धार (मध्यप्रदेश)। मोहनखेड़ा महातीर्थ बुधवार 1 जुलाई को आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर था। परम पूज्य चतुर्थ पट्टाचार्य, प्राकृत ज्ञान केसरी आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज (दिगंबर जैन संत) का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। श्री आदिनाथ जैन श्वेतांबर पेढ़ी ट्रस्ट, मोहनखेड़ा महातीर्थ ने आचार्य श्री की भव्य अगवानी की।
इस अवसर पर दिगंबर और श्वेतांबर समुदाय के संतों का मिलन हुआ, जो अपने आप में ऐतिहासिक रहा। मोहनखेड़ा महातीर्थ पर विराजमान गच्छाधिपति आचार्य श्री हितेश चंद्र विजयजी महाराज, मुनि श्री दिव्यचंद्र जी महाराज, मुनि श्री रजतचंद्र विजय जी महाराज एवं मुनि श्री पुष्पेंद्र विजय जी महाराज और सहित श्वेतांबर संतगण भी उपस्थित रहे। दोनों संप्रदायों के संतों की इस संयुक्त उपस्थिति ने जैन समाज में एकता और सौहार्द का संदेश दिया।
आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ने प्रभु श्री आदिनाथ भगवान के मंदिर में दर्शन-वंदन किए तथा दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी महाराज के मंदिर में भी दर्शन-वंदन किए। इसके बाद आचार्य श्री ने महातीर्थ स्थित श्री राजेंद्र विद्या शोध संस्थान पुस्तकालय का अवलोकन किया। पुस्तकालय के बारे में के.सी. जैन ने आचार्य श्री को विस्तृत जानकारी दी।
आचार्य श्री ने पुस्तकालय में उपलब्ध कुछ प्रमुख पुस्तकों पर हस्ताक्षर करके संस्थान को अपना स्नेह प्रदान किया तथा संस्थान के विकास के लिए बहुमूल्य सुझाव भी दिए। उनके सुझावों से शोध कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इस पूरे अवसर पर दोनों संप्रदायों के श्रद्धालुओं में अपार उत्साह और आध्यात्मिक श्रद्धा का वातावरण रहा।



