भोपाल : मध्यप्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रदेश के विकास, स्वास्थ्य,कृषि,महिला सशक्तिकरण और सड़क अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी। मंत्रि-परिषद ने विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों के लिए कुल 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी।
भोपाल-विदिशा 4 लेन सड़क के लिए 1,757 करोड़ रुपये मंजूर
भोपाल को मेट्रोपोलिटन सिटी के रूप में विकसित करने की दिशा में मंत्रि-परिषद ने भोपाल-विदिशा मार्ग को 4 लेन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 44.830 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के 4 लेन निर्माण के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
यह सड़क भोपाल के अयोध्या बायपास स्थित भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 146 पर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगी। मार्ग भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर से होकर भोपाल और विदिशा जिलों को जोड़ेगा।
सरकार के अनुसार सड़क के 4 लेन होने से क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ अधोसंरचना का विकास होगा। सांची स्तूप और कर्क रेखा जैसे महत्वपूर्ण स्थलों से जुड़ा होने के कारण यह मार्ग पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
परियोजना के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल लागू किया जाएगा। कुल परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से वहन किया जाएगा, जबकि शेष 60 प्रतिशत राशि का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा। निर्माण पूर्व कार्यों और सुपरविजन चार्ज के लिए 364 करोड़ 41 लाख रुपये की राशि भी राज्य बजट से दी जाएगी।
भोपाल बायपास को 6 लेन करने की तैयारी
मंत्रि-परिषद ने भोपाल बायपास को 4 लेन से 6 लेन करने के दृष्टिगत उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल वसूली की अनुमति 31 दिसंबर 2031 तक बढ़ाने को मंजूरी दी है। यह अनुमति 19 जुलाई 2026 से लागू मानी गई है।
भोपाल बायपास की कुल लंबाई 51.963 किलोमीटर है। यह मार्ग भोपाल को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों से जोड़ता है। बायपास के विकास से भोपाल शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलती है।
मंत्रि-परिषद ने आवश्यकता के अनुसार टोल संग्रहण की अवधि को अतिरिक्त पांच वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया है। टोल से प्राप्त राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा की जाएगी और सड़क विकास एवं संधारण के कार्यों में इसका उपयोग किया जाएगा।
संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के लिए 918 करोड़ रुपये मंजूर
मध्यप्रदेश सरकार ने संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 918 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इस योजना का उद्देश्य वनों के संरक्षण और संवर्द्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। योजना के तहत अब श्रमिकों के साथ संबंधित क्षेत्रों के रहवासियों को भी लाभांश दिया जाएगा।
प्रावधान के अनुसार काष्ठ के अंतिम पातन से प्राप्त बिक्री राजस्व की 20 प्रतिशत राशि संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दी जाती है। वहीं बांस के विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का शत-प्रतिशत हिस्सा कटाई में शामिल श्रमिकों को दिया जाता है।
रानी दुर्गावती और रानी अवंती बाई पुरस्कार की राशि बढ़ी
मंत्रि-परिषद ने महिला सशक्तिकरण से जुड़े राज्य स्तरीय पुरस्कारों की राशि बढ़ाने को भी मंजूरी दी है। रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार की राशि 2 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
वहीं वर्ष 2006 से दिए जा रहे रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है।
इन पुरस्कारों के माध्यम से विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए समाज सेवा और महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित किया जाएगा।
नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए 20 हेक्टेयर जमीन
किसान कल्याण वर्ष के तहत मंत्रि-परिषद ने सोयाबीन किसानों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सीहोर जिले की इछावर तहसील के ग्राम भाऊखेड़ी में नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए 20 हेक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने को मंजूरी दी गई है।
प्रस्तावित भूमि का उपयोग कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए किया जाएगा। सरकार के अनुसार इस केंद्र की स्थापना से मध्यप्रदेश में सोयाबीन उत्पादन, अनुसंधान और कृषि तकनीक को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 44,515.13 करोड़ रुपये मंजूर
मंत्रि-परिषद ने स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना तथा नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों से संबंधित योजनाओं के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये शामिल हैं।
स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमले से संबंधित योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, गैर-संचारी रोगों की रोकथाम, अंधत्व निवारण, कुष्ठ उन्मूलन, डायलिसिस, मुफ्त दवा और जांच जैसी स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया जाता है।
जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के लिए 795.59 करोड़ रुपये
मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के आगामी पांच वर्षों के संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की मंजूरी दी है। यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक ब्लॉक ग्रांट योजना के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।
विश्वविद्यालय के अंतर्गत 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केंद्र संचालित हैं। इनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान और कृषि विस्तार से संबंधित गतिविधियां संचालित की जाती हैं।
खनिज विभाग की परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 2.50 करोड़
खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों के संधारण के लिए वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 2 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
विभाग के अंतर्गत 54 खनिज भवन हैं। इनमें से कई भवनों को बने हुए 10 वर्ष से अधिक समय हो चुका है। स्वीकृत राशि से भवनों की मरम्मत और रखरखाव के कार्य किए जाएंगे।
देवास पटाखा फैक्ट्री हादसे की जांच आयोग की अवधि बढ़ी
देवास जिले के टोंकखुर्द क्षेत्र के टोकंकला स्थित पटाखा फैक्ट्री में 14 मई 2026 को हुई अग्नि दुर्घटना की न्यायिक जांच के लिए गठित एकल सदस्यीय आयोग के कार्यकाल में तीन महीने की वृद्धि की गई है।
मंत्रि-परिषद ने सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति सुभाष काकड़े की अध्यक्षता में गठित न्यायिक जांच आयोग के कार्यकाल को 14 अगस्त 2026 तक बढ़ाने संबंधी अधिसूचना का अनुसमर्थन किया।
एमपीपीएससी के वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा में रखे जाएंगे
मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन को विधानसभा के पटल पर रखने की मंजूरी दी है।
इसके साथ ही उन मामलों से संबंधित ज्ञापन भी विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिनमें आयोग की सलाह को स्वीकार नहीं किया गया है।
मध्यप्रदेश कैबिनेट की बैठक में सड़क, स्वास्थ्य, कृषि, वन, महिला सशक्तिकरण और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। भोपाल-विदिशा 4 लेन सड़क और भोपाल बायपास को 6 लेन करने की दिशा में लिए गए निर्णयों को प्रदेश की अधोसंरचना के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

