धार जिले के राजगढ़ में श्रावण माह के पहले सोमवार को महात्मा गांधी मार्ग स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर से बाबा चंद्रमौलेश्वर की भव्य सवारी निकाली गई। जानिए 81 साल पुरानी इस धार्मिक परंपरा का पूरा विवरण।
राजगढ़ नगर में श्रावण माह के पहले सोमवार के पावन अवसर पर बाबा चंद्रमौलेश्वर की भव्य और पारंपरिक सवारी अत्यंत उत्साह व भक्तिमय वातावरण में निकाली गई। नगर के महात्मा गांधी मार्ग स्थित अति प्राचीन श्री राम मंदिर से 3 अगस्त सोमवार की शाम को बैंड-बाजे और ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ यह धार्मिक यात्रा शुरू हुई। नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करती हुई यह भव्य सवारी पुनः श्री राम मंदिर प्रांगण पहुंचकर संपन्न हुई जहां पर आरती व प्रसादी वितरण किया। सवारी के दौरान पूरा राजगढ़ नगर 'हर-हर महादेव' और 'जय शिव शंभू' के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
वर्षों से अनवरत निभाई जा रही है आस्था की यह परंपरा
राजगढ़ में बाबा चंद्रमौलेश्वर की सवारी का इतिहास अत्यंत समृद्ध और जन-आस्था से भरा हुआ है। जानकारी अनुसार ब्रह्मलीन पूज्य गुरुदेव श्री 1008 श्री शिव रामदासजी (त्यागी) के शिष्य संत श्री शान्तु बाबा के पावन सानिध्य में यह परंपरा लगभग 81 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अटूट जनसहयोग और समर्पण से आयोजित होने वाली यह सवारी नगर की एक विशिष्ट धार्मिक पहचान बन चुकी है, जिसमें हर वर्ष क्षेत्र भर से सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं।
नगर भ्रमण और घर-घर महाप्रसाद का वितरण
सवारी के दौरान पूरे मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा बाबा चंद्रमौलेश्वर का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया गया। इस पारंपरिक शंकर सवारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल मंदिर परिसर या मुख्य मार्ग तक ही आयोजन सीमित नहीं रहता, बल्कि आयोजन समिति और श्रद्धालुओं द्वारा नगर के घर-घर जाकर महाप्रसाद का वितरण भी किया जाता है। श्रावण के प्रथम सोमवार पर निकले इस जुलूस ने पूरे राजगढ़ नगर को शिवभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया।

