राजगढ़ (धार) के चारभुजा नाथ मंदिर में शिव महापुराण कथा के चौथे दिन पं. सुभाषचंद्र शर्मा ने गणेश-कार्तिकेय प्रसंग,शिव भक्ति,उपवास और माता-पिता की सेवा का महत्व बताया....
राजगढ़ (धार)। नगर के श्री चारभुजा नाथ मंदिर में चल रही सप्त दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा के चौथे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या कथा श्रवण के लिए पहुंची। कथा वाचक पं. सुभाषचंद्र शर्मा ने भगवान शिव, गणेश और कार्तिकेय से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से जीवन में भक्ति,संस्कार और माता-पिता के सम्मान का महत्व बताया।
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन का वास्तविक उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति है और इसके लिए आत्मा की पवित्रता सबसे आवश्यक है। उन्होंने बताया कि धार्मिक कथा का श्रवण आत्मिक शुद्धि का माध्यम है और भगवान का नाम बार-बार सुनने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक परिवर्तन आता है।
गणेश और कार्तिकेय की कथा सुनाई
प्रवचन में गणेश और कार्तिकेय के प्रसंग का उल्लेख करते हुए पं. शर्मा ने कहा कि गणेश ने माता पार्वती और भगवान शिव की सात परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता की सेवा समस्त तीर्थों के समान मानी गई है। वहीं कार्तिकेय के प्रसंग के माध्यम से क्रोध पर नियंत्रण और धैर्य का संदेश भी दिया गया।
शिव भक्ति और अभिषेक का महत्व बताया
कथा में भगवान शिव की आराधना,अभिषेक और बेलपत्र के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
नरसी मेहता के प्रसंग से दिया दान और भक्ति का संदेश
प्रवचन में संत नरसी मेहता की भक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी भगवान की सच्ची भक्ति संभव है। उन्होंने दान,त्याग और ईश्वर पर विश्वास को जीवन के महत्वपूर्ण गुण बताया।
उपवास का सही अर्थ समझाया
पं. सुभाषचंद्र शर्मा ने कहा कि उपवास केवल भोजन छोड़ने का नाम नहीं है,बल्कि उस दिन क्रोध,असत्य और नकारात्मक व्यवहार से दूर रहकर प्रसन्नचित्त रहना भी उतना ही आवश्यक है।
कथा का आयोजन 22 अगस्त तक जारी रहेगा, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर शिव महापुराण का श्रवण कर रहे हैं।


