्ताक्षर किए गए हैं। शुरुआत में पहले छह विमान लाए जाएंगे, जिसके बाद भारत में ही असेंबली लाइन स्थापित होगी और प्रौद्योगिकी का पूर्ण हस्तांतरण किया जाएगा। भारत के नागरिक उड्डयन इतिहास में यह अपनी तरह का पहला बड़ा संयंत्र होगा जो विमान का निर्माण करेगा।
परियोजना के वित्तीय पहलुओं पर रोशनी डालते हुए, श्री अग्रवाल ने बताया कि शुरुआती चरण (पहले छह विमान और आवश्यक सहायता ढांचे सहित) में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिसे स्थानीय विनिर्माण की व्यापक मांगों के अनुसार भविष्य में और बढ़ाया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को रफ्तार देने के लिए Sberbank of Russia ने वित्तपोषण उपलब्ध कराने की सैद्धांतिक प्रतिबद्धता जताई है।
क्षेत्रीय मार्गों पर क्रांति और यात्रियों को सुविधा
विशेष रूप से छोटे रनवे और कम बुनियादी ढांचे वाले क्षेत्रीय हवाई अड्डों के लिए डिजाइन किया गया यह 66 से 68 सीटों वाला ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान, टियर 2 और टियर 3 शहरों की तस्वीर बदल देगा। ओमकम एविएशन के कार्यकारी निदेशक श्री आदित्य अग्रवाल ने इसके फायदों को समझाते हुए बताया कि यह विमान उन पॉइंट-टू-पॉइंट मार्गों को खोलेगा जहाँ बड़े विमान बुनियादी बाधाओं के कारण नहीं पहुंच सकते। उदाहरण के तौर पर, मेरठ से मुंबई या नोएडा, आगरा और पुणे जैसे उभरते शहरों के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित की जा सकेगी, जिससे यात्रियों को दिल्ली या अन्य बड़े एयरपोर्ट्स पर चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। श्री आदित्य अग्रवाल का मानना है कि इससे एक टिकाऊ घरेलू उड्डयन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा।
सह-संस्थापक और निदेशक श्री गोविंद गुप्ता (Mr. Govind Gupta) ने इस बात पर जोर दिया कि यह स्थानीय उत्पादन और बुनियादी ढांचे का विकास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर' अभियानों को मजबूती देता है तथा भारत-रूस के रणनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ करता है।
शीर्ष नेतृत्व की मुहर और कूटनीतिक समर्थन
इस परियोजना को शासन स्तर पर भी भरपूर समर्थन मिला है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि IL-114-300 भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं के अनुकूल है और मंत्रालय देश में रूसी विमानों के निर्माण की प्रक्रिया को जल्द से जल्द गति देना चाहता है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने व्यक्तिगत रूप से इनोप्रम में UAC के बूथ का दौरा किया और प्रदर्शित IL-114-300 का मुआयना किया। राष्ट्रपति पुतिन की गहरी व्यक्तिगत रुचि और मॉस्को की अटूट प्रतिबद्धता यह सुनिश्चित करती है कि भारत में विश्व स्तरीय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जल्द ही धरातल पर उतरेगी।
पिनेकल एयर की स्थिति स्पष्ट
हाल की कुछ मीडिया रिपोर्टों में भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए, पिनेकल एयर प्राइवेट लिमिटेड ने साफ किया है कि 10 सितंबर 2026 का यह 50 विमानों वाला मुख्य एलओआई केवल रूस के UAC और ओमकम एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुआ है। पिनेकल एयर इसकी एक सहयोगी कंपनी है, जिसकी रुचि केवल विमानों को लीज (पट्टे) पर लेने में है और वह इस समझौते का प्रत्यक्ष हिस्सा नहीं है। यह पहल भारत के घरेलू यात्रा बाजार और आर्थिक कूटनीति के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रही है।


