राजगढ़ में 13 मंदिरों की समकालिक भागवत कथा महोत्सव की तैयारियां तेज,राशि संग्रहण अभियान शुरू






 


  राजगढ़ (धार)। मालवा की धार्मिक नगरी राजगढ़ एक बार फिर सनातन आस्था के ऐतिहासिक महापर्व की तैयारी में जुट गई है। नगर के 13 सनातन धर्म मंदिरों में एक साथ आयोजित होने वाले श्रीमद्भागवत कथा महा-महोत्सव और कथा समापन पर 26 सितंबर को प्रस्तावित भव्य सनातन धर्मयात्रा को लेकर श्रीचारभुजा युवा मंच ने व्यापक राशि संग्रहण अभियान शुरू कर दिया है। सोमवार से प्रारंभ हुए इस अभियान में नगरवासियों,व्यापारियों और दानदाताओं का उत्साहपूर्ण सहयोग देखने को मिला।

 यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग चार दशकों से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर राजगढ़ की पहचान को मजबूत कर रहा है।

पहले दिन चौपाटी से पुराने बस स्टैंड तक चला संपर्क अभियान

 राशि संग्रहण अभियान के पहले दिन श्रीचारभुजा युवा मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों ने नगर के मुख्य चौपाटी क्षेत्र से लेकर पुराने बस स्टैंड तक घर-घर और प्रतिष्ठानों पर पहुंचकर लोगों से सहयोग का आग्रह किया। श्रद्धालुओं ने आयोजन को सफल बनाने के लिए उत्साहपूर्वक योगदान दिया।

 मंच ने आगामी 15 दिनों के भीतर संग्रहण अभियान पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, ताकि महोत्सव की सभी व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण की जा सकें।

20 सितंबर 1987 से शुरू हुई ऐतिहासिक परंपरा

 श्रीचारभुजा युवा मंच के अध्यक्ष कृष्णा बारोड़ ने बताया कि राजगढ़ की समकालिक भागवत कथा परंपरा देश में अपनी तरह की अनूठी धार्मिक परंपराओं में से एक है।

 उन्होंने बताया कि इस आयोजन की शुरुआत 20 सितंबर 1987, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (रविवार) को नगर के 10 सनातन धर्म मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा के शुभारंभ के साथ हुई थी। समय के साथ जनआस्था और सहभागिता बढ़ती गई और धीरे-धीरे अन्य मंदिर भी इससे जुड़ते चले गए।

 बाद में 6 सितंबर 2008, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (शनिवार) को एक और प्रमुख मंदिर को इस महाआयोजन से जोड़ा गया, जिसके बाद कथा स्थलों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। तब से यह 13-मंदिर महोत्सव निरंतर,अनवरत रूप से जारी है।

 सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल

 मंच के पदाधिकारियों के अनुसार यह आयोजन विभिन्न समाजों और समुदायों को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करता है। नगर के अलग-अलग समाजों से जुड़े मंदिर एक ही समय में एक ही सनातन ध्वज के तले श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन करते हैं, जो सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करता है।

 यही विशेषता इस आयोजन को सामान्य धार्मिक कार्यक्रमों से अलग पहचान दिलाती है।

26 सितंबर को निकलेगी भव्य सनातन धर्मयात्रा

 मंच के महासचिव सुजीत ठाकुर ने बताया कि श्रीचारभुजा युवा मंच पिछले 38 वर्षों से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का निरंतर संचालन कर रहा है।

 हर वर्ष भागवत कथा के दौरान सामूहिक डोल यात्रा,समकालिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव शोभायात्रा और कथा विश्राम पर विशाल धर्मयात्रा निकाली जाती है।

 इस वर्ष 26 सितंबर को निकलने वाली सनातन धर्मयात्रा में सभी 13 मंदिरों की पोथीजी, पूज्य आचार्यगण, बाहर से आने वाले सांस्कृतिक दल और हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरने वाली यह यात्रा पूरे राजगढ़ को भक्तिमय वातावरण में रंग देगी।

कोरोना काल में भी नहीं टूटी परंपरा

 मंच पदाधिकारियों ने बताया कि वैश्विक कोरोना महामारी के कठिन दौर में जब अधिकांश सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम स्थगित हो गए थे, तब भी राजगढ़ की यह परंपरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।

 शासन की गाइडलाइंस का पालन करते हुए सभी 13 मंदिरों के गर्भगृह में सीमित संख्या में पोथी स्थापना, पूजन और कथा वाचन विधिवत संपन्न किया गया था। इससे 38 वर्षों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा निरंतर बनी रही।

अभियान में इनकी रही सक्रिय भागीदारी

 राशि संग्रहण अभियान के प्रथम दिन मंच के संरक्षक और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इस दौरान धारासिंह चौहान, गोपाल माहेश्वरी, नारायण वैष्णव, महेश राठौड़,दीपक पटेल, भरत मोरी, मनोज माली, घनश्याम सोलंकी, राकेश सोलंकी और राजेंद्र पड़ियार अजय भावसार,नयन बलसारा,कृष्णा कौशल सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे।

क्यों खास है राजगढ़ का 13 मंदिर समकालिक भागवत कथा महोत्सव?

  • लगभग 38 वर्षों से लगातार चली आ रही धार्मिक परंपरा।

  • 13 मंदिरों में एक साथ श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन।

  • सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का अनूठा उदाहरण।

  • कोरोना काल में भी परंपरा का निरंतर निर्वहन।

  • 26 सितंबर को हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता वाली भव्य सनातन धर्मयात्रा।