श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में त्रिस्तुतिक श्रीसंघ मध्यप्रदेश इकाई का शपथ समारोह संपन्न,संजय मोदी बने प्रदेश अध्यक्ष

मोहनखेड़ा महातीर्थ में त्रिस्तुतिक श्रीसंघ मध्यप्रदेश शपथ समारोह








 राजगढ़ (धार)। श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के पावन प्रांगण में रविवार को त्रिस्तुतिक श्रीसंघ मध्यप्रदेश इकाई का शपथ विधि समारोह एवं प्रथम बैठक धार्मिक गरिमा और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। कार्यक्रम प.पू. आचार्य ऋषभ हितेशचंद्रसूरी म.सा. एवं मुनिमंडल की पावन निश्रा में आयोजित हुआ, जिसमें प्रदेशभर से पहुंचे समाजजन, पदाधिकारी और अतिथियों ने समाज को संगठित एवं सशक्त बनाने का संकल्प लिया।

 समारोह में राष्ट्रीय अध्यक्ष चंपालाल दर्शन, राष्ट्रीय महामंत्री पुष्पराज बोहरा, मेघराज जैन, सुजानमल सेठ, संजय सराफ सहित मोहनखेड़ा महातीर्थ ट्रस्ट के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

गुरु वंदन से हुआ शुभारंभ

  कार्यक्रम का आयोजन ऋषभ सूरी उपाश्रय में हुआ, जहां अतिथियों ने गुरुदेव के चित्र पर माल्यार्पण कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद सामूहिक गुरु वंदन के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा और नई प्रदेश कार्यकारिणी को विधिवत शपथ दिलाई गई।








संजय मोदी को सौंपी गई प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी

  त्रिस्तुतिक श्रीसंघ मध्यप्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संजय मोदी को सौंपी गई। इसके साथ ही संगठन की नई कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए सभी पदाधिकारियों को शपथ दिलाई गई।

   नई कार्यकारिणी में पारस गादिया (उज्जैन) को प्रदेश महामंत्री, सिद्धार्थ जैन (इंदौर) को प्रदेश कोषाध्यक्ष, राजेंद्र लोढ़ा (टांडा) को प्रदेश परमर्शदाता,अशोक भंडारी को प्रदेश संरक्षक, राहुल सेठ एवं गौरव सराफ को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।

 इसी प्रकार मनीष सेठ को प्रदेश संयोजक,सचिन सराफ को प्रदेश मंत्री,मनीष चॉइस एवं भूपेंद्र कांकरिया को प्रदेश संगठन मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

 मीडिया प्रभारी के रूप में दीपक जैन और सुनील बाफना नियुक्त किए गए। व्यवस्था मंत्री के रूप में संदीप खजांची, अनिल छाजेड़ (धार) एवं जितेंद्र लोढ़ा (टांडा) को दायित्व मिला। वाचनालय मंत्री संतोष पिपाड़ा (मोहनखेड़ा) एवं कमलेश दईजी (थांदला), जबकि जीवदया मंत्री के रूप में जोनेश छजलानी को नियुक्त किया गया।

 कार्यकारिणी सदस्य के रूप में अमित खजांची, प्रदीप रायली, पारस गादिया, सुनील चत्तर, राकेश राजावत तथा मनीष जैन (धार) को भी संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई।

 परिचय से विश्वास और सहयोग से सशक्त श्रीसंघ का दिया संदेश

 बैठक को संबोधित करते हुए मुनि पियूष चंद्र विजय ने संगठन के मूल मंत्र "परिचय से विश्वास, विश्वास से सहयोग और सहयोग से सशक्त श्रीसंघ" को समाज की एकता का आधार बताया।

  उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल व्यक्तियों को जोड़ना नहीं, बल्कि पूरे समाज को एक सूत्र में बांधना है। प्रदेश के प्रत्येक शहर और गांव तक पहुंचकर हर परिवार से कम से कम एक सदस्य को संगठन से जोड़ने और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।

मालवा क्षेत्र की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण

  मुनि चंद्रयश विजय ने कहा कि मालवा क्षेत्र ने समाज को संगठित करने में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब इस परंपरा को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

 उन्होंने बताया कि त्रिस्तुतिक श्रीसंघ की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। समय के साथ संगठन की गतिविधियां कुछ धीमी हुईं, लेकिन अब नई सोच और नई कार्ययोजना के साथ इसे फिर से मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

 निस्वार्थ सेवा से संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान

  मुनियों ने पदाधिकारियों से आह्वान किया कि वे व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर जिनशासन, संघ और समाज के प्रति समर्पित भाव से कार्य करें।

  उन्होंने कहा कि पद केवल सम्मान नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। शालीनता, सेवा और समर्पण के साथ कार्य करते हुए युवाओं को समाज निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

देवालय से सेवालय की दिशा में बढ़ने पर हुई चर्चा

 बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजहित से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। समाज के आंतरिक विवादों के समाधान के लिए प्रबुद्धजनों की समिति या समाज स्तरीय न्यायिक व्यवस्था विकसित करने जैसे सुझाव भी सामने आए।

  वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक संस्थाएं केवल देवालय तक सीमित न रहें,बल्कि सेवालय की भावना के साथ समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाएं।

 संगठित समाज से होंगे बड़े कार्य: आचार्य ऋषभ हितेशचंद्रसूरीश्वरजी

 प.पू. आचार्य ऋषभ हितेशचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि समाज की मजबूती के लिए सभी को मिलजुलकर संगठित प्रयास करने होंगे।

 उन्होंने कहा कि प्रत्येक पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी का ईमानदारी से निर्वहन करे और समाजजनों से निरंतर संपर्क स्थापित कर संगठन को मजबूत बनाए।

 आचार्यश्री ने आगामी सुदी सप्तमी पर अधिक से अधिक संख्या में मोहनखेड़ा महातीर्थ पहुंचने तथा दादा गुरुदेव श्रीमद् विजय राजेंद्रसूरीश्वरजी म.सा. के 200वें जन्म द्विशताब्दी महोत्सव को सामूहिक रूप से सफल बनाने का भी आह्वान किया।

 डिजिटल सदस्यता अभियान और नई योजनाओं पर बनी रणनीति

  बैठक में संगठन की गतिविधियों को डिजिटल एप के माध्यम से अधिक प्रभावी बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सदस्यता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने, आधुनिक तकनीक के जरिए समाज को जोड़ने तथा आगामी योजनाओं का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।

 सुजानमल सेठ सहित अन्य वक्ताओं ने संगठन की मजबूती, सामाजिक समरसता और समाज की नई पीढ़ी को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 कार्यक्रम के अंत में प्रदेशभर से पहुंचे पदाधिकारियों और सदस्यों ने जिनशासन, समाज और संघ की उन्नति के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।