पन्ना जिले की पवई तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत सुनेही में कौशल्या ह्यूमैनिटी फाऊंडेशन (KHF) द्वारा 101 जरूरतमंद बच्चों को वस्त्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक सहायता पहुंचाना और समाज में मानवता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करना था।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरों पर खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया। नए वस्त्र प्राप्त कर बच्चों ने प्रसन्नता व्यक्त की, वहीं उनके अभिभावकों ने भी संस्था के इस प्रयास की सराहना की। संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता करना केवल सामाजिक दायित्व नहीं बल्कि मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।
इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष अर्चना सिंगरौल, समाज सेविका अंजू सिंगरौल, समाजसेवी नरेंद्र सिंगरौल एवं संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। संस्था द्वारा भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जरूरतमंद परिवारों की सहायता से जुड़े कार्य निरंतर जारी रखने की बात कही गई।
संघर्ष, सेवा और सामाजिक बदलाव की पहचान: अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल
पन्ना जिले के पवई क्षेत्र में यदि महिलाओं की सामाजिक भागीदारी, जनसेवा और सामाजिक जागरूकता की बात की जाए, तो अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। दोनों बहनों ने अपने कार्यों से यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और समाज के प्रति समर्पण किसी भी व्यक्ति को बदलाव का माध्यम बना सकता है।
अर्चना सिंगरौल का जन्म ग्राम पंचायत सुनवारी से जुड़े किसान परिवार में हुआ। उनका पालन-पोषण पवई में हुआ, जहां उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की। लेकिन शिक्षा के साथ-साथ उनके मन में समाज सेवा का भाव भी लगातार विकसित होता रहा।
अर्चना सिंगरौल ने मात्र 15 वर्ष की आयु से समाज सेवा की शुरुआत कर दी थी। इस दिशा में उन्हें सबसे बड़ी प्रेरणा अपनी बड़ी बहन अंजू सिंगरौल से मिली। अंजू सिंगरौल लंबे समय से जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रही हैं और उन्होंने अनेक सामाजिक मुद्दों पर लोगों की आवाज बनने का कार्य किया है।
एक समय ऐसा था जब पन्ना जिले की अनेक महिलाएं सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीर, वीडियो या विचार साझा करने से झिझकती थीं। सामाजिक दबाव और आलोचनाओं के डर से महिलाएं खुलकर अपनी बात नहीं रख पाती थीं। ऐसे समय में अंजू सिंगरौल ने साहस के साथ सोशल मीडिया का उपयोग शुरू किया। उन्होंने सामाजिक मुद्दों को उठाया, अपनी बात निडरता से रखी और महिलाओं को यह विश्वास दिलाया कि उनकी आवाज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी और की।
उनके इस साहस का सकारात्मक प्रभाव पूरे क्षेत्र में देखने को मिला। धीरे-धीरे अनेक महिलाएं सोशल मीडिया से जुड़ीं, अपनी बात रखने लगीं और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने लगीं। यह बदलाव केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में भी दिखाई दिया।
वर्ष 2023 में अर्चना सिंगरौल ने समाज सेवा को संगठित रूप देने के लिए कौशल्या ह्यूमैनिटी फाऊंडेशन (KHF) की स्थापना की। स्थापना के बाद से संस्था पवई, पन्ना सहित कई जिलों और राज्यों में जरूरतमंद लोगों की सहायता, वस्त्र वितरण, सामाजिक जागरूकता, महिला सशक्तिकरण और मानव सेवा से जुड़े कार्य कर रही है।
दोनों बहनों का मानना है कि समाज में परिवर्तन केवल सरकारों या बड़े संसाधनों से नहीं आता, बल्कि जागरूक नागरिकों और संवेदनशील लोगों के छोटे-छोटे प्रयासों से भी बड़ी क्रांति लाई जा सकती है। उनका उद्देश्य केवल सहायता पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों के भीतर सेवा, सहयोग और मानवता की भावना को मजबूत करना है।
आज अंजू सिंगरौल और अर्चना सिंगरौल अनेक युवाओं, महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि यदि इरादे नेक हों और लक्ष्य समाज की भलाई हो, तो साधारण परिवार से निकलकर भी असाधारण बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।


