राजगढ़ : प.पू.सुभाषचंद्र शर्मा ने शिवमहापुराण कथा के छठवें दिन बताया भक्ति,केदारनाथ और काशी मुक्ति का गहरा रहस्य

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  राजगढ़ (धार) स्थित श्री चारभुजा नाथ मंदिर में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा के छठवें दिन प.पू. सुभाषचंद्र शर्मा के मुखारविंद से श्रद्धालुओं को भक्ति,मन की एकाग्रता,केदारनाथ महात्म्य,काशी मुक्ति और दान की महिमा से जुड़ी अनेक प्रेरणादायक कथाएं सुनने को मिलीं। श्रावण मास के पावन अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए उपस्थित रहे।

 मन को भगवान में लगाने का संदेश

  कथावाचक ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की कथा सुनना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि कथा तभी फलदायी होती है जब मन पूरी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ भगवान में लगा हो।

  मन की चंचलता को समझाने के लिए उन्होंने एक राजा और बकरे की कथा सुनाई। कथा का संदेश था कि जिस प्रकार मन को नियंत्रण में रखना आसान नहीं होता, उसी प्रकार साधना में निरंतर अभ्यास और संयम आवश्यक है।

 प्रतिदिन कुछ समय भगवान को देने की प्रेरणा

  प्रवचन में उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में तनाव और हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में नियमित पूजा, जप और साधना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

  उन्होंने शास्त्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रतिदिन कुछ समय भगवान की आराधना करने से जीवन में आध्यात्मिक शक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

 श्रीदामा भक्त की कथा से बताया सच्ची भक्ति का अर्थ

कथा के दौरान श्रीदामा नामक भक्त का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि सच्चा भक्त संसार की अपेक्षा भगवान के दर्शन को अधिक महत्व देता है। उन्होंने कहा कि भक्ति मनुष्य को माया से दूर ले जाकर सीधे ईश्वर से जोड़ती है।

 भस्मासुर और मोहिनी अवतार का प्रसंग

 भगवान शिव के भोले स्वभाव का वर्णन करते हुए कथावाचक ने भस्मासुर की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि कठोर तपस्या से वरदान प्राप्त करने के बाद भस्मासुर स्वयं भगवान शिव के लिए ही संकट बन गया।

 इसके बाद भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अपनी लीला से भस्मासुर का अंत कराया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने समझाया कि अहंकार अंततः स्वयं के विनाश का कारण बनता है।

 केदारनाथ की महिमा का किया वर्णन

 कथा में केदारनाथ धाम के महत्व का विस्तृत वर्णन किया गया। उन्होंने नर-नारायण की तपस्या,भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप में स्थापित होने तथा पांडवों के दर्शन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि केदारनाथ की महिमा सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखती है।

 उन्होंने भगवान शिव के भैंसे के रूप और भीम द्वारा उन्हें पहचानने से जुड़े प्रसिद्ध प्रसंग का भी उल्लेख किया।

 दान हमेशा विवेकपूर्वक करने की सीख

 प्रवचन में दान के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि दान सदैव उचित स्थान और योग्य व्यक्ति को करना चाहिए, क्योंकि दान का उद्देश्य समाज और धर्म की सेवा होना चाहिए।

 उन्होंने यह भी कहा कि कलयुग में दान का विशेष महत्व माना गया है और धार्मिक पर्वों तथा पुण्य तिथियों पर दान का अपना अलग आध्यात्मिक महत्व है।

 काशी विश्वनाथ और मोक्ष की कथा

  कथावाचक ने काशी की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान शिव का काशी से विशेष संबंध माना जाता है। उन्होंने काशी विश्वनाथ,मणिकर्णिका घाट और मोक्ष से जुड़े धार्मिक प्रसंगों का उल्लेख किया।

 इसके साथ ही एक राजा और रानी की कथा सुनाकर उन्होंने बताया कि ज्ञान के साथ संयम और विवेक भी उतना ही आवश्यक है।

श्रद्धालुओं में दिखी गहरी आस्था

श्री चारभुजा नाथ मंदिर परिसर में कथा के दौरान श्रद्धालु पूरे समय भक्ति भाव में लीन दिखाई दिए। श्रावण मास में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की महिमा सुनने पहुंच रहे हैं।